BJP ने OBC समाज के पीठ में छुरा घोंपा है! ओबीसी समाज इसके लिए भाजपा को कभी माफ नहीं करेगा!
: नेता प्रतिपक्ष श्री @UmangSinghar जी.
📍भोपाल | प्रेस कॉन्फ्रेंस
🚨 मध्यप्रदेश के OBC समाज के 27% आरक्षण पर भाजपा सरकार से पाँच सीधे सवाल!
मुख्यमंत्री @DrMohanYadav51 , @BJP4MP, महाधिवक्ता प्रशांत सिंह और @BJP4India नेतृत्व जवाब दें!
9 अक्टूबर 2026 को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने OBC का 27% आरक्षण बढ़ाने वाले 2019 के संशोधन को निरस्त कर दिया।
अदालत ने कहा कि आरक्षण 14% से बढ़ाकर 27% करने के लिए आवश्यक असाधारण परिस्थितियों का पर्याप्त आधार प्रस्तुत नहीं किया गया।
अब सवाल यह है कि सत्ता में रहने के दौरान भाजपा सरकार ने इस मामले में क्या किया?
1️⃣ हाईकोर्ट में OBC समाज के पक्ष में पर्याप्त आंकड़े क्यों नहीं रखे गए?
OBC की वास्तविक आबादी, सामाजिक-शैक्षणिक पिछड़ेपन, सरकारी सेवाओं में प्रतिनिधित्व और रिक्त पदों के प्रमाणित आंकड़े प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की थी। यदि आंकड़े अपर्याप्त थे, तो सरकार ने उन्हें समय रहते जुटाने के लिए क्या किया?
2️⃣ Youth for Equality की WP 18105/2021 और 87:13 का विवाद!
87:13 व्यवस्था न्यायालय द्वारा बनाया गया कोई सामान्य भर्ती फार्मूला नहीं था। राज्य सरकार ने 29 सितंबर 2022 के आसपास इस संबंध में प्रशासनिक निर्देश अपनाए। इसके तहत 13% पद विवाद के समाधान तक रोके गए।
यदि सरकार का उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया जारी रखना था, तो प्रभावित अभ्यर्थियों को वर्षों तक अनिश्चितता में क्यों रखा गया? अब हाईकोर्ट ने इन पदों को तीन महीने में भरने का निर्देश दिया है।
3️⃣ महाधिवक्ता प्रशांत सिंह की भूमिका की समीक्षा कौन करेगा?
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्पष्ट करें कि राज्य का पक्ष रखने के लिए कौन-सी कानूनी रणनीति अपनाई गई, कौन-से आंकड़े पेश किए गए और किन कमियों की ओर अदालत ने संकेत किया। यदि कानूनी तैयारी या सरकारी पक्ष प्रस्तुत करने में लापरवाही हुई, तो निष्पक्ष समीक्षा कर जिम्मेदारी तय की जाए।
4️⃣ नौवीं अनुसूची में शामिल कराने की पहल कहाँ है?
भाजपा सरकार बताए कि OBC आरक्षण की संवैधानिक सुरक्षा के लिए केंद्र सरकार के समक्ष क्या प्रस्ताव रखा गया है। नौवीं अनुसूची में किसी कानून को शामिल करना अपने-आप न्यायिक समीक्षा से पूर्ण सुरक्षा की गारंटी नहीं देता। फिर भी सरकार इस विकल्प सहित सभी संवैधानिक उपायों पर अपना स्पष्ट रोडमैप सार्वजनिक करे।
5️⃣ OBC समाज को राजनीतिक प्रतिनिधित्व का हवाला देकर उसके अधिकारों पर सवाल क्यों?
मुख्यमंत्री या मंत्री का OBC समुदाय से होना अपने-आप यह साबित नहीं करता कि पूरे समुदाय का सामाजिक, शैक्षणिक और सरकारी सेवाओं में पर्याप्त प्रतिनिधित्व है। सरकार को व्यक्तियों की राजनीतिक मौजूदगी के बजाय प्रमाणित सामाजिक और सेवा-संबंधी आंकड़ों के आधार पर अपना पक्ष रखना चाहिए।
भाजपा सरकार से हमारी स्पष्ट मांग
• 27% आरक्षण के मामले में प्रस्तुत सभी प्रमुख आंकड़े और कानूनी रणनीति सार्वजनिक की जाए।
• महाधिवक्ता और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष समीक्षा हो।
• 13% रोके गए पदों पर हाईकोर्ट के निर्देशानुसार समयबद्ध नियुक्तियाँ सुनिश्चित की जाएँ।
• OBC की आबादी, पिछड़ेपन और सरकारी सेवाओं में प्रतिनिधित्व के विश्वसनीय आंकड़े जुटाए जाएँ।
• नौवीं अनुसूची सहित संवैधानिक विकल्पों पर केंद्र और राज्य सरकार अपना स्पष्ट रुख बताएँ।
मुख्यमंत्री जी, OBC समाज को केवल आश्वासन नहीं, ठोस कार्रवाई चाहिए।
2019 में 27% आरक्षण का कानून बना। उसके बाद भाजपा भी सत्ता में रही। सात वर्षों तक चले विवाद के बाद आज लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ा सवाल फिर खड़ा है।
अब जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालने से काम नहीं चलेगा। सरकार को बताना होगा कि OBC आरक्षण का प्रभावी बचाव करने के लिए क्या किया गया और आगे क्या किया जाएगा।
OBC समाज का सवाल है—हमारे अधिकारों के लिए ठोस तैयारी कब होगी और जवाबदेही कब तय होगी?
