@Shubhrastha देहरादून में इंजीनियर राजेश गुलाटी ने पत्नी के 72 टुकड़े कर दिए थे।सुशील शर्मा ने पत्नी नैना साहनी के टुकड़े कर तंदूर में भून दिए थे।इंदौर में हर्ष शर्मा ने पत्नी को कुत्ते की जंजीर से गला घोंटा, चाकुओं से गोद दिया।गाजियाबाद में तो प्रीति शर्मा ने अपने पार्टनर फिरोज को मार दिया।
शर्म नहीं आती @dpradhanbjp
गद्दी छोड़ उतर क्यों नहीं जाते??
कुर्सी है तुम्हारा ये जनाज़ा तो नहीं है
कुछ कर नहीं सकते तो उतर क्यों नहीं जाते ”!!
#NEET2024#NEET2026
शर्म नहीं आती @dpradhanbjp
गद्दी छोड़ उतर क्यों नहीं जाते??
कुर्सी है तुम्हारा ये जनाज़ा तो नहीं है
कुछ कर नहीं सकते तो उतर क्यों नहीं जाते ”!!
#NEET2024#NEET2026
फर्क इतना साफ है कि जिसे न दिखे, उसे चश्मा नहीं नीयत चाहिए।
फोटो 1974 का है जिसमें मेज पर भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और भारत की पहली IPS किरण बेदी एक साथ खाना खा रही हैं , ऐसे समय में इंदिरा गांधी देश चला रही थीं जब भारत एक साथ कई मोर्चों पर जूझ रहा था।
1971 के युद्ध के बाद शरणार्थियों का बोझ, तेल संकट के कारण महंगाई, वैश्विक आर्थिक दबाव, खाद्यान्न चुनौती, बेरोजगारी, राजनीतिक अस्थिरता, विपक्षी आंदोलन, और विकासशील देश होने की सीमाएं।
आज की तरह तैयार हाईवे, विशाल विदेशी निवेश, डिजिटल टैक्स कलेक्शन और मजबूत निजी पूंजी वाला भारत तब नहीं था। तब देश सचमुच संघर्षशील अवस्था में था, इंस्टाग्राम रील वाला राष्ट्रवाद नहीं।
ऐसे दौर में इंदिरा गांधी ने केवल कुर्सी नहीं संभाली, व्यवस्था संभाली। हरित क्रांति को गति मिली, अनाज उत्पादन बढ़ा, सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों को मजबूत किया गया, बैंक राष्ट्रीयकरण के असर से ग्रामीण क्षेत्रों तक कर्ज पहुंचा, गरीब तबकों को योजनाओं से जोड़ने की कोशिश हुई।
देश को आत्मनिर्भरता की दिशा दी गई। उस समय भारत उधार की मानसिकता से निकलकर संस्थागत राष्ट्र निर्माण की तरफ बढ़ रहा था। आज जिनको सब तैयार मिला है, वे पुराने दौर पर हंसते हैं। जैसे किराएदार मकान मालिक को घर बनाना सिखाए।
महिला सशक्तिकरण की बात करें तो 1975 अंतरराष्ट्रीय महिला वर्ष था, और भारत में इसे औपचारिकता नहीं, नीति विषय बनाया गया। महिलाओं की वास्तविक स्थिति पर राष्ट्रीय बहस शुरू हुई।
1974 की ऐतिहासिक रिपोर्ट Towards Equality ने शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, प्रतिनिधित्व और भेदभाव पर कठोर तथ्य रखे। इस रिपोर्ट के बाद महिला नीति विमर्श तेज हुआ।
इंदिरा गांधी के दौर में महिलाओं के लिए जो बड़े संस्थागत कदम हैं, उनमें प्रमुख Integrated Child Development Services माताओं और बच्चों के पोषण, टीकाकरण, प्री-स्कूल शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल का ढांचा। गांव-गांव आंगनवाड़ी मॉडल की नींव। लाखों महिलाओं को कार्यकर्ता के रूप में भूमिका मिली।
epartment of Social Welfare
महिला, बाल और सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों को प्रशासनिक दिशा देने वाला ढांचा मजबूत किया गया।
