यदि किसी ग्राहक से नियमों के विपरीत शुल्क लिया जाता है, शिकायत करने पर वास्तविक मुद्दे का जवाब देने के बजाय केवल औपचारिक उत्तर देकर मामला बंद कर दिया जाता है, और संबंधित नियमों की प्रति तक उपलब्ध नहीं कराई जाती, तो यह गंभीर चिंता का विषय है। @pnbindia@RBI@FinMinIndia@PMOIndia
क्या @pnbindia का CGSP केवल प्रचार तक सीमित है?
एक Defence Civilian कर्मचारी ने PNB में CGSP Salary Account के आधार पर Personal Loan लिया। पहले Loan Account पर ₹13,511 Processing Fee काटी गई। बाद में वह Loan Account बंद हुआ और राशि वापस कर दी गई।
लेकिन जब नया Loan Account बनाकर ₹11 लाख का अंतिम लोन स्वीकृत हुआ, तो फिर से ₹13,511 Processing Fee और Documentation Charges काट लिए गए।
शिकायत करने पर भी PNB ने केवल पहले वाले Refund का हवाला देकर मामला बंद कर दिया, जबकि शिकायत का विषय अंतिम Loan Account से दोबारा काटी गई Processing Fee था। न यह बताया गया कि CGSP के तहत यह शुल्क क्यों लिया गया और न ही संबंधित CGSP Circular/Guidelines की प्रति उपलब्ध कराई गई।
यदि CGSP Salary Account धारकों को कोई विशेष लाभ नहीं मिलता, तो फिर इस योजना का उद्देश्य क्या है? और यदि लाभ मिलते हैं, तो पात्र ग्राहकों से Processing Fee क्यों वसूली जा रही है?
PNB को पारदर्शिता दिखानी चाहिए, संबंधित नियम सार्वजनिक करने चाहिए और शिकायतों का वास्तविक समाधान करना चाहिए। केवल औपचारिक जवाब देकर शिकायत बंद करना ग्राहकों के साथ न्याय नहीं है। @RBI@FinMinIndia@PMOIndia
पश्चिम बंगाल के दक्षिणेश्वर रेलवे स्टेशन पर एक लोकल ट्रेन के ऊपर 11,000 वोल्ट का ओवरहेड बिजली का तार टूटकर गिर गया। सभी यात्री ट्रेन के अंदर ही थे, लेकिन सभी सही सलामत ट्रेन से बाहर निकल गए स्टेशन पर भगदड़ मच गई। इतना भयानक हादसा भारत में आज से पहले कभी नहीं हुआ था। भगवान सबकी रक्षा करे।
सरकारी बैंक का काम केवल पैसा वसूलना नहीं, बल्कि नियमों के अनुसार ग्राहकों को उनका अधिकार देना भी है। यदि ग्राहकों को अपने ही वैध अधिकारों के लिए बार-बार लड़ना पड़े, तो यह बैंकिंग व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। @pnbindia@FinMinIndia@PMOIndia
PNB @pnbindia को यह समझना होगा कि ग्राहक उसकी मजबूरी नहीं, बल्कि उसकी सबसे बड़ी पूंजी हैं। इतिहास के सहारे नहीं, बल्कि ईमानदारी, पारदर्शिता और जवाबदेही के आधार पर ही कोई बैंक वास्तव में नंबर-1 बन सकता है।
पीएनबी @pnbindia देश का पहला सरकारी बैंक होने का गौरव रखता है, लेकिन केवल इतिहास से नहीं, बल्कि ग्राहकों के भरोसे से भी नंबर-1 बना जाता है।
जब ग्राहकों को अपने ही वैध अधिकारों के लिए बार-बार शिकायत करनी पड़े, एक ही मामले में स्पष्ट जवाब न मिले और पारदर्शिता के बजाय औपचारिक उत्तर देकर शिकायतें बंद कर दी जाएँ, तो यह ग्राहक सेवा पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
ग्राहकों का विश्वास किसी भी बैंक की सबसे बड़ी पूंजी होता है। यदि नियमों और योजनाओं के लाभ स्पष्ट नहीं बताए जाते या शिकायतों का संतोषजनक समाधान नहीं किया जाता, तो यह बैंक की साख को कमजोर करता है।
PNB को ग्राहकों के साथ पूर्ण पारदर्शिता, निष्पक्षता और जवाबदेही के साथ कार्य करना चाहिए। सरकारी बैंक से यही अपेक्षा होती है। @RBI@FinMinIndia@PMOIndia
क्या @pnbindia का CGSP केवल प्रचार तक सीमित है?
