BSP को तोड़ने के लिए BJP ने 2014 के बाद BSP के सभी OBC नेताओं को तोड़ा। तोड़ने के लिए ये लोग क्या करते हैं आपको पता है।
OBC नेताओं को तोड़के BJP को लगा कि BSP टूट जाएगी। लेकिन जो टूट जाएगी वह BSP कैसे?
BSP विचारधारा और आंदोलन है, सिर्फ पार्टी नहीं, इसलिए पार्टी दोबारा खड़ी हुई है।
इस बार BSP क्यों जीत रही है, इसका कारण चुनाव के बाद बताऊंगा।
आरक्षण राष्ट्र को बांटता नहीं है, बल्कि इससे राष्ट्र की नींव मजबूत होती है और संस्थाओं में भागीदारी बढ़ती है।
जब SC, ST और OBC के बच्चे डॉक्टर, इंजीनियर, जज, शिक्षक और अधिकारी बनते हैं, तो इससे उनके परिवारों के साथ साथ पूरे समाज का हौसला और हिम्मत बढ़ती है।
सवर्ण टैक्स देते हैं, इसलिए आरक्षण की कृतज्ञता दिखाओ।
भाई, टैक्स किसी जाति का दान नहीं, नागरिकों का योगदान है। उसी टैक्स से सड़क, अस्पताल, स्कूल, पुलिस और सरकारी संस्थान चलते हैं और Sc, St, OBC भी टैक्स देते हैं।
आरक्षण खैरात नहीं, संवैधानिक नीति है।
Taxpayer बनकर मालिक बनने की कोशिश मत करो लोकतंत्र में नागरिक बराबर होते हैं।
1.जैसाकि विदित है कि दिनांक 10 अगस्त 2019 को दिल्ली के तुग़लकाबाद में संतगुरु श्री रविदास जी के पवित्र गुरुघर को बुलडोज़र और भारी पुलिस बल की मौजूदगी में ढहा दिया गया था। इसके विरोध में देशभर की संगत जब लोकतांत्रिक ढंग से सड़कों पर उतरी तो तब उन्हें लाठीचार्ज, आँसूगैस, गिरफ्तारियाँ और मुकदमों आदि का सामना करना पड़ा। काफी लोगों को जेल भी जाना पड़ा।
2.इतना ही नहीं गुरुघर की भूमि भी छीन ली गई और आज भी संगत को लोहे के अस्थायी टीन शेड में अपने गुरुजी को माथा टेकने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। यह स्थिति करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं को आहत करने वाली है और आज भी समाज की स्मृति में अंकित है।
3.अब पंजाब चुनाव नज़दीक आते ही वही भाजपा संतगुरु श्री रविदास जी के नाम पर कलश यात्रा निकालकर गुरुजी के बेगमपुर शहर के लक्ष्य से समाज को भटाकने का प्रयास कर रही है। दूसरी ओर पंजाब के धलेता गाँव में गुरुघर की दीवार गिराए जाने पर जब संगत और बसपा ने आवाज़ उठाई तो गिरफ्तारियाँ की गईं। अन्त में फिर आम आदमी पार्टी की सरकार को झुकना पड़ा और गुरुघर का पुननिर्माण कराना पड़ा।
4.ऐसे में समाज भाजपा और आम आदमी पार्टी की राजनीति से सतर्क रहें। पराधीनता का अन्त एवं बेगमपुरा का संकल्प संतगुरु श्री रविदास जी सम्मान यात्रा जो तुग़लकाबाद से धलेता गाँव तक पहुँच रही है, जिसमें समूह संगत सादर आमंत्रित हैं। और संतगुरु श्री रविदास जी बेगमपुरा के आदर्श, सम्मान, समानता और न्याय के संदेश को जन-जन तक पहुँचाए तथा गुरुघरों की गरिमा, धार्मिक अधिकारों और संतगुरु श्री रविदास जी के सपनों के अनुरूप पराधीनता मुक्त समाज के निर्माण के संकल्प को मज़बूत बनायें।
आरक्षण ने कैसे देश को बर्बाद किया है , इस आंकड़े से समझ जायेंगे।
आईआईटी, कानपुर के 257 प्रोफेसर में से 252 प्रोफेसर सवर्ण जाति के हैं।
लेकिन,जरा रूकिए। यह कौन सा आरक्षण है?
