Deeply saddened by the tragic loss of Tarun Kumar in Uttam Nagar. It’s heartbreaking that something as small as a child throwing a water balloon during Holi could escalate into such violence. Humanity should never fall to this level. Prayers for his family and hope the culprits face the strictest punishment.
Sunil Gavaskar🎙; Wasim, What would you say on Jasprit bumrah's bowling???
Wasim Akram🎙; Sunil bhai, this pakistani team has humiliated me enough plz you don't humiliate me again by asking this question😂😭🔥
अविमुक्तेश्वरानंद पर CM योगी आदित्यनाथ पहली बार बोले और खुलकर बोले
- हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं लिख सकता
- जो पुल साढ़े 4 चार करोड़ श्रद्धालुओं की निकासी है
- अगर कोई उससे प्रवेश की कोशिश करेगा तो भगदड़ को जन्म दे रहा है
- शंकराचार्य हैं तो उनकी मर्यादाओं का आचरण करिए
और अगर वो शंकराचार्य थे तो सपा ने क्यों लाठियां चलवाईं थीं ?
उस कथित शंकराचार्य पर इससे संतुलित और लॉजिकल बयान और क्या होगा-
जब करोड़ो लोग स्नान कर रहे थे तब वो आदमी exit गेट से अपने लाव लश्कर के साथ साथ entry करने की कोशिश कर रहा था।
उन्हें रोका गया ��्योंकि stampede हो सकता था, लोग मारे जा सकते थे।
जो जनता की जान से खेलने का प्रयास करे वो पूजनीय कैसे ??
और जो अपनी प्रतिष्ठा तक दांव पर लगाकर जनता की जान बचाये उस पर निशाने क्यों ??
राम मंदिर धर्मध्वजा
मंदिर जब टूटते हैं, तो केवल शिलाएँ, ध्वजा या प्रतिमाएँ खंडित नहीं होती, तोड़ने वालों का लक्ष्य मंदिरो�� में बसी सनातन आत्मा का भंजन होता है। उनकी सोच उस पवित्र देवालय को अदृश्य करने मात्र की नहीं होती, वरन एक-एक टूटता मंदिर, एक-एक जलता गाँव, एक-एक धर्मविमुख होता व्यक्ति उसी सोच के विस्तार को अवलम्ब देती सीढ़ियाँ होती हैं कि यदि आक्रांता लगा रहे, तो एक दिन सनातन के धरातली अर्थ का आध्यात्मिक लोप भी हो जाएगा।
एक पुस्तक वालों ने हमारे पुस्तकालयों को जला कर यह सोचा कि हमारी सभ्यता या तो वो मिटा देंग���, या उनकी आने वाली पीढ़ियाँ। परंतु ऐसा हो नहीं पाया। हड्डियों में धँसे छर्रे हों या खोपड़ी में लगी सात-सात गोलियाँ, वो खंडित शिलाएँ, प्रतिमाओं के नोंचे टुकड़े, वायु में जलते पताकाओं के उड़ते धागे, अपने समय की प्रतीक्षा करते रहे कि कालचक्र घूमेगा और धर्मचक्र पुनर्स्��ापित होगा।
राम मंदिर के शिखर पर शोभायमान भगवा ध्वज एक मंदिर मात्र की पूर्णता नहीं बल्कि लाखों हिन्दुओं की टूटती साँसों, बिखरते विमर्श और धुँधली होती जाती आशा की राह पर खड़ा वह स्तंभ है, जो आज हमारा सामूहिक अवलम्ब बन चुका है।
यह धर्मध्वजा और मंदिर, कपड़े और पत्थर नहीं सनातन की गति, लहर और शाश्वत स्थायित्व का प्रत्यक्ष प्रमाण हैं कि हिन्दू था, हिन्दू है, और हिन्दू, ब्रह्मांडों की उत्पत्तियों और विनाशों के बाद हर बार पुनः आ जाएगा। मैंने पहले भी कहा था कि राम मंदिर के महत्व का अनुभव हमें वर्तमान में नहीं हो पाएगा क्योंकि हमें यह ‘एक और मंदिर परिसर’ की तरह बताया जाएगा।
हालाँकि कालांतर में, जब हजारों वर्षों के इतिहास, संघर्ष, आक्रमण, विनाश और जीर्णोद्धार की समय रेखा बनाई जाएगी तो ��ाम मंदिर वह उदाहरण बनेगा जिसके समक्ष सब फीका होगा।
माता अहिल्याबाई, या कृषणदेवराय, राजा सुहंगमंग, शिवाजी महाराज या सवाई मान सिंह द्वितीय आदि के शत्रु ज्ञात थे, विधर्मी थे, परंतु राम मंदिर उस काल खंड में नकारा जाता रहा जब सत्ता हिन्दुओं के हाथ में थी और उन हिन्दुओं ने जीर्णोद्धार के नाम पर राम लला को वैसे कपड़े के नीचे रखा जैसे अवैध लोग किसी स्लम में विज्ञापन के फ्लेक्स की छत बना कर रहते हैं।
