केंद्रात भाजप
कर्नाटकात भाजप
महाराष्ट्रात भाजप
मग हा इतका गोंधळ कशासाठी ?
🤔😡🤦🏻♂️🤔😡🤦🏻♂️
उत्तर - छत्रपती शिवाजी महाराजांचा झालेल्या ��पमानावरून लक्ष विचलित करण्यासाठी.
*खाजपची कुटनिती शिवद्रोही😡*
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हिमाचल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की प्रचंड जीत के लिए समस्त हिमाचलवासियों व पार्टी कार्यकर्ताओं को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
यह जीत आप सब की है।
हिमाचल की जनता ��े इतिहास रच कर ये सन्देश साफ़ दे दिया है कि यह जीत हिमाचल के विश्वास की है।
#Congress
"ब्राह्मणों भारत छोड़ो" जेएनयू की एक दीवार पर लिखा मिला,सभी नेता,एक्टिविस्ट, व मीडिया जग गयी
पर इसी भारत मे आए दिन मुसलमानो को मंचो से न'रसंहार, ब'लात्कार व पाकिस्तान भे��ने की ध'मकी अॉन कैमरा दी जाती है, तब कोई नही जगता क्यो?
@RubikaLiyaquat जवाब है ?
https://t.co/E6CIc5WO2I
बेटे भी होते हैं मगर बेटी को पराई समझ लेना को मुर्खता से अधिक कुछ नहीं।
बधाई Rohini acharya अपने पिता को दूसरा जन्म देने के लिए, विश्व की सारी बेटियां आप पर गर्व कर रहीं होंगी। #RohiniAcharya आप सभी नए पीढ़ी के लिए हमेशा प्रेणास्रोत रहेंगी🙏🙏🙏🙏
खुद MBBS डिग्रीधारी रोहिणी दी के तीन छोटे बच्चे हैं, उनके पति समरेश सिंह सिंगापुर में ही एवरकोर पार्टनर्स नाम की कंपनी में मैनेजिंग डायरेक्टर हैं।
ऐसी परिस्थि���ि में कोई अपनी किडनी अपने जर्जर हो चुके 75 साल के बूढ़े पिता को दे तो यह साहस बेटियां ही कर सकती हैं।
रोहिणी ने कहा कि "पापा के लिए मैं कुछ भी कर सकती हूं, मैं तो अभी सिर्फ अपने शरीर का मांस ही दे रही हूं।" अपनी बेटी के साहस और ज़िद के आगे लालू प्रसाद यादव हार गए।
दरअसल बेटियों के रहते बेटे की चाहत में बच्चे पैदा करते लोगों के लिए भी यह एक सबक है कि बेटियां ही अधिक विश्वसनीय हैं
Zee Hindustan चैनल के बंद होने से बेरोजगार हुए 300 पत्रकार क्या करें?
चाहें तो स्टूडियो के बाहर चाय-पकौड़ी की रेहड़ी लगा सकते हैं, सुना है वो भी सरकार द्वारा संरक्षित रोजगार का माध्यम है।
असलं हे मातृभूमीच्या स्वातंत्र्याकरिता प्रपंचाची होळी करणारे ,अफाट दारिद्र्य भोगलेले ��्रांतिवीर खरे वीर भारतरत्न साठी कसे आठवत नाहीत?
आठवतात ते माफी मागून क्रातीवीरां��े पत्ते ब्रिटिशांना सांगणारे गद्दार व त्यापायी आयुष्यभर घरी बसून पगार घेणारे माफीविर .
1932 सालची गोष्ट आहे क्रांतिसिंह नाना पाटील हे शिक्षा भोगून सुटले होते पण रोज सकाळ संध्याकाळ दोन वेळा पोलीस स्टेशनला हजेरी देण्याचे बंधन होते. त्यांचे गाव येडे मच्छीन्द्र मधून कृष्णा नदी ओलांडून दिवसातून दोनदा येणे शक्य नव्हते म्हणून त्यांनी इस्लामपूरताच राहण्याचे ठरवले .
दोन भोके पाडून त्याचा सदरा केला व तोच घालून ते राहू लागले .काहीजणांनी तर प���तेबाबा म्हणून म्हणायला सुरुवात केली.
पॅरोल मिळेपर्यंत हाच सदारा ते घालत होते .कोणीतरी त्यांचा हा फोटो काढला व त्याची एक कॉपी त्यांना दिली.
पुढे कॉम्रेड प्रेमाताई पुरब नावाच्या कम्युनिष्ट कार्यकर्ती कडे गेल