साथियों यह कर्मचारी महासंघ (एकीकृत) के प्रदेशाध्यक्ष गजेंद्र सिंह राठौड़ के नेतृत्व में आप सभी द्वारा किये गये संघर्ष की आंशिक जीत है,, RGHS योजना को बीमा कंपनी को नहीं देने के लिखित आश्वासन और कर्मचारियों को सरेंडर लीव का भुगतान शुरु होने तक आंदोलन चालू रहेगा।
RGHS हाल के सालों में सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों की सबसे पसंदीदा योजना है , इस योजना को बंद करना या इंश्योरेंस में बदलना अच्छा फैसला साबित नहीं होगा
अगर योजना में लीकेज है तो इतने संसाधन है इसे रोकने के लिए @BhajanlalBjp@GajendraKhimsar
10 दिन की छुट्टियों मे कटौती कर के टेस्टिंग की कर्मचारी अपने हितों की रक्षा कर पाने मे सक्षम नहीं दिखें अब आगें और टेस्टिंग की जाएगी.. 👍
अगला पडाव RGHS है.. 🙏🙏
राजस्थान में जनहित योजनाओं की ज़मीनी हकीकत: कागज़ी दावों और जनता के दर्द के बीच का फासला!
जयपुर। राजस्थान में इस समय सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी साख और लोक-कल्याणकारी सरकार के 'नरेटिव' (छवि) को बचाए रखने की है। एक तरफ जहां नेता से लेकर आला अधिकारी तक हर मंच से जनहित की योजनाओं का ढिंढोरा पीट रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ धरातल पर इन योजनाओं का दम टूटता नज़र आ रहा है। दो सबसे बड़े मोर्चे—शिक्षा और स्वास्थ्य—इस वक्त आम जनता के लिए सिरदर्द बन चुके हैं...
1. RTE एडमिशन: स्कूलों की मनमानी, अभिभावक परेशान
शिक्षा का अधिकार (RTE) कानून के तहत निजी स्कूलों में गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए 25% सीटें आरक्षित हैं। लेकिन वास्तविकता यह है कि कई नामी और स्थानीय निजी स्कूल एडमिशन देने में आनाकानी कर रहे हैं।
अभिभावकों की लाचारी: पोर्टल पर नाम आने के बाद भी अभिभावक दस्तावेजों की स्क्रूटनी और स्कूलों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
बहानेबाज़ी का खेल: कभी 'सीटें फुल होने' तो कभी 'दस्तावेजों में कमी' का बहाना बनाकर बच्चों को वापस लौटाया जा रहा है।
असर: शिक्षा विभाग का ढीला रवैया निजी स्कूलों के हौसले बुलंद कर रहा है, और गरीब बच्चों का भविष्य अधर में लटका है।
2. RGHS (राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम): इलाज के लिए भटकते कर्मचारी और पेंशनर्स
सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए संजीवनी मानी जाने वाली RGHS योजना इस समय खुद 'वेंटिलेटर' पर है। प्रदेश के अधिकतर निजी अस्पतालों ने इस योजना के तहत इलाज करने से हाथ खड़े कर दिए हैं।
अस्पतालों का तर्क: निजी अस्पतालों का कहना है कि सरकार की ओर से करोड़ों रुपये का भुगतान (Reimbursement) अटका हुआ है।
जनता पर मार.....
गंभीर बीमारियों से जूझ रहे बुजुर्ग और पेंशनर्स अस्पतालों के काउंटरों से बैरंग लौटाए जा रहे हैं। जिन्हें मुफ्त इलाज का हक था, उन्हें मजबूरन जेब से लाखों रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं या इलाज टालना पड़ रहा है।
सरकार का नरेटिव कहां से ठीक होगा?
एक पत्रकार के दृष्टिकोण से देखें, तो किसी भी सरकार का 'नरेटिव' विज्ञापनों, होर्डिंग्स या सोशल मीडिया की रील्स से नहीं, बल्कि डिलीवरी सिस्टम (योजनाओं के क्रियान्वयन) से बनता है। सरकार का नरेटिव तब तक ठीक नहीं हो सकता, जब तक वह इन तीन मोर्चों पर कड़े कदम नहीं उठाती....
