@nagarnigamvns के द्वारा लँका ट्रॉमा सेंटर BHU सड़क किनारे ठेला लगाने वाले सर्वेकृत वेंडरों को @varanasipolice थाने ले पकड़ कर ले आई है। @Uppolice आपसे अनुरोध है कि वेंडिंग जोन एलॉट न होने की स्थिति में पंजिकृत वेंडरों के साथ न्यायोचित रवैया अपनाए।
उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र में बीते महीने अलग-अलग विश्वविद्यालयों के छात्र, युवा गांधीवादी कार्यकर्ताओं समेत नागरिक समाज के लोग साइकिल से 'मनरेगा बचाओ यात्रा' पर निकले थे.
@soniya2408✍️
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मनरेगा बचाओ यात्रा 17 जनवरी को चौरीचौरा (गोरखपुर) से प्रारम्भ हुई, वह ऐतिहासिक स्थल जो भारत के स्वतंत्रता संग्राम में जन-प्रतिरोध का प्रतीक रहा है और 17 फरवरी को वाराणसी में सम्पन्न हुई। इस प्रकार यात्रा ने इतिहास के संघर्षों को आजीविका और गरिमा की समकालीन लड़ाई से जोड़ा।
सन् 2005 में लागू मनरेगा प्रत्येक ग्रामीण परिवार को वर्ष में 100 दिनों का वैधानिक मजदूरी-रोज़गार सुनिश्चित करता है। लाखों ग्रामीण मजदूरों विशेषकर महिलाओं, दलितों, आदिवासियों और भूमिहीन परिवारों के लिए यह कानून जीवनरेखा साबित हुआ है। इसने आय सुरक्षा दी है, स्थानीय अर्थव्यवस्था को मज़बूती दी है और मजबूरन होने वाले पलायन को कम किया है। यात्रा ने स्पष्ट किया कि मनरेगा कोई दया या अनुदान नहीं, बल्कि संवैधानिक और कानूनी अधिकार है, जो सामाजिक और आर्थिक न्याय के मूल सिद्धांतों पर आधारित है।
32 दिनों की इस यात्रा ने पूर्वी उत्तर प्रदेश के गाँवों, क़स्बों और शहरों में व्यापक संवाद स्थापित किया। यात्रियों ने दलित बस्तियों में सभाएँ कीं, महिला मजदूरों से सीधा संवाद किया और बाज़ारों व शिक्षण संस्थानों में जन-चर्चाएँ आयोजित कीं। नुक्कड़ सभाओं, जनगीतों, नारों और पर्चों के माध्यम से मजदूरी भुगतान में देरी, बजट में कटौती, अनिवार्य डिजिटल हाजिरी जैसी तकनीकी बाधाओं और कानून को कमजोर करने वाली नीतिगत प्रस्तावों जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया। इन समस्याओं को महज़ प्रशासनिक त्रुटि नहीं, बल्कि गरीब-विरोधी नीतिगत निर्णयों के रूप में रेखांकित किया गया।
इस आंदोलन को प्रख्यात अर्थशास्त्री और सामाजिक कार्यकर्ता Jean Drèze का समर्थन भी मिला। उन्होंने यात्रा में शामिल होकर कहा कि ग्रामीण संकट और आर्थिक असमानता के दौर में रोजगार गारंटी कानून की रक्षा लोकतांत्रिक जवाबदेही की बुनियादी शर्त है। उनका हस्तक्षेप इस बात की पुष्टि था कि मनरेगा भारत के समावेशी विकास मॉडल का केंद्रीय स्तंभ है।
17 फरवरी को यात्रा का समापन वाराणसी के कचहरी स्थित अंबेडकर प्रतिमा स्थल पर एकदिवसीय उपवास के साथ हुआ। यह समापन कार्यक्रम रोजगार के अधिकार को संविधान निर्माता बाबासाहब की सामाजिक न्याय की दृष्टि से जोड़ने का प्रतीक था। समापन सभा में यह घोषित किया गया कि मनरेगा को कमजोर करना संविधान द्वारा प्रदत्त गरिमा, समानता और आजीविका के अधिकार पर सीधा प्रहार है।