Central Social Welfare Board को विस्तार और सक्रिय समर्थन महिला प्रशिक्षण, परिवार कल्याण, जरूरतमंद महिलाओं के लिए कार्यक्रमों को बल मिला महिला शिक्षा और रोजगार योजनाओं के लिए राज्यों को नीति समर्थन
शहरी और ग्रामीण महिला प्रशिक्षण केंद्रों, सिलाई, पोषण, सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों का विस्तार। प्रशासन और सार्वजनिक जीवन में महिला भागीदारी को प्रतीकात्मक नहीं, वास्तविक प्रोत्साहन इसीलिए Kiran Bedi जैसी महिला अधिकारी का सार्वजनिक सम्मान किया गया।
संदेश साफ था, महिलाएं सिर्फ घर नहीं, शासन भी संभाल सकती हैं।
आज की तुलना देख लो। मंच पर नारी शक्ति, पोस्टर पर बहन बेटियां, और जमीन पर लंबित न्याय। महिला आरक्षण बिल लाकर भी लागू करने को भविष्य के तहखाने में डाल दिया गया। सीटें बढ़ेंगी, परिसीमन होगा, फिर कभी देंगे। मतलब अभी ताली बजाओ, अधिकार बाद में लेना।
इंदिरा गांधी का मॉडल था, पहले शक्ति दो फिर सम्मान मिलेगा। आज का मॉडल है, पहले नारा लो फिर इंतजार करो। वहाँ संस्थाएं खड़ी हुईं, यहाँ इवेंट खड़े होते हैं। वहाँ महिला अधिकारी को बुलाकर सम्मान दिया गया, यहाँ महिला खिलाड़ियों को सड़क पर इंतजार कराया गया।
सुना है चीनी रोबोट वाली यूनिवर्सिटी को 15 हजार स्टूडेंट्स ले जाने का टारगेट मिला है। नोएडा की कई और यूनिवर्सिटी/कॉलेजों को भी ऐसे ही टारगेट मिले हैं।
कल नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उदघाटन है...
@SupriyaShrinate माँ ने कहा आटा थोड़ा कम है, किफ़ायत से खाना, बच्चे जो दो रोटी खाते थे उन्होंने उसी टाइम से चार खानी शुरू कर दी। जो आटा दस दिन चलना था, पाँच में ही ख़त्म हो गया
@BJP4Odisha माँ ने कहा आटा थोड़ा कम है, किफ़ायत से खाना, बच्चे जो दो रोटी खाते थे उन्होंने उसी टाइम से चार खानी शुरू कर दी। जो आटा दस दिन चलना था, पाँच में ही ख़त्म हो गया
महाराष्ट्र में डबल इंजन की सरकार है इसलिए लोगों को 4 रू प्रति किलो टमाटर मिल रहा है,
किसान बेचारा क्या करे, खेत से मंडी तक ले जाना का किराया उससे अधिक आ रहा है,
इसलिए किसान भाई ने 25 कुंतल टमाटर कचरे में फेंक दिया,
कुछ दिन पहले कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान संसद में कह रहे थे कि किसानों की आय 8 गुनी हो गई है.
@Dileep_Sanghani@AmitShah We are proud to be part of an organization that continues 2contribute toD progress of Indian agriculture and the vision of a stronger, self-reliant nation. Grateful2 everyone whose dedication&hard work made this achievement possible. @IFFCO_PR #Iffco#SahkarSeSamriddhi
@Dileep_Sanghani@AmitShah This landmark occasion marks a significant step towards strengthening domestic fertilizer production and supporting the nation’s agricultural growth. The presence of such a distinguished leader made the event truly memorable and inspiring for all of us.