#समाज_की_शत्रु_सत्यार्थप्रकाश
सत्यार्थ प्रकाश (समुल्लास 4)में विधवा महिलाओं और गर्भवती पत्नी के संदर्भ में दिए गए नियमों पर महिला संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई है। उनका आरोप है कि यह सोच महिलाओं को केवल संतानोत्पत्ति का साधन मानने जैसी है, जो स्त्री सम्मान के सर्वथा विरुद्ध है।
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सत्यार्थ प्रकाश(समुल्लास 2)में नवजात को केवल 6दिन तक स्तनपान कराने के विचार पर महिला समूहों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कड़ा एतराज जताया है। उनका कहना है कि समाज शत्रु आर्य समाज की यह धारणा आधुनिक विज्ञान,मातृत्व और शिशु स्वास्थ्य के मूलभूत विपरीत है।
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समाज के शत्रु, आर्य समाजी आचार्यों से समाज को बचाने के लिए जनता हुए एकजुट
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#संतरामपालजी_Vs_महर्षिदयानंद
सत्यार्थ प्रकाश, समुल्लास 11, पृष्ठ 296 पर दयानंद सरस्वती ने संत शिरोमणि कबीर साहेब, जिन्होंने पूरे समाज को स���रसता का मार्ग दिखाया, उनके विषय में जातिगत संदर्भ लेकर अपमानजनक टिप्पणियां कीं।
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#संतरामपालजी_Vs_महर्षिदयानंद
महर्षि दयानंद का ज्ञान वेदो अनुकूल नहीं।
न ही ये ओम नाम के जाप के हक में थे।
दयानंद का कहना था कि नाम जाप की कोई ज़रूरत नहीं।
पूर्ण संत रामपाल जी महाराज जी ने पवित्र कबीर सागर और वेदों से सिद्ध किया है कि नाम के जाप से ही मोक्ष मिलेगा।
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Maharishi Dayanand
disrespected Guru Nanak Dev Ji. Saint Rampal Ji Maharaj holds Guru Nanak Dev Ji in the highest regard.
He honors the Guru Granth Sahib as the sacred and divine speech of enlightened souls.
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#वाहरे_समाज_नाशक_महर्षिदयानंद
महर्षि दयानंद ��रस्वती का जीवन चरित्र, पेज 220 एवं 285 पर लिखा है कि दयानंद जी तंबाकू खाते थे व सूंघते थे तथा हुक्का भी पीते थे।
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#वाह��े_समाज_नाशक_महर्षिदयानंद
सत्यार्थ प्रकाश, समुल्लास 11, पृष्ठ 296 पर दयानंद सरस्वती ने संत शिरोमणि कबीर साहेब, जिन्होंने पूरे समाज को समरसता का मार्ग दिखाया, उनके विषय में जातिगत संदर्भ लेकर अपमानजनक टिप्पणियां कीं।
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#वाहरे_समाज_नाशक_महर्षिदयानंद
सत्यार्थ प्रकाश, समुल्लास 11, पृष्ठ 291 पर दयानंद सरस्वती ने लिखा है कि
श्रावण मास में भक्तों के ‘बम-बम’ नाद की तुलना सीधे बकरे की आवाज़ से की गई और त्रिलोकीनाथ महादेव को ‘प्रेतनाथ’ और ‘भूतनाथ’ कहकर उपहास उ��़ाया गया है।
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सत्यार्थ प्रकाश, समुल्लास11,पृष्ठ 297-298 पर दयानंद सरस्वती ने सिख धर्म के प्रथम गुरु, आदरणीय श्री गुरुनानक देव जी के ज्ञान और भाषा पर भी अनुचित आक्षेप लगाए। लिखा है क��� उन्हें ज्ञान नहीं था।
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#जीवन_रक्षक_पूर्ण_परमात्मा
असली रक्षाबंधन किससे जोड़ें?
जिस परमात्मा के हाथ में जन्�� और मृत्यु की डोर है, असली रक्षा का बंधन उसी से बांधना चाहिए। वर्तमान में तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज से नामदीक्षा लेकर सतभक्ति करने से ही पूर्ण सुरक्षा संभव है।