पूरी यात्रा के दौरान महिला मजदूर इस आंदोलन की सशक्त आवाज़ बनकर उभरीं। अनेक महिलाओं ने बताया कि मनरेगा की मजदूरी ही उनकी एकमात्र स्वतंत्र आय है, जिससे वे परिवार का भरण-पोषण, बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य खर्च वहन करती हैं। साथ ही यात्रा ने यह भी रेखांकित किया कि मनरेगा जल-संरक्षण, भूमि विकास और सामुदायिक संसाधनों के निर्माण के माध्यम से ग्रामीण आधारभूत ढाँचे को मजबूत करता है।
गांधीवादी अहिंसक परंपरा में निहित इस यात्रा ने पदयात्रा, संवाद और उपवास को लोकतांत्रिक प्रतिरोध के औज़ार के रूप में अपनाया। यह केवल विरोध नहीं, बल्कि जन-जागरण, एकजुटता और जन-दबाव के माध्यम से मनरेगा की सार्वभौमिकता, पर्याप्त बजट और समय पर भुगतान सुनिश्चित करने का प्रयास था।
चौराचौरा से वाराणसी तक की यह यात्रा इतिहास की प्रतिरोध परंपरा को आगे बढ़ाते हुए यह संदेश देती है कि काम का अधिकार भारत के सामाजिक अनुबंध और लोकतांत्रिक मूल्यों का अभिन्न हिस्सा है।
#MGNREGABachao
#MGNREGABachaoYatra
भारत सरकार मनरेगा की जगह वीबी जी राम जी क़ानून लेकर आई है. इसी क़ानून के विरोध में युवाओं ने 'मनरेगा बचाओ यात्रा' निकाली. ये यात्रा 17 फ़रवरी को वाराणसी में समाप्त हुई है. इसकी शुरुआत 17 जनवरी को हुई थी. इन युवाओं का कहना है कि वो करीब 250 गांवों तक गए. देखिए इस ग्राउंड रिपोर्ट में.
रिपोर्ट: नीतू सिंह
शूट, एडिट: तेज बहादुर सिंह
VB-G RAM G के ख़िलाफ़ युवा गांधीवादियों की ‘मनरेगा बचाओ यात्रा’ का समापन आज बनारस के कचहरी स्थित अंबेडकर प्रतिमा स्थल पर 24 घंटे के एकदिवसीय उपवास के साथ हुआ। 17 जनवरी को चौरी-चौरा (गोरखपुर) से शुरू हुई यह साइकिल यात्रा गोरखपुर, देवरिया, बलिया, मऊ और गाज़ीपुर होते हुए बनारस पहुँची। एक महीने तक गाँव-गाँव, गलियों और बाजारों में संवाद करते हुए यात्रियों ने मनरेगा पर हो रहे मजदूर-विरोधी बदलावों के खिलाफ आवाज़ बुलंद की। खेतिहर मजदूरों, खासकर महिलाओं ने बताया कि मनरेगा ने उन्हें रोजगार की गारंटी और शोषण से राहत दी और यही संवैधानिक अधिकार आज सरकारी हमलों के निशाने पर है।
अंबेडकर प्रतिमा पर हुए उपवास में वक्ताओं ने कहा कि यह यात्रा अंत नहीं, बल्कि संघर्ष का नया पड़ाव है। गांधी और अंबेडकर के विचारों से प्रेरित यह आंदोलन श्रम के सम्मान, ग्रामीण रोज़गार की गारंटी और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए जारी रहेगा। युवाओं ने संकल्प लिया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में ‘मनरेगा बचाओ’ की मशाल लेकर जाएंगे, ब्लॉक स्तर पर रोज़गार पर चर्चा छेड़ेंगे और मजदूर-किसान एकता को मजबूत करेंगे।
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मनरेगा बचाओ यात्रा | एकदिवसीय उपवास | बनारस
मनरेगा मजदूरों के रोज़गार के संवैधानिक अधिकार पर सरकार द्वारा किये जा रहे नीतिगत हमले के विरोध में 17 फ़रवरी को कचहरी स्थित अम्बेडकर प्रतिमा स्थल पर दोपहर 2 बजे शुरू हुआ एकदिवसीय उपवास जारी है।
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Final Day | MGNREGA Bachao Yatra | Banaras
Yatris marched around the city with powerful slogans against the anti-labour policies of the government, raising their voices for dignity, work, and justice.
