आज समीर का जन्मदिन था… और उसका बेजान शरीर मोर्चरी में पड़ा है।
एक मां की इससे बड़ी बेबसी क्या होगी कि जिस बेटे को आज जन्मदिन की मुबारकबाद देनी थी, उसी बेटे के लिए वह रो-रोकर इंसाफ मांग रही है।
आज समीर की मां को देखकर कलेजा कांप उठा। वह बार-बार एक ही बात कह रही थीं— “मेरे बेटे को इंसाफ दे दो… मेरे बेटे ने कहा था कि मरने के बाद तो इंसाफ मिलेगा।”
एक मां के मुंह से निकले ये शब्द किसी भी इंसान को अंदर तक हिला देने के लिए काफी हैं।
समीर को सिर्फ उन दो लोगों ने नहीं मारा, जिन पर उसके साथ हुई घटना को लेकर सवाल उठ रहे हैं। समीर की मौत के लिए उस व्यवस्था को भी जवाब देना होगा, जिसमें एक गरीब की जान की कीमत इतनी कम है।
परिवार के मुताबिक, 4 अक्टूबर की रात घटना हुई। @Flipkartminutes के मैनेजर ने कथित तौर पर परिवार को खबर न देने और कार्रवाई करने की बात कही। अगले दिन, 5 अक्टूबर को, समीर घरवालों से यह कहकर निकला कि दोपहर 1:30 बजे तक लौट आएगा। लेकिन उसके बाद क्या हुआ, परिवार को इसकी पूरी जानकारी नहीं थी।
@Flipkartminutes के स्टोर के पास समीर ने जहर खा लिया था उसके साथ मौजूद एक राइडर और किसी वरिष्ठ कर्मचारी ने उसे लाल बहादुर शास्त्री अस्पताल पहुंचाया, लेकिन घरवालों को तत्काल सूचना नहीं दी गई। समीर के फोन से आए एक कॉल के बाद परिवार को उसके अस्पताल में होने का पता चला।
समीर का जूता, साइकिल, बैग सब वही स्टोर पर पड़ा है। लेकिन समीर अब इस दुनिया में नहीं ।
इसके बाद समीर करीब 15-16 दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच जूझता रहा। परिवार का आरोप है कि इस मुश्किल वक्त में @Flipkartminutes की तरफ से कोई उसकी खैरियत पूछने तक नहीं आया।
क्या @Flipkartminutes की जिम्मेदारी नहीं बनती
थी अपने राइडर के साथ खड़े होने की ।
एलबीएस अस्पताल में समीर का ठीक से इलाज नहीं हो पा रहा था, ऐसा परिवार का कहना है। लेकिन मां-बाप इतने गरीब थे कि अपने बेटे को निजी अस्पताल में वेंटिलेटर पर रखकर इलाज कराने का खर्च नहीं उठा सके। न उनके पास इतना पैसा था, न कोई ऐसी व्यवस्था जो उनके बेटे की जान बचाने में मदद कर पाती।
सोचिए, एक मां ने अपना बेटा खो दिया। एक परिवार ने अपना सहारा खो दिया। और गरीबी ने उन्हें अपने बच्चे को बचाने का वह मौका भी नहीं दिया, जिसके लिए वे शायद अपनी हर चीज दांव पर लगाने को तैयार थे।
समीर की मौत के लिए जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। घटना से जुड़े हर पहलू की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। जिन लोगों की लापरवाही या संवेदनहीनता सामने आए, उन पर कार्रवाई होनी चाहिए। किसी कंपनी की जिम्मेदारी सिर्फ अपने कारोबार और मुनाफे तक सीमित नहीं हो सकती। उसके यहां काम करने वाले लोग भी इंसान हैं, उनकी जिंदगी भी मायने रखती है।
समीर की मां को अब भी इंसाफ का इंतजार है। उसकी लाश मोर्चरी में रखी है। परिवार ने मेडिकल बोर्ड गठित करके पोस्टमार्टम कराने की मांग की है। इस प्रक्रिया में शायद दो-तीन दिन और लग जाएं।
जिस मां ने अपने बेटे को जन्म दिया, उसे आज अपने बेटे के लिए इंसाफ की लड़ाई लड़नी पड़ रही है। जन्मदिन पर घर में खुशियां होनी चाहिए थीं, लेकिन आज उस घर में मातम है।
आज समीर की मां को रोते देखकर बार-बार यही ख्याल आया कि इस देश में गरीब होना क्या इतना बड़ा गुनाह है कि इंसान अपने बच्चे का इलाज तक न करा सके?
