काशी की विश्वनाथ गली में आज भी एक पीले दरवाज़े के पीछे स्याही की महक ठहरी है। वहाँ पंडित हरिशंकर त्रिपाठी बैठते थे, शहर के आख़िरी चिट्ठी लिखने वाले। - न कंप्यूटर, - न प्रिंटर, - बस एक चौकी, - पीतल की दवात, - बाँस की कलम और चश्मे के पीछे झाँकती थकी आँखें। लोग कहते, पंडित जी, अब कौन चिट्ठी लिखता है? फोन कर दो न। वो हँस कर कहते, “बेटा, फोन बात पहुँचाता है, चिट्ठी बात को रोक कर रखती है।” ◆ पहली चिट्ठी 2006 के सावन में, जब *अस्सी घाट* पर पहली बार मोबाइल रिचार्ज की दुकान खुली थी, एक ग्यारह साल की लड़की भीगी चोटी लिए आई थी। नाम था अप्पू, असली नाम अपर्णा मिश्रा। “बाबा, बाबूजी को चिट्ठी लिखनी है। वो सूरत में कपड़ा मिल में हैं।” हरिशंकर ने पूछा, “क्या लिखवाओगी?” अप्पू ने थोड़ा सोचा, “लिखो कि आँगन का बेल पक गया है, और मैं रोज़ शाम को बाबूजी की खड़ाऊँ चौखट पर रख देती हूँ ताकि लगे वो गंगा नहा के अभी आएँगे।” पंडित जी ने वही लिखा, धीरे धीरे। नीचे अप्पू से गोल-गोल अक्षरों में नाम लिखवाया। वो चिट्ठी सूरत पहुँची। तीन हफ्ते बाद जवाब आया, और अप्पू फिर आई। फिर हर महीने। समय सरका। पीला बक्सा आज शाम, वैशाख की लू में जब घाट पर धूप तप रही थी, अपर्णा — अब BHU में संस्कृत की असिस्टेंट प्रोफेसर — उसी पीले दरवाज़े पर लौटी। दरवाज़ा बंद था। बगल की पान वाली अम्मा ने बताया, पंडित जी पिछली माघ में चले गए। चौकी खाली थी, बस कोने में एक स्टील का बक्सा रखा था। उस पर खड़िया से लिखा था: “अप्पू बिटिया के लिए।” अपर्णा ने खोला। अंदर कार्बन कागज़ों की गड्डियाँ थीं। हरिशंकर हर चिट्ठी की नकल अपने पास रख लेते थे। पहली नकल — “बेल पक गया है...” दूसरी — “बाबूजी, दीवाली पर मत आना, अम्मा कहती हैं टिकट महँगा है, पर मैं अपनी चाँदी की पायल बेच दूँगी, आप आ जाओ।” दसवीं — “बाबूजी, मैं दसवीं में फर्स्ट आई।” बीसवीं — “बाबूजी, अम्मा को दमा बढ़ गया है।” पचासवीं — “बाबूजी, आज मेरी नौकरी लगी, BHU में। आपकी खड़ाऊँ अब भी चौखट पर हैं।” हर नकल के नीचे पंडित जी की छोटी टिप्पणी: “लिखते समय चुप हो गई थी। दवात में गंगाजल मिलाया।” या “आज बहुत हँसी, बोली बाबा, इस बार मिठाई लाऊँगी।” सबसे नीचे एक बंद लिफाफा था, जिस पर लिखा था — “मेरे बाद पढ़ना।” अंदर पंडित जी की काँपती लिखावट: "बिटिया, मैं चिट्ठी लिखने वाला हूँ, पर एक चिट्ठी मैंने छुपाई। 2011 में तुम्हारे बाबूजी का आख़िरी पत्र आया था, सूरत के सरकारी अस्पताल से। उन्होंने लिखा था, अगर मुझे कुछ हो जाए तो अप्पू को मत बताना, वो पढ़ाई छोड़ कर आ जाएगी। मैं हर महीने मनीऑर्डर भिजवाता रहूँगा, तुम बस मेरी तरफ से जवाब लिखते रहना, जैसे मैं ठीक हूँ।" मैंने पंद्रह बरस तक तुम्हारे बाबूजी बन कर उत्तर लिखे। मुझे क्षमा करना। पर देखो न, तुम पढ़ीं, तुम पढ़ाती हो, तुम्हारी अम्मा ने तुम्हें टूटने नहीं