The Yatra concluded at the Ambedkar Statue, Kachahri, with a one-day fast in protest against the government’s policy-driven assault on the constitutional right to employment of MGNREGA workers.
Our resolve is stronger than ever. Work is a Right, not a favour. MGNREGA will be restored.
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Final Day | MGNREGA Bachao Yatra | Banaras
On the final day of the MGNREGA Bachao Yatra, young Gandhians thundered through the streets of Banaras with powerful pro-MGNREGA slogans, turning Banaras into a voice of resistance and hope.
From lanes to crossroads, the message was loud and clear. Right to Work is not charity, it is our constitutional guarantee.
With courage in our hearts and slogans on our lips, we marched for dignity, justice, and the protection of every rural worker’s livelihood.
The yatra may conclude, but the movement continues ✊
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Final Day | MGNREGA Bachao Yatra | Banaras
From the streets of Banaras to the footsteps of the Ambedkar Statue, the 32nd and concluding day of the MGNREGA Bachao Yatra stands as a powerful reminder that the fight for workers’ dignity is far from over.
Today, we ended the yatra with a one-day fast in defense of MGNREGA labourers’ constitutional right to work. ✊
This is not the end, it is a renewed pledge to resist anti-worker policies, defend rural livelihoods, and carry forward Babasaheb’s vision of justice, equality, and dignity for every worker.
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गांधीवादी युवाओं की ‘मनरेगा बचाओ यात्रा’ आज 17 फ़रवरी को भारत माता मंदिर से शुरू होकर बिस्मिल्लाह ख़ाँ की मज़ार, सरदार पटेल चौक, मलदहिया, आज़ाद पार्क, लहुराबीर और वरुणा पुल होते हुए अंबेडकर पार्क, कचहरी पहुँची।
मनरेगा में किए गए मजदूर-विरोधी बदलावों और काले कानून VB-G RAM G के खिलाफ यह यात्रा अब निर्णायक पड़ाव पर है। अंबेडकर प्रतिमा के सामने एकदिवसीय उपवास के साथ हमने साफ़ संदेश दिया है कि रोज़गार हमारा संवैधानिक अधिकार है, उस पर किसी भी तरह का हमला बर्दाश्त नहीं होगा।
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मजदूर विरोधी VB-G RAM G के खिलाफ गांधीवादी युवाओं की ‘मनरेगा बचाओ यात्रा’ आज बनारस शहर पहुँची जहाँ BHU के छात्रों ने यात्रा की अगुवाई की।
केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा में किए गए मजदूर-विरोधी बदलावों और नए कानून VB-G RAM G के खिलाफ मनरेगा बचाओ यात्रा 16 फ़रवरी को बेलवा से शुरू होकर बड़ागांव, टिकरी खुर्द, भोपतपुर, हरहुआ, चांदमारी, भोजूबीर और कचहरी होते हुए बनारस शहर पहुँची। गाँव-गाँव जाकर यात्रियों ने मजदूरों, महिलाओं और युवाओं से संवाद किया तथा काम के संवैधानिक अधिकार पर हो रहे सुनियोजित हमले के खिलाफ संगठित होने का आह्वान किया।
17 जनवरी को चौरी-चौरा(गोरखपुर) से शुरू हुई यह साइकिल यात्रा देवरिया, बलिया, मऊ और गाजीपुर की धरती पर मजदूरों की आवाज़ बुलंद करती हुई बनारस पहुँची है। 17 फ़रवरी को भारत माता मंदिर से निकलकर कचहरी स्थित अम्बेडकर प्रतिमा पर एकदिवसीय उपवास के साथ यात्रा का समापन होगा।
मनरेगा पर हमला नहीं सहेंगे।
VB-G RAM G वापस लो! ✊
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DAY 30 | MGNREGA BACHAO YATRA | BANARAS
Renowned activist Jean Drèze joined the Yatra, lending his voice and solidarity to the movement, and spoke about its crucial role in defending workers’ rights and safeguarding the right to work.
