"इतिहास के पन्नों में दफन "आदिवासियों की वीर गाथा को कमतर समझ कर उनकी वीरता को दबा के रखा गया। 1951 की जनगणना याद दिलाती है आदिवासियों को प्राप्त नौवें कॉलम पर रहते हुवे षड्यंत्र कर हटाया। आज हमे भी अपने धर्म की पहचान देना होगा। @HemantSorenJMM@JmmJharkhand@AdiwasiVoice
आख़िर भाजपा कब तक पर्दे के पीछे रहती?
अब भाजपा खुलकर छात्रों की आड़ से निकलकर राजनीति करने लगी है।
पहले दिन से ही साफ था कि छात्रों के शांतिपूर्ण आंदोलन के पीछे भाजपा अपनी राजनीतिक जमीन तलाश रही है। घेराव के दिन जिस तरह पार्टी कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया गया और बंगाल-बिहार से बसों एवं दूसरी गाड़ियों में लोगों को लाकर आंदोलन का हिस्सा बनाने की कोशिश हुई, उससे बहुत कुछ सामने आ गया है। भाजपा के संगठन के बड़े अधिकारी ख़ुद पल- पल हर घटना को दिल्ली प्रसारित करते रहें।
छात्रों का आंदोलन छात्रों का था - उसे राजनीतिक अखाड़ा बना दिया है भाजपा ने।
झारखंड के छात्रों के कंधे पर बंदूक रखकर राजनीतिक टकराव पैदा करने की यह कोशिश अब किसी से छिपी नहीं है।
इन सबकी आड़ में भाजपा ने झारखंडियों/आदिवासियों/मूलवासियों के खनिज भी लूटने का काम किया है।
इसलिए अब भाजपा को जवाब झारखंडी देंगे।
अब इससे बड़ा देश का अपमान और क्या होगा ?
पश्चिम बंगाल में जिस प्रकार देश की शान तिरंगे का अपमान BJP द्वारा किया गया है वो असहनीय है।
मुसलमानों से देशभक्ति का सर्टिफिकेट मांगने वाले भाजपाइयों आज तुम्हारी भी देशभक्ति पूरे देश ने देख ली।
लग गई लंका ना बाबू... प्राकृतिक से मिला यह अनमोल जीवन हमें सदैव दूसरों की भला के लिए सोच होने चाहिए इस ब्रह्माण्ड में कोई ईश्वर नहीं!
इंसान ही ईश्वर है इंसान ही दैत्य है।।
मनुष्य रूपी जीवन को संवारने के लिए धन की जरूरत होती और धन मेहनत से कमाई जाती है उस सीढ़ी तक पहुंचने के लिए भी हमें अपना व्यवहार अपना विचार सदैव सेवा भाव होने चाहिए तभी यह जीवन सफल हो पाएगा!
रांची में विरोध-प्रदर्शन के नाम पर राज्य के माननीय मुख्यमंत्री श्री @HemantSorenJMM जी को ऑन-कैमरा खुलेआम गाली-गलौज कर चुनौती दे रहा यह लड़का घर में घुसकर मारने की हिंसक धमकी देना बेहद निंदनीय एवं गंभीर अपराध है।
@JharkhandPolice महोदय मामले को तुरंत संज्ञान में लेकर संबंधित व्यक्ति पर कठोरतम धाराओं में FIR दर्ज करे और सलाखों के पीछे भेजे। @ranchipolice@DC_Ranchi@JharkhandCMO
भाजपाईयों की सच्चाई यहां छुपी है इसलिए छात्रों के पीछे खड़े होकर छात्रों को बरगला रहा है क्यों ठग @yourBabulal जी?
जिसे राज्य के फर्जी क्रांतिकारी @Tigerjairam आंख कान मुंह बंद कर लिया है जिसे उसे लगता है अगले बार हम CM बनकर रहेंगे।😂🤣
#UP के #विधानसभा और #विधानपरिषद् परीक्षा धांधली में हरेक पांचवां व्यक्ति मंत्री और अधिकारी के रिश्तेदार शामिल थे इसकी जांच इलाहबाद हाइकोर्ट ने जांच का आदेश होते ही सुप्रीमकोर्ट जा कर रुकवाने की अपील की गई क्यों?