दिया। कभी-कभी एक झूठ, सच से ज़्यादा जीवन देता है। अब ये बक्सा तुम्हारा है। चाहो तो गंगा में प्रवाहित कर देना, चाहो तो कक्षा में पढ़ाना। अपर्णा की आँखों से आँसू टपके और दवात की सूखी स्याही फिर गीली हो गई। ◆आख़िरी चिट्ठी उस रात अपर्णा ने पीला दरवाज़ा फिर खोला। चौकी पोछी, दवात में नई स्याही घोली। गली के बच्चे झाँकने लगे। उसने पहली चिट्ठी खुद पंडित जी के नाम लिखी: “बाबा, आज समझा कि चिट्ठी पहुँचती नहीं, रुकती है। आपने मेरे बाबूजी को पंद्रह साल तक मेरे पास ज़िंदा रखा। अब मैं आपकी चौकी ज़िंदा रखूँगी। हर शनिवार शाम दो घंटा, जो भी आएगा, मैं उसके लिए चिट्ठी लिखूँगी। बिना पैसे। बस एक शर्त, वो उसे पढ़ कर सुनाएगा, ताकि शब्द हवा में ठहरें।” उसने चिट्ठी मोड़ कर दवात के पास रख दी। अगले शनिवार एक ज़ोमैटो वाला आया, हेलमेट हाथ में, “दीदी, गाँव में दादी को मैसेज भेजना है, लिख दोगी?” अपर्णा हँसी, “बैठो। पहले बताओ, दादी क्या बनाती थीं?” लड़का बोला, “बाजरे की रोटी और गुड़।” उसने बाँस की कलम डुबोई और लिखना शुरू किया — “दादी, काशी में आज लू है, पर तुम्हारे हाथ की बाजरे की रोटी की याद आते ही पसीना भी मीठा लगने लगता है...” बाहर शंख बजा, घाट पर आरती की घंटियाँ बजीं, और अंदर पीले दरवाज़े के पीछे कलम कागज़ पर चलती रही। कभी-कभी शहर बदल जाते हैं, पर कुछ दरवाज़े जानबूझ कर पुराने रखे जाते हैं, ताकि लौटने पर स्याही की महक हमें नाम से पुकार ले। सौजन्य- गंगा शरण सिंह
मैं पिछले दो वर्षों से रोज रेल यात्रा करता हूँ लेकिन एक विशेष ट्रेन की चर्चा करना चाहूँगा जिस पर यात्रा करते हुए मैं हमेशा सचेत रहता हूँ।
सचेत का तात्पर्य आप ये लगा रहें होंगे की उस ट्रेन में चोरी और पॉकेटमारी होती होंगी। जी हाँ..! होती है लेकिन एक बात जो मैं अनुभव करता हूँ।
Sir, in train number 12568 there are so many spider nets available it shows that there is not cleaning in a good manner. Please, as a responsible citizen I want a clean India.
जिस आवाज़ से छठ की शुरूआत हुआ करती थी, वही आवाज़ छठ के शुरू होते ही ख़ामोश हो गई। शारदा सिन्हा जी अब हमारे बीच नहीं हैं। शारदा सिन्हा ने अपनी गायकी से ऐसी सामूहिकता का सृजन किया जिसे पहचानने के लिए ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाना नहीं पड़ता है बल्कि चुपचाप अपने भीतर महसूस करना होता है। उनके गीत छठ का हिस्सा हैं। कहते हैं छठ में कुछ भी बाहरी परिवर्तन नहीं हुआ, जो पुराना है वही चला आ रहा है सिवाय शारदा सिन्हा के छठ गीतों के। क्या कोई छठ को शारदा सिन्ही की आवाज़ से अलग कर सकता है? इन्हीं दिनों लाउड स्पीकर बजने लगते हैं। खेत खलिहानों और नदी किनारे बने घाटों से आ रही उनकी आवाज़ गांव-घर बुलाने लग जाती है।शारदा सिन्हा की आवाज़ बिहार जैसे ग़रीब राज्य की सबसे बड़ी समृद्धी थी। आज बिहार थोड़ा ग़रीब हो गया। हम आपको अपनी यादों में रखेंगे। जब रोएँगे अपनों की याद में, आपको भी याद करेंगे। अलविदा शारदा जी।