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OBC समाज के नेताओं को इससे सबक लेना चाहिए! 27% OBC आरक्षण हटाने को भाजपा अपनी जीत कह रही की और हमने OBC समाज को हरा दिया और आरक्षण को 14% कर दिया "द्वितीय स्वरूप"
आज समय की माँग है कि OBC समाज के सभी राजनीतिक दलों के नेता समाज के अधिकारों के लिए एकजुट हों। यदि वे समाज के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा नहीं कर पा रहे हैं, तो उन्हें अपने पदों पर बने रहने के बजाय सामूहिक रूप से इस्तीफा देने पर विचार करना चाहिए।
जिस तरह OBC आरक्षण के मुद्दे पर पिछड़े समाज के हित प्रभावित हुए हैं, उस पर पूरे देश की नजर है।
मध्य प्रदेश में OBC समाज की आबादी लगभग 60% होने का दावा किया जाता है, जबकि समाज को 27% आरक्षण देने की माँग लंबे समय से उठती रही है। लेकिन 27% आरक्षण के स्थान पर 14% आरक्षण तक सीमित रहने की स्थिति को मैं गलत और अन्यायपूर्ण मानता हूँ।
मेरा सवाल OBC समाज के सभी नेताओं से है:
जब समाज के अधिकारों की बात आती है, तो सभी नेता एक मंच पर आकर आवाज क्यों नहीं उठाते? आखिर कब तक समाज के नाम पर राजनीति होगी और समाज अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करता रहेगा?
अब समय आ गया है कि OBC समाज के नेता दलगत राजनीति से ऊपर उठें और अपने समाज के संवैधानिक अधिकारों के लिए एकजुट होकर संघर्ष करें।
समाज को केवल राजनीतिक वादे नहीं, बल्कि अपने अधिकारों की ठोस पैरवी चाहिए।
✊ OBC समाज की एकता ही उसके अधिकारों की मजबूत आवाज है।
— अपने विचारों के साथ, सामाजिक न्याय के पक्ष में
इस घटना ने मणिपुर की घटना की याद दिला दी. नारी सम्मान की बड़ी बड़ी बातें बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, नारी वंदन, आदि सब दिखावा साबित हुआ. किस तरह के यह गुन्डे एक लड़की को दौड़ाकर पीट रहे हैं. किसी भी सरकार को कभी घमंड नहीं पालना चाहिए क्योंकि लोकतंत्र में उसको भी एक दिन जाना है.जीवन और राजनीति में कुछ भी परमानेंट नहीं होता है. इन पर @DelhiPolice कड़ी कार्यवाही नहीं करती है तो माननीय सुप्रीम कोर्ट और देश की माननीय राष्ट्रपति जी इस पर संज्ञान ले कर कार्यवाही कराएँ और एक बेटी को न्याय दिलायें.
दिल्ली पुलिस के सामने BJP-RSS के गुंडे प्रोटेस्टर्स को मार रहे हैं।
मोदी-शाह ने पूरे देश में गुंडाराज कायम कर दिया है।
वीडियो में दिख रहा है कि गुंडे एक लड़की को जमीन पर गिराकर मार रहे हैं और पुलिस तमाशा देख रही है।
मध्यप्रदेश @BJP4MP सरकार की कथित ‘बड़ी जीत’ आखिर किसके खिलाफ है—ओबीसी समाज के खिलाफ?
ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर जवाबदेही तय करो!
@BJP4India सरकार मुर्दाबाद!
@DrMohanYadav51 मुर्दाबाद!
@narendramodi मुर्दाबाद!
@AmitShah मुर्दाबाद!
