जड़ हूँ।
जड़ बोले तो मूर्ख,
जो मिट्टी में मिलकर
अवसर देता है
अपने से जुड़ों को
पुष्पित,पल्लवित हो
खिलने का महकने का।
मेरा होना
कितना अनिवार्य है
चुनाव आपका।
@Prity73321456 जबतक नहीं होगा नारी का सम्मान ।
तब तक सृष्टि बनी रहेगी असमान।
दुर्गा काली सरस्वती सब बन बैठी नेतानी हैं
किससे आश करोगी बहना सबका मर गया पानी है।।
खुद की पीड़ा से मुक्ति का खुद हो उठो प्रयास करो।
अपनी बात कहो साहस से औरों में भी विश्वास भरो।।
नमन
आप माने या माने, Abdul अब आपके घर में Enter हो चुका है...!! 🔥🔥
Abdul अब सिर्फ पंचर ही नहीं लगाता....!!
Abdul अब सिर्फ बम ही नहीं फोडता....!!
Abdul अब सिर्फ पत्थरबाज़ी ही नहीं करता...!!
"अब्दुल अब Smart हो गया है" 😎😎
अब्दुल अब हिन्दुओं के घरों तक पहुंच गया है ✅💥🤫
अब्दुल अब आपकी बहन बेटियों को मेहंदी भी लगाता है..!!
अब्दुल अब आपकी बहन बेटियों के हाथों पर टैंटू भी बनाता है...!!
अब्दुल अब आपकी बहन बेटियों के हाथ पकडकर जिम में योगा सिखा रहा है....!!
अब्दुल अब आपकी बहन बेटियों को साड़ी ब्लाउज पहना रहा है.....!!
अब्दुल अब आपकी बहन बेटियों का फेसियल और मसाज कर रहा है....!!
एक स्त्री की साड़ी खींचने पर जिस देश में "महाभारत" हो गया हो,
उस देश की बहन बेटियां आधुनिकता और पश्चिमी सभ्यता के नशे में चूर होकर जाहिल मलेच्छों के पास लूटने स्वयं जा रही हैं...!!
और हम आंखें 👀 बंद किये बैठे हैं...!!
☝️ सोचियेगा अवश्य ।
@DesiVaidya हमारे गुरुकुल हुआ करते थे विद्यालय हुआ करते थे पाठशालाएं थीं पर स्कूल कॉलेज और कांवेंट सरकार के या उसके वित्तपोषित नियंत्रण वाले हैं। वे भारतीय संस्कृति को शिक्षा के नाम पर विकृत कर रहे हैं।
@myogioffice@myogiadityanath एक सनातन ही तो है जिसके दम पर संसार टिका है और उसी को तोड़ने के चौतरफा प्रयास हो रहे हैं।
बाहर वालों से अधिक अंदर वाले खतरनाक हैं।
कल रात को मैसेज फोन पर आया जिसे आज देखा। जिसके अनुसार मेरे कार्ड से 41300रुपए निकाले गए। न मैं बीमार हूं न कहीं कोई इलाज ले रहा हूँ।
इसकी जांच होनी चाहिए
मेरे नाम कोई आयुष्मान कार्ड भी नहीं बना है।
यह बड़े दुख व चिन्ता की बात है कि पिछले कुछ समय से अकेले यू.पी. में ही नहीं बल्कि अब तो फिल्मों में भी ’पंडत’ को घूसखोर आदि बताकर पूरे देश में जो इनका अपमान व अनादर किया जा रहा है तथा जिससे समूचे ब्राह्मण समाज में इस समय ज़बरदस्त रोष व्याप्त है, इसकी हमारी पार्टी भी कड़े शब्दों में निन्दा करती है। ऐसी इस जातिसूचक फिल्म (वेब सीरीज) ’घूसखोर पंडत’ पर केन्द्र सरकार को तुरन्त प्रतिबन्ध लगाना चाहिये, बी.एस.पी. की यह माँग। साथ ही, इसको लेकर लखनऊ पुलिस द्वारा प्राथमिकी दर्ज करना उचित कदम।
@Yadavashu007@Shubhamshuklamp चलो एक एक कर बताओ सिद्ध करो लिखकर यहां
कि आपके होने से देश को क्या और कितना लाभ हो रहा है।
आप कितने उपयोगी हो देश के लिए ?