एक Defence Civilian कर्मचारी ने PNB में CGSP Salary Account के आधार पर Personal Loan लिया। पहले Loan Account पर ₹13,511 Processing Fee काटी गई। बाद में वह Loan Account बंद हुआ और राशि वापस कर दी गई।
लेकिन जब नया Loan Account बनाकर ₹11 लाख का अंतिम लोन स्वीकृत हुआ, तो फिर से ₹13,511 Processing Fee और Documentation Charges काट लिए गए।
शिकायत करने पर भी PNB ने केवल पहले वाले Refund का हवाला देकर मामला बंद कर दिया, जबकि शिकायत का विषय अंतिम Loan Account से दोबारा काटी गई Processing Fee था। न यह बताया गया कि CGSP के तहत यह शुल्क क्यों लिया गया और न ही संबंधित CGSP Circular/Guidelines की प्रति उपलब्ध कराई गई।
यदि CGSP Salary Account धारकों को कोई विशेष लाभ नहीं मिलता, तो फिर इस योजना का उद्देश्य क्या है? और यदि लाभ मिलते हैं, तो पात्र ग्राहकों से Processing Fee क्यों वसूली जा रही है?
PNB को पारदर्शिता दिखानी चाहिए, संबंधित नियम सार्वजनिक करने चाहिए और शिकायतों का वास्तविक समाधान करना चाहिए। केवल औपचारिक जवाब देकर शिकायत बंद करना ग्राहकों के साथ न्याय नहीं है। @RBI@FinMinIndia@PMOIndia
आज चड्ढा भी पेपर लीक पर राज्य सभा में स्पीच दे रहे है। भारत सरकार में पेपर लीक हुए एक शब्द भी नहीं बोला केवल राज्य सरकारों को कोश रहे है। जिनकी गोद में बैठकर भाषण दे रहे हो वो तो दूध के धुले है। उनके तलवे चाटों और मौज करो। राज्यसभा भी पंजाब वालो ने दी है असली हो तो इस्तीफा दो और बीजेपी की सीट से आकर दिखाओ।
क्या जनता पर शुल्क का बोझ कम करने की ज़रूरत नहीं है?
यदि पिछले कुछ वर्षों में मिनिमम बैलेंस न रखने के नाम पर बैंकों द्वारा हजारों करोड़ रुपये वसूले गए हैं, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या ऐसी शुल्क व्यवस्था आम ग्राहकों, खासकर गरीब और मध्यम वर्ग, के हित में है।
बैंकिंग सेवाओं का उद्देश्य लोगों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना होना चाहिए, न कि छोटे खाताधारकों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालना।
क्या अब समय नहीं आ गया कि न्यूनतम बैलेंस से जुड़े शुल्कों की समीक्षा की जाए? यदि किसी बैंक द्वारा नियमों का उल्लंघन, अनुचित शुल्क वसूली या उपभोक्ता हितों की अनदेखी की जाती है और यह जांच में सिद्ध होती है, तो उसके खिलाफ कड़ी नियामकीय कार्रवाई और उचित दंड सुनिश्चित होना चाहिए।
जनता का पैसा सुरक्षित रखना और ग्राहकों के हितों की रक्षा करना नियामक संस्थाओं और बैंकों, दोनों की जिम्मेदारी है। बैंकिंग व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और उपभोक्ता हित सर्वोच्च प्राथमिकता होने चाहिए।
झारखंड के युवा आखिर किस पर भरोसा करें?
कहीं पेपर लीक, कहीं OMR पर सवाल, कहीं रिजल्ट विवाद, तो कहीं भर्ती प्रक्रिया पर लगातार आरोप। यदि ऐसी घटनाएँ बार-बार सामने आती हैं, तो युवाओं का व्यवस्था पर भरोसा कमजोर होना स्वाभाविक है।
एक युवा वर्षों तक मेहनत करता है, दिन-रात पढ़ाई करता है, परिवार उम्मीदें लगाता है। लेकिन जब भर्ती प्रक्रिया ही विवादों में घिर जाए, तो सबसे बड़ा नुकसान मेहनती और ईमानदार अभ्यर्थियों का होता है।
क्या अब समय नहीं आ गया कि परीक्षा और भर्ती प्रक्रियाओं के लिए पूरे देश में एक पारदर्शी, जवाबदेह और मजबूत व्यवस्था बनाई जाए? यदि किसी मामले में जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद पेपर लीक, भर्ती घोटाला या भ्रष्टाचार सिद्ध होता है, तो दोषियों के खिलाफ इतना कठोर दंड हो कि भविष्य में कोई भी युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने की हिम्मत न करे।
देश का भविष्य युवाओं से बनता है। यदि युवाओं का विश्वास ही टूट जाएगा, तो किसी भी राज्य या देश का भविष्य मजबूत कैसे होगा? युवाओं को केवल वादे नहीं, बल्कि निष्पक्ष और भरोसेमंद व्यवस्था चाहिए।
यदि भर्ती परीक्षाओं पर ही भरोसा नहीं रहेगा, तो युवाओं का भविष्य कैसे सुरक्षित होगा?
झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर पेपर लीक, अनियमितताओं और नौकरी की खरीद-फरोख्त जैसे आरोप बार-बार सामने आते रहे हैं। यदि जांच में ऐसे आरोप सही साबित होते हैं, तो यह केवल एक परीक्षा का मामला नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के सपनों और मेहनत के साथ अन्याय है।
झारखंड प्राकृतिक संसाधनों, खनिज संपदा और अपार संभावनाओं वाला राज्य है। लेकिन किसी भी राज्य की सबसे बड़ी पूंजी उसके युवा होते हैं। यदि भर्ती प्रक्रिया ही निष्पक्ष और पारदर्शी नहीं होगी, तो प्रतिभाशाली युवाओं का विश्वास कैसे बनेगा?
क्या अब समय नहीं आ गया कि परीक्षा घोटालों और पेपर लीक के खिलाफ पूरे देश में और अधिक कठोर कानून, समयबद्ध जांच और दोष सिद्ध होने पर सख्त दंड सुनिश्चित किया जाए?
युवाओं को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था चाहिए जहाँ मेहनत का सम्मान हो, प्रतिभा को अवसर मिले और भर्ती प्रक्रिया पर जनता का पूरा विश्वास कायम रहे। यही किसी भी विकसित राष्ट्र की पहचान है।
लोकतंत्र में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन जनता और युवाओं के लिए भाषा मर्यादित होनी चाहिए।
यदि किसी जनप्रतिनिधि द्वारा युवाओं के लिए ऐसे शब्दों का प्रयोग किया जाता है जिन्हें लोग अपमानजनक मानते हैं, तो यह गंभीर चिंता का विषय है। सत्ता में बैठे लोगों के शब्द केवल व्यक्तिगत राय नहीं होते, बल्कि उनका सार्वजनिक प्रभाव भी होता है।
युवा किसी भी लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत हैं। उनके विचारों से असहमति हो सकती है, लेकिन उन्हें सम्मानजनक भाषा में जवाब देना ही लोकतांत्रिक परंपरा है।
जनप्रतिनिधियों से अपेक्षा होती है कि वे संवाद, संयम और शालीनता का उदाहरण प्रस्तुत करें। कटु या अपमानजनक भाषा समाज में अनावश्यक विभाजन और अविश्वास बढ़ा सकती है।
लोकतंत्र में जनता का सम्मान केवल चुनाव के समय नहीं, बल्कि हर दिन और हर वक्त दिखना चाहिए। यही स्वस्थ लोकतंत्र की पहचान है।
कैसे बने मेरा देश महान?
कैसे हो सामाजिक न्याय की बात, जब भ्रष्टाचार हर व्यवस्था को कमजोर कर रहा हो?
भ्रष्टाचार केवल सरकारी धन की चोरी नहीं, बल्कि देश के भविष्य, युवाओं के सपनों, किसानों की मेहनत, गरीब के अधिकार, शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी सीधा हमला है।
क्या अब समय नहीं आ गया कि भ्रष्टाचार के खिलाफ पूरे देश में ज़ीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाए? जो भी व्यक्ति जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद दोषी सिद्ध हो, उसके खिलाफ इतनी कठोर और समयबद्ध कार्रवाई हो कि भविष्य में कोई भी भ्रष्टाचार करने से पहले सौ बार सोचे।
दुनिया के कई देशों ने सख्त कानून, पारदर्शिता और जवाबदेही के दम पर भ्रष्टाचार पर काफी हद तक नियंत्रण पाया है। भारत को भी ईमानदार व्यवस्था और मजबूत कानूनों की दिशा में निरंतर आगे बढ़ना होगा।
जब तक भ्रष्टाचार पर निर्णायक प्रहार नहीं होगा, तब तक न विकास की गति तेज होगी, न सामाजिक न्याय पूरी तरह मजबूत होगा। मजबूत राष्ट्र की नींव ईमानदार व्यवस्था और जवाबदेह शासन से ही बनती है।
आस्था के नाम पर लोगों को ठगने वालों के खिलाफ सबसे कड़ी कार्रवाई क्यों नहीं?
