"जिनका इंतजार मरघट कर रहा है, वो आके यहाँ ज्ञान दे रहे है.. खुद चला नहीं जा रहा है और सोनम वांगचुक को बूढ़ा बोल रहा है.."
ऐसे पेंशनजीवी बूढ़े अंधभक्त इस देश के लिए जहर है, युवा साथी ने सही क्लास लगाई है।
जंतर मंतर जाते वक्त जिन दो छात्रों की पिटाई हुई, उसमें एक आयुष को सुनिए –
"सत्यम पंडित और उसके साथियों ने हमारे साथ मारपीट की। हम किसी की मदद नहीं ले सकते थे, क्योंकि पुलिस हमारे खिलाफ थी, आर्मी हमारे खिलाफ थी"
@Asifansari9410
ये अर्चिता सारंगी हैं जो पूर्व IAS और भुवनेश्वर से BJP की सांसद अपराजिता सारंगी की बेटी हैं।
कल जब धर्मेंद्र प्रधान ने अपने शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दिया तो अर्चिता सारंगी ने Gen Z को सपोर्ट किया और
अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर सेलिब्रेट करते हुए एक स्टोरी लगा दी।
कुछ देर बाद ये पोस्ट वायरल हो गई तो,
उनपर स्टोरी डिलीट करने का दबाव बनाया जाने लगा था क्योंकि उनकी मां अपराजिता सारंगी धर्मेंद्र प्रधान को खुला समर्थन कर रही थीं।
उसके कुछ देर बाद अर्चिता ने एक स्टोरी और लगाई और धर्मेंद्र प्रधान के PA को टारगेट करते हुए कहा कि मुझे पता था मां को मैसेज करोगे, लेकिन
"मैं स्टोरी डिलीट नहीं करूंगी।"
और लोग यहां सोच रहे हैं कि सिर्फ विपक्ष ही धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांग रहा है। 😂
डॉ राकेश पाठक का पब्लिक इंडिया पर वीडियो वायरल है, जिसमें सोनम वांगचुक कह रहे हैं कि , मुझे अनशन तोड़ना पड़ा क्योंकि सरकार, नॉर्थ कोरिया बनाने जा रही थी। नर संहार की तैयारी थी।जैसे लद्दाख में बच्चों को माथे और सीने पर गोलियां मारी थी😡😳😳🇮🇳
#SaveTheCountry
लोग कह रहे है कि प्रहलाद जोशी को इसीलिए शिक्षा मंत्री बनाया गया है क्यूंकि RSS से जुड़े है
लेकिन यही योग्यता काफ़ी नहीं है इसके पीछे एक और साइकोलॉजिकल रीजन है
लोकसभा मे बीजेपी के पास 240 सांसद है
64 सांसद ग्रेजुएट है
49 सांसद पोस्ट ग्रेजुएट हैं
45 सांसद प्रोफेशनल ग्रेजुएट है
(MBBS, B. TECH, LLB , CA आदि,)
बाकी बचे सांसद 12वी या उससे कम पढ़े लिखें है
राजयसभा मे बीजेपी के 13 सांसदों के पास PHD की डिग्री है
फिर भी प्रहलाद जोशी को देश के कार्यवाहक शिक्षामंत्री बनाया गया जो खुद ग्रेजुएट है
साइकोलॉजिकली एक कम पढ़ा लिखा आत्ममुग्ध व्यक्ति अपने आसपास कम पढ़े लिखें व्यक्ति को ही रखना पसंद करता है
क्योंकि ज्यादा पढ़ा लिखा व्यक्ति समझदार होता है और यह बात आत्ममुग्धता मे रहने वाले व्यक्ति
बर्दाश्त नहीं कर पाते हैं
तो अब आपको समझ में आ गया कि क्यों प्रहलाद जोशी को ही शिक्षा मंत्री बनाया गया है?
खरी खरी :
ये युवा हमारे देश का भविष्य हैं. अपने ही देश के युवाओं पर लाठी चलाना, पैलेट गन चलाना और उन्हें घायल करना स्वीकार नहीं किया जा सकता.
ये युवा सिर्फ एक निष्पक्ष और जवाबदेह व्यवस्था की मांग कर रहे थे. किसी भी लोकतंत्र में उनकी आवाज़ सुनी जानी चाहिए, न कि उन्हें हिंसा का सामना करना पड़े.
हमारे ही देश की सुरक्षा बल हमारे ही देश के भविष्य पर गोली चलाएँ, यह हमें किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं है.
- नेता विपक्ष राहुल गाँधी जी
#युवाओं_की_बात
#मुद्दों_की_बात
एक बदमिजाज तानाशाह को कभी भी बच्चों की, जनता की फ़िक्र नहीं होती केवल अपनी सत्ता की फ़िक्र होती है ,कमाल है कूड़े-कचरे से रैपर निकाल लिए कि बच्चों को खाना किसने पहुंचाया,,? अजब गजब हिंदुत्ववादी सरकार हिंदुओं पर ही जुल्म ढा रही है,,,!!
सभी देशभक्त देशवासियों जवाब दीजिए -
क्या संसद में झूठ बोलकर शहादतें छिपाने का देशद्रोह करने वाले ग़ैरज़िम्मेदार व्यक्ति को रक्षा मंत्री बने रहना चाहिए?
