@Vijay_DUSU चुनाव हार गये, किन्तु उनके संयमित भाषा, आपको भविष्य का नेतृत्व मिलता हैं, वो अपनी बात सहज रुप से रखते हैं, भाई नरेश मीणा व अन्य छात्र नेताओं मे ये कमी देखी जा सकती हैं,
आज राजस्थान निकाय अध्यक्ष चुनाव में जिस तरह की तस्वीरें सामने आई है, उसके बाद मुझे लगता है कि देश में चुनाव अब बंद करवा देने चाहिए।
जब वोट चाहे किसी को ही मिल रहा हों, जब सरकार एक की ही बननी है तो चुनाव की क्या ज़रूरत?
दिल्ली विश्वविद्यालय चुनाव परिणाम अपडेट
After round 3
P
Yash Dabbas 3100
Vijay Meena 3600
VP
Deepanshu Shokeen 4200
Ishu M 2400
Sec
Riya C 2800
Namrata C 2332
JS
Lakshay S 2200
Vishesh Y 3000
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनावों को वर्षों से केवल विचारधाराओं की लड़ाई मानना अपने-आप को धोखा देना होगा।
यहाँ विचार के साथ जाति है, संगठन के साथ सामाजिक समीकरण हैं और उम्मीदवार की योग्यता के साथ यह गणित भी चलता रहा है कि किस समुदाय के कितने वोट किस कॉलेज में हैं। खासकर अध्यक्ष पद की राजनीति लंबे समय से जाट–गुर्जर प्रभाव के इर्द-गिर्द घूमती रही है। और सबसे अधिक गिरावट इस बात है कि एबीवीपी से आए शिक्षक आज भी नैतिकता बोध को सबसे ऊपर रखने के बजाय अपने उम्मीदवारों के प्रति हर तरह की चुनावी धांधलियां करते हैं। यह शर्मनाक है।
इसीलिए DUSU चुनाव 2026 में आदिवासी पृष्ठभूमि के विजय शंकर मीणा को NSUI का अध्यक्ष पद का प्रत्याशी बनाना केवल उम्मीदवार बदलने की घटना नहीं है। हालांकि Times of India तक ने भी इसे परंपरागत जाट–गुर्जर समीकरण से स्पष्ट विचलन के रूप में दर्ज किया है। यह ठीक नहीं है। संगठनों में चेहरे बदलते हैं तो कार्यशैली और सोच-विचार में भी बदलाव होता है और विनोद ने जिस ज़मीनी स्तर से उठकर जिस तरह काम किया है, वह शायद एनएसयूआई के इतिहास में लंबे समय बाद पहली बार ही हो रहा है।
इस निर्णय को समझने के लिए विनोद जाखड़ की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। 20 फरवरी 2026 को उन्हें NSUI का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया और वे इस पद तक पहुँचने वाले राजस्थान के पहले नेता बने। स्वयं दलित पृष्ठभूमि से जाखड़ राजस्थान विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। अर्थात् वे छात्र राजनीति को ऊपर से देखने वाले नियुक्त पदाधिकारी भर नहीं हैं; वे उसी चुनावी व्यवस्था से निकले हैं, जिसमें टिकट, जाति, संसाधन, संगठन और व्यक्तिगत जनाधार आदि सबकी शक्ति उन्होंने स्वयं देखी है। और यह उल्लेखनीय है कि विनोद ने अपने आपको वैचारिक धरातल पर बहुत सलीके से स्थापित करने की कोशिशें की हैं।
यहीं DUSU 2026 का टिकट-वितरण अर्थपूर्ण हो जाता है। विजय शंकर मीणा राजस्थान के एक साधारण किसान-मजदूर परिवार से हैं और दिल्ली विश्वविद्यालय में बौद्ध अध्ययन के विद्यार्थी हैं। NSUI ने उन्हें अपने सबसे महत्वपूर्ण पद अध्यक्ष का उम्मीदवार बनाया। इसे जाति की राजनीति समाप्त करना कहना सही नहीं होगा; भारतीय समाज में प्रतिनिधित्व का प्रश्न स्वयं सामाजिक पहचान से जुड़ा है। लेकिन इसे कुछ प्रभावशाली जातियों की चुनावी उपयोगिता से आगे बढ़कर वंचित और कम प्रतिनिधित्व वाले समुदाय को राजनीतिक दृश्यता देने का प्रयास अवश्य कहा जा सकता है। यही जातीय गणित और सामाजिक न्याय की राजनीति के बीच बुनियादी फ़र्क़ है।
