25 तबादले हुए, लेकिन ईमानदारी नहीं टूटी।
सड़क किनारे ढाबों से लेकर हाई कोर्ट की कैंटीन तक, तुकाराम मुंढे ने साफ़ कर दिया कि कानून सबके लिए बराबर है।
ऐसे अफसर ही व्यवस्था में भरोसा ज़िंदा रखते हैं। 🇮🇳
@dtptraffic
Dear Traffic Police, this is to report unauthorized parking in the NS block, causing major inconvenience. I'm attaching a photo for your reference. Please take necessary action. @LtGovDelhi@CPDelhi
A protestor says, “We were asked to sit in a place by the Police, and then suddenly some officer received a call and they started to assault us with their lathis. We were treated like terrorists.”
@narendramodi - why do you hate the youth so much? What wrong did we do?
मध्य प्रदेश के छतरपुर में केन बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में लोग प्रदर्शन कर रहे हैं. इसे देश की नदियों को जोड़ने वाली पहली परियोजना बताया गया है. सरकार का कहना है कि इससे मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के 13 ज़िलों में सिंचाई और पेयजल की सुविधा बढ़ेगी. क़रीब 45 हज़ार करोड़ रुपये की इस परियोजना की आधारशिला दिसंबर 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रखी थी. वहीं प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि पुनर्वास और मुआवज़े की प्रक्रिया अब भी अधूरी और अपारदर्शी है. देखिए ये ग्राउंड रिपोर्ट.
रिपोर्ट-एडिट: विष्णुकांत तिवारी
शूट: लोचन माली
पूरे देश में प्रदर्शनकारियों को हटाने से अच्छा है, भाजपा सरकार स्वयं ससम्मान हट जाए।
यदि भाजपाइयों और उनके संगी-साथियों ने इतिहास पढ़ा होता या स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया होता तो वो जानते कि जन-शक्ति जब हर संभावना से निराश हो जाती है, तो वो ख़ुद एक शक्ति बन जाती है।
भाजपा के राज में लोग जीते-जी अपनी चिता ख़ुद सजा के लेट गये, अब इससे ज़्यादा ‘अच्छे दिन’ भाजपा क्या लाएगी। भाजपा का समय पूरा हुआ।
भाजपा का अंतिम दौर शुरू होता है अब…
#चिता_आंदोलन
#केन_बेतवा_विरोध
मध्यप्रदेश के छतरपुर में केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में शांतिपूर्ण जल सत्याग्रह और भूख हड़ताल कर रहे आदिवासियों को जिस तरह पुलिस बल के दम पर हटाया गया, वह लोकतंत्र और संवैधानिक अधिकारो पर सीधा हमला है। क्या सरकार के पास आदिवासियों की आवाज सुनने की संवेदनशीलता खत्म हो गई है?
Thank you for your support @msisodia sir - it is absolutely correct that tomorrow’s march is for our children, for our students, for our youth, for our next generation - and for our democracy!
देश में एक आदिवासी राष्ट्रपति भी है लेकिन वह भी इस आंदोलन को नजरअंदाज कर रही हैं, यह दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है, शर्म आनी चाहिए लेकिन आएगी नहीं। @rashtrapatibhvn