चले सतयुग की ओर,#सत्यराह,
इस देश को आपनो ने लुटा बैमान बन कर।हम अपने कर्म से संसार को कलयुग बना सकते है।तो फीर सत्य के मार्ग पर चलकर सतयुग भी बना सकते है।
यह देश कभी संसार को ज्ञान से संचीत कर विश्व गुरू बना।पर हम आज कैसे ज्ञान के साथ जी रहे है।सही गलत को भी नही समझ पाते।कभी सोचा है।हमसभी विश्व गुरू के बंशज कहलाने के कघीकारी है।जरा खुद से पुछे, और जरूर पुछे!