अंग्रेजी साहित्य के विद्यार्थी और शिक्षक होने के वावजूद,जब जन्म लिया तब "माँ" शब्द से लेकर जब मरूंगा "मृत्यु" शब्द तक, माँ आप मेरे प्रिय हैं और रहेंगी।
चरण स्पर्श और प्यार आपको माँ हिन्दी 🙏❤️
TRE 2 में चयनित अभ्यर्थियों को काउंसलिंग में निम्न कागजात प्रस्तुत करना होगा :-
1. बिहार लोक सेवा आयोग की विद्यालय अध्यापक नियुक्ति परीक्षा, 2023 का मूल प्रवेश-पत्र एवं उसकी एक स्वअभिप्रमाणित छायाप्रति ।
2. मूल आधार प्रमाण पत्र एवं उसकी स्वअभिप्रमाणित छाया प्रति ।
3. सभी शैक्षणिक एवं प्रशैक्षणिक प्रमाण-पत्रों की मूल एवं बिहार लोक सेवा आयोग के वेबसाईट पर अपलोड किए गए प्रमाण पत्रों की डाऊनलोड प्रति, जिसमें बिहार लोक सेवा आयोग का वाटरमार्क परिलक्षित हो, की एक-एक स्वअभिप्रमाणित छाया प्रति।
4. CTET/BTET/STET उत्तीर्णता प्रमाण-पत्र मूल एवं बिहार लोक सेवा आयोग के वेबसाईट से डाऊनलोड वाटरमार्क प्रति की स्वअभिप्रमाणित छाया प्रति।
5. पासपोर्ट साईज का तीन फोटोग्राफ, जैसा कि आयोग द्वारा आयोजित परीक्षा में शामिल होने हेतु पूर्व में आयोग मे ऑनलाईन / ऑफलाईन जमा किया गया था।
6. आरक्षण दावा से संबंधित मूल प्रमाण-पत्र एवं उसकी एक बिहार लोक सेवा आयोग के वेबसाइट से डाऊनलोड वाटरमार्क प्रति की स्वअभिप्रमाणित छाया प्रति ।
7. जन्म तिथि में छूट (यदि लागू हो) से संबंधित दावा का प्रमाण-पत्र एवं बिहार लोक सेवा आयोग के वेबसाइट से डाऊनलोड वाटरमार्क प्रति की स्वअभिप्रमाणित छाया प्रति।
8. Counselling हेतु उपस्थित होने वाले वर्ग 9-10 एवं वर्ग 11-12 के सफल अभ्यर्थी Orientation (लगभग दो सप्ताह) हेतु तैयारी के साथ आएंगे।
9. अनुशंसित अभ्यर्थी अपने आधार कार्ड एवं इससे लिंक्ड मोबाईल नम्बर के साथ उपस्थित होंगे।
10. पंचायती राज/नगर निकायों के नियुक्त शिक्षक एवं आयोग द्वारा अनुशंसित अभ्यर्थी औपबंधिक नियुक्ति के पश्चात् एक पक्ष के अन्दर अपने नियोजन इकाई से अनापत्ति प्रमाण पत्र एवं विरमन प्रमाण पत्र प्राप्त कर संबंधित जिला शिक्षा पदाधिकारी को समर्पित करेंगे।
11. अनुशंसित अभ्यर्थी अपने बैंक एकाउन्ट नम्बर के साथ Cancelled Cheque/Pass Book की प्रति भी साथ लेते आएंगे।
12. सभी अनुशंसित अभ्यर्थी अपना पैन नम्बर से संबंधित पैन कार्ड भी साथ लेते आएँगे।
#One_Candidate_One_Result
यदि ऐसा होगा तो कितने ही छात्र बेरजोगारी की भयावह रोग से बच जायेंगे और इसका अच्छा परिणाम ये होगा की हमारा राष्ट्र एक ईमानदार और मेहनती युग का निर्माण करेगा।
जय हिन्द 🙏
शहीद भगत सिंह जी की जन्मतिथि को याद करते हुए उन्हें पूर्ण श्रद्धांजलि देता हूं और उनके सुझाए पथ पर चलने का आशीर्वाद मांगता हूं।
#भगत_सिंह#birthdaybhagatsingh#शहीद