अभिभावक एवं संरक्षक विश्व की बड़ी पार्टी भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष, गृहमंत्री उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री प्रखर वक्ता एवं जनप्रिय राजनेता, माननीय रक्षा मंत्री श्री @rajnathsingh जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई।
प्रभु श्री राम से दीर्घायु एवं यशस्वी जीवन की कामना है।
प्रेस वक्तव्य:
हमें भाषाई व संवैधानिक मर्यादाओं के दायरे से बाहर जाने पर मजबूर न किया जाए: डॉ सुरेन्द्र जैन
नई दिल्ली। जुलाई 31, 2026।
विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय संयुक्त महासचिव डॉ सुरेंद्र जैन ने आज संसद भवन परिसर में विपक्षी सांसदों द्वारा संत वेश धारण कर किए गए भोंडे प्रदर्शन पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने इसे सनातन धर्म, पूज्य साधु-संतों और संपूर्ण हिंदू समाज की धार्मिक भावनाओं का सीधा अपमान और अनादर करार दिया है।
श्री सुरेंद्र जैन ने कहा कि कांग्रेस समर्थित निर्दलीय सांसद पप्पू यादव, कांग्रेस नेता राहुल गांधी तथा समाजवादी पार्टी व कांग्रेस के अन्य सांसदों द्वारा संत वेश में किया गया प्रदर्शन एक बेहद निम्नस्तरीय कृत्य है।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार रावण ने छल-कपट के लिए संत का छद्म वेश धारण किया था, उसी प्रकार ये नेता धार्मिक प्रतीकों का दुरुपयोग कर हिंदू आस्था पर चोट करने का प्रयास कर रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा कि विपक्षी दलों का हिंदू विरोधी रवैया नया नहीं है। श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण में रोड़े अटकाने से लेकर अब तक, ये लगातार सनातनी आस्थाओं को निशाना बनाते रहे हैं। भव्य राम मंदिर बनने के बाद से उपजी बौखलाहट में यह सब किया जा रहा है। हिंदू समाज धैर्यवान और सहिष्णु है, लेकिन उसे अपनी भाषाई व संवैधानिक मर्यादाओं के दायरे से बाहर जाने पर मजबूर न किया जाए।
डॉ जैन ने चुनौती देते हुए कहा कि यदि इन नेताओं में साहस है, तो वे किसी अन्य धर्म के धर्मगुरुओं या मौलवियों का वेश धारण कर उनके प्रतीकों का मजाक उड़ाकर दिखाएं। ऐसा करते ही सड़कों पर उग्र प्रदर्शन होने लगेंगे और उनका बाहर निकलना कठिन हो जाएगा।
विश्व हिंदू परिषद ने माननीय लोकसभा अध्यक्ष से यह पुरजोर मांग भी की कि संसद परिसर में धार्मिक प्रतीकों का इस प्रकार अनादर करने वाले सांसदों के खिलाफ कठोरतम अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही इस अमर्यादित कृत्य और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के विरुद्ध विश्व हिंदू परिषद स्वयं भी कानूनी कार्रवाई करने पर विचार कर रही है।
श्री सुरेंद्र जैन ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि इस प्रकार के कृत्यों पर तुरंत अंकुश नहीं लगाया गया, तो देश के साधु-संतों और संपूर्ण हिंदू समाज का आक्रोश बहुत जल्द सड़कों पर देखने को मिलेगा।
जारीकर्ता:
श्री विनोद बंसल
राष्ट्रीय प्रवक्ता,
विश्व हिंदू परिषद
नई दिल्ली
प्रेस वक्तव्य:
नई दिल्ली - 15 मई 2026. विश्व हिन्दू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता श्री आलोक कुमार ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा भोजशाला संबंधी प्रकरण में दिए गए ऐतिहासिक निर्णय का स्वागत करते हुए कहा है कि यह निर्णय भारत की सांस्कृतिक चेतना, सत्य एवं सनातन परंपरा की महत्वपूर्ण पुष्टि है।
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने यह निर्णय दे दिया है कि धार की भोजशाला हिन्दू मंदिर है। न्यायालय ने कहा कि सैदव ही भोजशाला के पूजा स्थान की पद्द्ति हिन्दू मंदिर की रही है। न्यायालय के निर्णय से भोजशाला में अब निरंतर पूजा का हिन्दुओं को अधिकार मिल गया है। मुसलमानो के लिए भी यह कहा गया है कि वह सरकार से मस्जिद के लिए जगह मांग सकते है।
हम यह अपेक्षा करेंगे कि भोजशाला केवल माँ वाग्देवी की पूजा का स्थान न रहे अपितु पुरातन काल की तरह संस्कृत और धर्मशास्त्रों के अध्ययन का एक वैश्विक केंद्र बने। यह काम समाज और सरकार को मिलकर करना होगा। इस स्थान की ऊर्जा से पुरे जगत में आध्यात्मिक ज्योति फैलेगी।
उन्होंने कहा कि यह फैसला पूरी न्यायायिक पद्धति का पालन करके हुआ है। कोर्ट ने उस ASI को जांच करने के लिए नियुक्त किया था जो इस बारे में भारत की सबसे विशेषज्ञ संस्था है। जांच की प्रतिलिपि दोनों पक्षों को दी गयी। दोनों पक्षों को अपना मत रखने के लिए पर्याप्त समय दिया। विद्वान न्यायाधीशों ने स्वयं मौके पर जाकर उस भवन का निरिक्षण भी किया।