क्योंकि इसका लिंक झारखंड से भी जुड़ा है।
और इसी #TSR #कंपनी के #डायरेक्टर का झारखंड में गिरफ्तार हो चुके हैं।
@HemantSorenJMM@JMMKalpanaSoren@JmmJharkhand@VinodPandeyJMM
#jpsc
महान आंदोलनकारी एवं झामुमो के स्तंभ, स्व. रामदास सोरेन जी की पुण्यतिथि पर शत-शत नमन। 🙏
झारखंड की अस्मिता, अधिकार और संघर्ष के लिए उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। उनके विचार और संघर्ष की मशाल आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देती रहेगी।
विनम्र श्रद्धांजलि। 💐
विनम्र जोहार।।💐💐
@HemantSorenJMM@someshchsoren
आज स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर रांची स्थित स्व. दिशोम गुरु शिबू सोरेन जी के आवास पर आदरणीय रुपी सोरेन जी एवं अन्य के साथ झंडोत्तोलन मे शामिल हुआ।
आप सभी को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं !
जय हिन्द !
@JmmJharkhand
खनिज संशोधन पर भाजपा बताए : - झारखंड के अधिकार पर दिल्ली का पहरा क्यों ?
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू का बयान यह बताता है कि भाजपा के पास झारखंड के सवालों का ठोस जवाब नहीं है। जब सवाल झारखंड के संवैधानिक अधिकार, खनिज संपदा और राज्य के राजस्व का हो, तब भाजपा मुद्दे का जवाब देने के बजाय भ्रम फैला रही है। लेकिन, भाजपा को ये नहीं भूलना चाहिए कि झारखंड की जनता अब जागरूक है, वे सब समझ रही। भाजपा के झारखंड से निर्वाचित सांसद केंद्र सरकार के इस कुत्सित प्रयास पर चुप हैं, लेकिन उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि ये पब्लिक है सब जानती है।
भाजपा को पहले यह बताना चाहिए कि अगर केंद्र सरकार का प्रस्ताव राज्यों के अधिकारों को प्रभावित नहीं करता, तो राज्य सरकारों द्वारा खनिज-अधिकारों और खनिजयुक्त भूमि पर लगाए जाने वाले कर, सेस और लेवी को केंद्र द्वारा निर्धारित शर्तों के अधीन करने की जरूरत ही क्यों पड़ी? भाजपा ‘वन नेशन, वन टैक्स’ की आड़ में राज्यों के अधिकारों को कमजोर करने की कोशिश न करे।
झामुमो के अनुसार :-
खनिज वहन भूमि उपकर (जेएमबीएल सेस) कोई मनमाना टैक्स नहीं है, न ही झारखंड सरकार ने इसे किसी प्रशासनिक आदेश से थोपा है। जुलाई 2024 में सर्वोच्च न्यायालय की नौ सदस्यीय संविधान पीठ ने स्पष्ट किया कि खनिजयुक्त भूमि भी भूमि है और संविधान की राज्य सूची के तहत राज्य सरकारों को ऐसी भूमि पर कर लगाने का अधिकार है। इसी संवैधानिक अधिकार के आधार पर झारखंड विधानसभा ने कानून बनाया।
अब भाजपा बताए कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा राज्यों के अधिकार को मान्यता दिए जाने के बाद संसद के कानून के जरिए उस अधिकार को व्यवहार में सीमित करने की कोशिश किस संघीय भावना के तहत की जा रही है?
अगर यह विधेयक राज्यों के अधिकार नहीं छीनता, तो केंद्र को यह तय करने की शक्ति क्यों चाहिए कि राज्य खनिजयुक्त भूमि पर किस शर्त के तहत कर या सेस लगा सकते हैं? यही असली सवाल है और भाजपा इससे बच नहीं सकती।
भाजपा कहती है कि राज्यों का राजस्व कम नहीं होगा। लेकिन झारखंड का अनुभव सामने है। जेएमबीएल सेस से वर्ष 2024-25 में लगभग ₹1,379 करोड़, वर्ष 2025-26 में लगभग ₹7,488 करोड़ और वर्ष 2026-27 में लगभग ₹13,215 करोड़ के राजस्व का अनुमान है। भाजपा बताए कि यदि यह राजस्व स्रोत सीमित होता है तो इस कमी की भरपाई कौन करेगा?
