नगीना सांसद @BhimArmyChief चन्द्रशेखर आजाद के कल मेरठ के ललिता गौतम प्रकरण में पीड़ित परिवार से मिलने के ऐलान के बाद अब पूरे गांव को मेरठ पुलिस द्वारा छावनी में तब्दील कर दिया गया है 🚨
एससी एसटी के प्रति शासन प्रशासन का हमेशा दोगला रवैया रहा है, एक तरफ धार्मिक उन्माद फैलाने वाले और हत्यारे बलात्कारियो के फेवर मे आई हुई भीड़ को प्रोटेक्शन देते है और पीड़ितो के लिए आवाज उठाने वालों पर लाठियां बरसते है बस यही है इस देश की हकीकत, संविधान ना होता तो यह जीने नही देते
मेरठ में शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन कर रहे लोगों के साथ पुलिस की मारपीट चिंताजनक; निष्पक्ष जाँच कर दोषी अधिकारियों के विरुद्ध उचित कार्यवाही हो ।
-मायावती, पूर्व मुख्यमंत्री, UP
मेरठ (यूपी)
आज मेरठ में कथित दलित नेता जबरन रोड जाम कर रहे थे
जिस मुद्दे को लेकर हो रहा था हंगामा उसमें पहले ही हो चुकी थी गिरफ्तारी।
जयभीम के नारे की आड़ में पुलिस कप्तान अविनाश को बना रहे थे निशाना।
कप्तान साहब ने उड़ा दिए नी,,, ले कबूतर
अब कबूतर कार्रवाई को बता रहे हैं असंवैधानिक।
संविधान का अनुच्छेद 19(1)(b) हर नागरिक को शांतिपूर्ण और बिना हथियार के एकत्र होकर अपनी बात रखने का अधिकार देता है। आखिर संविधान की कौन-सी धारा किसी SSP को ये अधिकार देती है कि वो शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर हाथ उठाए?
कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की जिम्मेदारी है, लेकिन शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों के साथ बल प्रयोग करना कहां तक सही है?
और अगर सड़क जाम होना ही सबसे बड़ा अपराध है, तो धार्मिक रूप से कांवड़ यात्रा के दौरान कई-कई दिनों तक राष्ट्रीय राजमार्ग बंद रहते हैं। तब यही कानून कहाँ जाता है? तब हेलिकॉप्टर से फूल बरसाए जाते हैं, स्वागत होता है, सेवा की जाती है। लेकिन जब दलित समाज अपनी बेटी के लिए इंसाफ मांगता है, तब उसी सड़क पर लाठियां बरसने लगती हैं। ऐसा क्यों?
अन्य जातियों के हिस्से में… न्याय आता है। दलितों के हिस्से में लाठिया! क्यों?
और लाठियों के साथ ऐसे² टपोरी टाइप के डायलॉग… "ये सड़क तुम्हारे बाप की है।" ये जुमले शायद सिर्फ दलितों के लिए ही बचाकर रखे गए हैं। ऐसा किसी ने ऊंची जातियों के लोगों से कहा हो, आपने कभी सुना है?
जिस दरिंदे ने उस बच्ची की ज़िंदगी छीन ली, उसके सामने अपनी बहादुरी का परिचय नहीं दिए। लेकिन वही व्यवस्था निहत्थे लोगों पर टूट पड़ी। लगता है इस सिस्टम की सारी बहादुरी सिर्फ कमज़ोरों के लिए बचाकर रखी गई है?
जवाब दीजिए @Uppolice !!
मेरठ में हुई दुर्व्यवहार घटना में हमारे सहयोगी भाई @manojvoice1 जी के द्वारा @NCSC_GoI को पत्र लिखा गया !!
SSP जितना पुलिस बल न्याय मांगने वालों पर लगाई है उतना अगर अपराधी के लिए लगाती तो ये दिन नहीं आता !!
