किराये के मकान मे रहकर अब्बू ने 8 बच्चे पैदा किये शबाना से 8 बच्चो मे सब लड़किया थी
अब अब्बू गुज़र गया तो अम्मी ने आठों जवान बेटियों को पहचानने से किया इंकार
फिर दूसरा निकाह भी कर लिया, ये है खूबसूरती ताजमहल और लालकिला के मालिकों की 😍😏😏🤩💯☑️
قبل … 1990: الأرباح من الحج صفر
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بحسب بيانات المصادر المفتوحة ، السعودية لا تربح ريالاً واحداً من الحج بل ان إنفاقها على الحج ضخم جداً وتتحمله المملكة بالكامل لوحدها من اجل ضيوف الرحمن🇸🇦
منذ عهد الدولة السعودية الاولى ، 3 قرون والمملكة لا تربح ريالاً
دولة عظيمة جداً
पहली तस्वीर सुप्रीम कोर्ट के मुसलमान जज अब्दुल नज़ीर की है जिन्होने तीन तलाक के फैसले पर साइन करने से इंकार किया
दूसरी तस्वीर है देश से गद्दारी करने वाले गद्दार मुसलमान हामिद अंसारी की जो 2007 से 2017 तक भारत के 13वें और 14वें उपराष्ट्रपति थे। की जिन पर रॉ के चीफ एन के सूद ने खुलासा करते हुए कहा था कि इन्होंने भारत के कई रॉ ऑफिसर कि हत्या करवाई
तीसरी तस्वीर है भारत के गद्दार और पूर्व चुनाव आयुक्त NY कुरैशी कि हैँ जिनके मुख्य चुनाव आयुक्त रहते झारखण्ड और बंगाल मे सबसे ज्यादा अवैध बंग्लादेशी मुस्लिम वोटर कार्ड बनाये गए थे.....
पढ़े लिखे हो या जाहिल पर मजहब के मामले में यह सब एक जैसे है
इनके लिए देश नही मज़हब मायने रखता है।
ताजमहल एक कब्रगाह/मकबरा है और मकबरे के परिसर के अंदर नमाज पढ़ना गुनाह/हराम है
इस्लाम में इसे हराम कहा गया है।
ये रहा रेफरेंस:
सहीह बुखारी, हदीस नंबर 435 / सहीह मुस्लिम, हदीस नंबर 529:
सुनन अत-तिर्मिज़ी, हदीस नंबर 317:
Your face looks good, but your thoughts seem cruel a pig. Hello Mr. Neeraj, what do you think about killing animals in the name of BALI? You never speak about that and always target Muslims. Anyway, I understand this is your work and way of earning money feed your children.
भारत के संविधान में सबसे खतरनाक चीज “आर्टिकल 30” साबित हो रही है जो-
“माइनॉरिटीज को अपने शिक्षण संस्थान स्थापित करने और चलाने का अधिकार देता है”।
इसी आर्टिकल के संरक्षण के कारण देश में मदरसों की संख्या लाखो में पहुँच गई है, जबकि सच ये है कि मुस्लिम अब इस देश में अल्पसंख्यक है ही नहीं।
इस आर्टिकल को अमेंड करके इसमें से मुस्लिमों को एक्सक्लूड करना ही चाहिए, अन्यथा इसका फायदे लेकर कट्टरता जारी रहेगी।
क़तर भूखों मर जाएगा, क्योंकि उसके पास खाना नहीं है। खाद्य पदार्थ वहाँ होते ही नहीं हैं। सीधी भाषा में - क़तर अपने भोजन का 90% बाहर से आयात करता है, जी हाँ - नब्बे प्रतिशत।
जिस प्रकार का समुद्री गतिरोध चल रहा है, उससे क़तर की खाद्य आपूर्ति श्रृंखला ठप्प होने के कगार पर है। यूरोप से वहाँ ताज़ी उपज आती है और अमेरिकी महाद्वीप अनाज भेजते हैं। समुद्री रास्ता बाधित है, अमीर मुल्क़ है तो महँगे विमानों से फल-सब्जियाँ अनाज मँगा रहे हैं, लेकिन कबतक मंगाएँगे।
अबतक कीमतें क़तर ने बड़ी चालाकी से नियंत्रण में रखी हैं, ज़्यादा से ज़्यादा 10% तक ही दाम बढ़े हैं। यही कारण है कि उसका हाल पाकिस्तान जैसा नहीं हो रहा। क्योंकि, क़तर की वित्तीय क्षमता इतनी विशाल है कि तेल-गैस का आयात रुका रहे फिर भी कम से कम कई वर्षों तक वो वेतन वगैरह तो दे ही सकता है। सरकारी सेवाएँ बाधित नहीं होंगी पैसे के बिना, अथाह है उसके पास।
