राइजिंग राजस्थान: कुछ जरूरी सुझाव...
भजनलाल शर्मा सरकार की महत्वाकांक्षी राइजिंग राजस्थान समिट-2024 से पहले प्रवासी राजस्थानी और जाने माने सामाजिक कार्यकर्ता संदीप भूतोड़िया ने इस आलेख के माध्यम से कुछ बेहद महत्वपूर्ण और जरूरी मुद्दे उठाए हैं। भूतोड़िया के अनुसार प्रव��सी निवेशक सबसे बड़ी पूंजी हैं लेकिन कुछ उद्योगपति इसके लिए उचित बुनियादी ढांचे की कमी को जिम्मेदार ठहरा���े हैं। फिर जब राजस्थान से समझौते के लिए प्रतिनिधिमंडल जाते हैं तो अफसरों और मंत्रियों के पास परियोजनाओं को मंजूरी देने के लिए जरूरी अधिकार ही नहीं होते हैं। एक और बड़ी समस्या ये शिकायतें हैं कि जब राज्य के मंत्री या प्रतिनिधिमंडल प्रवासी राजस्थानियों से मिलने उनके शहरों में जाते हैं तब अलग व्यवहार करते हैं और जब प्रवासी राजस्थानी उनसे मिलने राजस्थान आते हैं तो उनका बर्ताव अलग होता है। क��� मंत्री निवेश के लिए आमंत्रित किए गए मेहमानों को मुलाकात के लिए समय तक नहीं देते। अगर यह सही है तो प्रवासी राजस्थानियों को लुभाने के लिए प्रतिनिधियों को भेजने में समय, ऊर्जा और संसाधनों की ऐसी बर्बादी होनी ही क्यों चाहिए? सरकार को यह उपेक्षापूर्ण रवैया दूर करने के लिए तुरंत जरूरी कदम उठाने होंगे। एक जरूरी सुझाव और है कि प्रवासी राजस्थानियों को आकर्षित करने के लिए भावनात्मक बंधनों और उनके पूर्वजों के सामाजिक निवेश व योगदान से जुड़े विशेष सत्र भी आयोजित होने चाहिए क्योंकि नई पीढ़ी ने अपने पुरखों की जन्म भूमि और उनके द्वारा बनाए गए स्कूलों व अस्पतालों से संपर्क खो दिया है।
@sundeepbhutoria @essbeewrites @BhajanlalBjp @Ra_THORe @kkvishnoibjp @RajCMO
"आ बैल मुझे मार" या कहो "उपर मुंह कर थूका हुआ मुंह पर वापस गिरना"
सरदार साहब के साथ यही हो रहा है कुछ कंटको की टीम बनाकर महिलाओ को ट्रोल कर X पर तथाकथित प्रसिद्धि पाने वाले #वामपंथी_चुजे की हालत आज ढोलक से कम नही है कोई आये और बजा जाये ("कर्मा इज बैक")
अब आते हैं मुद्दे पर......
श्रीनगर के लालचौक पर तिरंगा फहराना अपनी मौत को निमंत्रण देना होता था। फहराना तो दूर हाथ मे लेकर वहा से निकलना भी बङी उपलब्धी थी आज वहा पर तिरंगे के साथ भगवा झंडा और दिवाली के दिये 🪔 जग रहे है जो संपुर्ण भारत को खूशी एंव गौरवान्वित करता है।
उसी संदर्भ मे पत्रकार महोदय श्री @arvindchotia जी द्वारा एक पोस्ट को कोट कर लिखा "आखिर यह कैसे संभव हुआ?"
जवाब मे परविक्षाकाल के दौरान ताज़ा-ताज़ा APO हूये सरकारी व्याख्यात��� @JATbera1 जी ने जो लिखा है वो तस्वीर मे देख सकते है।
मुर्खो की फौज के अलावा संभवतः कोई भी पढ़ा-लिखा एंव हिंदुत्व मे आस्था रखने वाला इंसान उनके जवाब को बर्दाश्त नही कर सकता तो धार्मिक आस्था वाले चोटिया जी कैसे कर पाते और उन्होंने भूगोल, इतिहास और समसामयिक ज्ञान देते हुये "दे बेल्ट-दे बेल्ट" कर दिया जो आप पढ़ 👇 सकते है।
बाकी आप इनकी पोस्ट के कमेंट सेक्शन मे जाकर भी देख सकते है की APO व्याख्याता की लोग ���ैसे भद्द पीट रहे है।
किरकिरी करवाने के बाद के हमेशा की तरह जातीवादी गैंग के सस्ते ट्रोलर्स द्वारा चौटिया जी को जाती पर ट्रोल करना और इमोशनल कार्ड के अलावा कुछ न था।
जल्दबाजी में स्वंय का बचाव करने के लिये भैराराम जी द्वारा इमोशनल कार्ड खेलने की कोशिश मे आचार संहिता नियमो का हवाला देकर पुनः अपने पद और ज्ञान पर संदेह करवा दिया
सरदार के पांचवीं पास जातीवादी ट्रोलर्स को इतिहास, समसामयिकी और सामाजिक ज्ञानवर्धन के लिए कुछ बिंदू :- 👇
1. आचार संहिता की पालना करनी थी तो बेवजह किसी की पोस्ट पर जाकर टिप्पणी करनी जरूरी थी?