समीर अब लौटकर नहीं आएगा। उसकी मां की गोद फिर नहीं भरेगी। लेकिन उसकी मौत का सच सामने आना चाहिए, जिम्मेदारों की जवाबदेही तय होनी चाहिए और किसी दूसरे गरीब परिवार को ऐसी बेबसी का सामना न करना पड़े।
समीर को इंसाफ मिलना चाहिए। उसकी मां की आवाज सुनी जानी चाहिए।
क्योंकि इंसाफ सिर्फ अदालत के फैसले का नाम नहीं है। इंसाफ यह भी है कि किसी गरीब की जिंदगी को भी उतनी ही अहमियत दी जाए, जितनी किसी अमीर की जिंदगी को दी जाती है।
आज पूरे दिन उनके साथ हॉस्पिटल में बैठी रही , विडियो पोस्ट करने की हिम्मत नहीं थी , लेकिन समीर को इंसाफ मिले इसीलिये पोस्ट कर रही हूं।
@RahulGandhi@ShayarImran
This is just so painful
A delivery boy with @Flipkartminutes ended life over assault, humiliation and abuse by a customer who himself gave him a torn 10 rupees note and then started fighting with him
This young boy complained to @DelhiPolice but no action was taken
Tragic!
इस नौजवान का नाम समीर हुसैन है। वह अपने माता-पिता का बड़ा बेटा था। उसका एक छोटा भाई भी है। पिता बढ़ई का काम करते हैं और परिवार कल्याणपुरी के खिचड़ीपुर के पास एक किराये के मकान में रहता है।
समीर सुसाइड करने से पहले जिन लोगों पर आरोप लगाए हैं, वे बीजेपी के एक नेता के परिवार से जुड़े बताए जा रहे हैं।
परिवार FIR दर्ज होने और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर पोस्टमार्टम कराने के लिए तैयार नहीं था। अब कल पोस्टमार्टम किया जाएगा।
हम आखिर कैसी दुनिया में जी रहे हैं, जहाँ इंसान की हैसियत उसके काम से तय होने लगी है, उसके इंसान होने से नहीं?
जो लोग हमारी सुविधाओं के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं, हमारे घर के दरवाज़े तक सामान पहुँचाते हैं, क्या हम उनके साथ थोड़ा सम्मान से पेश नहीं आ सकते? क्या सिर्फ इसलिए कि कोई हमें सामान पहुँचाता है, हम उसे अपने से छोटा समझने लगें? हम क्यों भूल जाते हैं कि उसके पास भी दिल है, आत्मसम्मान है, सपने हैं और एक पूरी ज़िंदगी है।
दिल्ली के कल्याणपुरी में Flipkart Minutes में काम करने वाले इस नौजवान का वीडियो देखकर मैं अपने आँसू नहीं रोक पाई। मैं इस लड़के को नहीं जानती, लेकिन उसके शब्दों में जो दर्द है, उसे महसूस कर पा रही हूँ। उसके एक-एक शब्द दिल को भीतर तक तोड़ देते हैं।
काश, उस वक़्त कोई उसके पास होता। काश, कोई उसके हाथ से ज़हर छीनकर फेंक देता। काश, कोई उसे गले लगाकर कह देता कि तुम्हारी ज़िंदगी किसी के अपमान से कहीं ज़्यादा क़ीमती है। काश, उसे उस पल यह एहसास करा पाता कि दुनिया में कुछ लोग भले ही तुम्हारी मेहनत की क़द्र न करें, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि तुम्हारी कोई क़ीमत नहीं।
वह भी तो हमारी तरह अपनी मेहनत से ज़िंदगी जीना चाहता था। अपने सपने पूरे करना चाहता था। किसी पर बोझ बने बिना अपने पैरों पर खड़ा होना चाहता था। लेकिन जब रोज़मर्रा के व्यवहार में किसी इंसान को बार-बार उसकी हैसियत का एहसास कराया जाता है, तो हम यह क्यों भूल जाते हैं कि शब्द भी ज़ख़्म देते हैं और अपमान भी इंसान को भीतर से तोड़ सकता है?
