@elonmuskTN Just tried the simple way out for this 1... Ain't sure if this really is the correct and answer.
10+10+10=30
5+5+10=20
4+4+5=13
10+5+2=17
Values:
Airpods - 10
Human - 5
2 Watches - 4
1 Watch - 2
रहमत बन बरसा
ये मन था जिसको तरसा
हुई जैसे हर दुआ कबूल
जो तू हुआ मुझे हासिल
पाना ही तो सिर्फ मंजिल न था
ये भी शायद रास्ता ही तो था
फिर भी बन गया तू सकून
मिले न मिले हम
अरमां बस तेरा ही
तुझको पाना जैसे हो
एक खूबसूरत ख्वाब ही
#पदचिन्ह
मेरे मन की बस इतनी सी अभिलाषा
संस्कृति की जाने सब परिभाषा
हमारी संस्कृति में अथाह अर्थ छुपे
उगते सूरज को हम प्रणाम करते
वो हममें नई ऊर्जा भरते
प्रेम से सभी जीव मिलकर रहते
जो हमको एकता की सीख है देते
प्रत्येक कार्य नियत समय पर होते
जो हमें समय की कीमत का ज्ञान देते
#पीहू
मैने सोचा था
दर्द मेरा बड़ा है
पर तुझसे मिली
तो जाना
कि कोई भी
दर्द से अछूता कहां है
किसी ने दर्द को
दवा बना लिया
किसी ने हलाहल
मान उसे पिया
दूर से जो हंसता
खेलता मुझे दिखा था
हकीकत में वो
अंदर से उतना ही टूटा था
सिहर गई मैं
सुन कर उसकी दास्तां
शायद वो ही सच्चा मनुष्य था
कभी कभी
बेवजह यूं ही
पलकों की कोर
भींग जाती है
एक सवाल
मन को व्यथित
करता है
क्या इतनी बुरी हूं मैं
क्यों मुझको ही
ईश्वर ने हर दर्द के
लिए चुना
क्या इतनी बुरी हूं मैं
ख्वाइशों की उम्र में
जिम्मेदारियां थी
आखिर क्यों छीन गया
सुखमयी सपनों का संसार
क्या इतनी बुरी हूं मैं
वक्त हर मर्ज की दवा बना
घाव जो मिले थे
वक्त के साथ भर गए
किसको क्या मिला
वक्त ही हर पल का गवाह बना
थम के जो पीछे देखने लगे
बहुत कुछ लावारिस सा
बिखरा मिला
कही टूटे सपने थे कहीं
टूटे पंखों का कारवां मिला
वक्त ने ही फिर नई उड़ान दी
टूटे पंखों को नई पहचान दी
तू उन्मुक्त गगन का पक्षी,
क्यों विचरे यहां वहां?
तेरी मंजिल, तेरा ठोर है कहां?
आज यहां कल वहां,ये प्रवृत्ति छोड़ दे।
एक राह चुन बाकी, मनोवृत्ति छोड़ दे।💞
मन तो असीमित इच्छाओं का भंडार है।
मन की सुनेगा तो तेरी हार है।
अपनी मंजिलों की ठोह ले,
ये दौड़ा दौड़ी छोड़ दे। 💕
इतिहास के पन्नों में
बोलो वो नायक कहां
धरती मां के लिए
जो शहीद हुए
वो भगत, सुभाष कहां
कहां खो गया नाम
आजाद भारत से आजाद का
बोलो वो बिस्मिल अशफाक कहां
हम को आजादी किसी
साबरमती के संत के
प्रयास मात्र से नही मिली
तो बोलो वो लाल बाल पाल कहां
कहां खो गए सरदार पटेल
वेद की ऋचाएं
जो पहचान थी
आर्य भूमि की
लुप्त वो विलुप्त वो
संस्कृति जो आन बान शान थी
लुप्त वो विलुप्त वो
एक अंधी से दौड़ में दौड़ रहे
फिर भी सनातन की तरफ
न स्वयं को मोड़ रहे
पहचान विहीन जीवन में
जो संस्कार थे
लुप्त वो विलुप्त वो
जागो की जब जागो तभी सबेरा
जयतु सनातन
जहां अथिति को भगवान जानते है
सिर्फ संस्कार ही पहचान मानते है
वो पावन भूमि मेरी जन्म भूमि
जहां गाय को माता कहते है
सिर्फ परोपकार को बहती नदियां
वो पावन भूमि मेरी जन्म भूमि
जहां ॐ की ध्वनि सुनाई दे
सिर्फ परोपकार को शीतल बयार बहे
वो पावन भूमि मेरी जन्म भूमि
शून्य,शब्द,आकाश,गुरुत्वाकर्षण
हमने दिया संसार को
प्रणाम हमारा
चरक और सुश्रुत महान को
पाणिनि की व्याकरण जैसी
कोई महान व्याकरण नही
किसी और देश के पास
आयुर्वेद का ऐसा ज्ञान नही
आर्यभट्ट जैसे महान व्यक्तित्व
यहां जन्मे है
चाणक्य जैसे महान
अर्थशास्त्री भी यहां आने तरसे है
मिट्टी से बने हम मिट्टी में मिल जायेंगे
खाली हाथ आए थे खाली हाथ जायेंगे
फिर क्या दंभ, फिर क्या लोभ
क्या कागज के टुकड़े से
सुख प्रेम हम पा जायेंगे
कितनी योनियों से गुजर
मानव जीवन पाता है
उसे भी थोड़े सुख के लिए गंवाता है
सच्चे सुख की कल्पना से परे
बस कागज कमाने लग जाता है
दो सौ साल की पराधीनता भी
जिसे न मिटा सकी
गर्व से कहो हम
उस संस्कृति के जन्मे है
गर्व है हमें कि हम भारतीय है
जो हमेशा आकर्षण का केंद्र रहा
कभी सोने की चिड़ियां तो
कभी बेमिसाल मसालों का जोड़ रहा
मिटा न सका जिसकी हस्ती
ये विश्व इतना कमजोर रहा
गर्व से कहो हम हिंदू है 🙏🙏