श्री आलोक कुमार ने यह भी कहा कि इस प्रकार से एक वैज्ञानिक विशलेषण करवाने के बाद, सबको सुनकर और प्रत्यक्ष भवन को देखने के बाद यह निर्णय आया है। माननीय उच्च न्यायालय ने उपलब्ध ऐतिहासिक साहित्य, पुरातात्विक साक्ष्यों एवं सतत हिन्दू उपासना की परंपरा के आधार पर यह स्पष्ट रूप से माना है कि भोजशाला देवी वाग्देवी माँ सरस्वती का प्राचीन मंदिर एवं संस्कृत शिक्षा का केंद्र था। यह निर्णय केवल एक स्थल से जुड़ा विषय नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और सभ्यतागत अस्मिता से जुड़ा हुआ है। यह निर्णय संतुलित है, अच्छा है। सब लोगो को यह निर्णय स्वीकार करना चाहिए।
उन्होंने न्यायालय द्वारा केंद्र सरकार को लंदन के ब्रिटिश म्यूज़ियम में स्थापित माँ सरस्वती की प्रतिमा को भारत वापस लाने हेतु प्रस्तुत अभ्यावेदनों पर विचार करने संबंधी टिप्पणी का भी स्वागत किया और कहा कि यह प्रतिमा भारत की सांस्कृतिक आत्मा का प्रतीक है, जिसे उसके मूल स्थान भोजशाला में पुनः स्थापित किया जाना चाहिए।
श्री आलोक कुमार ने यह भी कहा कि यह विषय किसी के हार या जीत का नहीं है। हम सभी को न्यायालयों के आदेशों एवं संवैधानिक प्रक्रियाओं का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने सभी पक्षों से शांति, सौहार्द एवं सामाजिक समरसता बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि यह निर्णय किसी समुदाय की पराजय नहीं, बल्कि ऐतिहासिक सत्य एवं सांस्कृतिक न्याय की पुनर्स्थापना है।
उन्होंने आशा व्यक्त की कि केंद्र सरकार, राज्य सरकार एवं भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण इस निर्णय के अनुरूप भोजशाला मंदिर के संरक्षण, व्यवस्थापन एवं संस्कृत अध्ययन की गौरवशाली परंपरा के पुनर्जीवन हेतु शीघ्र आवश्यक कदम उठाएंगे।
जारी कर्ता:
विनोद बंसल
राष्ट्रीय प्रवक्ता
विश्व हिन्दू परिषद
मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath जी महाराज कल पश्चिम बंगाल के जोरासांको, चकदहा एवं उदयनारायणपुर विधान सभा क्षेत्रों में आयोजित जनसभाओं को संबोधित करेंगे।
4 मई को TMC के टेरर, माफिया राज और करप्शन का अंधेरा छटेगा, पश्चिम बंगाल की समृद्धि एवं विकास का सूर्योदय होगा...
जोरासांको विधान सभा क्षेत्र
LIVE LINK
https://t.co/VH8hw6FuBK
चकदहा विधान सभा क्षेत्र
LIVE LINK
https://t.co/RxcROg4xnS
उदयनारायणपुर विधान सभा क्षेत्र
LIVE LINK
https://t.co/1r7bLgYcWT
लाइव जुड़ें!
https://t.co/IV10q9sJmH
https://t.co/PSCrPvheyP
https://t.co/ORKa9UKwRT
मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. पं. विद्याराम मिश्र को नमन करते हुए जनपद कन्नौज में जी. टी. मार्ग के कि. मी. - 312 से सिकन्दरपुर नौली नन्दपुर दरौरा मार्ग का नाम 'स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. पं. विद्याराम मिश्र मार्ग' करने का निर्णय लिया है।
@UPGovt
सौराष्ट्रदेशे विशदेऽतिरम्ये,ज्योतिर्मयं चन्द्रकलावतंसम्।भक्तिप्रदानाय कृपावतीर्णं,तं सोमनाथं शरणं प्रपद्ये॥
सोमनाथ प्राणप्रतिष्ठा के पावन अवसर पर सभी सनातनियों को हार्दिक शुभकामनाएं।
सोमनाथ में वर्तमान मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा वैशाख शुक्ल पँचमी, तदनुसार 11 मई, 1951 को संपन्न हुई थी।
इस ऐतिहासिक अनुष्ठान भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद जी की उपस्थिति में हुई थी । स्वतंत्रता के बाद इस मंदिर का पुनर्निर्माण सरदार बल्लभ भाई पटेल के प्रयासों से कराया गया, जिसके बाद विधि-विधान से भगवान शिव की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की गई।
यह घटना भारत की सांस्कृतिक पुनर्जागरण और आस्था के पुनर्स्थापन का एक महत्वपूर्ण प्रतीक मानी है।
देश के युवा जो ठान लेते हैं, उसे करके दिखाते हैं। यह हमारी युवाशक्ति का ही सामर्थ्य है कि हमारा राष्ट्र आज तेज गति से विकास के पथ पर अग्रसर है।
व्यसने वाऽर्थकृच्छ्रे वा भये वा जीवनान्तके।
विमृशन् वै स्वया बुद्ध्या धृतिमान् नावसीदति॥
बंगाल सरकार के बजट में Industry के लिए 1,400 करोड़ और IT सेक्टर के लिए 217 करोड़ रुपये रखे गए, जबकि मदरसों के लिए 5,700 करोड़ दिए गए हैं।
ममता जी ने हमेशा से तुष्टिकरण की राजनीति को बढ़ावा दिया है।