पूर्व राजदूत दीपक वोहरा से जुड़े CBI मामले में आरोप भारतीय राजनयिक मिशनों में कथित वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित हैं। 2022 में केंद्र सरकार ने CBI को वोहरा और तत्कालीन अंडर सेक्रेटरी अजय गांगुली के खिलाफ अभियोजन आगे बढ़ाने की मंजूरी दी थी। मामला उनके सूडान और दक्षिण सूडान में तैनाती के दौरान हुए कथित वित्तीय गड़बड़ियों से जुड़ा था।
CBI की ओर से पहले मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की गई थी, लेकिन विशेष अदालत ने उसे दो बार स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा था कि रिकॉर्ड पर ऐसा पर्याप्त सामग्री मौजूद है, जिससे वोहरा, गांगुली और रविंद्र प्रकाश के बीच कथित साजिश और अपराध की जांच/अभियोजन का आधार बनता है। इसके बाद CBI को अभियोजन की सरकारी मंजूरी लेने का निर्देश दिया गया।
मामले में कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार से जुड़े प्रावधानों की बात सामने आई थी।
प्रिय @YRDeshmukh
Ji
अगर आप 'गजनी' के संजय सिंघानिया नहीं बन गए हैं तो आपको याद होगा कि...
१) एक बार भरे मंच से माननीय मोदी जी ने एक हाथ की उंगलियां मोड़ कर छेद जैसा बनाया और उस पर दूसरे हाथ की हथेली ठोकते रहे।
ये कैसा किस बात का 'शालीन' इशारा था क्या आप बता सकते हैं?
इसका वीडियो आप ख़ुद ढूंढ लीजिए।
२) माननीय ने संसद में विपक्ष के नेता की खिल्ली उड़ाने को दोनों हाथों की उंगलियां नचा नचा कर जो प्रहसन किया था वो क्या था?
(वीडियो संलग्न है )
२) माननीय ने अपने श्रीमुख से सोनिया गांधी को जर्सी गाय कहा, पार्टी की विधवा कहा था।
३) माननीय ने अपनी पवित्र जिह्वा से किसी दिवंगत महिला को पचास करोड़ की गर्लफ्रेंड कहा था।
४) माननीय ने संसद में एक महिला सांसद को शूर्पणखा कहा था। क्या ये किसी महिला का सम्मान बढ़ाने वाला शब्द था?
५) माननीय ने संसद के भीतर विपक्ष के नेता को बाल बुद्धि कहा, बाहर खड़े होकर कहा कि मैं किसी 56 साल के युवा की बात नहीं कर रहा।
क्या आज़ाद भारत के इतिहास में किसी प्रधानमंत्री ने विपक्ष के नेता पर ऐसे स्तरहीन व्यंग्य बाण चलाए हैं?
६) माननीय ने डिसलेक्सिया से पीड़ित बच्चों का मज़ाक बनाते हुए नेता प्रतिपक्ष पर निशाना साधा था और उस समय उनकी मां तक पर कटाक्ष किया था।
ये किस स्तर की राजनीति थी?
७) माननीय ने डॉ मनोहन सिंह को मौन मोहन कहा, देहाती औरत कहा था।
क्या ये किसी पूर्व प्रधानमंत्री का अपमान नहीं था?
८) संसद में खड़े होकर माननीय ने मनमोहन सिंह के लिए कहा था कि वे बाथरूम में रैन कोट पहन कर नहाने हैं।
ये किस नैतिकता के उच्चतम स्तर की भाषा थी?
९) एक महिला मुख्यमंत्री को भरी सभा में सड़कछाप शोहदों की तरह दीदी ओ दीदी कह कर बुलाना किस भाषाई संस्कार की नुमाइश थी?
आज़ाद भारत के इतिहास में पहली बार किसी प्रधानमंत्री को एक अख़बार की हैडलाइन में 'कमेंटमारा ब्यॉय' लिखा गया।
मतलब सड़क पर लड़कियों पर कमेंट करने वाले लफंगा।
(देखें द टेलीग्राफ)
१०) अंतर्राष्ट्रीय दौरों पर माननीय के क्रियाकलाप की सूची बनाने का काम आप खुद कर लीजिए।
विदूषकों जैसे करतबों की इतनी लंबी फेहरिस्त है कि आप गिनते गिनते थक जायेंगे।
लेकिन इन अनगिनत स्तरहीन हरकतों और बोल वचन को हमारा नैतिकतावादी समाज अमृत समझ कर पी जाता है।
🚨ब्रेकिंग: मोदी के कार्यकाल में रुपया ₹96 तक पहुंच गया
1947 में नेहरू — ₹3.30
2010 में मनमोहन सिंह — ₹45.73
2020 में मोदी — ₹76.38
2026 में मोदी — ₹96
देखिए, इस सरकार के दौरान रुपये में कितनी बड़ी गिरावट आई।
हर भाषण में मजबूत भारत का दावा किया गया लेकिन डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार गिरता गया।
गैर-कांग्रेसी सरकारों के दौर में रुपया लगातार कमजोर होता रहा। मोदी के कार्यकाल में यह गिरावट और ज्यादा गहरी हो गई।
अमेरिका के लिए मास्टरस्ट्रोक,भारत के लिए भारी बिल
Firstly his son is in the UK or US puck knows but there ...
