लोनी, गाजियाबाद और बुलंदशहर के इलाकों से आने वाले ये संघी गुंडे दिल्ली पुलिस के ‘हिंसा मित्र’ हैं ।
किसी शांतिपूर्ण प्रदर्शन को बदनाम करना हो, हिंसक बनाना हो या माहौल बनाकर लाठीचार्ज की नौबत लानी हो, इस तरह की सेवा के लिए शाह की पुलिस इनका इस्तेमाल करती है।
शाहीन बाग, दिल्ली दंगों और क��सान आंदोलन के दौरान तरह तरह से इन हिंसा मित्रों का प्रयोग किया गया था। इनमें से ज्यादातर भाजपा विधायकों, बजरंग दल और हिंदू शब्द के साथ बने रेंडम संगठनों से जुड़े होते हैं । कई जन्मजात नफ़रती होते हैं, कई इसको माध्यम बनाकर राजनीति में ऊपर जाना चाहते हैं।
दिल्ली पुलिस के कुछ ख़ास अफ़सरों और SHOs को इनके इस्तेमाल की महारत हासिल हो गई है, वो इनसे संपर्क साधकर ख़ास मौकों पर इनकी सेवाएँ लेते हैं।
Delhi had 221 companies of CAPF. Apart from 20K Delhi Police. Complete clampdown. And yet (miraculously) perpetrators with metal knuckles not only entered but violently attacked women & tore their clothes.