बीएसपी सरकार और भाजपा सरकार में यही अन्तर है।
यूपी में जब बीएसपी सरकार थी,आईएएस-आईपीएस दलितों की बस्तियों खुद जाकर एफआईआर लिखते थे।
आज भाजपा सरकार में ललिता गौतम को न्याय दिलाने के लिए संवैधानिक व्यवस्था के तहत विरोध-प्रदर्शन कर रहे दलितों पर आईपीएस अविनाश पाण्डेय हाथ उठा रहा है,लाठीचार्ज कर रहा है व दलितों को गालियाँ दे रहा है।
बहुजनों संगठित होकर बहुजन समाज पार्टी की सरकार बना लो,फिर प्रदेश के आईएएस-आईपीएस न्याय दिलाने आपकी बस्तियों में ही आया करेंगे।
इन दलितों पर पुलिस महोदय ने जितनी तेजी से थप्पड़ बरसाए हैं, अगर इतनी ही तेजी उस दलित लड़की के हत्यारों के खिलाफ कार्यवाही करने में दिखाई होती तो ये लोग आज धरने पर ना बैठते....
ख़ैर आप दलित है, तो आपको न्याय के लिए लंबी लडाई लड़नी पड़ेगी।
#अविनाश_पांडे_को_बर्खास्त_करो
अन्याय के खिलाफ मेरठ कूच!
भीम आर्मी और आज़ाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आज़ाद जी बहुत जल्द पूरी ताकत के साथ मेरठ आ रहे हैं।
पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए हमारा संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक दोषियों को सजा नहीं मिल जाती।प्रशासन ने जिस तरह का संवेदनहीन रवैया अपनाया है, वह बेहद निंदनीय है।
बहरे प्रशासन को जगाने और सत्ता के अहंकार को तोड़ने के लिए भीम आर्मी और आज़ाद समाज पार्टी के सभी कार्यकर्ता अपनी कमर कस लें। अब चुप बैठने का वक्त नहीं है, बल्कि हर ज़ुल्म का डटकर जवाब देने का वक्त है।
न्याय की इस लड़ाई में हम लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से अपनी आवाज़ बुलंद करेंगे। प्रशासन को जनता के प्रति अपनी जवाबदेही सुनिश्चित करनी होगी।
सभी साथी एकजुट रहें, मेरठ में न्याय की मांग के लिए हम शांतिपूर्ण और मज़बूत तरीके से अपनी बात रखेंगे।
यह कोई दरोगा या इंस्पेक्टर नहीं,बल्कि मेरठ एसएसपी अविनाश पाण्डेय है। इसकी भाषा देखिए।
मेरठ एसएसपी कह रहा है कि यह रोड इनके (दलितों) पिता जी की नहीं है। रोड गन्दा कर दिया,सालों ने।
एसएसपी अविनाश पाण्डेय द्वारा दलितों गाली देने का अधिकार किसने दिया?
"मैं मरूंगा... मेरे साथ बदतमीजी हुई है, कप्तान साहब... मैं वकील हूं!"
उत्तर प्रदेश के जिला मेरठ में ललिता गौतम हत्याकांड मामले में प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए एडवोकेट रवि गौतम ने पुलिस वैन के अंदर फांसी लगाने की कोशिश की। एसएसपी अविनाश पांडेय ने एडवोकेट रवि गौतम की पिटाई भी की। जिसका वीडियो भी सामने आया है।
मेरठ कलेक्ट्रेट पर 08 जुलाई की घटना में अधिवक्ता रवि गौतम के साथ पुलिस वाहन के भीतर कथित मारपीट एवं पुलिस बल प्रयोग के आरोपों को लेकर आज़ाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) में शिकायत भेजी है।
शिकायत में सभी वीडियो एवं इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित कराने, हिरासत के अभिलेख व समयरेखा तलब करने तथा निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने पर विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
@UPGovt@ChiefSecyUP@dgpup@CMOfficeUP@adgzonemeerut@digrangemeerut@meerutpolice@DmMeerut
जिले के पुलिस विभाग के सबसे बङे पदाधिकारी की भाषा ऐसी होनी चाहिए कि जनता जुङाव महसूस करे। मेरठ एसपी की भाषा में पद और जाति का अहंकार दिखता है ।
चूंकि , इनको प्रदर्शनकारी की जाति पता है, इसलिए इनका व्यवहार इस तरह का है। कायदे से अविनाश पांडे पर एससी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज होना चाहिए।