सख्त प्रशासनिक हंटर: जो स्कूल RTE के तहत एडमिशन देने से इनकार कर रहे हैं, उनकी मान्यता रद्द करने जैसी सख्त कार्रवाई हो। सिर्फ नोटिस देने से काम नहीं चलेगा।
बजट और भुगतान का संकट दूर हो: RGHS के तहत अस्पतालों के बकाए का तुरंत भुगतान किया जाए, ताकि वे मरीजों को मना न कर सकें। जनता को सरकारी और निजी तंत्र के बीच की लड़ाई का शिकार बनाना बंद होना चाहिए।
जवाबदेही तय हो: हर जिले में जिला कलेक्टर और संबंधित विभाग के अधिकारियों की सीधी जवाबदेही तय हो। यदि कोई योजना सुचारू रूप से नहीं चल रही है, तो गाज अधिकारियों पर गिरनी चाहिए...
जनता को इस बात से सरोकार नहीं होता कि बजट में कितनी बड़ी घोषणाएं हुईं, उन्हें सरोकार इस बात से है कि जब उनका बच्चा स्कूल जाए तो उसे दाखिला मिले और जब परिवार में कोई बीमार हो तो उसे अस्पताल में बेड मिले। अगर सरकार को अपनी छवि सुधारनी है, तो उसे 'घोषणा मोड' से बाहर निकलकर 'एक्शन मोड' में आना होगा। वरना कागजी योजनाओं और जमीनी हकीकत का यह अंतर आगामी चुनावों में भारी पड़ सकता है।
RGHS हाल के सालों में सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों की सबसे पसंदीदा योजना है , इस योजना को बंद करना या इंश्योरेंस में बदलना अच्छा फैसला साबित नहीं होगा
अगर योजना में लीकेज है तो इतने संसाधन है इसे रोकने के लिए
RGHS योजना का मैं निजी तौर पर लाभार्थी रहा हूं. पिछले साल पिताजी स्वास्थ्य कारणों के चलते बुरे दौर से गुजरे जिसके बाद ये योजना उनके लिए जीवनदायिनी साबित हुई.
हां हर योजना और सुविधा में संस्थागत सिस्टम गड़बड़ होता है, अंदर की ही मशीनरी आपदा में अवसर देखती है लेकिन इसे रोकना तो जिम्मेदारों का काम है ना.
अगर स्वास्थ्य मंत्री के नाते गजेंद्र खींवसर इस योजना की मॉनिटरिंग ढंग से नहीं कर सकते तो उनकी इससे बड़ी नाकामी क्या होगी?
इस योजना के लूपहोल बंद किए बिना टैक्सपेयर और पैसे की बहानेबाजी करना दिखाता है कि पब्लिक हेल्थ मंत्री जी की प्राथमिकता में नहीं है..!
#Rajasthan
01.07.2021 से लागू #RGHS गंभीर अव्यवस्थाओं का शिकार
वेतन से हर माह 440, 658, 875 रुपये की कटौती के बावजूद समुचित इलाज नहीं
@BhajanlalBjp जी
@GajendraKhimsar
जी से आग्रह तत्काल हस्तक्षेप कर राहत दें
@K_Barupal
प्रदेश अध्यक्ष
राजस्थान शिक्षक संघ अंबेडकर
https://t.co/DWBQd4IIwS
चिरंजीवी योजना से गरीब लोगों का अब इलाज नहीं हो पा रहा, सरकारी कार्मिको को न RGHS का लाभ मिल पा रहा ।
हा अगर कोई चीज रेगुलर चल रही है तो वो है दिल्ली दौरे।
क्या लोगो को सरकार से कुछ उम्मीद ही नहीं या वो सरकार से सवाल ही नहीं पूछना चाहते
पिछली सरकार काम करते थकती नहीं थी ओर ये!
RGHS योजना समेत विभिन्न मांगो के लिए प्रदेश स्तर से प्राप्त निर्देशानुसार आज राजस्व मंत्रालयिक कर्मचारी संघ दौसा द्वारा SDM साहब सिकराय को ज्ञापन प्रस्तुत किया गया।
माननीय मुख्यमंत्री जी, राजस्थान
महोदय,
RGHS योजना लम्बे समय से चिकित्सकों की हड़ताल की वजह से बंद पड़ी है। सरकार पता नहीं क्यों चिकित्सकों से वार्ता कर इसे हड़ताल को समाप्त नही करा रही। गहलोत सरकार द्वारा प्रारम्भ की गई इस योजना से बड़ी संख्या में पेंशनर व कर्मचारी लाभान्वित हो रहे थे जो अब वंचित है।
क्या सरकार इस योजना को अपनी मौत मारना चाहती है ताकि बंद करने के आरोप से बच जाये और योजना बंद हो जाये।राजस्थान का सीनियर सिटीज़न इससे बहुत प्रभावित है।हम तो आपकी सरकार से अपेक्षा करते थे कि इस योजना को और सुदृढ़ व व्यापक करेंगे पर परिणाम उल्टा कि योजना ही बंद हो रही है।क्या सरकार का फण्ड इतना कम हो रहा है?