हमने उनसे भगवान को मिथक बताते सुना और अंततः स्वयं के ही समूहों से स्वयं ही लड़ते हुए इस मंदिर का निर्माण किया है।
आज २५ नवंबर २०२५ है, लहू के थक्कों का बोझ उठाते यज्ञोपवीतों ने आज मानो एक रक्तबंध का निर्माण किया है जो हमारे पूर्वजों के शौर्य की पताका को सभ्यता के इस प्रतीकात्मक शिखर पर स्थापित करता ��ै। इस यात्रा के हर पथिक, हर नेता, हर गिलहरी और हर जटायु-सम्पाति को प्रणाम।
To witness the Dharma Dhwajarohan Utsav at Shri Ram Janmabhoomi Mandir is a moment crores of people in India and the world have waited for. History has been made in Ayodhya and this inspires us even more to walk the path shown by Prabhu Shri Ram.
अयोध्या के पावन धाम में श्री राम जन्मभूमि मंदिर में ध्वजारोहण समारोह का हिस्सा बनना मेरे लिए अत्यंत भावविभोर करने वाला अनुभव रहा। शुभ मुहूर्त में संपन्न हुआ यह अनुष्ठान हमारे सांस्कृतिक गौरव और राष्ट्रीय एकता के नए अध्याय का उद्घोष है। राम मंदिर का गौरवशाली ध्वज, विकसित भारत के नवजागरण की संस्थापना है। ये ध्वज नीति और न्याय का प्रतीक हो, ये ध्वज सुशासन से समृद्धि का पथ प्रदर्शक हो और ये ध्वज विकसित भारत की ऊर्जा बनकर इसी रूप में सदा आरोहित रहे.....भगवान श्री राम से यही कामना है। जय जय सियाराम।
The passing of Dharmendra Ji marks the end of an era in Indian cinema. He was an iconic film personality, a phenomenal actor who brought charm and depth to every role he played. The manner in which he played diverse roles struck a chord with countless people. Dharmendra Ji was equally admired for his simplicity, humility and warmth. In this sad hour, my thoughts are with his family, friends and innumerable fans. Om Shanti.
प्रभु श्री राम भारतवर्ष की आत्मा, उसकी चेतना और उसके गौरव का आधार हैं। मेरे लिए यह परम सौभाग्य की बात है कि कल 25 नवंबर ��ो सुबह करीब 10 बजे अयोध्या के दिव्य-भव्य श्री राम जन्मभूमि मंदिर परिसर में दर्शन-पूजन का अवसर प्राप्त होगा। इसके बाद दोपहर लगभग 12 बजे श्री राम लला के पवित्र मंदिर के शिखर पर केसरिया ध्वज के विधिवत आरोहण के ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनूंगा। यह ध्वज भगवान श्री राम के तेज, शौर्य और उनके आदर्शों के साथ-साथ हमारी आस्था, अध्यात्म और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है।
जय श्री राम!
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कौनसे बिल में छुपे है आज वो भाषावादी गुंडे
तुम्हारे महाराष्ट्र में गुज्जु शेर हिन्दी में भाषण दे रहे
गरीब हिन्दू और व्यापारियों पे रौफ ज़मा���े वाले
राजनितिक गुंडों दम है तो इनसे मराठी बोल के दिखाओ
देश के अमर सेनानी महाराणा प्रताप को उनकी जयंती पर कोटि-कोटि नमन। मातृभूमि के स्वाभिमान की रक्षा के लिए उन्होंने जिस साहस और शौर्य का परि���य दिया था, वह आज भी हमारे वीर-वीरांगनाओं के लिए पथ-प्रदर्शक बना है। मां भारती को समर्पित उनका पराक्रमी जीवन देशवासियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा।
War has been chosen by Pakistan when they had an opportunity to keep quiet.
They have escalated to save it’s terrorist assets, speaks so much about them.
Our forces will reply in the most appropriate manner, a manner Pakistan will never forget.