The Jagadguru Ramanandacharya Rajasthan Sanskrit University, Jaipur has been established by an Act of @RajAssembly in 1998.
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#Jaipur : लालसोट के एमडी पीजी कॉलेज में सामूहिक नकल का मामला
संस्कृत विश्वविद्यालय ने पीजीडीसीए परीक्षा की द्वितीय पारी की परीक्षा निरस्त की, निरीक्षण में प्रिंटेड उत्तरों से सामूहिक नकल पकड़ी गई, उड़नदस्ता दल ने नकल सामग्री और अन्य साक्ष्य किए जब्त, साक्ष्य परीक्षा विभाग को सौंपे गए, कुलपति प्रो. मदनमोहन झा ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश, शेष परीक्षाओं के लिए विशेष पर्यवेक्षक नियुक्त...
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जयपुर में जन्मे डॉ. रामनारायण चतुर्वेदी ने ज्ञान और प्रशासनिक दक्षता से संस्कृत-जगत में विशिष्ट स्थान अर्जित किया। आज जब संस्कृत विद्वानों के लिए पारंपरिक वेशभूषा - धोती पहनना केवल मंचीय औपचारिकता रह गई है, तब डॉ. चतुर्वेदी ने आजीवन धोती को अपनी दिनचर्या का अभिन्न अंग बनाए रखा।
विश्वविद्यालय में आज #गुरु_पूर्णिमा पर विशिष्ट व्याख्यान समारोह का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शोधपीठाध्यक्ष प्रो. सत्यप्रकाश दुबे जी ने गुरु-तत्त्व पर पव्याख्यान देते हुए भारतीय संस्कृति में गुरु की महिमा, ज्ञान परंपरा तथा गुरु-शिष्य संबंध की गरिमा पर प्रकाश डाला।
गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ। गुरु की कृपा से सभी का जीवन ज्ञान, संस्कार एवं सफलता से आलोकित हो।#jrrsu#StudentSuccess#गुरु_पूर्णिमा
१७वीं शती में जन्मे जयपुर के विद्वान् भट्ट चक्रपाणि गोस्वामी शास्त्र परंपरा के तेजस्वी नक्षत्र थे। सनातन धर्म के संप्रदायों के बीच धार्मिक समरसता को बनाए रखने के लिए उन्होंने 'पंचायतन-प्रकाश:' ग्रंथ लिखा। इसमें सौर, वैष्णव, शैव, शाक्त और गाणपत्य संप्रदायों के संबंधों का वर्णन है।
#Jaipur: जगद्गुरु रामानंदाचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय सिंडीकेट की बैठक सम्पन्न
कुलगुरु प्रो. मदनमोहन झा की अध्यक्षता में कई अहम फैसलों पर मुहर, तीन सह...
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'तनै कांई भाटा दैवां?' क्या इस एक वाक्य से महान् विद्वान् जनार्दन भट्ट गोस्वामी को मिली थी बंजर जागीर!
17वीं शताब्दी के गोस्वामी ने आयुर्वेद, ज्योतिष, धर्मशास्त्र, तंत्र, श्रीविद्या, कामशास्त्र तथा साहित्य पर उन्होंने अनेक ग्रंथों की रचना कर भारतीय ज्ञान-परंपरा को समृद्ध किया।
विश्वविद्यालय में 21वाँ अंतरराष्ट्रीय योग दिवस आयोजित। कुलगुरु डॉ. मदन मोहन झा, नि. शै.डॉ. विनोद शास्त्री, अनु. निदेशक डॉ. राजधर मिश्र सहित विद्वान व विद्यार्थी उपस्थित रहे। डॉ. वंदना राठौर ने योगाभ्यास कराया। आइए गाँव‑गाँव, घर‑घर योग का प्रसार करें। जय संस्कृत, जय योग, जय भारत।
राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे जी ने राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु जी के जन्मदिवस पर उनके स्वस्थ और सुदीर्घ जीवन की कामना करते हुए कहा कि राष्ट्र के लिए सतत ऊर्जावान रहते उनका समर्पित जीवन और सभी वर्गों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध उनका नेतृत्व राष्ट्र को गौरवान्वित करने वाला है।
पण्डित नवलकिशोर शर्मा #संस्कृत व ढूंढाड़ी के विलक्षण साहित्यकार थे। उनकी साहसिक कृति #राष्ट्रवेद में वैदिक शैली में आधुनिक भारत का चित्रण है। 'यात्रा-विलासम्' यात्रा-वृत्तांत है। ढूंढाड़ी में 'सैल सपाटा', 'लाखीणा बोल' तथा 'कादम्बरी' के रूपांतरण से उन्होंने लोकभाषा को समृद्ध किया।
अदम्य साहस, अद्वितीय शौर्य और मातृभूमि के प्रति अटूट समर्पण की प्रतीक, महान वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई जी के बलिदान दिवस पर उन्हें कोटिशः नमन!
स्वाधीनता के लिए उनका संघर्ष, त्याग और पराक्रम भारतीय इतिहास के स्वर्णिम अध्याय हैं। उनकी प्रेरणादायी गाथा सदैव राष्ट्रभक्ति और मातृभूमि की सेवा हेतु हमें प्रेरित करती रहेगी।
लक्ष्मी थी या दुर्गा थी वह स्वयं वीरता की अवतार,
देख मराठे पुलकित होते उसकी तलवारों के वार....
स्वाधीनता, साहस और मातृभूमि के प्रति अद्वितीय समर्पण की प्रतीक, वीरांगना झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई की पुण्यतिथि पर उन्हें कोटिशः नमन एवं भावपूर्ण श्रद्धांजलि ...
रानी ने अपने अदम्य साहस, स्वाभिमान और वीरता से विदेशी शासन के विरुद्ध संघर्ष कर भारतीय इतिहास में अमिट स्थान बनाया। उनका जीवन राष्ट्रप्रेम, आत्मसम्मान और मातृभूमि की रक्षा के लिए सर्वस्व अर्पित करने की प्रेरणा देता है।
#संस्कृत संस्थाओं के विकास में वृद्धिचंद्र शास्त्री का योगदान असाधारण रहा। वे उस युग के प्रतीक थे, जब संस्कृत संस्थाओं की पहचान नेताओं से नहीं बल्कि विद्वानों से होती थी। 1950 में #जयपुर से प्रकाशित भारती संस्कृत पत्रिका के वे संपादक रहे और वैदिक संस्कृति प्रचार संघ स्थापित किया।
छायामन्यस्य कुर्वन्ति तिष्ठन्ति स्वयमातपे ।
फलन्त्यपि परार्थाय वृक्षाः सत्पुरुषा इव ॥
- विक्रमचरितम्
Trees themselves stand in the blazing sun, while providing shade to the others. Even their fruits are borne for the sake of others. Indeed, trees are just like noble people.
A national workshop was organized under the aegis of Rajasthan Mantra Pratishtha at Jagadguru Ramanandacharya Sanskrit University. This event is a unique event in itself. As far as I know, this will be the first program not only in Rajasthan but in the whole of India.