दृष्टि आकाश में आस का एक दिया
तुम बुझती रही मैं जलाता रहा
तुम ग़ज़ल बन गई गीत में ढल गई
मंच से में तुम्हें गुनगुनाता रहा
@DrKumarVishwas#HBD_Kaviraj 💐🌸
एक बनफूल था इस शहर में वो भी न रहा
कोई अब किस के लिए लौट के आना चाहे
ज़िंदगी हसरतों के साज़ पे सहमा-सहमा
वो तराना है जिसे दिल नहीं गाना चाहे
@DrKumarVishwas#HBD_Kaviraj •🌼💐