फ़िलहाल क़तर का पूरा ज़ोर है विदेशी कंपनियों को वापस लाने और विदेशी पूँजी का पलायन रोकने पर। देश में और बाहर भी, उसने पैसों का अथाह भण्डार खड़ा करके रखा हुआ है। कारण - कंपनियाँ चली गईं तो क़तर का मानव संसाधन चला जाएगा, वैसे भी 90% बाहरी ही हैं वहाँ। पलायन रोकना क़तर की सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी है, यही कारण है कि वहाँ हो रहे हमलों की मीडिया कवरेज को फैलने से रोकने का पूरा प्रयास किया गया।
IMF तो कह रहा है कि इस वर्ष क़तर की अर्थव्यवस्था 8.60% तक सिकुड़ सकती है। ये बड़ी गिरावट होगी। युद्ध से पहले क़तर इस कोशिश में लगा हुआ था कि उसकी आय केवल जीवाश्म ईंधन पर ही निर्भर न रहे, वो एक भव्य पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित हो और अंतरराष्ट्रीय व्यापार व वित्तीय लेनदेन के केंद्र के रूप में भी। हर महीने अंतरराष्ट्रीय स्तर से खेल आयोजन की मेजबानी होने लगी। लेकिन, ईरान-युद्ध ने पर्यटन को ऐसा गिराया है कि पूरे मध्य-पूर्व को प्रतिदिन लगभग ₹5800 करोड़ का नुकसान हो रहा है।
क़तर आतंकी संगठनों का पोषक रहा है और दुनियाभर में इस्लामी कट्टरता को फैलाने के लिए बड़ी फंडिंग करता रहा है, लेकिन आज वो सोच रहा है कि खाना उस तक कैसे पहुँचेगा।
@GEVernova This hate-monger is always posting hateful content about Muslims on LinkedIn. In this post, he directly said that Muslims hate non-Muslims. Is this your company’s policy to speak against Muslims?If you review all of his LinkedIn posts.
दो बातें बताता हूँ... हालांकि तुझे समझ नहीं आएगी, पर लोग जरूर समझेंगे।
1- दुनिया में केवल 10% सांप ही जहरीले होते हैं लेकिन हम हर सांप से कटवा कर नहीं देख सकते कि कौन सा जहरीला है और कौन सा नहीं।
2- सांप केंचुली छोडने के बाद भी सांप ही रहता है।
सांप का सांप होना काफी होता है। अच्छा सांप बुरा सांप जैसा कुछ नहीं होता।
पहली बात की तेरा नाम बहुत अच्छा है श्याम लेकिन दूसरी बात तू एक सुवर है जो हमेशा हिंदू मुस्लिम करता है। अबे सुवर हिंदू मुस्लिम ना बो बे तेरे आने वाले जेनरेशन भी इसमें छपेट में आएंगे।
पहली बात तो यह कि यदि सन् 1997 में तू यह काम कर रहा होता तो तब इस ‘सलीम ख़ान’ को तू बचा रहा होता। अब चूँकि इस व्यक्ति ने यह छद्म चोला ओढ़ रखा था और इस नाते पीछे इस पर तेरे दीनी भाईयों ने जानलेवा हमला किया था, तब तूने उस हमले के ख़िलाफ़ इतना लंबा ट्वीट नहीं किया था।
इसलिए ही तुम्हें निकृष्ट कहता हूँ। तू हिंदू घृणा में बजबजाता जीव है, जिसकी कोई मुक्ति नहीं।
बात रही इस नए परिप्रेक्ष्य की तो यह सबके लिए ही नया है। यह जानते हुए इसका समर्थन कोई नहीं करेगा। किंतु यह एक्स मुस्लिम नहीं हुआ होता तो तू यह पोस्ट नहीं लिखता। तू इस कार्यवाही को ज़ुल्म की तरह पेश करता। यह केस एक मुसलमान द्वारा एक हिंदू बच्चे की हत्या का केस है। तू नहीं बोलता। तेरी नियत तो हमें मालूम है ज़ुबैर।
Listen to this extremist— Uttar Pradesh’s 🇮🇳 chief minister Yogi says in his election speeches that “Land of Bengal” should not become “Land of Kaaba.”