#MGNREGABachao#MGNREGABachaoYatra
बनारस की धरती पर बुलंद हुई मजदूरों की आवाज़ ✊
आज 15 फ़रवरी को युवा गांधीवादियों की ‘मनरेगा बचाओ यात्रा’ पुआरीकलाँ से निकलकर अहरक, पश्चिमपुर, दल्लीपुर, मगरी बाज़ार, गुलज़ारगंज, जगदीशपुर, परशोनी, बसनी होते हुए बेलवाँ पहुँची। यात्रा में प्रख्यात अर्थशास्त्री व सामाजिक कार्यकर्ता Jean Drèze भी शामिल हुए और मजदूरों के संवैधानिक रोज़गार के अधिकार की लड़ाई को मजबूती दी।
जगदीशपुर में मुसहर समाज की महिला मजदूरों के साथ बैठक में मनरेगा में किए गए मजदूर-विरोधी बदलावों और VB-G RAM G जैसे क़ानूनों के खिलाफ़ आवाज़ बुलंद हुई। बेलवाँ में नट समुदाय की बहनों ने भी साफ़ कहा मनरेगा हमारा अधिकार है, इसे छीना नहीं जा सकता।
यात्रा जारी है 🚴♂️
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#MGNREGABachaoYatra
मोदी सरकार द्वारा मनरेगा में किए गए मजदूर विरोधी बदलावों और नए कानून VB-G RAM G के विरोध में निकाली जा रही युवा गांधीवादियों की ‘मनरेगा बचाओ यात्रा’ 12 फ़रवरी को सादात के डोरा गाँव से निकलकर डोरियाँ, शिकारपुर, उकराव में महिला मज़दूरों से संवाद करते हुए, गहनी, प्यारेपुर चट्टी में महिला मज़दूरों से संवाद करते हुए, डढ़वाल, आतमपुर, छपरा से रघुवंश चौराहा पर मीडिया को संबोधित करते हुए सिसवापार, बुढ़नपुर में महिलाओं से संवाद करते हुए फिर सरदरपुर में सभा करते हुए कनेरी, रफ़ीपुर होते हुए सैदपुर पहुँची।
यात्रियों ने गाँव-गाँव पहुंचकर महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के सपने को साकार करने वाले मनरेगा जैसे अधिकार आधारित क़ानून के बहाली का संकल्प लिया और नये क़ानून VB- G RAM G के आने के बाद महिला मज़दूरों के मन में पैदा हुए अविश्वास को समझा।
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मनरेगा बचाओ यात्रा | 26वाँ दिन । ग़ाज़ीपुर
कल दिनांक 11 फ़रवरी को यात्रा नंदगंज से निकलकर सादात पहुँची। सादात में सामाजिक कार्यकर्ता सावित्री पासवान जी ने साथियों का गर्मजोशी से स्वागत किया और यात्रा को दलित बस्तियों तक लेकर गईं। वहाँ महिला मजदूरों के साथ महत्वपूर्ण बैठक हुई, जहाँ मनरेगा में कटौती, काम की कमी और मजदूरी के मुद्दों पर खुलकर बातचीत हुई।
महिलाओं ने साफ कहा रोज़गार हमारा अधिकार है, इसे छीना नहीं जा सकता। मनरेगा बचाओ यात्रा गाँव-गाँव, बस्ती-बस्ती पहुँचकर मजदूरों की आवाज़ को संगठित कर रही है। संघर्ष जारी है। 🚴♂️
#MGNREGABachao
#MGNREGABachaoYatra
DAY 25 | MGNREGA BACHAO YATRA | GHAZIPUR
Yatra on its 25th day moved through villages and local markets, cycling from one basti to another distributing parchas, holding conversations, and exposing the anti-labour changes in MGNREGA along with the Modi government’s newly brought anti-labour VB-G RAM G law.
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