आशा है आप गंभीरता से विचार कर सम्बन्धित अधिकारियों को निर्देशित कर हल निकालेंगे तथा RGHS को चालू करेंगे।
भवदीय,
डॉ श्रीगोपाल बाहेती
पूर्व विधायक पुष्कर
@RajCMO@ashokgehlot51@SachinPilot@GovindDotasra@TikaRamJullyINC@rahularya580
1 जुलाई 2021 से लागू #RGHS योजना आज गंभीर अव्यवस्थाओं का शिकार है।
कर्मचारियों व पेंशनर्स के वेतन से हर माह 440, 658 व 875 रुपये की नियमित कटौती के बावजूद समुचित इलाज नहीं मिल पा रहा है
पुराने मेडिकल बिलों के भुगतान में देरी के कारण कई निजी अस्पताल योजना से दूरी बना रहे हैं, जिसका सीधा असर कर्मचारियों एवं पेंशनर्स पर पड़ रहा है।
पेंशनर्स की ओपीडी लिमिट भी बहुत कम है,
माननीय मुख्यमंत्री
@BhajanlalBjp जी
माननीय चिकित्सा मंत्री
@GajendraKhimsar
जी से आग्रह है कि तत्काल हस्तक्षेप कर #RGHS व्यवस्था को सुचारु करवाएं एवं कर्मचारियों-पेंशनर्स को राहत प्रदान करें।
@madandilawar@rajeduofficial
#Rajasthan #Employees #Pensioners #CashlessTreatment
सत्य प्रकाश
प्रदेश सभाध्यक्ष
@K_Barupal
प्रदेश अध्यक्ष
@sohanjoharm
प्रदेश महामंत्री
हरिराम बेनीवाल
प्रदेश कोषाध्यक्ष
राजस्थान शिक्षक संघ अंबेडकर https://t.co/Gt042ankUQ
📰
#RGHS की विसंगतियों एवं शिक्षकों की समस्याओं को लेकर संगठन की आवाज़
शिक्षक हितों के लिए संघर्ष
सरकार से आग्रह है कि आरजीएचएस की विसंगतियों को दूर कर कर्मचारियों को सुगम एवं गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करवाई जाए।
स्वास्थ्य सुविधा अधिकार है, परेशानी नहीं।
माननीय
@RajCMO@officialRGHS@GajendraKhimsar
#TeacherIssues #RajasthanTeachers
प्रदेश नेतृत्व
राजस्थान शिक्षक संघ (अंबेडकर)
कोटा में प्रसूताओं की किडनी फेल होकर मौत के मामले में भास्कर की खबर के मुताबिक मेडिकल कॉलेज में स्थानीय स्तर पर खरीदी दवाइयों और इंजेक्शन में एक बाहरी इंजेक्शन होने के सबूत मिले हैं. अस्पताल में इस कंपनी के 4 हजार इंजेक्शन सप्लाई हुए थे.
यह इंजेक्शन मेडिकल कॉलेज के रेट कॉन्ट्रेट में अप्रूव नहीं है और इनको ना खरीद सकते हैं और ना ही मरीजों को लगा सकते हैं.
फिलहाल पूरे देश में इन दवाओं के उपयोग पर रोक लगाई हुई है. अब ये जांच का विषय है कि ये इंजेक्शन अस्पताल में कैसे और किसके इशारे पर पहुंचे.
#Kota #Rajasthan
खबर बस इतनी-सी है कि सरकार और स्वास्थ्य मंत्री को बार-बार चेताने के बाद भी कोई फर्क नहीं पड़ता।
“कोटा में एक और प्रसूता की मौत हो गई।”
अब यह सिर्फ एक खबर बनकर रह गई है–
न संवेदनशीलता बची,
न जवाबदेही,
न इंसानियत।
लगता है व्यवस्था ने भी तय कर लिया है कि मौतों पर चिंता नहीं, केवल बयान जारी होंगे।
BANSWARA PATRIKA 2 PM BULLETIN | 14.05.2026
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