1.देश में ’बहुजन समाज’ में से ख़ासकर एससी, एसटी व ओबीसी वर्गों के लिये आरक्षण ’सामाजिक परिवर्तन व आर्थिक मुक्ति’ अर्थात् हमेशा से इनके आत्म-सम्मान की ज़िन्दगी से जुड़ा अति-महत्वपूर्ण व अत्यन्त संवेदनशील मामला है और जाति के आधार पर सदियों से यहाँ तोड़े, सताये व पछाड़े गये एससी व एसटी समाज के लिये तो यह अत्यन्त ज़रूरी मामला भी विशेषकर तब बन जाता है जब जातिवादी द्वेष, शोषण, प्रताड़ना, अन्याय-अत्याचार कम होने का नाम ना ले, और इसीलिये इसमें क्रीमी लेयर की बात करना अनुचित ही नहीं बल्कि परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के मानवतावादी संविधान के पवित्र उद्देश्यों के भी विरुद्ध है, हालाँकि किसी को भी इसकी अनदेखी नहीं करनी चाहिये बल्कि सभी को देश व जनहित के मद्देनज़र अपनी पूूरी ईमानदारी व निष्ठा के साथ इस पर अमल भी ज़रूर करना चाहिये।
2.जबकि इस बारे में आरएसएस प्रमुख का अभी हाल में फिर से यह कहना कि, ’आरक्षण का जानबूझकर राजनीतिकरण किया गया है जिससे समाज में कड़वाहट भरी है तथा आरक्षण के लाभार्तियों को स्वेच्छा से इसका लाभ छोड़ देना चाहिये’, वास्तव में यह इनकी ऐसी जातिवादी सोच है जिससे संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थ की पूर्ति तो हो सकती है, किन्तु इससे संवैधानिक उद्देश्यों की अवहेलना होती है, क्योंकि आरक्षण मूलतः सदियों से जातिवादी व्यवस्था के शिकार करोड़ों शोषित-पीड़ित, उपेक्षित व तिरस्कृत लोगों को मानवीय आधार पर समता व समानता का संवैधानिक व कानूनी अधिकार देना है, और जिसे आर्थिक उन्नति से कतई भी नहीं आँका जा सकता है, क्योंकि जातिवाद का दंश जीवन के हर पहलू में उन्हें डसता ही रहता है और जो क्रम अभी भी हर स्तर पर लगातार जारी है, यह आरएसएस से ज़्यादा भला कौन जानता है?