जहां आपको टैग नही किया गया वहा जाकर बेहुदा टिप्पणी ताकी कॉन्ट्रोवर्सी मे बने रहे परंतु सामने से इच्छा के अनूरूप प्रतिउत्तर की बजाय कठोर संदेश मिला तो बचाव मे पतली गली पकङने के लिये आचार संहिता याद आ गई।
आचार संहिता उल्लंघन का डर हो वहां जाना उचित नही और दूसरी बात उङाता तीर लेने चले गये थे तो कश्मीर मे शांती और मौजूदा माहौल स्थापित करने के लिए भारत सरकार के साथ भारतीय सेना का भी अहम योगदान था। इसके अलावा भी आचार संहिता नियमो के दायरे मे दसो जवाब लिखे जा सकते थे।
2. छोटी-छोटी बात पर अनेको X युजर को पुलिस की धमकी, थान�� मे शिकायत और पुलिस को मेंशन करने वाले को आज खुद की शिकायत होने पर नही बिलबिलाना चाहिए और जब स्वयं को डर लगे तो यह भी सुनिश्चित करना चाहिए की भविष्य मे ऐसी ग़लती स्वयं न करे।
3. बेशक पत्रकारिता वृद्धावस्था मे चली गई है लेकिन आपने शिक्षा को किस अवस्था मे पहुंचाया वो राज्य के युवा भली-भांति जानते है।
4. अध्यापक होना ज्ञानी व समझदार होने का प्रमाणपत्र नही है अध्यापक हो या थानेदार फूंफाजी की कृपा और आशीर्वाद हो तो सब संभव है पेपर और इंटरव्यू फाइट किया कोई शिक्षक जेल की हवा खा रहा है तो कोई फरारी भी काट रहा है
हाल ही में भर्ती हुये थानेदारो ने भी पेपर और इंटरव्यू फाइट किये थे जिनमे कुछ जेल मे है और कुछ जाने वाले है।
5. कश्मीर घाटी मे इस्लामिक आतंकवाद से सिर्फ पंडित समुदाय पिङित नही था अन्य हिंदू जातीया भी पिङित थी चूंकी पंडित आबादी ज्यादा थ��� तो ज्यादा टार्गेट हुये।
6. पश्चिमी UP और पाकिस्तान के सिंध-पंजाब के वर्तमान मुस्लिम इतिहास के जाट थे 18 वी शताब्दी मे इस्लामिक शासन से तंग आकर कुछ लङे, मरे कुछ इस्लाम कबूल किये और कुछ पलायन कर सुरक्षित जगहो पर शरण लिये
मुजफ्फरनगर दंगा- सर्वविदित है क्यो हुआ था कैराना के सैंकड़ो जाट परीवारो को अपनी बहन-बेटियो की इज्जत बचाने और परीवार का सरंक्षण रखने के लिये पलायन करना पङा।
अंततः राकेश टिकैत ज��से जाट नेताओ ने माफी भी मांगी।
7. लाखो फोलोवर्स होने का अच्छे विचार होने से कतई मतलब नही है
🔹भारत मे आतंकी संगठन हमास और हिजबुल्ला के करोड़ो समर्थक मिल सकते है।
🔹आतंकी अफजल के जनाजे मे लाखो लोग शामिल हो सकते हैं।
🔹आतंकी इमरान तिहाड़ जेल में रहकर लाखो वोट प्राप्त कर MP चुनाव ज��त सकता है
🔹मियाँ खलिफा के भी 60 लाख फोलोवर्स है।
अर्थात फोलोवर्स अच्छाई का पैमाना नही है।
8. कलियुग पीक पर है पुर्व लिखित पुस्तको का कवर बदलकर भी लेखक बना जा सकता है 3 लाइन के FIR पत्र मे 7 गलतिया करने वाला भी पुस्तक लेखक बन सकता है
वर्णित पुस्तक मे 1 बिंदू ऐसा नही है जो नया हो या पुर्व किताबो मे लिखा हुआ न हो
पुस्तक के कवर और लेखक के नाम के अलावा कुछ भी नया नही, कवर के अलावा किसी भी बिंदू पर लेखक व टीम ��्वारा शोध नही
देश की विभिन्न सरकारी और गैर सरकारी संस्थाओं ने #दीपावली पर #पटाखे न चलाने का संदेश दिया है।
सभी मे एक चीज कॉमन थी वो "कुत्तो को पटाखो से डर"
संदेश स्पष्ट है की #पटाखो से सिर्फ कुत्तो को दिक्कत है अन्य किसी को नही।
खुशी-खुशी #दिवाली मनाओ थोङी देर में हम भी आ रहे है।
#दीपावली2024
#Deepavali2024
कपील मिश्रा जी यह विडियो नहीं देखा तो कुछ नहीं देखा।
कुछ हिंदुओं को समझ नहीं आया मोदी क्या कर रहा है लेकिन जिहादियों को समझ आ गया
देश के अंदर बाहर सारे हिंदुओं के दुश्मन @narendramodi के ख़िलाफ़ एक हो गये हैं ....
जि* हादियों को पता हैं कि उनके और हिंदुओं के बीच मोदी दीवार बनकर खड़ा है
हिंदू ह्रदय @KapilMishra_IND जी द्वारा @JaipurDialogues में...... 🔥