@AMISHDEVGAN@AMISHDEVGAN जी , राजीव त्यागी की तरफ से मैं आपसे माफ़ी मांगता हूं । उन्होंने कम शब्दों में आपकी बेज्जती की जो बेज्जती की है वो आपकी चाटूकारिता के लिए काफ़ी हद तक कम है ।
मुझे आशा नहीं थी कि @RahulGandhi जी की सच में ट्वीट करेंगे अब मुझे राहुल गांधी जी जैसे बड़े नेता का साथ मिल चुका है अब मुझे न्याय मिल कर रहेगा और स्वतंत्र भारद्वाज जेल जाकर रहेंगे..
राहुल जी की नाक से बहता यह खून सिर्फ़ एक व्यक्ति का नहीं, उस विचार का प्रतीक है जो अन्याय के सामने झुकना नहीं जानता।
कभी इंदिरा गांधी ने कहा था :
"मेरे खून का एक-एक कतरा देश को मजबूत करेगा।"
आज जब राहुल गांधी संघर्ष के रास्ते पर चोट खाते दिखाई दे रहे हैं, तो वही विरासत याद आती है। इतिहास सत्ता से नहीं, संघर्ष से लिखा जाता है।
जिनके इरादे मज़बूत होते हैं, वे चोटों से नहीं रुकते। उनका हर घाव लोकतंत्र, संविधान और जनता के अधिकारों के लिए लड़ी जा रही लड़ाई की गवाही बन जाता है।
खून के धब्बे मिट जाते हैं, लेकिन संघर्ष की कहानियाँ पीढ़ियों तक याद रहती हैं।
नफ़रत के सामने झुकना नहीं, सच के लिए डटे रहना ही गांधी नेहरू विरासत का सबसे बड़ा सम्मान है।
#नरेंदर_सरेंडर जी, अमेरिका से डील के पहले ये बताइए कि कपास, सोयाबीन, मक्का उत्पादकों के लिए सुरक्षा योजना क्या है? किसान आपकी मनमर्जी की बलि नहीं चढ़ेगा।
#नरेंदर_सरेंडर, किसान सम्मान निधि से ज्यादा जरूरी है—न्यायपूर्ण दाम और बाजार सुरक्षा। जो आपकी सरकार नहीं दे रही, हम अमेरिका से डील नहीं, फसलों के दाम मांग रहे थे।
#नरेंदर_सरेंडर—क्या मोदी जी अब “डील पहले, किसान बाद में” की नीति पर चल पड़े हैं? खेत गिरवी, समझौता पक्का? आपके गलत कर्मों की सजा देश का किसान नहीं भुगतेगा, डील नहीं न्याय चाहिए।
@RahulGandhi
जी एक बार मिलने की ख्वाइश तो मुझ कार्यकर्ता की भी हे,, किंतु असभंव लगता हे,, आपसे मुलाकात करना,, ।
जी का एक छोटा सा शिष्य हु,खानदानी पीढ़ियों से कांग्रेस कार्यकर्ता हु,,।
@akshaykumar कोई माँ के पेट से रहमान डकैत बनकर नहीं आता
न ही उसमे औरंगज़ेब जैसी क्रूरता का शुक्राचार्य
जैसी दुष्टता भरीहोती है
ये वही मासूम आतिश कपूर है जो बस
ऑस्कर चाहता था..सिर्फ एक!
यदि तीसमारखां पर ही
इसे #ऑस्कर देदिया होता
तो क्यो बनता ये रहमान डकैत
☝️😁
#dhurandhar#AkshayeKhanna
पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता शिवराज पाटिल जी के निधन से गहरा दुख पहुंचा है। सार्वजनिक जीवन में उनके योगदान और राष्ट्रहित के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को सदैव सम्मान के साथ याद किया जाएगा। पाटिल परिवार को इस दुःख को सहने की शक्ति मिले।
#ShivrajPatil#ShivrajPatil
कांग्रेस पार्टी की ओजस्वी,राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं सोशल मीडिया विभाग की राष्ट्रीय चेयरपर्सन,श्रीमती @SupriyaShrinate जी को जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।
आपकी गहन विचारशीलता,तार्किक क्षमता और अद्वितीय हाजिरजवाबी ने पार्टी की आवाज़ को एक नई धार दीहै व जन-जन तक मजबूती से पहुँचाया है
🙏
नीतीश ने बेईमानी तो की है। चुनावी तारीख डेट
घोषित होने के एक दिन पहले महिलाओं के खाते में 10 हज़ार रुपये डालना सही नहीं कहा जा सकता। तेजस्वी द्वारा हर परिवार के एक बंदे को नौकरी तो फिर भी क्षम्य है। क्योंकि वह चुनावी वादा है।
“आपको नहीं बोलने दूँगी मैं.” “आप मेरे स्टूडियो से बाहर चली जाइये”…
मार्च 2025 के तीसरे सप्ताह की एक चर्चा में चित्रा त्रिपाठी के ये शब्द थे, जब उनके BJP जनित नैरेटिव को मैंने चलाने से रोका था.
दो दिनों से ट्विटर (X) पर रागिनी नायक जी और चित्रा त्रिपाठी की ट्वीट्स चर्चा का विषय बनी हुई हैं.