रॉयल्टी, नीलामी प्रीमियम, DMF और GST का नाम गिनाकर भाजपा JMBL Cess के सवाल को नहीं टाल सकती। अलग-अलग राजस्व स्रोतों को एक-दूसरे का विकल्प बताना वित्तीय वास्तविकता से आंखें मूंदना है।
खनिज झारखंड की धरती से निकलता है, उसका बोझ झारखंड उठाता है—तो निर्णय का अधिकार भी झारखंड की जनता और उसकी निर्वाचित सरकार के पास रहना चाहिए।
खनन से विस्थापन होता है, जंगल और पर्यावरण पर दबाव पड़ता है, पानी और हवा प्रभावित होती है, स्थानीय बुनियादी ढांचे पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है और आदिवासी एवं स्थानीय समुदायों को सामाजिक-सांस्कृतिक कीमत चुकानी पड़ती है। JMBL Cess इसी व्यापक जिम्मेदारी को ध्यान में रखकर बनाया गया है।
भाजपा इसे ‘लूट’कहती है। भाजपा बताए—खनन प्रभावित लोगों के पुनर्वास, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, ग्रामीण विकास और स्थानीय आधारभूत संरचना के लिए राज्य को अतिरिक्त संसाधन जुटाने का अधिकार क्यों नहीं होना चाहिए?
मंईयां सम्मान योजना का नाम लेकर भाजपा डर फैलाने का आरोप लगाती है। सवाल यह है कि झारखंड की महिलाओं को आर्थिक सम्मान देने वाली योजना से भाजपा को इतनी परेशानी क्यों है?
राज्य सरकार के पास संसाधन होंगे तो महिलाओं, किसानों, गरीबों, युवाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास की योजनाएं मजबूत होंगी। JMBL Cess से प्राप्त अतिरिक्त राजस्व राज्य की वित्तीय क्षमता को मजबूत करता है। भाजपा को यह बताना चाहिए कि यदि राज्य की आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत सीमित होता है तो वह किस स्रोत से उसकी भरपाई करेगी।
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@JmmJharkhand
झारखंड ने देश को खनिज दिए, अब अपने ही खनिजों पर अधिकार भी छीना जा रहा है।
कोयला, लोहा और दूसरे खनिजों से देश की औद्योगिक अर्थव्यवस्था को ताकत देने वाला झारखंड आज भी अपने विकास के लिए संघर्ष कर रहा है।
न विशेष राज्य का दर्जा मिला,
न खनिज संपदा का न्यायपूर्ण हिस्सा।
अब भाजपा सरकार ने ऐसा कानून पारित किया है जो राज्यों की mineral rights और mineral-bearing land पर अपनी Tax/Cess लगाने की शक्ति को केंद्र की शर्तों के अधीन करता है।
खनिज झारखंड का,
जमीन झारखंड की,
विस्थापन और प्रदूषण झारखंड का,
लेकिन पैसा दिल्ली दिल्ली जायेगा और फायदा खनन कंपनियों का भर भर के।
यह काला कानून है।
यह संसाधन-संपन्न राज्यों की आर्थिक ताकत को कमजोर करने और फैसले की शक्ति केंद्र में समेटने का सवाल है।
झारखंड अब पूछेगा:
देश को सब कुछ देने वाले झारखंड से आखिर उसका अपना हक ही क्यों छीना जा रहा है?
देश के वैज्ञानिक @Wangchuk66 को जब प्रदर्शनों स्थल से जबरजसती उन्हें उठा कर हॉस्पिटल में डाला गया था तब संघी लोग समर्थन क्यों किया?
आज इसी देश के छत्तीसगढ़ राज्य में राष्ट्रध्वज की जगह बीजेपी का झंडा फहराया गया?
भाजपा वाले चुप क्यों हैं?
इसी को दोगला चरित्र कहते हैं और देशद्रोही भी।
स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं!
आइए देश के लिए अपने प्राण ن्योछावर करने वाले वीरों को याद करने का दिन है!
उनकी वीरता उनकी साहस कठिन वक्त में भी देश के आजादी के लिए खुद को न्यौछावर करने वाले ऐसे महापुरुषों एवं उनके परिवार जनों को मेरा सदैव जोहार आभार।
#15अगस्त#स्वतंत्रता@HemantSorenJMM
भाजपा को झारखंड की चिंता है तो पहले यह बताए कि झारखंड की खनिज संपदा पर अंतिम नियंत्रण किसका होना चाहिए - झारखंड की जनता का या दिल्ली का ?
