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महाभारत के 18 दिवस युद्ध का दिवस अनुसार महत्वपूर्ण घटनाक्रम
यहाँ 18 दिनों के युद्ध का सारांश प्रस्तुत है :-
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1. महाभारत की शुरुआत और श्रीकृष्ण का गीता ज्ञान:-
कुरुक्षेत्र का युद्ध महाभारत का मुख्य भाग है। युद्ध से पहले अर्जुन, जो पांडवों के प्रमुख योद्धा थे, युद्धभूमि में अपने परिवार, गुरु, और मित्रों को देखकर विचलित हो गए। उन्हें युद्ध करने के बारे में संदेह और नैतिक संकट होने लगा। इस मानसिक स्थिति में उन्होंने अपने रथ के सारथी, भगवान श्रीकृष्ण से मार्गदर्शन की प्रार्थना की।
यही वह क्षण था जब भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को भगवद गीता का उपदेश दिया।
2. भीष्म पितामह तथा अर्जुन के मध्य युद्ध :-
भीष्म पितामह और अर्जुन के बीच हुआ युद्ध अत्यंत घमासान था। अर्जुन ने अपने धनुष से भीष्म पर प्रचंड आक्रमण किए, लेकिन भीष्म की वीरता और अनुभव के आगे वह थक गए।
श्रीकृष्ण अर्जुन की सहायता में जुटे थे, परंतु इस दौरान दोनों घायल हो गए। इसके बावजूद, अर्जुन की तीव्र तीर वर्षा से कौरव पक्ष को भारी क्षति पहुँची।
3. भीम तथा घटोत्कच ने कौरव सेना पर भयानक आक्रमण किया फलस्वरूप भीष्म पितामह का रौद्र रूप.
कृष्ण द्वारा अर्जुन को भीष्म पितामह के वध की सलाह अर्जुन के निरुत्साह होने पर कृष्ण का क्रोध तथा अपना वचन तोड़ कर हथियार उठाने की धमकी. फलस्वरूप अर्जुन का पुनः उत्साहित होना
4. भीम ने महाभारत युद्ध में कौरवों के 14 प्रमुख योद्धाओं का वध किया, जिससे कौरव सेना को भारी नुकसान हुआ। इस कारण पांडव पक्ष युद्ध में कौरवों पर भारी पड़ा और उनकी विजय सुनिश्चित हुई।
5. महाभारत के युद्ध में सात्यकि के दस पुत्रों का अंत भयंकर युद्ध में हुआ। कौरव पक्ष के योद्धाओं ने एकजुट होकर सात्यकि के पुत्रों का वध कर दिया।
यह युद्ध दोनों ओर से अत्यंत उग्र था, जिसमें पांडव और कौरव योद्धाओं ने अपने-अपने सेनापतियों के प्रति निष्ठा दिखाते हुए भयंकर संघर्ष किया।
9. भीष्म पितामह के वध की सलाह पर अर्जुन के पुनः हतोत्साहित होने पर क्रोधित कृष्ण द्वारा रथ का पहिया उठा कर भीष्म पितामह पर आक्रमण करने के प्रयत्न पर अर्जुन द्वारा उनके क्रोध को शांत करना. कौरव पक्ष युद्ध में पांडवों पर भारी