क्या समर्थन केवल तेरह दिन का होता है❓️
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जवानिया ग्राम के लिए बलिदान हुए भरत तिवारी और समाज की क्षणिक संवेदनाएँ
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जवानिया ग्राम के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले भरत तिवारी आज भी असंख्य लोगों के हृदय में जीवित हैं। उनकी हत्या के बाद जो दृश्य देखने को मिला, वह अभूतपूर्व था।
बिलौटी गाँव मानो पूरे प्रदेश का केंद्र बन गया था। हजारों-लाखों लोगों की भीड़ निरंतर उमड़ रही थी। जनप्रतिनिधि, विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता, सामाजिक कार्यकर्ता, बाहुबली, कलाकार, गायक, उद्योगपति, पत्रकार तथा समाज के विभिन्न वर्गों के लोग लगातार श्रद्धांजलि देने पहुँच रहे थे।
ऐसा प्रतीत होता था कि पूरा समाज एक स्वर में न्याय की माँग कर रहा है।
सोशल मीडिया पर भी मानो भावनाओं की बाढ़ आ गई थी।
प्रत्येक व्यक्ति अपनी-अपनी शैली में भरत तिवारी को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा था। कोई उन्हें गरीबों का मसीहा कह रहा था, कोई न्याय का योद्धा, कोई निर्भीक समाजसेवी, तो कोई जननायक।
हर ओर केवल भरत तिवारी की चर्चा थी।
किन्तु समय का चक्र आगे बढ़ा।
तेरहवीं तक लोगों का आना-जाना लगा रहा। उसके बाद धीरे-धीरे भीड़ समाप्त हो गई।
बिलौटी गाँव पुनः शांत हो गया। जहाँ कभी हजारों लोगों की आवाजाही थी, वहाँ अब सन्नाटा दिखाई देने लगा। सोशल मीडिया, जो कुछ दिन पहले श्रद्धांजलि और न्याय की माँग से भरा हुआ था, अब लगभग मौन हो गया।
यह दृश्य एक गंभीर प्रश्न खड़ा करता है—क्या हमारी संवेदनाएँ केवल कुछ दिनों की अतिथि होती हैं?
क्या हमारा समर्थन केवल तेरह दिन तक ही सीमित रहता है?
क्या किसी शहीद के परिवार का दुःख तेरहवें दिन समाप्त हो जाता है?
क्या न्याय की आवश्यकता केवल प्रारम्भिक दिनों तक ही रहती है?
वास्तविक समर्थन वह नहीं जो भीड़ के साथ दिखाई दे, बल्कि वह है जो समय बीत जाने के बाद भी अपने दायित्व को निभाए।
जब कैमरे हट जाते हैं, जब समाचारों की सुर्खियाँ बदल जाती हैं, जब सोशल मीडिया किसी नए विषय की ओर बढ़ जाता है—उसी समय किसी शहीद के परिवार को समाज की सबसे अधिक आवश्यकता होती है।
यह स्वाभाविक है कि समय के साथ जनजीवन सामान्य होता है और चर्चाओं का केंद्र बदलता है।
किंतु यदि न्याय की माँग, परिवार के प्रति संवेदना और समाज के प्रति दायित्व भी उसी गति से समाप्त हो जाए, तो यह आत्ममंथन का विषय अवश्य है।
भरत तिवारी का जीवन और उनका बलिदान केवल तेरह दिनों की चर्चा का विषय नहीं होना चाहिए।
यदि उनका संघर्ष वास्तव में समाज और वंचित लोगों के लिए था, तो उनके आदर्शों को भी उतनी ही गंभीरता से स्मरण किया जाना चाहिए जितनी गंभीरता से उनकी अंतिम यात्रा में लोग सम्मिलित हुए थे।
आज आवश्यकता केवल पुष्प अर्पित करने की नहीं, बल्कि उस उद्देश्य को जीवित रखने की है जिसके लिए उन्हें लोग याद करते हैं।
किसी भी बलिदान का सम्मान तभी पूर्ण माना जाएगा जब समाज न्याय, सत्य और जनहित के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को समय के साथ भी बनाए रखे।
आइए, हम स्वयं से यह प्रश्न पूछें—क्या हमारा समर्थन केवल भीड़ का हिस्सा बनने तक सीमित है, या हम कठिन समय बीत जाने के बाद भी सत्य और न्याय के साथ खड़े रहने का साहस रखते हैं?