हम अक्सर कहते हैं कि ज़माना बदल गया है, लोग संवेदनहीन हो गए हैं। लेकिन बदलाव की शुरुआत दूसरों से नहीं, हमसे होनी चाहिए। अगली बार जब कोई डिलीवरी पार्टनर आपके दरवाज़े पर आए, तो उससे ऐसे बात कीजिए जैसे आप अपने किसी परिचित से करते हैं। एक धन्यवाद, एक मुस्कान और थोड़ी-सी इज़्ज़त देने में हमारा कुछ नहीं जाता, लेकिन सामने वाले के लिए उसका बहुत बड़ा मतलब हो सकता है।
काश, हम किसी इंसान की ख़ामोशी के पीछे छिपा दर्द, उसके टूट जाने से पहले समझ पाते। काश, हम उस समाज का हिस्सा बन पाते जहाँ किसी को अपनी ग़रीबी, अपने काम या अपनी हैसियत की वजह से अपमान न सहना पड़े।
उस नौजवान के लिए दिल रो रहा है। और उससे भी ज़्यादा तकलीफ़ इस बात की है कि हम इंसान होकर भी एक-दूसरे के प्रति इतने बेरहम कैसे हो गए?
किसी के काम को छोटा मत समझिए। मेहनत करने वाला कोई इंसान छोटा नहीं होता। छोटा हमारा नज़रिया हो सकता है।
अल्लाह उस नौजवान पर रहम करे और उसके परिवार को यह दुःख सहने की ताक़त दे। आमीन।
@DelhiPolice से मां बाप न्याय की गुहार लगा रहे है , कम से कम उनकी सुन लीजिये Delhi Police। इस लड़के की फ़रियाद तो आपलोगों ने नहीं सुनी, सुन ली होती तो शायद जिंदा होता ...
#LBSHospital #Delhipolice
दिलेर मेहंदी पर फूटा कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल का गुस्सा
उत्तराखंड में एक कार्यक्रम के दौरान मशहूर पंजाबी सिंगर दिलेर मेहंदी को भजन गाने के लिए बुलाया गया था। जहां मौजूद मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा, बोल तो पा नहीं रहे गाना क्या गाओगे!
आखिर क्यों नहीं बोल पा रहे थे दिलेर मेहंदी?
इंदौर में एक 15 साल की गरीब बच्ची गरबा खेलने आई
इंदौर में BJP मंडल अध्यक्ष ने बच्ची को धक्का दिया उसके साथ बदसलूकी की
नवरात्र में देवी स्वरूप के साथ यह बर्ताव ही BJP की असलियत है
सेवा में,
माननीय मुख्यमंत्री जी,
उत्तर प्रदेश सरकार, लखनऊ।
विषय: पति व सास-ससुर द्वारा झूठी शिकायतें दर्ज कराकर घर से निकालने, दहेज/स्त्रीधन उत्पीड़न, गंभीर घरेलू हिंसा तथा थाना काकादेव पुलिस की निष्क्रियता के संबंध में।
महोदय,
सविनय निवेदन है कि प्रार्थिनी विजयेता श्रीवास्तव, पत्नी शालिन श्रीवास्तव, निवासी: कानपुर नगर (ससुराल में विगत 10 वर्षों से स्थायी रूप से निवास कर रही है) अत्यंत पीड़ा व न्याय की आस में यह प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर रही है। मेरे पति शालिन श्रीवास्तव, सास पुष्पा श्रीवास्तव तथा ससुर सुरेश श्रीवास्तव मुझे व मेरे नाबालिग बच्चे को अतिरिक्त दहेज न देने और स्त्रीधन न सौंपने के कारण घर से निकालकर पति की दूसरी शादी करवाना चाहते हैं, जिसके लिए मेरे बैंक खाते बंद करवाकर मुझे आर्थिक रूप से पंगु बना दिया गया है तथा शारीरिक, मानसिक व यौन उत्पीड़न किया जा रहा है। 