Mr. Modi, our students are demanding Dharmendra Pradhan’s resignation.
Don’t insult their intelligence with this pathetic midnight video.
1. Sack Pradhan.
2. Punish those who beat students.
3. Apologise
पापा, आपने जिस कुशल, समृद्ध और मजबूत भारत का सपना देखा था, उसे साकार करने की जिम्मेदारी मैं पूरी करूंगा।
आपकी सीख, आपके संस्कार और आपकी यादें हमेशा मेरे साथ रहेंगी।
18% टैरिफ बनाम 0% - आइए समझाता हूं, कैसे झूठ बोलने में माहिर प्रधानमंत्री और उनकी कैबिनेट इसपर भ्रम फैला रहे हैं। और, किस तरह से वो भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से देश के कपास किसानों और टेक्सटाइल एक्सपोर्टर्स को धोखा दे रहे हैं।
बांग्लादेश को अमेरिका में गारमेंट्स निर्यात पर 0% टैरिफ का फायदा दिया जा रहा है - शर्त बस इतनी है कि वो अमेरिकी कपास आयात करें।
भारत के गारमेंट्स पर 18% टैरिफ की घोषणा के बाद जब मैंने संसद में बांग्लादेश को मिल रही खास रियायत पर सवाल उठाया, तब मोदी सरकार के मंत्री का जवाब आया - “अगर यही फायदा हमें भी चाहिए, तो अमेरिका से कपास मंगवानी होगी।”
आखिर, ये बात तब तक देश से छुपाई क्यों गई?
और, ये कैसी नीति है? क्या यह सचमुच में कोई विकल्प है - या फिर “आगे कुआं, पीछे खाई” की हालत में फंसाने वाला जाल?
अगर हम अमेरिकी कपास मंगवाते हैं तो हमारे अपने किसान बर्बाद हो जाएंगे। अगर नहीं मंगवाते, तो हमारा टेक्सटाइल उद्योग पिछड़कर तबाह हो जाएगा।
और, अब बांग्लादेश यह संकेत दे रहा है कि वह भारत से कपास आयात भी कम या बंद कर सकता है।
भारत में टेक्सटाइल उद्योग और कपास की खेती आजीविका की रीढ़ हैं। करोड़ों लोगों की रोज़ी-रोटी इन्हीं पर टिकी है। इन क्षेत्रों पर चोट का मतलब है लाखों परिवारों को बेरोज़गारी और आर्थिक संकट की खाई में धकेल देना।
एक दूरदर्शी और राष्ट्रहित में सोचने वाली सरकार ऐसा सौदा करती जो कपास किसानों और टेक्सटाइल एक्सपोर्टर्स - दोनों के हितों की रक्षा और समृद्धि सुनिश्चित करती।
लेकिन इसके ठीक उलट, नरेंद्र “सरेंडर” मोदी और उनके मंत्रियों ने ऐसा समझौता किया है जो दोनों क्षेत्रों को गहरी चोट पहुंचाने वाला साबित हो सकता है।
#FarmersFirst 🇮🇳
ये विज्ञापन भयावह है।
भारत की सत्तारूढ़ पार्टी की तरफ़ से जारी इस वीडियो में एक राज्य का मुख्यमंत्री मुसलमानों पर गोली चलाता दिख रहा है।
नफ़रत और हिंसा के प्रचार का ये वीभत्स रूप है। बिलकुल नाजी जर्मनी जैसा घिनौना।