यह कैसा न्याय है...?
14 वर्षीय मासूम विनोद सिंह को नसीम अंसारी और उसके अन्य साथियों द्वारा घर से उठाकर कुछ दूर ले गए उसे एक भैंस को सुरक्षित स्थान तक छोड़ने के लिए कहा गया और रास्ते में उसके साथ मारपीट की गई...
यह पूरी घटना सुनियोजित थी जिनसे नसीम अंसारी सहित कुछ लोगों के कथित भैंस एवं पशु तस्करी के नेटवर्क का खुलासा हो सकता था इसी वजह से उसे निशाना बनाया गया घायल बच्चा किसी तरह चौकी पहुंचा और पूरी घटना पुलिस को बताई पुलिस ने कथित आरोपियों को बुलाकर केवल बातचीत की और उन्हें जाने दिया न तो घायल बच्चे का मेडिकल कराया गया और न ही गंभीरता से कानूनी कार्रवाई की गई इतना ही नहीं अभद्र व्यवहार किया गया और बच्चे के पिता को भी धमकाया गया शाशन पुलिस चौकी में पदस्थ पुलिसकर्मी का मोबाइल नंबर 70491 34049 और नाम देवेंद्र सिंह है|
रात में जब मासूम की तबीयत बिगड़ी और शरीर में असहनीय दर्द हुआ, तब उसे इलाज के लिए हीरावती अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई
क्या 14 वर्षीय मासूम विनोद सिंह की मौत का जिम्मेदार सिर्फ आरोपी हैं... या पुलिस की कथित लापरवाही भी?
अगर पुलिस समय रहते कानूनी कार्रवाई करती, मेडिकल कराती और आरोपियों पर तत्काल कार्रवाई होती, तो आज 14 वर्षीय विनोद सिंह जिंदा होता?
सुनिए एक पिता का दर्द.......?
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500 करोड़ की प्रॉपर्टी है... चाहूं तो एक साथ चार विधायक खड़े कर दूं... राइफल लेकर गाड़ी में घूम रहा हूं... विधायक पुत्र को धमकी... फिर एक के बाद एक लेटरबाजी... आखिर सिंगरौली में चल क्या रहा है?
दो विकेट गिर चुके हैं... अगला निशाना कौन?
अगर जिले में सब कुछ कानून के हिसाब से चल रहा है तो फिर वर्षों से एक ही जिले में जमे बैठे कुछ अधिकारियों पर नियम क्यों लागू नहीं होते? कांस्टेबल से लेकर बड़े अधिकारियों तक—क्या ट्रांसफर नीति सिर्फ चुनिंदा लोगों के लिए है?
पुलिस लाइन, कोतवाली, विंध्यनगर और अन्य थाना-चौकियों में वर्षों से जमे पुलिस अधिकारिय-कर्मचारीयो पर सवाल आखिर इन्हें जिले से बाहर भेजने की जरूरत क्यों महसूस नहीं होती? क्या सब कुछ नियमों के तहत है या फिर कोई और वजह है?
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मोबाइल चोरी हो गया तो सिर्फ थाने के चक्कर लगाने से काम नहीं चलेगा… पहले जागिए, जानकारी लीजिए और सरकार के CEIR Portal का इस्तेमाल करना सीखिए सिंगरौली पुलिस साइबर सेल अधिकारी Pawan Singh और @JournalistAjay2 की खास बातचीत कैसे एक छोटी सी लापरवाही आपका बैंक अकाउंट खाली कर सकती..
कलेक्ट्रेट और नगर निगम से महज़ डेढ़ किलोमीटर करीब विकास का ऐसा मॉडल पहले सड़क खोदो… फिर खानापूर्ति में बड़े-बड़े पत्थरों से ढक दो क्या यही जिम्मेदार ठेकेदार इंजीनियर और अधिकारियों की है? @PSingrauli
जनता की सुरक्षा जाए भाड़ में, बस कागज़ों में काम पूरा दिखना चाहिए
#सिंगरौली
पटवारी पवन शाह, जिनका गृह ग्राम कचनी, जिला सिंगरौली है, आखिर किसकी अनुमति और किसके संरक्षण में अपने ही गृह ग्राम में पदस्थ हैं?
प्रशासनिक नियमों के तहत किसी भी कर्मचारी को अपने गृह क्षेत्र में पदस्थापना नहीं दी जाती, ताकि निष्पक्षता बनी रहे फिर आखिर यह नियम यहां क्यों टूटे?
