#RealityOfMaharshiDayanand
महर्षि दयानन्द को न तो वेदों का ज्ञान था न श्रीमद्भगवत गीता का, इसलिए हठयोग करके भांग आदि नशीली वस्तुओं का सेवन करके दीवार से कमर
लगा कर बैठा रहता। जनता भोली थी वह यह सोचते कि बड़ा योगी पुरूष है और यह फोड़ रहा था अपने भाग्य को। - संत रामपाल जी महाराज
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दयानंद की अज्ञानता
पिता के एक गोत्र माता की छः पीढ़ी के गोत्र में विवाह
करना अच्छा नहीं। समीप देश (स्थान) में भी विवाह करना अच्छा नहीं ? फिर कहा है कि दस कुल (गोत्र) भी छोड़ दें।
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दयानंद विधवा के पुनविर्वाह का विरोधी या उसके लिए नियोग का प्रावधान किया है। विधवा स्त्री तथा जिस पुरूष की स्त्री मर जाए वे दोनों पुनविर्वाह न करें। अपितु नियोग करें।
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दयानंद की अज्ञानता
समुल्लास 4 के पृष्ठ 101 पर अज्ञानी महर्षि ने लिखा है कि एक स्त्री नियोग ग्यारह व्यक्तियों तक कर सकती है। इसी प्रकार पुरूष भी ग्यारह स्त्रियों से नियोग (अभ्रद कर्म) कर सकता है।
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महर्षि दयानन्द ने नियोग के लाभ तथा पुनविर्वाह के दोष बताते हुए कहा है कि ‘‘पुनविर्वाह करने से दोनों साथ-2 एक घर में रहेंगे। जिस कारण से उन दोनों का प्रेम कम हो जाएगा। पुनविर्वाह का एक दोष और बताया है कि स्त्री का पतिव्रत धर्म नष्ट हो जाएगा।
इसी प्रकार वह स्त्री दो सन्तान उस पुरूष के लिए उत्पन्न करे तथा दो-तीन वर्ष तक अकेली पालन पोषण करके उस सन्तान को उस मलंग पुरूष को दे दे जिस से गर्भ धारण किया था।
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अज्ञानी महर्षि ने समुल्लास 4 पृष्ठ 97 में लिखा है कि विधवा स्त्री किसी अन्य पुरूष से नियोग करके अपने लिए दो सन्तान उत्पन्न करे। नियोग नियमानुसार अकेली स्त्री ही बच्चों का पालन करे।
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दयानंद की अज्ञानता
सत्यार्थ प्रकाश समुल्लास 7 पृष्ठ 155 तथा 163 पर लिखा है कि परमात्मा साधक के पाप नाश नहीं कर सकता। जबकि यजुर्वेद अध्याय 8 मंत्र 13 में छः बार लिखा है कि परमात्मा दान देने वाले अपने भक्त के घोर पाप को भी नाश कर देता है।
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दयानंद की अज्ञानता
समुल्लास 4 पृष्ठ 96-97 पर महर्षि दयानंद ने लिखा है कि विधवा स्त्री का पुनः विवाह इसलिए नहीं करना चाहिए क्योंकि पुनःविवाह से उसका पति व्रत धर्म नष्ट हो जाएगा। इसलिए नियोग करें।
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दयानंद की जीवनी में लिखा है कि दयानंद भांग पीता था, तम्बाकू खाता था, तम्बाकू सूंघता था,
हुक्का पीता था। दयानंद के भक्तों का कहना है कि बाद में भांग पीना, हुक्का पीना, तम्बाकू खाना, छोड़ दिये थे।
वे रोग हैं:- बवासीर, दमा,खांसी, अमाश्य, मिरगी, श्वेत कुष्ट और गलित कुष्ट रोग तथा जिन
व्यक्तियों के शरीर पर बड़े-2 बाल हों उनके पूरे कुल को त्याग दें।
विचार करें:- क्या महर्षि दयानंद के विधान अनुसार बच्चों का विवाह हो सकेगा?
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समुल्लास 4 पृष्ठ 70 पर लिखा है कि विवाह के समय पिता के गोत्र तथा माता के कुल की छः पीढ़ियों को छोड़ कर लड़के -लड़की का विवाह करें।
जिस किसी कुल में किसी एक व्यक्ति को निम्न रोगों में से एक भी रोग हो तो उस पूरे कुल के लड़के तथा लड़की से विवाह न करें।
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दयानंद की अज्ञानता
समुल्लास 4 पृष्ठ 71 पर लिखा है कि कैरी आँखों वाली लड़की से विवाह मत करो, दांत युक्त लड़की से विवाह करो, किसी का नाम पार्वती, गोदावरी, गोमति आदि नदियों और पर्वतों पर हो उस लड़की से विवाह मत करो।
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सत्यार्थ प्रकाश नहीं झूठार्थ प्रकाश!
महर्षि दयानंद ने सत्यार्थ प्रकाश समुल्लास 8 पृष्ठ 197-198 पर लिखा है कि सूर्य पर पथ्वी की तरह सब प्रजा बसती हैं। इसी प्रकार सर्व पदार्थ हैं। इन्हीं वेदों को सूर्य पर रहने वाले मनुष्य पढ़ते हैं।
#RealKnowledgeOfBuddhism
Mahatma Buddha didn't get God, he failed because of his wrong way of worship and that's why the followers of Buddhism slowly turned atheists.
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बुद्ध ने शास्त्र विरुद्ध तपस्या की। अपने अनुभव का प्रचार करना शुरू कर दिया। जबकि उनका ज्ञान किसी भी धर्म शास्त्र से नहीं मिलता, जिससे व्यर्थ है। केवल परमेश्वर कबीर साहिब का ज्ञान ही शास्त्र अनुकूल है।