12 अगस्त को पति चाकू लेकर मुझे जान से मारने आया था तथा 10 सितंबर को बच्चे की ट्यूशन अध्यापिका व घरेलू सहायिका सुमन के समक्ष पति और सास ने मेरे हाथ पकड़कर घर से निकाला, तलाक की धमकी दी और भारी प्रिंटर उठाकर मुझे मारने का प्रयास किया। पति द्वारा मुझे निरंतर 'मोटी' कहकर बॉडी शेमिंग की जाती है, बच्चे की एक आंख न होने के कारण प्रताड़ित किया जाता है, पति घर न रहकर होटलों में समय बिताता है, कॉल नहीं उठाता तथा बाहरी व अनजान व्यक्तियों से गंदे फोन करवाकर धमकियां दिलवाता है। ससुराल पक्ष अपने अधिवक्ता नातेदार (राजकुमार नशित श्रीवास्तव, हाईकोर्ट) के साथ मिलकर कानून का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं; सास-ससुर वरिष्ठ नागरिकता का नाजायज फायदा उठाकर मुझ पर झूठे आरोप लगा रहे हैं तथा मेरे कानपुर स्थित ससुराल में रहने के बावजूद धारा 9 व अन्य मुकदमों के नोटिस जानबूझकर मेरे लखनऊ (मायके) के बंद पड़े मकान के पते पर भिजवा रहे हैं ताकि मुझे विधिक प्रक्रिया से वंचित रखा जा सके।
इस गंभीर उत्पीड़न के संबंध में मैंने पूर्व में आई.जी.आर.एस. (IGRS) पोर्टल पर संख्यावार निम्नलिखित शिकायतें दर्ज कराई हैं:
* शिकायत संख्या 40016426111357
* शिकायत संख्या 40016426116787
* शिकायत संख्या 40016426117319
शिकायत संख्या 40016426121525
इसके अतिरिक्त, मैंने थाना काकादेव में दिनांक 11 अक्टूबर 2026 को प्रार्थना पत्र दिया तथा दिनांक 13 अक्टूबर 2026 (मंगलवार) को पुलिस आयुक्त (कमिशन्रेट कार्यालय) कानपुर नगर में शिकायत दर्ज कराई, परंतु थाना काकादेव पुलिस द्वारा कोई ठोस कार्यवाही न कर केवल टालमटोल किया जा रहा है।
अतः आपसे नम्र निवेदन है कि थाना काकादेव पुलिस को मेरी व मेरे बच्चे की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने, दोषियों के विरुद्ध दहेज उत्पीड़न, स्त्रीधन छिनैती व घरेलू हिंसा का मुकदमा दर्ज करने तथा ससुराल पक्ष द्वारा दर्ज कराई गई झूठी शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर त्वरित कानूनी कार्यवाही करने का आदेश प्रदान करने की कृपा करें।
प्रार्थिनी: विजयेता श्रीवास्तव
कानपुर नगर - 208005
दिनांक: 17 अक्टूबर 2026
Pati ki harkat ka 1 sample video ki mujhe kaise pratadit kiya ja raha hai cctv ke samne..cctv band karke mujh pe aur bacche pe roz physical abuse aur jaan se Marne ki koshish kari ja rahi hai aur isme saas sasur bhi shamil rahte hai
Recently, YouTuber Dhruv Rathee was detained to prevent him from joining an unauthorized protest organized by CJP
Journalist/YouTuber Ajeet Bharti reacted to Dhruv Rathee's experience of being detained
Ajeet Bharti Roast Mode On 🔥
प्रश्न : लोकतंत्र क्या होता है?
उत्तर: जब सरकारी अस्पताल में ५५ सफाईकर्मी होने के बाद भी, हर महीने उनकी तनख्वाह पर लाखों खर्च होने केबावजूद ... बीमार बच्चे की लाचार मां से अस्पताल का फर्श साफ करवाया जाये
📍दमोह ,मध्य प्रदेश