जाखड़ के नेतृत्व में NSUI का पैनल भी केवल पोस्टर और नारे तक सीमित नहीं रखा गया। संगठन ने विजय शंकर मीणा को अध्यक्ष, वीर चतरथ को उपाध्यक्ष, नम्रता चौधरी को सचिव और गोपाल चौधरी को संयुक्त सचिव प्रत्याशी बनाया। इसके साथ जारी “Accountable DU: Accountable DUSU” घोषणापत्र में सस्ती छात्र-आवास व्यवस्था, रियायती मेट्रो पास, menstrual leave, 24x7 लाइब्रेरी, सस्ती कैंटीन, बेहतर वाई-फाई, परीक्षा और पुनर्मूल्यांकन में पारदर्शिता जैसे ठोस परिसर-आधारित मुद्दे रखे गए। यानी प्रतिनिधित्व की राजनीति के साथ रोजमर्रा के छात्र जीवन को जोड़ने की कोशिश दिखाई देती है।
लेकिन विनोद जाखड़ की राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में राजनीतिक शैली को समझने का शायद अधिक महत्वपूर्ण उदाहरण NEET-UG 2026 का पेपर-लीक प्रकरण है।
मई में जब NEET की परीक्षा-व्यवस्था और कथित पेपर-लीक को लेकर संकट सामने आया, जाखड़ ने इसे केवल प्रेस-कॉन्फ्रेंस का विषय नहीं बनाया। 14 मई तक Indian Express दिल्ली में शिक्षा मंत्रालय के सामने उनके नेतृत्व में NSUI के प्रदर्शन को दर्ज कर चुका था। इसके बाद NTA के खिलाफ प्रदर्शन हुए और जाखड़ ने गुवाहाटी, हैदराबाद तथा जयपुर सहित अलग-अलग शहरों में आंदोलन का नेतृत्व किया। 23 मई को सीकर में छात्रों और युवाओं के साथ मार्च करते हुए उन्होंने निष्पक्ष जाँच, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और परीक्षा-व्यवस्था में जवाबदेही की माँग उठाई।
इस घटनाक्रम की टाइमलाइन महत्वपूर्ण है। 25 मई को Indian Express ने लिखा कि जाखड़ के अलग-अलग शहरों में चलाए जा रहे इन प्रदर्शनों से कांग्रेस नेतृत्व प्रभावित था और राहुल गांधी ने उनसे आंदोलन को आगे जारी रखने को कहा था। यानी उपलब्ध रिकॉर्ड से कम-से-कम इतना साफ है कि शीर्ष नेतृत्व का प्रोत्साहन आने से पहले जाखड़ कई शहरों में NEET के मुद्दे को सड़क पर राष्ट्रीय छात्र आंदोलन का रूप देने में जुट चुके थे। यह फ़र्क़ छोटा नहीं है: संगठन का राष्ट्रीय अध्यक्ष केवल ऊपर से आए निर्देश को लागू करे और राष्ट्रीय नेतृत्व को किसी मुद्दे की ओर नीचे से खींच ले, दोनों नेतृत्व-शैलियाँ अलग हैं।
जाखड़ के दौर की दिलचस्प विशेषता इसी में दिखाई देती है। एक तरफ NEET जैसे प्रश्न पर सड़क का आंदोलन; दूसरी तरफ DUSU में प्रत्याशी चयन के पुराने सामाजिक समीकरण को चुनौती; और तीसरी तरफ घोषणापत्र को हॉस्टल, किराया, परिवहन, लाइब्रेरी, महिला विद्यार्थियों और अकादमिक जवाबदेही जैसे वास्तविक छात्र प्रश्नों से जोड़ना। ये तीनों चीजें मिलकर NSUI की राजनीतिक भाषा में बदलाव का संकेत देती हैं।
विजय शंकर मीणा की उम्मीदवारी इसलिए सबसे प्रतीकात्मक है। दिल्ली विश्वविद्यालय जैसे परिसर में किसी आदिवासी, साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि वाले विद्यार्थी को सर्वोच्च छात्र पद की दौड़ के केंद्र में रखना अपने आप में प्रतिनिधित्व की सीमा को विस्तृत करता है। चुनाव में हार-जीत इसका एक परिणाम होगी; लेकिन उम्मीदवार बनाया जाना भी राजनीति का एक तथ्य होता है। राजनीति केवल यह नहीं तय करती कि कुर्सी पर कौन बैठेगा, वह यह भी तय करती है कि किसे उस कुर्सी तक पहुँचने योग्य समझा जाएगा।