करीब चार महीने पहले जब चित्रा त्रिपाठी औरंगज़ेब वाला शो कर रही थीं, तो उन्होंने पत्रकार और एंकर की मर्यादा को पीछे छोड़ते हुए मुझसे कहा था कि “आप मेरे डिबेट से निकल जाइये”. उस समय मैंने उनके चीफ़ एडिटर रजनीश आहूजा से बात की और बाद में खुद चित्रा त्रिपाठी ने मुझसे माफ़ी माँगी थी.
लेकिन चित्रा त्रिपाठी की उस माफ़ी को किसने देखा या सुना ? मेरा अपमान और उनकी बदतमीज़ी बहरहाल, दर्शकों ने देखी भी थी और सुनी भी थी.
लेकिन आज फिर वही घटना याद आ गई। सच यह है कि जो शख़्स अपने पेशेवर चरित्र में इतना बायस्ड हो, उसे दूसरों पर टिपणियाँ करने का कोई हक़ नहीं. चित्रा त्रिपाठी निष्पक्ष पत्रकार नहीं हैं — यह सब लोग जानते हैं.
हमारा मीडिया चैनलों पर जाना सिर्फ़ इसलिए है कि संवाद की संभावनाएँ पूरी तरह खत्म न हों, वरना मुख्यधारा का इलेक्ट्रॉनिक मीडिया तो वैसे ही एकतरफ़ा चल रहा है. मगर इसका मतलब यह नहीं कि चित्रा त्रिपाठी या अंजना ओम कश्यप जैसे एंकर किसी के सम्मान से खिलवाड़ करें.
हर कोई प्रतिष्ठित घरों से आता है, अपनी प्रोफ़ेशनल लाइफ़ में संघर्ष और उपलब्धियाँ लेकर चलता है. अगर आप किसी पर उंगली उठाएँगे तो सामने वाला भी चोट करेगा.
इसलिए बेहतर यही होगा कि सभी, ख़ास तौर पर एंकर (जो अब पत्रकार नहीं बचे, सिर्फ़ एंकर हैं) अपने-अपने प्रोफ़ेशन में निष्पक्ष रहें—तब ऐसे टकराव नहीं होंगे….और इसे महिलाओं का टकराव कहकर कुछ तथाकथित पत्रकार चटखारे नहीं ले पाएंगे.
बहरहाल, मैं दोबारा कहूंगी — चित्रा त्रिपाठी पिछले करीब 8 वर्षों से निष्पक्ष पत्रकार नहीं रही हैं.
चित्रा जी, आप किस अधिकार से @NayakRagini को भला बुरा कह रही है.. रागिनी वो है जो पूरी जिंदगी कांग्रेस के साथ रही और आज भी है। आपकी तरह नहीं है कभी आजतक तो कभी ABP तो कभी कही और... निष्ठा शब्द का अर्थ आप क्या जाने... इसी निष्ठा से रागिनी ने वजीरपुर से चुनाव लड़ा और पूरी शिद्दत से लड़ा। आगे और भी लड़ेगी जब भी पार्टी मौका देगी। राजनीति में हार जीत आम बात है। उसपर निम्न स्तर की टिप्पणी करना कहा तक जायज है ? पत्रकार शब्द का अर्थ भी समझिए किसी दिन।आप सिर्फ नाम की पत्रकार है....काम तो भाजपा के प्रवक्ता का करती है आप। पत्रकार कभी किसी एक की तरफदारी नहीं करते। जो ऐसा करते है उन्हें दलाल कहा जाता है। मुद्दों पर जवाब देते नहीं बनता तो व्यक्तिगत टिप्पणी करने पे उतारू हो गई आप... फिर जवाब भी वैसे ही आएंगे आपको। उसमें इतना बिलबिलाने की क्या जरूरत है?
विवाद की शुरुआत तो चित्रा ने की थी।
रागिनी नायक स्थापित राजनेता हैं—छात्र जीवन से राजनीति में सक्रिय। DU प्रेसिडेंट से लेकर विधायक तक, सब कुछ अपने दम पर… बिना किसी “गॉडफ़ादर” के।
लेकिन चित्रा…
पिछले दरवाजे से राजनीति में आने की तम्मन्ना में चाटुकारिता की सारी हदें पार कर चुकी हैं।
पत्रकारिता के मापदंडों को उन्होंने निम्नतम स्तर तक गिरा दिया है।
अगर राजनीति का इतना ही शौक है तो उतरें मैदान में…
छोड़ें लाखों की सेलरी, और जनता के बीच बहाएँ पसीना।
जनता अच्छे से बता देगी कि—
टीवी डिबेट में नेताओं पर कीचड़ उछालना आसान है,
लेकिन जनता का विश्वास जीतना नामुमकिन।
दावे से कह रहा हूँ—
निर्दलीय लड़ीं तो जमानत ज़ब्त।
और बीजेपी से बनारस, कानपुर या गोरखपुर से लड़ीं तो भी 100% हार तय।
#घोरकलजुग #chitratripathi
पहली बात-कांग्रेस से प्यार करती हूँ,पार्टी ने चुनाव लड़ाया,मैंने मेहनत से लड़ा
कांग्रेस हर सीट पर हारी,मैं भी हारी
फिर लड़ाएँगे फिर लड़ूंगी क्योंकि जिससे प्यार करती हूँ निभाती हूँ पर आप ये कहॉं समझ पाएँगी
दूसरी बात-OYO से रविकिशन तक जनता ने किसकी आरती कहॉं उतारी मैं नहीं बोलूंगी क्योंकि मेरे ऐसे संस्कार नहीं हैं
तीसरी बात-मेरे साथ अच्छा हो या बुरा - भाजपा की दलाली कभी नहीं करूंगी