This “provocative linkage” isn’t an argument; it’s a rhetorical tactic. It turns a sacred religious symbol into a political “outcome” to be feared, and implies that Muslim identity does not belong in a certain region.
That’s how exclusion is wrapped up as nationalism: by collapsing religion into a threat narrative instead of addressing real policies.
नरेंद्र मोदी जी के खिलाफ एक और गंदी राजनीति
दुनिया के 100 प्रभावशाली लोगों के लिस्ट से बाहर
दुनिया की प्रतिष्ठित पत्रिका टाइम (TIME) ने 2026 के सबसे प्रभावशाली 100 लोगों का लिस्ट बनाया है
इसमें डोनाल्ड ट्रंप, शी जिनपिंग, बेंजामिन नेतन्याहू और कई बड़े बिजनेसमैन, एथलीट और कलाकारों का नाम शामिल किया है पर नरेंद्र मोदी जी को जगह नहीं दिया है
कुछ विदेशी शक्तियां लगातार भारत और मोदी जी को हर तरीके से निचे दिखाने के प्रयत्न में लगें रहते हैं
He is the Indian government news anchor who clearly notes that Muslims are Jihadis. This stupid person still doesn't know what Jihad means. This chawani is taking money from the government, which is paid by Indian taxpayers, but their work still focuses on Hindus and Muslims.
रेडियो मिर्ची वाली जेहादी RJ सायमा ने मुझे उस दिन ब्लॉक कर दिया था जिस दिन दिल्ली दंगों के लिए इसने भीड़ को उकसाया और मैने इसके खिलाफ आवाज उठाई। अब चोरी छुपे #DoTook के क्लिप्स देख कर ट्रोल करती है। और इसे बुरा लगा जब स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर का अपमान करके वाले सैयद जवाद को मैने लताड़ लगाई। और यह स्वाभाविक है क्योंकि सायमा खुद शाहीन बाग में बैठ कर "जिन्ना वाली आजादी" के नारे लगा रही थी।
धर्म ओर मजहब के आधार पर देश का बटवारा हुआ था
एक मुस्लिमों का पाकिस्तान एक हिंदुओं का भारत.
फिर भारत में मुस्लिम किस आधार पर रह रहे है ??
भारत को खाली करो
वीडियो के अंत में पीली दाढ़ी वाला मुस्लिम उस क्षेत्र की आबादी का ब्योरा दे रहा है-
मुस्लिम - 25 %
एसटी- 25%
सैनी- 25%
और बाकी 25% में सभी आ जाएँगे. मित्रों इस दाढ़ी टोपी के लिए मुस्लिम 25 प्रतिशत ही है लेकिन हिंदू एसटी, सैनी और बाकी में विभक्त है. यह चाहता तो कह सकता था मुस्लिम 25 प्रतिशत हैं और हिंदू 75 प्रतिशत. परंतु इनका एजेंडा अपने को कम दिखाना है ही नहीं. अल्पसंख्यक वाला रोना तो केवल स्वयं को विक्टिम बनाने के लिए रोएँगे. अभी इनको सैनी समाज की जमीन मिल रही है. सैनी समाज बाकी हिंदुओं के कहे में न आएँ इसलिए इनका 25 प्रतिशत हिस्सा अलग कर दिया गया. जमीन लेने के बाद भी वो हिंदुओं का एहसान मानने को तैयार नहीं है. हिंदू बेवकूफ बनकर अपने ही संहार के बीज बो रहा है.
#rajasthan #sikar