क्या बेटियों के कपड़े फाड़ेंगे आप?
- सदन में अखिलेश यादव को युवाओं के मुद्दे पर बोलने से रोका गया,
आखिर सरकार चाहती क्या है कि जो क���ई भी युवा के साथ है उसका इस तरीके से विरोध करती है।
जब बच्चे तक न उठा सकते आवाज़
तो कैसे कहें कि ये वतन है आज़ाद?
आज भाजपा के कट्टर समर्थक भी शर���मिंदा हैं और पश्चाताप और प्रायश्चित की आग में जल रहे हैं, उनका भी तो परिवार है और परिवार में बच्चे भी हैं, और उन बच्चों का भी वर्तमान और भविष्य है।
अब कोई भाजपा से भविष्य की क्या उम्मीद करे, जब वर्तमान में ही जनता भाजपा से पूरी तरह नाउम्मीद हो गई है।
आज हर उम्र के लाखों लोगों ने बेख़ौफ़ होकर जिस तरह भाजपा के विरोध में एकजुटता दिखाई है, सच तो ये है कि उस जन-आक्रोश को देखकर भाजपाई और उनके संगी-साथ��� बेहद डर गये हैं। ये वो आम जनता है जिसे सरकार की किसी भी एजेंसी का भय नहीं है।
भाजपा ख़त्म!
कल दिल्ली में सरकार के इशारे के बाद युवा साथियों पर हुए लाठीचार्ज के बाद न्याय की मांग को लेकर नगीना से सांसद व आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट चंद्रशेखर जी आजाद संसद भवन परिसर में संविधान निर्माता बाबा साहब भीमराव जी अम्बेडकर की मूर्ति के समक्ष धरने पर बैठे है, आज मैं भी उनके पास पहुंचा ,इस दौरान राजस्थान से लोक सभा सांसद श्री राजकुमार जी रोत भी मौजूद रहे |
भारत सरकार को युवाओं पर चली एक - एक लाठी का हिसाब देश को देना होगा,लोकतंत्र में तानाशाही स्वीकार्य नहीं है |
@BhimArmyChief@roat_mla
दिल्ली पुलिस का आदर्श वाक्य ‘शांति, सेवा, न्याय’ है, लेकिन कल जंतर-मंतर पर वर्दीधारी द्वारा मासूम बेटियों की अस्मिता पर किया गया हमला इस आदर्श वाक्य को विडंबना बना देता है।
देश का छात्र कह रहा है - “हमारा कोई भविष्य नहीं।”
और इस सरकार के मंत्री कह रहे हैं - “हमारी कुर्सी नहीं जाएगी।”
जिस देश में छात्र भविष्य खो दे और मंत्री कुर्सी न खोए - वहां न्याय है ही नहीं।