#समाज को क्या लाभ हो रहा है आपके होने से?
@MR_COOL77777 क्यों भाई यूहीं ट्विटर पर लिखकर पूछ लेने से कोई बना देता है क्या प्रधानमंत्री मैं भी साक्षात्कार देना चाहूंगा।
मुझे बना दो एक बार
युग बदल जाएगा
हां, आपका मत आंशिक रूप से सही है—1947-1950 में डोमिनियन स्टेटस के कारण नेहरू की शपथ ब्रिटिश क्राउन से थी, और संक्रमण काल में ब्रिटिश सिस्टम पर निर्भरता थी। लेकिन नेहरू ने स्वतंत्रता आंदोलन में नेतृत्व किया, संविधान निर्माण करवाया, और आधुनिकीकरण पर फोकस किया, जो भारत के हित में था। इतिहासकारों के अनुसार, यह संक्रमण पूर्ण स्वतंत्रता की ओर कदम था।
हां, संविधान सभा के सदस्यों ने 1946 में पहली बैठक में कोई ब्रिटिश क्राउन के प्रति निष्ठा की शपथ नहीं ली। वे केवल रजिस्टर पर हस्ताक्षर करके उपस्थिति दर्ज कराते थे। सभा का उद्देश्य संविधान बनाना था, और स्वतंत्रता के बाद यह संप्रभु हो गई। सीखने की प्रक्रिया विभिन्न स्रोतों से हुई, जिसमें ब्रिटिश मॉडल शामिल थे, लेकिन भारतीय जरूरतों के अनुरूप। और जानना चाहें?
@grok@KarishmaAziz_ जी भारतीय संविधान सभा के सदस्यों को भी शपथ दिलाई गई होगी और वह शपथ भी वही या वैसी ही रही होगी।
किसी को कुछ पता नहीं था। कार्य करते हुए देखकर काम को सीखा जा सकता है। पर ऐसा क्यों करते हैं यह जानने के लिए सुनना और समझना भी होता है । कई कई बार।
तो ब्रिटिश शासन से ही सिखा होगा।
हां, आपकी बात में दम है। नेहरू की शपथ ब्रिटिश प्रभाव के तहत थी, लेकिन अंतरिम सरकार ने स्वतंत्रता के बाद भारत के हितों को प्राथमिकता दी। ट्रांज़िशन में ब्रिटिश सलाह ली गई, पर नेहरू ने भारतीय संविधान सभा के माध्यम से लोकतांत्रिक ढांचा तैयार किया। क्या कोई विशिष्ट पहलू पर और जानना चाहते हैं?
@grok@KarishmaAziz_ जी क्या आप बता सकते हैं कि जब भारत का संविधान ही नहीं बना था तो जवाहर लाल नेहरू ने किसकी निष्ठा की शपथ लेकर प्रधानमंत्री का पद भार संभाला था।
प्रथम लोकसभा (1952-57) में पुलिस एक्ट 1861 में कोई प्रमुख संशोधन नहीं हुआ। भारतीय दंड संहिता में आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम 1952 द्वारा आर्थिक अपराधों और त्वरित सुनवाई के लिए सीमित बदलाव किए गए। आपराधिक जनजातियों को 1952 के निरसन अधिनियम से मुक्त किया गया; क्रांतिकारियों को 'आतंकी' दर्जे से मुक्त करने का कोई विशिष्ट प्रस्ताव नहीं लाया गया, हालांकि सामान्य क्षमादान और सम्मान प्रदान किए गए।