Secondly he should of been sacked by now Desi bond :
Pulwama
Pahalgam
URI
Pathankot
Punjab militants
Punjab cross border firing
Drugs
Arunachal
Bangaluru cafe blast
Delhi blast
Manipur insurgents
Van Dyke
Kashmiri pandits..
And is sitting giving bashan on economy 😀
हमने प्रधानमंत्री की ओछी PR के ऊपर राजनीति की है।
हर सभा में वही अंदाज़—
“अरे भाई, ज़रा देखिए ये किसका फोटो है… लीजिए, फोटो पकड़िए।”
प्रधानमंत्री पद की गरिमा के लिए ऐसी ओछी PR शोभा नहीं देती।
और हैरानी देखिए—हर बार प्रधानमंत्री के काफिले के बीच अचानक एंबुलेंस भी आ जाती है, और कैमरे भी ठीक उसी वक्त मौजूद रहते हैं।
@DrRakeshPathak7 महामानव तो 2014 से ही राहुल गांधी जी की खिल्ली उडा रहे हैं। मोदी जी देश के पहले प्रधानमंत्री हैं जो कि नेता प्रतिपक्ष को देखना ही नहीं चाहते। लेकिन अब समय बदल रहा है, नींद उड़ रही है।
📍अपन को LoP देवता जैसा चाहिए, मुखिया तो 'विदूषक' भी चलेगा..!
अपन ने सुना है कि इंदौर में राहुल के मंच पर एक कॉमेडियन की चंद सेकंड की मौजूदगी से धरती हिल रही है।
नैतिकता के ध्वजवाहकों ने कलप कलप कर महा जलप्लावन कर दिया है।
तो अपन भी राहुल को लानत भेजते हैं।
जी बिल्कुल ऐसी मिमिक्री और वो भी देश के मुखिया की नहीं होना चाहिए।
उस कॉमेडियन ने किसी की मां का नाम लेकर भी कुछ हास परिहास किया। ये भी नहीं होना चाहिए।
वैसे कॉमेडियन ने मुखिया जी की मां की बारे में कुछ नहीं कहा।
('मां के लिए कुर्सी लाओ' माननीय की आमसभा के उस स्क्रिप्टेड ड्रामा पर तंज था जिसमें माननीय एक ऐसी महिला के लिए कुर्सी लाने को कह रहे थे जिसके गले में VIP पास का पट्टा तक लटका था।)
फिर भी कितना शुभ संकेत है कि हमारा समाज नैतिकता के ऐसे उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है जहां उसे विपक्ष के नेता के मंच से बित्ते भर की घटियाई मंज़ूर नहीं।
अपन भी चाहते हैं कि विपक्ष का नेता चौबीस कैरेट सोने जैसा हो, कोहिनूर जैसा हो, देवता समान हो, भले ही देश का मुखिया कीचड़युक्त कोयला हो।
अपन भी चाहते हैं कि विपक्ष के नेता के मंच से सुई की नोंक के बराबर घटियापन न हो भले ही ख़ुद देश का मुखिया छिछोरियाई की मिसाल कायम करता रहे।
इस नैतिकता के तकाजे पर आप सबको एक हज़ार सलाम।
(देश के मुखिया की कथनी करनी पर इस आगे सुबूतों के साथ सब बताएंगे।)
अब कुछ सवाल..
१) क्या इंदौर में राहुल गांधी ने अपने मुंह से एक भी शब्द ऐसा बोला जो अनुचित हो?
२) क्या राहुल गांधी ने अपने पूरे सार्वजनिक, राजनैतिक जीवन में कभी कोई एक भी शब्द स्त्री विरोधी कहा है?
अगर कहा हो तो प्लीज बताएगा।
३) क्या राहुल से पहले किसी नेता ने किसी प्रधानमंत्री की खिल्ली नहीं उड़ाई?