विनोद जाखड़ के नेतृत्व का अभी पूरा मूल्यांकन करना जल्दबाजी होगी, उन्होंने राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद फरवरी 2026 में ही संभाला है। लेकिन शुरुआती महीनों के रिकॉर्ड में एक स्पष्ट प्रवृत्ति दिखाई देती है: संगठन को सड़क पर ले जाना, विद्यार्थी के ठोस प्रश्नों को राजनीतिक मुद्दा बनाना और टिकट को केवल स्थापित जातीय वोट-बैंकों की अंकगणित न मानकर सामाजिक प्रतिनिधित्व का औजार बनाना। मुझे कई बार हैरानी भी होती है कि कांग्रेस नेताओं ने "छाऋों की गूँज" कार्यक्रम शुरू करके विनोद जाखड़ की भूमिका ऐसे समय थोड़ा मोड़ दी, जब वे पॉलिटिकली नेक्स्ट ऑर्बिट को लांघने के करीब थे। अगर उस समय यह नया कार्यक्रम नहीं आता और विनोद के वे प्रदर्शन जारी रहते तो यह कांग्रेस के पक्ष में एक ख़तरनाक बदलाव होता, जो कुछ सप्ताहों बाद कॉकरोचों के पक्ष में दिखा।
DUSU 2026 में जाखड़ ने जाति को राजनीति से गायब करने का दावा नहीं किया; उन्होंने यह सवाल बदलने की कोशिश की कि जाति की राजनीति किसके प्रभुत्व के लिए होगी और सामाजिक प्रतिनिधित्व किसके लिए खुलेगा। जाट–गुर्जर प्रभुत्व वाली पारंपरिक अध्यक्षीय गणित के बीच विजय शंकर मीणा की उम्मीदवारी इसी परिवर्तन का सबसे दृश्यमान उदाहरण है। आज परिणाम चाहे जो आएँ, लेकिन विनोद ने DUSU 2026 की ज़मीन को नए तरीके से बदलने की कोशिश की है और इस काँग्रेस के पक्ष ज़रख़ेज़ बनाया है। विनोद जाखड़ ने एनएसयूआई के अब तक रहे अध्यक्षों की तरह पलक पर जगमगाकर दो घड़ी की ऐश वाला काम नहीं किया है। उसने रोशनी बन कर संगठन के अंदर ही अंदर फैल जाने वाला काम किया है।
@VinodJakharIN@RahulGandhi@nsui@INCIndia #DUSU2026
मैं डरने वाला नहीं हूँ। हमारी आवाज को दबाया नहीं जा सकता। हमारी जीत देखकर सरकार डर गई है, इसलिए पुलिस का सहारा लेकर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है।
एक दलित समाज का बच्चा लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव लड़ रहा है—हम उसके साथ मजबूती से खड़े हैं।
संघर्ष जारी रहेगा, जीत हमारी होगी। ✊
#NSUI #DUSUElections #ArjunChaprana #StudentRights @RahulGandhi@SachinPilot@Rahulkherli1@VinodJakharIN@NayakRagini@nsui
#DU के चुनाव पर अबकी बार पूरे देश की नजर हैं क्या होगा और यह फैसला छात्र शक्ति करेगी, और निश्चित ही छात्र शक्ति से उम्मीद हैं की वो अपना वोट कास्ट करते समय जातिवाद पूंजीवाद से उपर उठकर DU के मुद्दों पर वोट कास्ट करेंगे, और आने वाली नई जनरेशन को रास्ता दिखायेंगे
#Vote_For_NSUI
DUSU चुनाव सिर्फ पदों का चुनाव नहीं, बल्कि छात्रों के अधिकार, सुरक्षित कैंपस और जवाबदेही की लड़ाई है। पेपर लीक, महंगे PG और कोचिंग के दबाव से लेकर सत्यनिकेतन हादसे तक - छात्रों के सवालों पर जवाबदेही तय होनी चाहिए।
18 सितंबर को छात्रहित, सुरक्षित कैंपस और न्याय की आवाज़ को मजबूत करें।
NSUI DUSU Panel 2026-27:
6️⃣ विजय शंकर मीणा — अध्यक्ष
4️⃣ वीर चतरथ — उपाध्यक्ष
1️⃣ नम्रता चौधरी — सचिव
2️⃣ गोपाल चौधरी — सह-सचिव
Vote & Support NSUI Panel: 6 • 4 • 1 • 2 💙
#DUSU2026 #DelhiUniversity #NSUIForABetterDU
#DUSU का चुनाव गांव देहात का पंचायत चुनाव नहीं हैं, यह सम्पूर्ण देश के छात्रों को नयी दिशा देने का चुनाव हैं, जातिवाद क्षेत्रवाद बाहुबली पूंजीवाद से उपर उठकर आप अपनी समस्याओ और मुद्दों को ध्यान में रखकर वोट करेंगे आप एक विश्वविद्यालय के छात्र हो
ये लड़का पता कौन है
ये लड़का कोई बड़े घर से नहीं है
किसी बड़े नेता का बालक नहीं है
ये है आम घर का लड़का विजय शंकर मीणा . DUSU में इस बार विनोद जाखड़ ने जबरदस्त खेल किया है अमीर घरों के लड़कों को पीछे रख कर एक आम को टिकट दिया है NSUI का . अब देखते है पब्लिक आम को चुनती है या ख़ास को .
