जिनस्वर द्वारा आयोजित ‘तात्त्विक काव्य सृजन प्रतियोगिता’ के विजेताओं (वरिष्ठ वर्ग) को हार्दिक बधाई! 🥳
आपकी लेखनी इसी प्रकार जिनधर्म प्रभावना हेतु चलती रहे, यही मंगल कामना है। ✍🏼
आप इनकी रचनाओं का आनंद JinSwara YouTube और Instagram channels पर ले सकते हैं। 😇
~ टीम जिनस्वर
जिनस्वर द्वारा आयोजित ‘तात्त्विक काव्य सृजन प्रतियोगिता’ के विजेताओं (कनिष्ठ वर्ग) को हार्दिक बधाई! 🥳
आपकी लेखनी इसी प्रकार जिनधर्म प्रभावना हेतु चलती रहे, यही मंगल कामना है। ✍🏼
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~ टीम जिनस्वर
201 प्रविष्टियाँ. 201 कविताएँ. 201 सुन्दर अभिव्यक्तियाँ. ❤️
आप सभी ने जिस प्यार और उत्साह के साथ तात्त्विक काव्य सृजन प्रतियोगिता में प्रतिभागिता की, उसके लिए आभार! 🙏
ये सिर्फ एक प्रतियोगिता नहीं थी, हम सबने मिलकर जैन काव्य को एक नई आवाज़ देने की कोशिश की है। ✨
अपना आभार 🙏🏼
कविवर द्यानतराय जी अनेकों आध्यात्मिक भजनों, पाठों, स्तुतियों और स्तोत्रों के रचनाकार रहे हैं।
उनके द्वारा रचित स्वयंभू स्तोत्र 24 तीर्थंकरों की स्तुति रूप रचना है जो कि जैन समाज में अत्यंत प्रचलित है।
‘महाकवि भूधरदास जी’ ने अपने भक्ति रस पूरित काव्य द्वारा जैन साहित्य की परम्परा को समृद्ध किया है।
इनके द्वारा रचित कई भजन https://t.co/tixjVV3PZ9 पर उपलब्ध हैं।
क्या आप भी तात्त्विक काव्य की रुचि रखते हैं?
यदि हाँ, तो हमारे उभरते कवियों की तरह आप भी अपनी रचना हमें भेज कर इस प्रतियोगिता में प्रतिभागिता कर सकते हैं।
विषय: जैन तत्त्व से संबंधित समस्त विषय
अंतिम तिथि: 9 अगस्त, 2026
कविवर पंडित बनारसीदास को आधुनिक हिंदी की प्रथम आत्मकथा ‘अर्धकथानक’ लिखने का भी श्रेय प्राप्त है।
परंतु आत्मा की लगन लगने के बाद उनका लौकिक साहित्य की और से मोह कम हो गया और उन्होंने आत्महितकारी काव्य लेखन में अपनी लेखनी चलाई!
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