आदित्य साहू संविधान पढ़ने की सलाह दे रहे हैं। हम उनसे आग्रह करेंगे कि वे संविधान का केवल संघीय ढांचा वाला अध्याय नहीं, बल्कि संविधान की सातवीं अनुसूची और राज्यों की विधायी शक्तियों का पूरा संदर्भ पढ़ें। संघीय गणराज्य का अर्थ यह नहीं कि केंद्र जब चाहे राज्यों के अधिकारों पर शर्तें लगा दे।
भाजपा का तर्क है कि केंद्र से टकराव राज्यहित में नहीं है। हम स्पष्ट कर दें—झारखंड अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाता है तो वह टकराव नहीं, संवैधानिक संघवाद की रक्षा है।
भाजपा खनन नीलामी के आंकड़ों की आड़ में मूल सवाल से भाग रही है।
अगर झारखंड में खनिज ब्लॉकों की नीलामी को लेकर भाजपा सवाल उठा रही है तो वह बताए कि केंद्र की नीतियों, पर्यावरणीय मंजूरियों, खनिज प्रशासन और पूरे नीलामी तंत्र में केंद्र की भूमिका क्या है। केवल आंकड़े गिनाकर झारखंड की खनिज नीति को कटघरे में खड़ा करना आसान है, लेकिन खनिज क्षेत्र की पूरी प्रशासनिक व्यवस्था की जिम्मेदारी से भाजपा बच नहीं सकती।
और जहां तक ‘खनिज लूट’ के आरोपों की बात है, भाजपा के पास यदि किसी मामले में प्रमाण हैं तो वह जांच एजेंसियों और कानून के सामने प्रमाण रखे। प्रेस बयान जारी करके आरोप लगाना राजनीति हो सकती है, प्रमाण नहीं।
छात्रों के सवालों को JMBL Cess से जोड़ना भी भाजपा की मुद्दा भटकाने की राजनीति है।
छात्रों की समस्याएं अपनी जगह महत्वपूर्ण हैं और राज्य सरकार उनसे जुड़े विषयों पर गंभीरता से काम कर रही है। लेकिन छात्रों के सवालों की आड़ में झारखंड के खनिज अधिकारों पर केंद्र के प्रस्तावित कानून से पैदा होने वाली चिंता को दबाया नहीं जा सकता।
आज सवाल यह है कि झारखंड अपने प्राकृतिक संसाधनों से मिलने वाले राजस्व पर कितना अधिकार रखेगा। भाजपा इस मूल प्रश्न का जवाब दे।
झामुमो आंदोलन से नहीं डरता, क्योंकि झामुमो की राजनीति ही जल-जंगल-जमीन और झारखंड के अधिकारों की राजनीति है।
झारखंड की खनिज संपदा केवल कॉरपोरेट बैलेंस शीट का आंकड़ा नहीं है। यह आदिवासियों, मूलवासियों, मजदूरों और उन लाखों परिवारों की जमीन से जुड़ी है जिन्होंने पीढ़ियों से इस धरती की कीमत चुकाई है।
अगर केंद्र सरकार ऐसा कानून लाती है जिससे राज्यों के संवैधानिक अधिकार सीमित होते हैं, तो झारखंड सवाल करेगा। अगर झारखंड के राजस्व पर असर पड़ने की आशंका है, तो झारखंड सवाल करेगा। अगर खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए राज्य की वित्तीय क्षमता कमजोर होती है, तो झारखंड सवाल करेगा।
और भाजपा चाहे इसे राजनीति कहे या कुछ और—झारखंड अपने अधिकारों पर समझौता नहीं करेगा।
आदित्य साहू जी, हेमंत सोरेन जी को संविधान पढ़ने की सलाह देने से पहले भाजपा को यह जवाब देना चाहिए कि जब सर्वोच्च न्यायालय राज्यों के अधिकार को मान्यता दे चुका है, तब केंद्र सरकार उसी अधिकार पर नियंत्रण की नई शर्तें क्यों लगा रही है?
झारखंड को उपदेश नहीं, अपने अधिकारों की गारंटी चाहिए।
झारखंड की खनिज संपदा झारखंड की है, उसका न्यायपूर्ण लाभ झारखंड के लोगों को मिलना चाहिए—और इस अधिकार की लड़ाई झामुमो पूरी मजबूती से लड़ेगा।
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@JmmJharkhand