महाधिवक्ता प्रशांत सिंह मुर्दाबाद
27% ओबीसी आरक्षण पर हाईकोर्ट के फैसले के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी को जवाब देना चाहिए कि ओबीसी समाज को न्याय दिलाने के लिए सरकार ने अदालत में पर्याप्त आंकड़े और ठोस पक्ष क्यों नहीं रखे?
महाधिवक्ता प्रशांत सिंह की भूमिका की निष्पक्ष समीक्षा हो और जवाबदेही तय की जाए। यदि सरकार ओबीसी हितों के प्रति गंभीर है, तो उन्हें पद से हटाने की मांग पर भी स्पष्ट निर्णय ले।
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मूर्ख अकेले नहीं डूबता अपने साथ मालिक को भी ले डूबता है. अंजना ने मजीठिया से ये सवाल पूछकर भी यही किया है - अंततः फिर सिद्ध हुआ कि गंगाधर ही शक्तिमान है.
एक आंदोलनकारी बच्ची पर घूसों से निर्मम प्रहार करनेवाले इस व्यक्ति की AI से तुरंत पहचान की जाए और गिरफ़्तारी हो और ऐसा दंड दिया जाए कि अपनी बेटी के समान बच्ची पर फिर कभी कोई भाजपाई या उनके संगी-साथी या सादी वर्दी के गुर्गे हाथ न उठा सकें।
जो पुलिसकर्मी निष्क्रिय दिख रहे हैं, उनकी भी शिनाख़्त हो और गहन निष्पक्ष जाँच के पश्चात अनुशासनात्मक-दंडात्मक कार्रवाई भी।
सभ्य-लोकतांत्रिक समाज में संकीर्ण नकारात्मक मानसिकतावाले हिंसक लोगों की कोई जगह नहीं होनी चाहिए।
नई पीढ़ी ने भाजपाइयों को ‘कैंसल’ कर दिया है।
देश कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा!
सुनने में आ रहा है मध्यप्रदेश सरकार ओबीसी को 27 %आरक्षण दिलाने के लिए आगे लड़ाई लड़ेगी परंतु आप ये बताइए जिस सरकार ने हाईकोर्ट में जानबूझकर ओबीसी का पक्ष नहीं रखा वो क्या खाक ओबीसी की लड़ाई लड़ेगी,डॉ मोहन यादव जी ये नौटंकी बंद कीजिए ओबीसी वर्ग को 27% आरक्षण का संवैधानिक अधिकार दिलाने के लिए नौवीं अनुसूची में शामिल कराने की ठोस पहल कीजिए।
अमित शाह की दिल्ली पुलिस खुद तो गुंडागर्दी पर उतर ही आई - RSS-BJP के असली गुंडों को भी महिलाओं और युवाओं पर हिंसा करने की खुली छूट और बढ़ावा दे रही है।
जैसा मैंने कहा था, Mogambo Modi और उसकी सरकार जितना दबाएगी, Gen Z और छात्रों का गुस्सा उतना ही बढ़ेगा।
सोमवार, 12 अक्टूबर को कांग्रेस, पूरा INDIA गठबंधन और देश के युवा बड़ी संख्या में एक बार फिर सड़कों पर उतरेंगे। और इस बार भी आवाज़ पूरे देश में गूंजेगी - पहले से कहीं ज़्यादा।
@AmitShah, जितनी पुलिस लानी है, 10 हज़ार, 20 हज़ार, 40 हज़ार, ले आइए। BJP-RSS के जितने गुंडे बुलाने हैं, बुला लीजिए।
हम डरने वाले नहीं हैं। पीछे हटने वाले नहीं हैं। ये लड़ाई अब रुकने वाली नहीं है!
सोमवार को हम मुख्य न्यायाधीश से भी मिलेंगे और मांग करेंगे कि जब दिल्ली की सड़कों पर संविधान को तार-तार किया जा रहा है और लोकतंत्र को कुचला जा रहा है, तब कानून के संरक्षक आंखों पर पट्टी डाल कर नहीं बैठ सकते।
संविधान की धज्जियां उड़ेंगी और हम चुप बैठेंगे? ऐसा हरगिज़ नहीं होगा। जवाबदेही तय करवाकर रहेंगे!
इस साहसिक पत्रकार ने बड़ा काम किया है। इसीलिए यू ट्यूबर पर खीझ निकाली जा रही है। Some Youtuber कहा जा रहा है। इसी Some ने सरकारी संरक्षण में गुंडागर्दी का More evidence जमा कर दिया। अगर यह संरक्षण नहीं है तो सरकार बताए कि इनके ख़िलाफ़ क्या कार्रवाई हुई? इस तरह की घटना वहाँ कैसे हो गई जहाँ कई हज़ार सुरक्षा बल तैनात थे।