क्या ख़ुद माननीय ने कभी किसी पूर्व प्रधानमंत्री के लिए आपत्तिजनक शब्द नहीं कहे?
▪️
आइए अब माननीय जी के स्वयं के करतब और बोल वचन याद कर लीजिए।
अगर आप 'गजनी' के संजय सिंघानिया नहीं बन गए हैं तो आपको याद होगा कि...
१) एक बार भरे मंच से माननीय ने एक हाथ की उंगलियां मोड़ कर छेद जैसा बनाया और उस पर दूसरे हाथ की हथेली ठोकते रहे।
ये कैसा किस बात का 'शालीन' इशारा था क्या आप बता सकते हैं?
इसका वीडियो आप ख़ुद ढूंढ लीजिए।
२) माननीय ने संसद में विपक्ष के नेता की खिल्ली उड़ाने को दोनों हाथों की उंगलियां नचा नचा कर जो प्रहसन किया था वो क्या था?
(वीडियो संलग्न है )
२) माननीय ने अपने श्रीमुख से सोनिया गांधी को जर्सी गाय कहा, पार्टी की विधवा कहा था।
३) माननीय ने अपनी पवित्र जिह्वा से किसी दिवंगत महिला को पचास करोड़ की गर्लफ्रेंड कहा था।
४) माननीय ने संसद में एक महिला सांसद को शूर्पणखा कहा था। क्या ये किसी महिला का सम्मान बढ़ाने वाला शब्द था?
५) माननीय ने संसद के भीतर विपक्ष के नेता को बाल बुद्धि कहा, बाहर खड़े होकर कहा कि मैं किसी 56 साल के युवा की बात नहीं कर रहा।
क्या आज़ाद भारत के इतिहास में किसी प्रधानमंत्री ने विपक्ष के नेता पर ऐसे स्तरहीन व्यंग्य बाण चलाए हैं?
६) माननीय ने डिसलेक्सिया से पीड़ित बच्चों का मज़ाक बनाते हुए नेता प्रतिपक्ष पर निशाना साधा था और उस समय उनकी मां तक पर कटाक्ष किया था।
ये किस स्तर की राजनीति थी?
७) माननीय ने डॉ मनोहन सिंह को मौन मोहन कहा, देहाती औरत कहा था।
क्या ये किसी पूर्व प्रधानमंत्री का अपमान नहीं था?
८) संसद में खड़े होकर माननीय ने मनमोहन सिंह के लिए कहा था कि वे बाथरूम में रैन कोट पहन कर नहाने हैं।
ये किस नैतिकता के उच्चतम स्तर की भाषा थी?
९) एक महिला मुख्यमंत्री को भरी सभा में सड़कछाप शोहदों की तरह दीदी ओ दीदी कह कर बुलाना किस भाषाई संस्कार की नुमाइश थी?
आज़ाद भारत के इतिहास में पहली बार किसी प्रधानमंत्री को एक अख़बार की हैडलाइन में 'कमेंटमारा ब्यॉय' लिखा गया। मतलब सड़क पर लड़कियों पर कमेंट करने वाले लफंगा।
(देखें द टेलीग्राफ)
१०) अंतर्राष्ट्रीय दौरों पर माननीय के क्रियाकलाप की सूची बनाने का काम आप खुद कर लीजिए।
विदूषकों जैसे करतबों की इतनी लंबी फेहरिस्त है कि आप गिनते गिनते थक जायेंगे।
लेकिन इन अनगिनत स्तरहीन हरकतों और बोल वचन को हमारा नैतिकतावादी समाज अमृत समझ कर पी जाता है।
कल से अब तक जितने लोग राहुल के मंच पर मिमिक्री से मचल रहे हैं उनमें से किसी ने भी माननीय के विदूषकों जैसे व्यवहार पर कभी एक शब्द नहीं लिखा।
काहे...?
Absolutely, that's the reason after so many years someone has to stand on stage meant for self praise have to listen to Jawaharlal Nehru's policy appraisals with this face from host country. Chad Pandit 🗿
संसद में मोदी जी की भाषा ₹2 के ट्रोल से भी बेहतर नहीं लग रही। 😭
संजय सिंह पर “काला”, शराब और शीशमहल जैसे तंज कसना तब बड़ा मजेदार लग रहा था, जब वे खुद निशाना साध रहे थे
लेकिन अब उसी ऊर्जा का 1% भी उनकी तरफ लौटकर आया, तो अचानक उन्हें बुरा लगने लगा😭
No-this is not crass humour. This is not immature behaviour. This is a much-needed long-awaited phenomenon. To fearlessly lampoon a PM is a democratic right long denied to Indians.