क्षेत्र की जनता का आरोप है कि पटवारी पवन शाह जातिगत द्वेष भावना और व्यक्तिगत उद्देश्यों के चलते लोगों को निशाना बना रहे हैं जमीन नापीकरण हो या राजस्व से जुड़ा अन्य कोई कार्य — बिना रिश्वत लिए काम नहीं किया जाता
कलेक्टर महोदय, सुना है आप ईमानदार हैं अब समय है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो और यदि आरोप सही हैं तो संबंधित पटवारी को तत्काल गृह ग्राम से हटाकर अन्यत्र पदस्थ किया जाए
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अपने लिए नहीं… अपने परिवार के लिए सही चलिए...
अगर आप सड़कों पर हैं, सफर कर रहे हैं, तो ट्रैफिक नियमों का पालन जरूर करें हो सकता है आपकी नजर में पुलिस कई बार गलत लगे…
लेकिन एक सच यह भी है कि आधी रात को वही पुलिस आपके लिए खड़ी है… आपके परिवार की खुशियों के लिए खड़ी है… ताकि आप सुरक्षित अपने घर पहुंच सकें
जो लोग सड़कों पर ड्यूटी कर रहे हैं, वो सिर्फ नियम लागू नहीं कर रहे…
वो आपके जीवन की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभा रहे हैं..
इसलिए ट्रैफिक नियमों पर उंगली उठाने से पहले…
एक बार खुद को आईने में देखिए और सोचिए — क्या मैं सड़क पर जिम्मेदारी से चल रहा हूं?
दूसरों को मत देखिए… स्वयं में बदलाव लाइए
अगर हर व्यक्ति खुद बदल गया, तो पूरे सिंगरौली की तस्वीर बदल जाएगी
सुरक्षित रहें — परिवार की खुशियां आपके इंतजार में हैं...
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जिले के अपर कलेक्टर साहब को ही नहीं मालूम कि आबादी के बीच हो रही ब्लास्टिंग की अनुमति है या नहीं… तो फिर आखिर जिले में चल क्या रहा है?
सड़क रोककर धमाके, आबादी के नजदीक लगातार ब्लास्टिंग, ग्रामीणों में दहशत… और जब जिम्मेदार अधिकारियों से सवाल पूछा गया तो जवाब मिला — “मुझे नहीं मालूम, पता करता हूं…
अब सवाल है —
क्या THDC India Limited मनमर्जी से काम कर रहा है?
ब्लास्टिंग की अनुमति किस विभाग ने दी?
सुरक्षा मानकों की निगरानी कौन कर रहा है?
कितने परिवारों को पूरा मुआवजा मिला और बाकी विस्थापन कब होगा? अगर जिला प्रशासन को ही जानकारी नहीं, तो ग्रामीणों की जान की जिम्मेदारी कौन लेगा?
#सिंगरौली
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सुरक्षा कर्मियों की जिम्मेदारी है सुरक्षा करना जो कर रहे हैं अच्छी बात है? लेकिन कंपनी प्रबंधन सुरक्षा कर्मियों को सामने करके ब्लास्टिंग कर रहा अनुमति है या नहीं भगवान जाने पर ऐसे कृत्य से स्थानीय ग्रामीण आसपास के रहवासी छोटे-छोटे मासूम बच्चे अत्यधिक परेशान डर के साए में जी रहे है छोटे-छोटे बच्चों सहित आसपास के ग्रामीण जनों को अगर कुछ हो गया तो इसकी जवाबदारी कौन लेगा?
जिला प्रशासन या कंपनी प्रबंधन या फिर सुरक्षा कर्मी...?
बगैर मुआवजा पुनर्वास दिए सड़क के करीब स्थानीय लोग ग्रामीण जनों के घरों के आसपास ब्लास्टिंग करना बहुत बड़ी बात है? कोई भी अनहोनी हो इससे पहले हमारी जिम्मेदारी है कि हम आवाज़ उठाएं?
कंपनी प्रबंधन जिम्मेदार अधिकारी कंपनी से बाहर निकलते नहीं सुरक्षा कर्मियों को सामने खड़ा कर देते हैं तो सवाल हम किससे करें पहला सवाल सुरक्षा कर्मियों से करनी पड़ती है तब जाकर बात कंपनी के अंदर तक पहुंचती है फिर निष्कर्ष निकलता है..?
