विश्वरत्न, महामानव डॉ. बाबासाहब अम्बेडकर जी के 131वें जन्म जयंती के अवसर पर विनम्र अभिवादन एवं सभी बहुजनों को हार्दिक बधाईयां..💐💐
#AmbedkarJayanti#WorldEqualityDay
#हर रोज उठकर मूलनिवासी समाज को जगाने के लिए एक टारगेट फिक्स करो चाहे छोटा सा ही करो, लेकिन करो, और 24 घण्टे में से टाइम का मैनेजमेंट करके उस समय को टारगेट को पूरा (Achieve) करने में लगा दो, आपकी आने वाली हजारों पीढ़ियाँ ब्राह्मणों की एवम ब्राह्मणवाद की गुलामी से आजाद हो जाएगी !
#मेरी_जवानी_मेरे_समाज_के_लिये।
11 अप्रैल 2022, राष्ट्रपिता महात्मा जोतिबा फुले जयंतीदिन, भारतीय विद्यार्थी मोर्चा के 11 वे वर्धापन दिन के अवसर पर सभी मूलनिवासी छात्रों को हार्दिक बधाईयां। 💐💐💐
आज दिनांक 10 अप्रैल 2022 को उत्तर प्रदेश के अर्जुन भाई पटेल भवन, लखनऊ में बामसेफ के ऑफशूट संगठन राष्ट्रीय मूलनिवासी महिला संघ की राष्ट्रीय स्तर की समीक्षा बैठक सफलता पूर्वक संम्पन हुई.
मूलनिवासी बहुजन समाज के विद्यार्थियों का सबसे बड़ा देशव्यापी संगठन #भारतीय_विद्यार्थी_मोर्चा के #11वें_स्थापना_दिन की देशभर के सभी कार्यकर्ता, पदाधिकारियों को एवं बहुजन समाज के सभी लोगों को हार्दिक बधाइयां...💐💐
आधुनिक भारत में क्रांति के प्रणेता, राष्ट्रपिता, महात्मा जोतिराव फुलेजी के 195 वें जयंती के अवसर पर विनम्र अभिवादन एवं सभी मूलनिवासी बहुजनों को हार्दिक बधाईयां...
#राष्ट्रपिता_जोतिराव_फुले#जयंती
अखण्ड और समृद्ध राष्ट्र के निर्माता राष्ट्रनायक महान चक्रवती सम्राट अशोका जी के 2326वें जन्म जयंती के अवसर पर विनम्र अभिवादन एवं सभी बहुजनों को हार्दिक बधाइयां...💐💐
#सम्राट_अशोक#जन्म_जयंती
बामसेफ एवं भारत मुक्ति मोर्चा द्वारा आयोजित
डॉ० बाबासाहब अम्बेडकर जन्म जयंती के अवसर पर विशाल प्रबोधन सम्मेलन
दिनांक-14 अप्रैल 2022 समय- श्याम 4 से 9 बजे तक।
Link - https://t.co/ZQ4QTpgnrM
#बामसेफ_एवं_भारत_मुक्ति_मोर्चा
विश्वरत्न महामानव डॉ. बाबासाहब अम्बेडकर जी के जन्म जयंती के अवसर पर विशाल प्रबोधन सम्मेलन
दि. 14 अप्रैल 2022 को शाम 04 बजे से रात 10 बजे तक, स्थल : अंजार तहसील, जिला-भुज
#अध्यक्षता : मा. वामन मेश्राम साहब (राष्ट्रीय अध्यक्ष, बामसेफ, नई दिल्ली)
क्रांति का क्या अर्थ है?
मैं ऐसा मानता हूँ कि विचार करने का जो तरीका है उसमें अगर मूलभूत परिवर्तन होता है, सोचने का जो नजरिया है, उसमेंं अगर मूलभूत परिवर्तन होता है तो कहा जा सकता है कि यह क्रांतिकारी परिवर्तन है. समाज व्यवस्था में संरचनात्मक परिवर्तन ही क्रांति है|
"जब तक ब्राह्मणशाही एक स्थापित सजीव शक्ति है और जब तक कुछ लोग अपने स्वार्थ के लिए उसके साथ जुडे हैं और दूसरों पर बंधन डाल रहे हैं तब तक जिन लोगों को इस कारण दु:ख झेलना पडा रहा है, उन लोगों को इसके विरुध्द संगठित होना अनिवार्य है|" -डा. बाबासाहब आंबेडकर
आज हमारे देश मे जो चारो ओर साम्प्रदायिक तनाव को हम देखते है, वो योजनाबद्ध षड्यंत्र का एक हिस्सा है और इस देश के उँची जाति के लोग छोटी जाति के लोगों का अधिक दमन एवं शोषण करने के लिए एक हथियार के रुप मे इस साम्प्रदायिकता को बढ़ाते है| यह साम्प्रदायिकता प्रस्थापित वर्ग की ही देन है|