जस्टिस उज्जल भुइयां सुप्रीम कोर्ट के जज हैं। उन्होंने यह टिप्पणी अदालत की कार्यवाही में नहीं है बल्कि भोपाल की नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी द्वारा आयोजित पाँचवें जस्टिस जी.पी. सिंह मेमोरियल लेक्चर में अपने संबोधन के दौरान की है। उनके संबोधन का सिर्फ यही अंश नहीं बल्कि पूरा संबोधन ही शानदार है। लेकिन हमें बात ‘शानदार’ से आगे ले जानी है। ये बातें हॉल में तालियां पिटवाने के लिए ही नहीं कही जानी चाहिए। बल्कि अदालत की कार्यवाही में दिखनी भी चाहिए।
जस्टिस उज्जल भुइयां सुप्रीम कोर्ट के जज हैं, जिस मामले का वो ज़िक्र कर रहे हैं, उसमें बिरयानी खाए जाने का कोई सबूत ही नहीं था। लेकिन इसके बावजूद मुस्लिम युवाओं को महीनों तक जेल में रखा गया। उन युवकों को ज़मानत भी हाईकोर्ट से मिली है। चूंकि गंगा में बिरयानी खाना कानून ‘अपराध’ नहीं है, इसलिए उन युवकों के मामले में नाविक को अगुवा करने और धमकी देने जैसे संगीन मामलों की धाराएँ जोड़ी गईं। दिल्ली में बैठे सुप्रीम कोर्ट के जजेस खुले आम उड़तीं कानून की इन धज्जियों को देखते रहे। सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान तक नहीं लिया।
अब सुप्रीम कोर्ट के जजेस कोर्ट के बाहर कितना ही शानदार भाषण दें, कितनी ही शानदार दलीलें दें, इनकी कोई अहमियत नहीं है। जब आपके हाथ में कलम है! तब तालियां आपके भाषणों पर नहीं बल्कि फैसलों पर बजनी चाहिए।
कुछ दिन पहले प्रहलाद जोशी जो नए शिक्षा मंत्री हैं - TV पर झूठ बोलकर बकवास कर रहे थे
पीछे से राहुल गांधी आ गए
भग खड़े हुए
अब सोचिए - कितना भागना होगा 🏃🏃
आज 2 रिकॉर्ड बने है,
पहला, नरेंद्र मोदी देश के पहले ऐसे नेता बन गए है जिन्हे इंस्टाग्राम पर 24 घण्टे मे सबसे ज्यादा 303 मिलियन views मिले है
दूसरा, धर्मेंद्र प्रधान बीजेपी के पहले ऐसे नेता बन गए है जिन्होंने छात्रों के दवाब मे अपने पद से इस्तीफा दिया है
इतिहास गवाह है कि पिछले 12 सालो मे बीजेपी के किसी नेता ने अपनी मर्जी से इस्तीफा नहीं दिया है,
राजनाथ सिंह ने तो यहाँ तक कहा था की BJP मे इस्तीफे नहीं होते, आज ये मिथक भी टूट गया
इससे ये बात साबित हो गयी है कि अगर जनता अपनी पर आये तो नितिन गडकरी, नरेंद्र मोदी,
अमित शाह को भी इस्तीफा देने पर मजबूर कर सकती है
है कि नहीं?
इस तस्वीर में दिख रहे शख्स का नाम संदीप सिंह है। यह पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह जी के पोते हैं और वर्तमान में उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग में मंत्री हैं।
इन्होंने जबसे उत्तर प्रदेश में बेसिक शिक्षा विभाग का कार्यभार संभाला है एक भी पेपर लीक नहीं हुआ है।
इनकी कार्यकुशलता पर कोई सवाल भी नहीं उठा सकता, धर्मेंद्र प्रधान की तरह इस्तीफा मांगना तो दूर की बात है।
जानते हैं क्यों?
क्योंकि जबसे इन्होंने कार्यभार संभाला है उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा में एक भी शिक्षक भर्ती ही नहीं आई है। 😀
और जब शिक्षक भर्ती नहीं आई तो लीक का सवाल ही नहीं उठता है जबकि प्रदेश में लाखों पद खाली हैं और अंतिम भर्ती 2018 में आई थी।
"पुलिस अंकल बाय बाय... नितिन गडकरी के टाइम मिलेंगे वापस"
नितिन गडकरी मोदी सरकार के विकास के फ्लैग बियरर बने घूमते हैं। हैं परिवहन मंत्री, दिन भर इथेनॉल की मार्केटिंग करते हैं। देश का युवा देख रहा है।
मेक इन इंडिया के तहत जनता को उल्लू बनाने की परियोजना की उम्र बहुत थोड़ी बची है।
🔥 इस्तीफ़ा तो हो गया... लेकिन जवाब कौन देगा? 🔥
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की खबर के बाद अब देशभर में एक बड़ा सवाल उठ रहा है।
Modi जी इस्तीफा कब देंगे.?
जो छात्र सड़कों पर उतरे, जिन पर लाठीचार्ज हुआ, जो घायल हुए, जिन्हें बदनाम किया गया, उनकी पीड़ा और नुकसान की ज़िम्मेदारी कौन लेगा?
कई छात्र अब यह भी मांग कर रहे हैं कि केवल मंत्री का इस्तीफ़ा नहीं, बल्कि पूरे मामले की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
लोकतंत्र में इस्तीफ़ा अंत नहीं होता, जवाबदेही की शुरुआत होता है। देश के युवाओं का सवाल साफ़ है
न्याय, पारदर्शिता और ज़िम्मेदारी कब तय होगी?