और हम यही कर रहे हैं फिर आप इस बात को समझें कि मैं अपने लिए नहीं बल्कि आप सबके लिए प्रयास कर रहा हूं छोटे-छोटे मासूम बच्चों के लिए आवाज उठा रहा हूं जो आज डर के साए में जी रहे हैं.. उम्मीद करुंगा अब समझेंगे और दूसरों को भी समझाएंगे क्योंकि यह हमारी और आपकी नैतिक जिम्मेदारी है अपनी जिम्मेदारियां का निर्वहन हम दोनों सभी मिलकर भाईचारे के साथ करेंगे?
मामला :: THDC बंधा पीड़रवाह अमिलिया कोल माइंस जिला #सिंगरौली
सड़क रोकी, धमाके किए...आबादी के करीब ब्लास्टिंग, सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी?
यदि ब्लास्टिंग सुरक्षा मानकों के तहत हो रही है, तो सड़क पर आम जनता का आवागमन रोकने की अनुमति किस विभाग ने दी है?
THDC प्रबंधन बताए कि— ब्लास्टिंग की अनुमति किस विभाग से प्राप्त है? सुरक्षा मानकों की निगरानी कौन कर रहा है? कितने प्रभावित परिवारों को पूर्ण मुआवजा मिला है? शेष परिवारों के विस्थापन की समय सीमा क्या है?
जब ब्लास्टिंग स्थल आबादी के नजदीक पहुंच चुका है, तब ग्रामीणों की सुरक्षा, मुआवजा और विस्थापन की जिम्मेदारी कौन निभाएगा?
ग्रामीणों ने बताया कि वर्षों पहले भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन आज भी कई प्रभावित परिवार पूर्ण मुआवजे और पुनर्वास का इंतजार कर रहे हैं दूसरी ओर रोजाना होने वाली ब्लास्टिंग से लोग भय और असुरक्षा के माहौल में जीवन जीने को मजबूर हैं..
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कहानी सिर्फ सिंगरौली की नहीं है कहानी उस पिता की है जो सुबह घर से निकलते समय अपने बेटे से कहता है – “जल्दी वापस आऊंगा…” कहानी उस मां की है जो शाम को दरवाजे पर दरवाजे की ओर देखती रहती है, कहानी उस पत्नी की है जो अपने पति के सुरक्षित लौटने की दुआ करती है और कहानी उन बच्चों की है जो हर दिन अपने पिता के घर आने का इंतजार करते हैं लेकिन सिंगरौली की सड़कों पर एक सवाल बार-बार खड़ा हो जाता है। जब भी कोई दुर्घटना होती है तो हम कहते हैं बड़ी गाड़ी जिम्मेदार है, सड़क जिम्मेदार है, व्यवस्था जिम्मेदार है, लेकिन क्या कभी हमने खुद से पूछा कि हमारी अपनी जिम्मेदारी क्या थी? मध्य प्रदेश का एकमात्र सिंगरौली जिला जहां आज भी बहुत से लोग हेलमेट को बोझ समझते हैं, सीट बेल्ट को जरूरी नहीं मानते और ट्रैफिक नियमों को सिर्फ चालान से जोड़कर देखते हैं। जबकि सच्चाई यह है कि दुर्घटना किसी को बताकर नहीं आती एक छोटी सी लापरवाही जिंदगी और मौत के बीच की दूरी बन जाती है इसी को देखते हुए जिले के पुलिस अधीक्षक श्री सियाज के. एम ने जिले के आम नागरिकों से लेकर हर व्यक्ति तक अपील की है कि अगर हम अपने परिवार को सुरक्षित और खुशहाल देखना चाहते हैं तो हमें सड़क पर जिम्मेदार नागरिक बनकर उतरना होगा उन्होंने कहा है कि हमें आरोप-प्रत्यारोप के दौर में नहीं पड़ना है बल्कि अपनी सुरक्षा को अपनी जिम्मेदारी बनाना है अगर दोपहिया वाहन में हैं तो हेलमेट जरूर लगाइए, अगर चारपहिया वाहन में हैं तो सीट बेल्ट का उपयोग जरूर कीजिए, शराब पीकर बिल्कुल वाहन मत चलाइए और ट्रैफिक नियमों का पालन कीजिए क्योंकि हादसे के बाद सिर्फ खबरें बनती हैं, लेकिन दर्द पूरा परिवार सहता है हमें दूसरों को बदलने से पहले खुद को बदलना है अगर हमारी सोच बदलेगी तो हमारा परिवार सुरक्षित रहेगा, समाज सुरक्षित रहेगा और निश्चित रूप से हमारा सिंगरौली भी बदलेगा घर से निकलो तो सिर्फ सफर के लिए नहीं, सुरक्षित वापस लौटने के लिए निकलो
