बड़ी खबर-
(सूत्र)-
पूरे चुनाव को हिंदू-मुसलमान करने की तैयारी है।
मस्जिदों पर एक्शन पे एक्शन जारी है!
उधर से रिएक्शन क्यों नहीं हो रहा अब तक?
ईश्वरीय टीम में बस इसी बात की बेक़रारी है!!
रिएक्शन अगर नहीं हुआ तो हिंदू-मुसलमान का खेल परवान चढ़ेगा कैसे?
हार की आशंका से घबराए राजा के लि��� एक एक दिन भारी है!!
@Deepakbudhwarde इंदिरा जी दूर दृष्टिकोण वाली नेता थी इंदिरा जी के अलावा शायद ही किसी भारतीय P.M. ने तिब्बत में मानवाधिकार हनन के मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से बोला हो।
“Good bye India, बहुत जल्द आप लोग मुझे चीन में देखेंगे। सिर्फ़ मुझे ही नहीं पूरा अरुणाचल चीन में दिखेगा।”
- अरुणाचल प्रदेश के युवा Taba Nagu ने ये कहते हुए एक वीडियो बनाया है
Taba का दावा है कि अरुणाचल की ज़मीन पर चीन कब्जा कर रहा है और उनका ये वीडियो वायरल है।
सुनिए 👇🏼
एक छोटी सी कविता:
न्यूज चैनल वाले गोदी हो गये!
पत्रकार कुछ भक्त, कुछ मोदी विरोधी हो गए!
पत्रकारिता सुबक रही अपनी हाल पर!
जिनके भरोसे ��ी, सब के सब लोभी हो गए!
किसी ने सत्ता की चौखट चूम ली,
किसी ने विरोध में अपनी दुकान खोल ली।
सत्ता से सवाल पूछना, जैसे गुनाह हो गया,
निष्पक्ष होना भी अब इल्ज़ाम हो गया!
जो कल तक हुक्मरानों से सवाल करते थे,
आज सवाल पूछने वालों से सवाल करते हैं।
जो सच के प्रहरी होने का दावा करते थे,
वही सच को छिपाने का सामान हो गए !
- prabhakar mishra
बिहार की ख़बर है। ऐसी ही ख़बर यूपी से मिल जाएगी। किसी और राज्य से भी। कई साल से ऐसी ख़बरें छपती हैं और फिर गुम हो जाती हैं। 2018 का साल रहा होगा। अदाणी पूर्ण एनडीटीवी पर जब इस मुद्दे को कवर करना शुरू किया तो कवरेज ब��द करना मुश्किल हो गया। कई हफ़्तों पर भर्ती परीक्षा पर प्राइम टाइम करता रहा। दुनिया की सारी ख़बरें छोड़ दी थीं। संख्या तो ठीक से याद नहीं मगर साठ से अधिक प्राइम टाइम किया था। टीवी चैनल के इतिहास में नौकरी सीरीज़ जैसा दूसरा उदाहरण पूरी दुनिया में नहीं मिलेगा। मुसलमानों के ख़िलाफ़ नफ़रत फैलाने के मुद्दे पर गोदी मीडिया ने ज़रूर किया होगा, रिया चक्रवर्ती को अपराधी बनाने का कवरेज हफ्तों चला होगा, जंग का लगातार कवरेज मिलेगा, लेकिन भर्ती परीक्षा को लेकर नहीं। उस समय जंतर-मंतर या झारखंड जैसा आंदोलन नहीं चल रहा था, छात्र जहां प्रदर्शन करते थे, वहां पुलिस लाठियों से खदेड़ देती थी। इस तरह के कितने ही मार्च और लाठी चार्ज के उदाहरण आपको मिल जाएंगे। लेकिन हर रात एक ही विषय पर प्राइम टाइम करना, जानलेवा होता जा रहा था।सरकारों ने कुछ नहीं किया। युवाओं ने धर्म के नाम पर वोट देना बंद नहीं किया। सरकार को लगा कि युवा भर्ती परीक्षा का मुद्दा फालतू का है। अभी भी सरकारें यही समझ रही हैं कि ये युवा धर्म के नाम पर या मुसलमानों से नफरत के नाम पर ही वोट करेंगे, कर सकते हैं, लेकिन जिस तरह से परीक्षा आयोग ने उनका जीवन बर्बाद किया है, वो बर्बादी दिखती रहेगी। 2014 से 2026 आ गया, इतने फर्ज़ी मिशन लांच हुए मगर भर्ती परीक्षा को ठीक करने का फर्ज़ी मिशन भी लांच नहीं हुआ। इस नज़र से देखें तो झारखंड के छात्रों का आंदोलन भविष्य को ठीक करने का आंदोलन है। वे एक परीक्षा से आगे देख रहे हैं। आयोग के भीतर के सडांध को ठीक करन��� चाहते हैं। इस आंदोलन को बांटने की कोशिश की गई लेकिन छात्र अपने मुद्दे पर टिके हुए हैं। उन्हें पता है कि जब तक यह आयोग ठीक नहीं होगा, परीक्षा को लेकर सरकार राजनीतिक कीमत नहीं चुकाएगी, उसके भीतर यह बात नहीं बैठेगी कि परीक्षा से खिलवाड़ नहीं करना है। किसी अपने को चेयरमैन बनाने या किसी अपने को किसी जुगाड़ से नौकरी में घुसा देने के लालच से करीब भी नहीं जाना है। झारखंड के छात्रों को अपने आंदोलन से ��ही हासिल करना चाहिए। अख़बारों में ऐसी ख़बरें भरी पड़ी है। यह समस्या इतनी विकराल है कि एक एक परीक्षा की अलग समस्या है, उसे पूरी तथ्यात्मक जानकारी के साथ कवर करना संभव नहीं। यूपी से ही इतनी ख़बरें निकल आएंगी कि संभालना मुश्किल हो जाएगा। राजनीतिक रुप से न भी देखें तो क्या किसी भी आयोग को इस तरह से काम करना चाहिए कि हर छात्र एक पोस्टर लेकर घूम रहा है, चंदा जमा कर मुकदमा लड़ रहा है और परीक्षा है कि ह���ती नहीं, होती है तो साफ-सुथरी नहीं होती। यूपी ��ें एक माइग्रेशन का मुद्दा है। राहुल गांधी की सभा में उसका पोस्टर दिखा। यही इतना टेक्निकल और जटिल है लेकिन छात्रों ने पूरा रिसर्च कर रखा है। इस पर वीडियो है। सब है। तो क्या आयोग के अधिकारियों को नहीं लगा कि छात्रों को बुलाकर पहले ही बात कर लें और इस समस्या को दूर करें। दस हज़ार देकर वोट ख़रीदने से चुनाव जीते जा सकते हैं लेकिन छात्रों की यह समस्या सैलाब बनकर आती रहेगी। सामने जो होगा, वही बह जाएग���।