3.इतना ही नहीं बल्कि केन्द्र में अभी तक रही सभी सरकारें भी इस कड़वी ज़मीनी वास्तविकता को भलीभाँति जानती और समझती भी हैं और इसीलिये अगर वर्तमान सरकार अपने वाजिब तर्कों के आधार पर इसकी प्रभावी व समुचित पैरवी करके एससी व एसटी समाज को क्रीमी लेयर से दूर रखने हेतु अपना पक्ष अदालत से मनवा लेती है तो यह पूर्णतः उचित व संवैधानिक होगा। वैसे अक्सर यही देखा गया है कि सरकारों के लचर रवैये व अच्छी कानूनी पैरवी के अभाव में ही अदालतें ’सामाजिक परिवर्तन’(Social Transformation) आदि के मामलों में सही से न्याय नहीं कर पाती हैं।
4.इस बारे में आरएसएस से भी यही कहना है कि वह परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के मानवतावादी एवं कल्याणकारी संविधान को पूरा-पूरा आदर-सम्मान देते हुये आरक्षण को लेकर राजनीति करना छोड़ दे और साथ ही आरक्षण में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ की वकालत बंद करके देश में ’समतामूलक समाज व्यवस्था’ (Equalitarian Social order) की स्थापना के संवैधानिक दायित्व/उद्देश्यों की पूर्ति में पूरी तरह से सहयोग करे तो यह बेहतर होगा, यही वक्त की ज़रूरत व समय की माँग भी है।
जो न्यायालय में बैठे हैं वो मेरिट के आधार पर नहीं बल्कि जातीय प्रभुता और भाई-भतीजावाद के कारण हैं। 85% आबादी के 1% जज उच्च न्यायालय क्यों नहीं हैं ? कोलेजियम को ध्वस्त करना ही होगा।
~ @sanjuydv जी
जिन सवालों के जवाब वो देना नहीं चाहते वही सवाल मज़बूती से दागे गए हैं।
शानदार✊🏾
आरक्षण हटाने निकले थे, अब सिर फुटौव्वल कर रहे हैं।
आपस में पेज कब्जा ले रहे हैं, पासवर्ड नहीं शेयर कर रहे हैं।
और इनका दावा है कि आरक्षण हटा दो, दलित पिछड़ों के साथ नौकरी शेयर करेंगे।
कुछ दिन और इंतजार करो एक दूसरे को एक्सपोज करके ये ख़त्म करेंगे।
आरक्षण के मु्द्दे पर नगीना सांसद @BhimArmyChief चन्द्रशेखर आजाद का यह बयान समस्त देशवासियों को अवश्य सुनना चाहिए 👇🏻
"जो लोग संविधान के विरोध में आए 10% आरक्षण को लेते हैं वो भी आरक्षण पर सवाल खड़ा कर रहे हैं। जो सदियों से आरक्षण का लाभ लेते आ रहे हैं, जो संस्थानों पर काबिज हैं, कमजोर वर्गों पर अत्याचार पर जिनके मुंह से एक शब्द नहीं निकला, वो हमसे सवाल कर रहे हैं? आपको कोई अधिकार नहीं है"
लो अब सिद्धिविनायक में चढ़ावा चोरी की पोल खुली । हर साल 18 करोड़ रुपये की डकैती।
ईश्वर कहा है ?
आमजन ईश्वर को चढ़ावा चढ़ाता है और पांडा लूट ले रहा लूट के इतिहास देखते हुए साफ़ है-
भारत के मंदिरों को कभी किसी विदेशी ने लूटा होगा ये अपने आप में सदिग्ध है।
दलित नेता दलितों का नेता और ब्राह्मण नेता पूरे समाज का नेता ?
लोकतांत्रिक व्यवस्था में यह नैरेटिव सबसे ज्यादा बहुजन समाज को नुकसान पहुंचा रहा है.
चंद्रशेखर आजाद ने भी एक बड़ी लोकसभा सीट पर जीत दर्ज की, कुल 5,12,552 वोट प्राप्त किया.
आजाद समाज पार्टी के नेता हैं. UP के 2027 के आगामी विधानसभा चुनाव सभी 400 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है.
लेकिन मीडिया ने चंद्रशेखर आजाद को उस तरह प्रोजेक्ट नही किया जैसे प्रशांत किशोर को कर रही है.
प्रशांत किशोर ने एक छोटी सी विधानसभा में 64,151 वोट पाकर जीत हासिल की है. मीडिया ऐसे गुणगान कर रहा मानो प्रशांत किशोर इस देश के बहुत बड़े नेता हैं. इस मानसिकता को जातिवाद कहा जाता है.
Congratulations ❤️❤️❤️ my Dear Cockroaches.. Dear Sonam wangchuk sir and every single one who stood by the youth . You Have proved that you can bring a regime down to its knees . 💪💪💪 #justasking