जल जंगल-जमीन पर पहला हक़ अधिकार आदिवासियों का हैं,आदिवासीयों को पहाड़ी प्राकृतिक संपदाओं से वंचित कर रहे है,विपरीत परिस्थितियों में निवास करने वाले आदिवासीयों का पालन-पोषण पहाड़ों की सम्पदा एव रक्षा कर के रोजगार चलाते हैं @TribalArmy@BhimArmyChief#preetjamre
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Preetjamre
सवाई माधोपुर के बौंली क्षेत्र में महिला कमला देवी की लूट के लिए निर्���म हत्या अत्यंत निंदनीय और शर्मनाक है। जंगल में बकरियां चराने गई महिला का गला रेतकर चांदी की कड़ियां लूट लेना मानवता पर कलंक है। दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी, कड़ी सजा और पीड़ित परिवार को न्याय मिलना चाहिए।
सरक��र में तुम्हारे लोग हैं। मीडिया में तुम्हारे लोग हैं। सुप्रीम कोर्ट में भी तुम्हारे लोग बैठे हैं। और हमारे लोग? हमारे लोग आज भी ज़मीन पर हैं। भेदभाव झेलते हुए, अपमान सहते हुए, न्याय का इंतज़ार करते हुए। यही वजह है कि यूजीसी एक्ट को रोकने की साज़िशें रची जा रही हैं, क्योंकि यह कानून जातिगत भेदभाव के खिलाफ एक सुरक्षा कवच है। UGC एक्ट को लागू करवाने के लिए मैं जल्द ही सड़कों पर उतरने जा रहा हूं। यह ल��़ाई किस�� एक व्यक्ति की नहीं, यह लड़ाई सम्मान, समानता और संविधान की है। जो जमीन पर हैं, वही इतिहास बनाते हैं। और अब इतिहास दोहराया जाएगा।
Dear @TeamYouTube Many creators are currently facing a technical issue where videos are getting good views, but subscribers are not increasing at all. This seems to be affecting multiple channels. Please look into this issue and resolve it as soon as possible. Thank you.
आदिवासी समाज जिस जंगल - जमीन की कई पीढ़ियों से रक्षा करते आए हैं उसे अब इतनी आसानी से कैसे छोड़ देगा । संविधान कानून जरूर अनुसूचित क्षेत्रों के हितों में है लेकिन उसे लागू करने वाली सत्ता पूंजीपतियों की ग़ुलाम है । आज ये हालात छत्तीसगढ़ के सरगुजा में स्थित अमेरा कोयला खदान के विस्तार परियोजना के लिए जारी जमीन अधिग्रहण के कारण बने हैं जहाँ बिना ग्रामसभा सहमति के ही जमीन छीनी जा रही है�� कोयला खदान एसईसीएल की है लेकिन इसका संचालन गुजरात की एक निजी कंपनी करती है।
"आदिवासी को मालूम है पानी कब आएगा तूफान कब उठेगा धान कब उगेगा आग की पहचान उसी ने कराई ज़हर किसे कहते हैं, उसी ने बताया ���रती से जीवन उपजाने का राज उसी ने समझाया
धरती का पहला वैज्ञानिक ��दिवासी है धरती का भगवान आदिवासी है जो सबसे पहले था वो आदिवासी था!"
पिछले 10 दिनों में मेरी सोच में दो लोगों के लिए बहुत बड़ा परिवर्तन आया है।
मैं पहले असदुद्दीन ओवैसी साहब को पसंद नहीं करता था मगर पिछले 10 दिनों के घटनाक्रम ने मुझे उनका फैन बना दिया।
मैं पहले अमिताभ बच्चन को घटिया और नीच आदमी नहीं समझता था मगर पिछले 10 दिनों में इनकी पोस्ट देखकर मेरे ख़्याल पहले जैसे बिल्कुल भी नहीं रहे हैं।
मध्य प्रदेश सरकार में आदिवासी सुरक्षित नहीं हैं ना तो बहन बेटी और ना ही आदिवासी युवक।
महामहिम राष्ट्रपति महोदया आप हि संज्ञान में ले जनजाति आयोग भी मौन है। जो भी दोषी उन पर शक्त कारवाई हो। @rashtrapatibhvn
जब मस्जिदों से आतंक के ख़िलाफ़ आवाज़ उठती है, तो यह संदेश जाता है कि मज़हब का नाम लेकर की गई हिंसा का कोई स्थान नहीं है। इंसानियत के पक्ष में खड़े होकर कश्मीर की मस्जिदों ने जो एकता और शांति का संदेश दिया है, वह बेहद सराहनीय है। ऐसी आवाज़ें समाज में अमन और भाईचारे को मज़बूत करती हैं। दोषियों को सख़्त सज़ा मिलनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी ऐसी घिनौनी हरकत करने से पहले सौ बार सोचे।
मध्यप्रदेश के मंडला में हुई कथित नक्सली मुठभेड़ में मारे गए आदिवासी युवक हीरन सिंह के परिजन का दाव��� है कि वह निर्दोष थे। अगर यह फर्जी मुठभेड़ है, तो यह आदिवासियों के खिलाफ राज्य प्रायोजित हिंसा का गंभीर मामला है। हम इस घटना की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग करते है।
#टंट्या_भील_शहादत_दिवस
महामानव महानायक महायोद्धा महाविद्रोही राष्ट्र मालिक इंडियन रॉबिन हुड भगवान टंट्या भील के शहादत दिवस पर उन्हें श��� शत नमन जोहार...!
ये तस्वीर बांग्लादेश की नहीं, उत्तर प्रदेश की हैं। जहां अमेठी में एक पूरे दलित परिवार को मौत के घाट उतार द���या गया। यूपी में राष्ट्रपति शासन लागू किया जाना चाहिए। #Amethi
।। सँयुक्त राष्ट्र संघ द्व��रा घोषित ���।
आदिवासी अधिकार घोषणा दिवस
सन 2007 में सयुक्त राष्ट्र संघ में सभी देशो के प्रमुख और भारत सहित सभी देशो के प्रतिनिधियों के मंच से 13 सितंबर, 2007 को संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा घोषित आदिवासियों के अधिकारों के 46 अनुच्छेद