राजस्थान के कोटा में पुलिस ने ऐसे गिरोह का खुलासा किया है, जिस पर आरोप है कि वह बाबा बनकर लोगों को डराता था, अंधविश्वास फैलाता था और फिर उन्हें ठगकर नकदी व जेवरात लेकर फरार हो जाता था। यदि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ये आरोप सही साबित होते हैं, तो यह केवल धोखाधड़ी नहीं, बल्कि लोगों की आस्था और विश्वास के साथ गंभीर छल है।
क्या ऐसे अपराधों के लिए पूरे देश में और अधिक कठोर कानून नहीं होने चाहिए?
जो लोग धर्म, आस्था या अंधविश्वास का सहारा लेकर लोगों को ठगते हैं, उनकी वजह से समाज में भय और अविश्वास फैलता है। ऐसे मामलों में समयबद्ध जांच, त्वरित न्याय और दोष सिद्ध होने पर अत्यंत कठोर दंड सुनिश्चित होना चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी निर्दोष लोगों की भावनाओं का फायदा उठाने की हिम्मत न करे।
आस्था सम्मान की चीज़ है, उसे ठगी का साधन बनाने वालों के प्रति कानून का रवैया बेहद सख्त होना चाहिए।
60% की बजाए 100% क्यों नहीं। सरकार ऐसे मोल भाव कर रही है जैसे मंडी में सौदागर। अपनी फसल बेच रहा है किसान कोई फ्री वाला पांच किलो राशन नहीं मांग रहा है।
परीक्षा प्रणाली में सबसे बड़ा सवाल आज भी अनुत्तरित है—पेपर लीक होने से पहले उसे रोका कैसे जाएगा?
अगर बार-बार विवादों में रही या ब्लैकलिस्टेड कंपनियों को ही परीक्षा कराने की जिम्मेदारी दी जाएगी, तो फिर पेपर लीक पर रोक लगाने के दावे कितने प्रभावी होंगे?
कठोर कानून बनाना अच्छी बात है, लेकिन कानून तब लागू होता है जब अपराध हो चुका होता है। असली सफलता तो तब है जब ऐसी व्यवस्था बनाई जाए कि अपराध करने का अवसर ही न मिले।
अगर केवल सज़ा से ही अपराध रुक जाते, तो हर जगह पुलिस, सीसीटीवी, सुरक्षा जांच और निगरानी तंत्र की आवश्यकता ही नहीं होती। इनका उद्देश्य अपराध होने के बाद कार्रवाई करना नहीं, बल्कि अपराध होने से पहले उसे रोकना होता है।
इसी तरह परीक्षा प्रणाली में भी केवल दोषियों को सज़ा देने से काम नहीं चलेगा। पारदर्शी प्रक्रिया, विश्वसनीय एजेंसियों का चयन, मजबूत डिजिटल सुरक्षा, जवाबदेही और लगातार निगरानी जैसी व्यवस्थाएं भी उतनी ही आवश्यक हैं।
देश के करोड़ों युवाओं का भविष्य दांव पर है। उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ऐसी परीक्षा व्यवस्था चाहिए जहाँ पेपर लीक की संभावना ही समाप्त हो जाए।
क्या @pnbindia का CGSP केवल प्रचार तक सीमित है?
एक Defence Civilian कर्मचारी ने PNB में CGSP Salary Account के आधार पर Personal Loan लिया। पहले Loan Account पर ₹13,511 Processing Fee काटी गई। बाद में वह Loan Account बंद हुआ और राशि वापस कर दी गई।
लेकिन जब नया Loan Account बनाकर ₹11 लाख का अंतिम लोन स्वीकृत हुआ, तो फिर से ₹13,511 Processing Fee और Documentation Charges काट लिए गए।
शिकायत करने पर भी PNB ने केवल पहले वाले Refund का हवाला देकर मामला बंद कर दिया, जबकि शिकायत का विषय अंतिम Loan Account से दोबारा काटी गई Processing Fee था। न यह बताया गया कि CGSP के तहत यह शुल्क क्यों लिया गया और न ही संबंधित CGSP Circular/Guidelines की प्रति उपलब्ध कराई गई।
यदि CGSP Salary Account धारकों को कोई विशेष लाभ नहीं मिलता, तो फिर इस योजना का उद्देश्य क्या है? और यदि लाभ मिलते हैं, तो पात्र ग्राहकों से Processing Fee क्यों वसूली जा रही है?
PNB को पारदर्शिता दिखानी चाहिए, संबंधित नियम सार्वजनिक करने चाहिए और शिकायतों का वास्तविक समाधान करना चाहिए। केवल औपचारिक जवाब देकर शिकायत बंद करना ग्राहकों के साथ न्याय नहीं है। @RBI@FinMinIndia@PMOIndia