करीब सभी स्कूलों में
प्रधान शिक्षकों को
प्रभार मिला है,
लेकिन मुझे,
प्रभार नहीं,
हां,
आश्वासन कई बार मिला है।
जय जय बिहार जय जय बिहार,
हम स्कूल चला रहे बिना प्रभार!!
@4MaZlEcjpJxPOT0@TrUmeshYadav3@NitishKumar@sidarths बिल्कुल,
जो प्रभारी थे समझदार,
उन्होंने सौंप दिया प्रभार,
जिन्होंने किया भ्रष्टाचार,
उन्होंने सौंपा नहीं प्रभार।
टिकारी ब्लॉक में एक प्रभारी द्वारा अभी तक प्रभार नही सौंपने का जो कारण बताया गया, स्तब्ध कर देने वाला है। बीडीओ उनसे इतना काम ले रहे हैं कि उन्हें समय ही नही मिल रहा।
@KSaveena@TrUmeshYadav3 यदि ऐसा है,
तो सीएम महोदय @NitishKumar तथा
एसीएस महोदय @sidarths को इस पर संज्ञान लेना चाहिए, क्योंकि यह बिहार के शैक्षणिक स्वास्थ्य के लिए खतरे की घंटी है।
ACS द्वारा VC में दिए गए निर्देश सराहनीय हैं। फिर भी निर्देश बिंदु (2) में अनावश्यक विलम्ब किया जाएगा जबकि बिंदु (4) से अनुश्रवण कर प्रधान शिक्षकों पर कार्रवाई अविलंब होगी, क्योंकि बिना वित्तीय प्रभार के ये आधे-अधूरे हैं।
इस भ्रष्ट तंत्र की फौज में,
प्रभारी प्रधान हैं मौज में!!
बीपीएससी द्वारा परीक्षा से प्रधान बनने वालों को प्रभार लेना ही होगा,
एमडीएम और कैश बुक में गोदना गोदने वालों को प्रभार देना ही होगा।
प्रभारी द्वारा तैयार प्रभार प्रपत्र यदि प्रखंड शिक्षा कार्यालय द्वारा प्रमाणित कर दिया जाए तो सारे विवाद स्वत: सुलझ जाएंगे,
यह न्यायोचित भी होगा।
शिक्षा विभाग Full Form में,
प्रधान शिक्षकों की Real में जल्द पोस्टिंग,
21 से 25 July के बीच योगदान,
17 को नियुक्ति पत्र वह भी online,
It's a big surprise, very fine!
अभ्यर्थियों को ससमय उपलब्ध कराने हेतु औपबंधिक नियुक्ति पत्र, विद्यालय पदस्थापन पत्र तथा प्रारूप योगदान प्रपत्र कल दिनांक 17-07-2025 से किये जा सकते हैं प्रिंट आउट।
दिनांक 21-07-2025 से दिनांक 26-07-2025 तक स्कूल में योगदान समर्पित करने का मिला है अवसर।
@BiharEducation_
@TrUmeshYadav3 इस बार लगता है जल्द का मतलब जल्द होने वाला है क्योंकि सरकार और शिक्षा विभाग दोनों गंभीर हैं। गठबंधन में रहते हुए भी माननीय मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी की अपनी पहचान है। वे अपना स्टैंड कायम रखते हैं। बीजेपी ने यदि शिक्षा में सहयोग किया तो यह पोस्टिंग जल्द होगी।
यह 'जल्द' शब्द जनवरी 2025 से ही सुनते आ रहे हैं। अभी जुलाई 2025 में भी यही शब्द सुनाई दे रहा है!
सरकार स्वार्थी हो तो जल्द का सही अर्थ केवल विधायक, सांसद, मंत्री, मुख्यमंत्री तथा प्रधानमंत्री के शपथ ग्रहण के संदर्भ में होता है। जब बात जनहित की आती है तो यह 'जल्द' शब्द विलम्ब का
मजबूत व्यक्ति माफ करता है जबकि कमजोर व्यक्ति बदला लेता है।
गलत तो गलत होता ही है लेकिन अहीरों के सही होने पर भी और स्वजाति के गलत होने पर भी अन्य जातियां एकजुट हो जाती हैं। दूसरी तरफ अहीर अन्य जातियों के पक्ष में अहीर से ही लड़ जाते हैं। इसलिए अहीर महान होते हैं।
@TrUmeshYadav3@UIDAI इस पर संबंधित प्राधिकरण को संज्ञान लेना चाहिए। समस्या का शीघ्र समाधान कर आधार जारी किया जाए,
या आवेदन को रद्द किया जाए ताकि फिर से आवेदन दिए जा सकें।
ये बच्चे बिहार के सरकारी विद्यालय में नामांकित हैं जहां आधार अनिवार्य रूप से मांगा जा रहा है।
@NitishKumar