स्वर्गीय भरत तिवारी जी को विनम्र श्रद्धांजलि।
ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा उनके परिजनों को यह असहनीय दुःख सहने की शक्ति दें।
मध्यप्रदेश मंत्रालय में 85% पदोन्नतियाँ आरक्षित वर्ग के अधिकारियों को मिलेगी और 15 अंडर सेक्रेटरी में 14 अधिकारी SC/ST वर्ग से होंगे एल जनरल से तो गंभीर प्रश्न उठता है—
जब शीर्ष प्रशासनिक पदों पर पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिल चुका है, तब भी केवल "प्रतिनिधित्व की कमी" और "भेदभाव" का हवाला देकर आरक्षण को अनिश्चितकाल तक जारी रखने की मांग किस आधार पर की जा रही है?#मध्यप्रदेश #आरक्षण #सामाजिक_न्याय
बंधुओ आप ही बताओ, इतने बड़े रामद्रोही मुलायम सिंह को पद्मविभूषण से सम्मानित कर दिया और उससे भी बड़े रामभक्त नरेश अग्रवाल का तो बाहें फैलाकर स्वागत किया इस तथाकथित हिंदूवादी दल के तथाकथित हिंदूवादियों ने ये कैसे हिन्दुओ के सुभचिन्तक हुऐ,
आदरणीय बंधुओ आज देश को महामानव कहा किस तरफ ले जा रहे सभी विचार करे एक तरफ कोई भ्रष्टाचार का मुद्बा उठता है तो उनको जान गवनी पडती है यदि कोई आवाज उठाये तो उसके खिलाफ fir होती है अब समय आ गया सभी भारत की जनता को सोचना होगा ये कैसा राष्ट्र निर्माण हो रहा,
भरत तिवारी हत्या मामले में 12 कंटेंट क्रिएटर्स के खिलाफ पटना साइबर थाने में FIR दर्ज किया गया है और 50 से ज्यादा सोशल मीडिया अकाउंट अभी पुलिस की निगरानी मे है।
मतलब बिहार पुलिस अब तानाशाही पर उतर चुकी है?
पहले तो हत्या करके उसको एनकाउंटर बताया, जब सच्चाई सबके सामने आई to लोग जब विरोध किए फिर उन सभी पर लाठी चार्ज और FIR दर्ज। अब जो लोग सोशल मीडिया पर न्याय की मांग कर रहे हैं उसके खिलाफ बिहार पुलिस FIR दर्ज कर रही है, ये लोकतंत्र है या पुलिसिया तंत्र??
ये बताओ कि किसके ऊपर FIR किया गया? क्यों करवाई हुई? उसने ऐसा क्या पोस्ट किया? तभी पता चलेगा न कि ये करवाई उचित हुई भी है या नहीं? अन्यथा आम लोगों को लग रहा है कि पुलिस लोगों का मुंह दबाने की कोशिश कर रही है।
एक बात तो साफ साफ पता चल रहा है कि पुलिस अब इसको अपने अना का मसला बना लिया है और लोगों से दुश्मनी निकाल रही है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी जी कृपया अपने पुलिस को समझाइए की भारत एक लोकतांत्रिक देश है, हर प्रश्न भ्रामक और दंगा भड़काने वाला नहीं होता है।
@samrat4bjp@ips_gupteshwar@officecmbihar@PMOIndia@narendramodi@AmitShah@Sham4Samastipur@jansuraajonline
Source: Copied from "Samastipur Town" facebook page
बधुओ देर रात संदिग्ध कार ने की भरत भूषण तिवारी के घर की रेकी,मचा हड़कंप-दहशत में परिवार
आज देश का दुर्भाग्य है कि सत्य बोलना भी जुर्म हो गया है उसकी हत्या कर दी जाती है और लगातार भरत भूषण तिवारी जी परिवार को प्रताड़ित किया जा रहा है लेकिन सभी मौन है
#विहार_सरकार_मौन_है
बंधुओ जगदीशपुर से चल कर #DSP#पंकज कुमार मिश्रा जी आज दिनांक 5.7.2026 शाहिद भरत #तिवारी जी के माता-पिता से मिलने उनके घर पर आ पहुंचे वाले की मांग गांव के जितने भी नमजद हैं सबको केस नाम हटाने के लिए #Bharat#tiwari#manish#vlogs#भोजपुर
