कभी किसी समस्या का ज़िक्र करने कि अपे़क्षा उसके निदान का ज़िक्र करना चाहिए और सब मिलकर निदान का इतना अधिक जिर्क करेगें तब पृकृति मजबूर हो जाएगी उसका निदान बताने के लिए और कोरोना से हमें मुक्ति मिलेगी यह पृकृति का नियम है। जय सच्चिदानंद
जो हिमालय में साधना करने में मिलेगा क्या घर में साधना करने में नहीं मिल सकता यही प्रश्न भगवान बुद्ध से पूछा गया था उत्तर बिलकुल मिलेगा परन्तु उस समय जानता न था मोदी जी से संसार के सारे काम करते हुए भी साधना करने से वह मिल जाएगा
आज का प्रधान मन्त्री का भाषण देश के विकास के लिए सबसे अच्छा भाषण था इससे अच्छा दिया ही नहीं जा सकता भाषण के अन्दर बोलने से ज़्यादा करने की इच्छा थी हम देशवासी ख़ुशनसीब है कि हमें ऐसा प्रधान मन्त्री मिला
ध्यान के द्वारा परमात्म�� को पाया जा सकता है जिसने भी पाया ध्यान के द्वारा ही पाया नाम जाप,प्राणायाम ,ध्यान,समाधि, के द्वारा परमात्मा को पाया जा सकता है
यही वास्तिविक योग है जब अल्पज्ञ का सर्वज्ञ से जोड़ शुरु हो जाता है उसे पाना बहुत आसान है
है श्वास का कुछ Part पीनियल में आता है वह पीनियल गलैड श्वास के उस Part से प्राण ऊर्जा ग्रहण करके हमारे नाड़ी तन्त्र में प्रवाहित करता है नाड़ी तन्त्र या नर्वस सिस्टम ही हमारे पूरे शरीर को स्वस्थ रखता है नाड़ी तन्त्र शुद्ध होने पर शरीर की
प्रतिरोधक क्षमता (Resistance Power) बढ़ती
है इसके लिए हमें ध्यान की मुद्रा में बैठकर रीड़ की हड्डी को सीधा रखकर दोनों भोंह के बीच में ध्यान लगाना है इससे पीनियल
Active हो जाती है और प्राणायाम शुरु हो
जाता है यही वासतिविक प्राणायाम है
जय सच्चिदानंद
है बाह्य वातावरण में प्राण ऊर्जा प्रचुर मात्रा में विद्यमान है उस प्राण ऊर्जा का अपने अन्दर विस्तार प्राणायाम कहलाता है,कैसे
इसके लिए हमें नाड़ी तन्त्र को जानना होगा नाड़ी तन्त्र में ही प्राण ऊर्जा का विस्तार होता है नाड़ी तन्त्र का उदगम स्थान पीनियल ग्लैड है जब हम श्वास लेते
आज प्राणायाम के बारे
प्राणायाम क्या है प्राणायाम दो शब्दों से मिलकर बना है प्राण + आयाम,प्राण का अर्थ है प्राण ऊर्जा,आयाम का अर्थ यहॉ विस्तार से है प्राण ऊर्जा का अपने अन्दर विस्तार प्राणायाम कहलाता है
अभी तक हमने प्राणायाम के नाम पर केवल श्वास के व्यायाम को ही प्राणायाम माना
योग दिवस पर कुछ नया
अभी तक व्यायाम को ही हम योग मानते है जबकि अल्पज्ञ का सर्वज्ञ से मिलन योग कहलाता है,किसी नाम या मन्त्र का जाप करने से हमारा नाड़ी तन्त्र शुद्ध हो जाता है और हमारा शरीर निरोगी हो जाता है
केवल नाम जाप से ही शरीर को निरोगी बना सकते है और ध्यान के द्वारा उसे प
योग दिवस पर कुछ नया
अभी तक व्यायाम को ही हम योग मानते है जबकि अल्पज्ञ का सर्वज्ञ से मिलन योग कहलाता है,किसी नाम या मन्त्र का जाप करने से हमारा नाड़ी तन्त्र शुद्ध हो जाता है ���र हमारा शरीर निरोगी हो जाता है
केवल नाम जाप से ही शरीर को निरोगी बना सकते है और ध्यान के द्वारा उसे प