बचपना अमीर और गरीब के बीच कोई फर्क नहीं करता है 🫶❣️
बच्चों का प्रेम निस्वार्थ और सच्चा होता है — वे छोटी-छोटी चीजों में ही खुशियां ढूंढ लेते हैं, जो अमीरी-गरीबी से ऊपर है।
गणतंत्र दिवस परेड के दौरान महाराष्ट्र में BJP मंत्री GIRISH MAHAJAN ने अन्य महापुरुषों का नाम लेते हुए Dr Baba Saheb Ambedkar का नाम जानबूझकर छोड़ दिया.
वहां ड्यूटी पर फॉरेस्ट महिला अधिकारी ने भड़क उठी और अपना विरोध दर्ज कराया.
वहां सेवाओं में तैनात अधिकारियों के एक बड़े वर्ग में रोष है और उन्होंने मंत्री से सार्वजनिक माफी की मांग की है.
BJP का दो चेहरा है. BJP नेता दोहरी भूमिका में जीते हैं. केवल वोट बैंक के लिए AMBEDKAR STATUE बनाया है. यह लोग तो नाम भी नही लेना चाहते. वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है.
अपनी गरीबी, अपनी मुफलिसी से बाहर निकल कर लोग अमीर बनने का ख्वाब देखते हैं.
वहीं टाइटैनिक की Rose Dewitt Bukater अपने पति को धोखा देकर गरीब लड़के से रोमांस कर गरीब बनना चाहती है.
Rose को उसका पति पसंद नही है, जो उसे बहुत प्यार करता है. इस प्यार को वो दखलंदाजी समझती है.
टाइटैनिक के आलीशान फर्स्ट क्लास कंपार्टमेंट में Rose का दम घुटने लगता है.
बेरोजगार, आवारा और घुमक्कड़ जैक डावसन उसे आत्महत्या करने से बचाता है. Rose को इस टपोरी से प्यार हो जाता है.
दोनों छुप छुप कर मिलने लगते हैं. टपोरी जैक, Rose को टाइटैनिक के थर्ड क्लास कंपार्टमेंट में लेकर जाता है,
Rose यहां गरीबों के बीच नाच कर, शराब पीकर और गरीबी अनुभव कर बहुत खुश होती है. फिर दोनों टाइटैनिक के पार्किंग में जाकर S€X भी करते हैं. यहां भी Rose बहुत खुश होती है.
इस घटना के चंद मिनिट बाद टाइटैनिक आइस बर्ग से टकराता है. सब मर जाते हैं, Rose बच जाती है. हैरान की बात है पति का दिया हुआ बेशकीमती ब्लू डायमंड अपने पास ही रखती है.
100 की एक बात Rose बेवफा थी. उसने अपने पति को धोखा दिया. ऑडियंस का पूरा ध्यान टाइटैनिक के डूबने पर था. नही तो फ़िल्म प्लॉप हो जाती.
BIGGEST NEWS 🚨 गंगा सभा नाम के संगठन के अध्यक्ष नितिन गौतम ने उत्तराखंड सरकार से मांग की है
कि हरिद्वार को Only Hindu City घोषित किया जाए. (Source: Times of India)
हरिद्वार के सभी घाटों और कुंभ मेला क्षेत्रों में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है.
उत्तराखंड सरकार ने विरोध करने के बजाय कहा है कि 105 घाटों पर पहले से ही गैर हिंदुओं के प्रवेश पर रोक है, जबकि बाकी मांगों पर विचार किया जाएगा.
आज गैर हिंदुओं के प्रवेश पर पाबंदी लगाई जा रही है, कल परंपरा के नाम पर पिछड़ों, दलितों और आदिवासियों के प्रवेश पर भी किसी स्थान पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है.
गंगा सभा की इन मांगों का विरोध होना चाहिए. जब से पुष्कर सिंह धामी मुख्यमंत्री बने हैं, भगवाधारियों की हिम्मत लगातार बढ़ती जा रही है.
अधिकांश भारतीय लोग इन्हें जानते भी नहीं होंगे लेकिन इन्होंने देश को कई बार गौरवान्वित होने का मौका दिया है।
इस अर्जुन अवॉर्डी पैरा एथलीट का नाम "दीप्ति जीवनजी" है इन्होंने देश के लिए 2024 पैरा ओलंपिक में कांस्य पदक जीता था।
2024 विश्व चैंपियनशिप के 400 मीटर दौड़ में, उन्होंने 55.06 सेकेंड का विश्व रिकॉर्ड बनाया। 🇮🇳🫡👍🇮🇳
मोटा भाई जब फॉर्म में होते हैं, तो अच्छे-अच्छों का 'सिस्टम' हैंग कर देते हैं! 🔥
भरे सदन में साफ कह दिया-
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*नागरिकता थी नहीं और वोटर बन गए*
*विपक्ष का शोर बता रहा है कि* तीर एकदम सही निशाने पर लगा है 🎯
इसे कहते हैं धोबी पछाड़! 😂🇮🇳😡
राष्ट्र प्रेरणा स्थल की चमक उद्घाटन के 1 हफ्ते में ही फीकी पड़ गई। प्रधानमंत्री ने 25 दिसंबर को उद्घाटन किया था। उसके बाद एक हफ्ते में यानी 1 जनवरी को इसे पब्लिक के लिए खोल दिया गया। यहां पूरा नजारा बदला हुआ नजर आया। जो प्रेरणा 25 को चमकता दिख रहा था, वह पूरी तरह अव्यवस्थित और गंदा दिखा। फाउंटेन में काई पड़ चुकी है। स्थल की खाली जगहों पर पॉलिथीन, दोने-पत्तल पड़े हुए हैं। पाथवे के किनारों पर लगे सभी पौधे पूरी तरह से सूख गए हैं।
मालूम हो 65 एकड़ में बना यह स्थल 230 करोड़ रुपए से बनाया गया था। इसकी देखरेख की जिम्मेदारी लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) को है। LDA ने उद्घाटन वाले दिन तो साज-सज्जा पर करोड़ों रुपए खर्च दिए, लेकिन अब स्थिति उलटा हो गई है। 15 रुपए का टिकट भी लगाया गया, इसके बावजूद सफाई नहीं है।
सावित्रीबाई फुले
उन्हें पत्थरों, अपमान और नफरत का सामना करना पड़ा - फिर भी उन्होंने किताबें और उम्मीद अपने साथ रखीं।
भारत की पहली महिला शिक्षिका के रूप में, उन्होंने लड़कियों और दबे-कुचले लोगों के लिए शिक्षा के द्वार खोले।
उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि शिक्षा ही सबसे शक्तिशाली क्रांति है।
एक रसूकदार नेता से ऐसे कठोर सवाल पूछने और बदतमीजी करने पर सबक सिखाने के लिए हिम्मत चाहिए होती है।
आप एक हिम्मती पत्रकार हैं, ऐसे ही पत्रकारिता करते हुए ईमानदार और सच्ची पत्रकारिता को जिंदा रखे।
उम्मीद है, इतना बड़ा बवंडर खड़ा करने के बाद आप सुरक्षित होंगे — क्योंकि ये अब आपको नुकसान पहुंचाने की पूरी कोशिश करेंगे।