पहले ख़ुद आम घरों के लड़को को वोट नहीं देते है फिर कहते है आम घरों के लड़को को टिकट नहीं मिलता है मौक़ा मिला है इस बार खेल कर दो आम जनता ❤️
दिल्ली विश्वविद्यालय चुनाव 2026: क्या गुंडागर्दी और गाली-गलौज बनेगी DU की पहचान?
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव 2026 की गर्माहट के बीच हाल ही में सामने आई एक वायरल ऑडियो रिकॉर्डिंग ने विश्वविद्यालय के लोकतांत्रिक माहौल और छात्र राजनीति की गरिमा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ABVP के कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा #NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष #विनोद_जाखड़ और NSUI के अध्यक्ष पद प्रत्याशी विजय शंकर मीणा के खिलाफ कथित तौर पर की गई अभद्र भाषा, गाली-गलौज और धमकी भरे लहजे ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कैंपस में स्वस्थ राजनीति की जगह बाहुबल और डर का माहौल बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
दिल्ली विश्वविद्यालय देश का एक प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान है, जहाँ विचार-विमर्श और लोकतांत्रिक मूल्यों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। लेकिन चुनावी बहस के बजाय गाली-गलौज और गुंडागर्दी का सहारा लेना छात्र संघ की साख को ठेस पहुँचाता है।
जब किसी प्रत्याशी या संगठन के पास हॉस्टल, फीस वृद्धि, महिला सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं जैसे वास्तविक मुद्दों पर बात करने के लिए कोई ठोस योजना नहीं होती, तो वे अक्सर गाली-गलौज और व्यक्तिगत हमलों का सहारा लेते हैं।
इस तरह की गुंडागर्दी आम छात्रों, विशेषकर दूर-दराज से आए विद्यार्थियों में असुरक्षा की भावना पैदा करती है।
जो प्रत्याशी चुनाव प्रचार के दौरान ही बदसलूकी और गाली-गलौज पर उतर आए, वह जीत के बाद छात्रों के अधिकारों की रक्षा कैसे करेगा?
दिल्ली विश्वविद्यालय चुनाव में एनएसयूआई के प्रत्याशी #विजय_शंकर_मीणा ने लगातार कैंपस में एक शांत, संयमित और जन-पक्षधर नेतृत्व का उदाहरण पेश किया है।
विजय शंकर मीणा का मुख्य एजेंडा कैंपस में पारदर्शी व्यवस्था, किफायती शिक्षा और विद्यार्थियों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना है।
हिंसा और धमकी के विपरीत, उन्होंने हमेशा बातचीत और लोकतांत्रिक विरोध के जरिए छात्रों की समस्याओं को हल करने का मार्ग चुना है।
सुरक्षित कैंपस का संकल्प: दिल्ली विश्वविद्यालय को भयमुक्त और सम्मानजनक माहौल देने के लिए एक ऐसे नेता की आवश्यकता है जो हर छात्र की आवाज बन सके।
18 सितंबर 2026 को होने वाले मतदान में दिल्ली विश्वविद्यालय के जागरूक छात्रों को यह तय करना होगा कि वे दिल्ली विश्वविद्यालय में किस तरह की संस्कृति चाहते हैं। गाली-गलौज, अहंकार और बाहुबल को नकारते हुए विजय शंकर मीणा के पक्ष में वोट देना केवल एक प्रत्याशी का समर्थन नहीं, बल्कि दिल्ली विश्वविद्यालय में लोकतंत्र, मर्यादा और छात्र हितों को मजबूत करने का संकल्प होगा।
बैलेट नं 6️⃣
विजय शंकर मीणा
अध्यक्ष पद प्रत्याशी
#VinodJakhar
#nsuiforabetterdu
#delhiuniversity #delhiuniversityelection
#dusu2026
@VinodJakharIN@NSUIDelhi
NSUI ने DUSU के चुनाव को वर्चस्व की लडाई बना दी हैं, और संकेत कर दिए हैं की ये चुनाव ABVP से नहीं हैं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हैं और बीजेपी भी जानती हैं की यदि NSUI चुनाव जीतती हैं तो दिल्ली मे छात्रों के धरने प्रदर्शन चलते रहेंगे जो 2029 की लडाई को मुश्किल करेंगे
मेरे एक बात समझ नहीं आयी DUSU चुनाव मे राजस्थान के दो होनहार NSUI से उम्मीदवार हैं, पुरे देश की नजर DUSU चुनाव पर हैं,देश के बडे बडे नेता भाग ले रहें हैं,स्वयं राहुल गांधी जी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी भी नजर बनाएं हुए हैं,किन्तु राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष का एक ट्वीट