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सिंगरौली : जिले में माइनिंग विभाग टीम द्वारा अवैध रेत उत्खनन कर रहे बिना नंबर प्लेट की हाईवा क्रमांक पर कार्यवाही करते हुए नवानगर थाने में खड़ा कराया गया सूत्रों से मिली वाहन स्वामी कांग्रेसी नेता मनोज शाह है वही नेता जो आए दिन जिले की सड़कों पर विभिन्न प्रकार की समस्याओं को लेकर अक्सर धरना प्रदर्शन आंदोलन जुलूस निकालते रहते हैं और नारा देते हैं हम राहुल गांधी के बब्बर शेर हैं जीतू पटवारी जिंदाबाद एक तरफ यह नारा विभिन्न प्रकार की समस्याओं को लेकर और फिर अचानक से प्रशासन से सेटलमेंट करते हैं यह कहते हैं मेरा कारोबार चलने दीजिए हम आपका विरोध नहीं करेंगे और अगर हमारा कारोबार नहीं चलेगा तो हम कई प्रकार की समस्याएं लेकर आपके कार्यालय के पास आएंगे आप अभी परेशान होंगे हम भी होंगे क्योंकि सिंगरौली में नेताओं का यही मकसद रहता है और प्रशासन क्यों चाहेगा कि आप आंदोलन प्रदर्शन हगामा करें यही वजह रहती है दोनों के बीच जुगाड़ होता है और पब्लिक जाए भाड़ में दोनों मिलकर यानी नेताजी और जिला प्रशासन मिलकर अवैध उत्खनन एवं अन्य गतिविधियों में शामिल होकर अपना व्यापार व्यवसाय चलाते हैं यही वजह रहती है पब्लिक आए दिन परेशान रहती है सड़कों पर दिखती है प्रत्येक दिन दुर्घटनाएं हो रही 10000, 15000, 20000 देकर पूरे मामले को दबा दिया जाता है फिलहाल जिले में जितने नेता हैं अधिकतर लोग बिना नंबर प्लेट की गाड़ी का इस्तेमाल कर अपना व्यापार चल रहे हैं ताकि किसी को पता ना चले कि नेताजी का भी कारोबार चल रहा है क्योंकि पता चलेगा तो नेताजी का धोती खुल जाएगा और प्रशासन की किरकिरी होगी इसलिए दोनों मिलकर सामंजस्य से बनाकर अपना व्यवसाय कर रहे हैं यही वजह रहती है और जब ज्यादा दबाव आता है प्रेशर आता है तो यह कार्रवाई करने निकलते हैं और अचानक से बिना नंबर प्लेट की गाड़ी पकड़ ली जाती है जब तक कार्यवाही होती है तब तक पता चलता है नेताजी की गाड़ी थी और फिर एक दूसरे में खींचातानी कैसे मेरी गाड़ी पकड़ ली अब देखो हम बताते हैं कल आएंगे आंदोलन करने प्रदर्शन करने पब्लिक को लेकर हजारों की संख्या में चेतावनी देते हैं प्रशासन को और फिर कम बेसी करके किसी भी तरीके से पकड़ी गई गाड़ी को छुड़वाने के लिए प्रयास करते हैं और फिर नेताजी अपने कारोबार में सक्रिय हो जाते हैं और उधर जो ठेका लिए हैं करोड़ों का इनका नुकसान होता है क्योंकि प्रशासन और नेताजी मिलकर कारोबार व्यवसाय चलाते हैं फिलहाल नवानगर थाने में खड़ी गाड़ी कांग्रेसी नेता मनोज शाह के ऊपर जो कार्यवाही हुई है जीतू पटवारी या फिर राहुल गांधी किस नजर से देखते हैं….? अब इसको देखना हैं
शेष अगले अंक में विस्तार से…..
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