मध्य प्रदेश में एक हॉस्पिटल चोरी हो गया ,,मतलब सिर्फ़ कागजों में हास्पिटल बना हुआ,, कर्मचारियों को वेतन भी मिल रहा रहा था।। और पोस्टिंग भी हो रहा था।।
हॉस्पिटल आज तक बना नहीं।।
कई सालों से ये खेल चल रहा था।।
इस तरह का भ्रष्टाचार भारत में ही संभव है।।
समाज के साथ ये जो कुछ भी रहा है बेहद निंदनीय चिंताजनक दुर्भाग्यपूर्ण है।।
🚨ब्रेकिंग न्यूज़🚨:
धाकड़ न्यूज़ वाले हर्ष राजपूत को मिली गोली मारने की धमकी।
हर्ष राजपूत ने हाल ही में राम मंदिर चंदा चोरी पर एक वीडियो बनाया था जो सोशल मीडिया पर बहुत तेजी से वायरल हो रहा था।
अब उस वीडियो से बहुत से लोगों की भावना आहत हो गई है अब लोग हर्ष राजपूत को जान से मारने की धमकी दे रहे है।
आदरणीय बंधुओ क्या आप सभी को एक माँ की पुकार सुनिए सरकार! 😭🙏
भोजपुर के भरत भूषण तिवारी के हत्यारे पुलिसकर्मियों को अगर 8 जुलाई तक गिरफ्तार नहीं किया गया, तो उनकी माँ 'आमरण अनशन' शुरू कर देंगी।
"न्याय में देरी, अन्याय के समान है।"
@NitishKumar जी @bihar_police इस पीड़ित माँ को न्याय दीजिए, दोषियों को गिरफ्तार कीजिए!
#JusticeForBharatTiwari #Bhojpur #Bihar #Justice @yadavtejashwi@samrat4bjp
बंधुओ इसे जंगलराज कहना गलत तो नहीं ?
ब्राह्मणों सरकार नहीं तुम्हारी एकता ही तुम्हारी सुरक्षा हो सकती है
पूर्वी चंपारण- ढाका के सिसवा मंगल गांव में भारी आक्रोश है-- 25 जून की सुबह लगभग 7:00 बजे के आसपास 58 वर्षीय राम बिहारी पांडेय जो अपने खेत में काम कर रहे थे गांव के ही रघु साह 10-15 की संख्या में जिसमें उनके पुत्र, पत्नी सहित कई लोग बताए जा रहे हैं राम बिहारी पांडेय के खेत में पहुंचकर रस्सी से बांधकर इतनी पि"टाई करते हैं कि राम बिहारी पांडेय हड्डी-हड्डी टूट जाती है-इसके बाद अपराधियों के द्वारा रस्सी में बांधकर मोटरसाइकिल के पीछे घसीटते हुए गांव के मुखिया के दरवाजे पर ले जाकर फेंक दिया जाता हैं-इलाज के लिए मोतिहारी सदर अस्पताल ले जाते समय राम बिहारी पांडेय रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं।
परिजनों के द्वारा पचपकरी थाना में FIR दर्ज कराया गया है जिसमें नौ लोगों को नामजद अभियुक्त बनाया गया है, वहीं कई लोगों को अज्ञात बताया जा रहा है-पुलिस के द्वारा एक अभियुक्त की गिरफ्तारी की गई है बाकी फरार बताए जा रहे हैं।
इस बीच पीड़ित परिवार के लोगों को धमकी भी दी जा रही है।
पूरा मामला खेत के मिट्टी कटाई से जुड़ा है।
मंगल राज करते-करते यह कौन सा राज आ रहा है सोचना और समझना होगा--
अहे गडकरी आपके स्टेज के भाषण से और लोग चू**या बन जाते होंगे, पर जाओ और गब्बर से कह देना कि रामगढ़ वालों ने अब नेताओं के बेटों के फैक्ट्री के लिए पर्यावरण सुरक्षा का लोड लेना बंद कर दिया है।
गडकरी अपने आप को आइंस्टाइन के नाती से कम नहीं दिखाता, मैने मारुति वालों से, टोयाटो वालों से, होंडा वालों से कहा कि फ्लैस फ्यूल इंजन बनाए, हांकते जा रहा है सा$&£
और मारुति ने केवल तीन गाड़ियां बेची है ऐसी जो संभवतः गडकरी ने एक स्वयं के लिए और बाकी दो अपने बेटों के लिए ली होगी।
— अजीत भारती ( @ajeetbharti )