हे भगवन्-!!
न त्वहम् कामये राज्यम् न स्वर्गम् न पुनर्भवम्
कामये दुःखताप्तानाम् प्राणिनाम् आर्तिनाशनम्
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जीवने यावदादानम् स्यात प्रदानम् ततोऽधिकम्
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जय हिन्द
“हम मोदी को मारेंगे"
ये बोल 6 साल के उस बच्चे के हैं जो अपने परिवार और रिश्तेदारों के साथ 13 मई को कोरोना से जंग जीतकर इंदौर के इंडेक्स मेडिकल कॉलेज के अस्पताल से घर वापस जा रहा था।
सवाल यह है कि इस छोटे से मासूम बच्चे के ज़ेहन में आखिर ये जहर भरा किसने?
तुम अपनी इसी हरकतों के वजह से बर्बाद हुए हो और आगे भी बर्बाद होते रहोंगे
मोदी समर्थक बेशक राम मंदिर चोरी से आहत हुए थे , भयंकर गुस्सा था है और रहेगा पर हर बार की तरह ये लोग मोदी क्यों जरूरी हैं वो उनके समर्थकों को समझा ही देते हैं
बेशक राम मंदिर में चोरी हुई है। पर क्या किसी साधु संत ने चोरी की है? क्या किसी पुजारी ने चोरी की है? नहीं ना फिर भी उनका वेश धर के उनको ही टारगेट कर रहे हैं ये लोग ।
तुम्हे विरोध करना है तो चंपत राय का करते , दूसरे ट्रस्टियों का करते , पैसा गिनने वालों का करते , बीजेपी को करते , मोदी को टारगेट करते , पर नहीं तुम्हे टारगेट करना है भगवे को
इसी हरकतों के चलते तो लगातार हार रहे हो फिर भी अकल नहीं आ रही है
विनाश काले विपरित बुद्धि
पहले विपक्ष ने कहा— पेपर लीक पर चर्चा हो। सरकार तैयार हो गई।
फिर विपक्ष ने कहा— पहले शिक्षा मंत्री इस्तीफा दें। इस्तीफा भी दे दिया गया।
अब जब पेपर लीक पर महत्वपूर्ण विधेयक पेश किया जा रहा है, तब भी ये सदन नहीं चलने दे रहे।
अब Gen Z और पूरे देश को समझने की ज़रूरत है कि मोदी सरकार को युवाओं के भविष्य की चिंता है,
लेकिन विपक्ष सिर्फ अपनी राजनीतिक रोटियाँ सेंकने में लगा है।
दुबई की 'एब्रिको फ्रेट कंपनी' के 23 मलयाली कर्मचारियों को कंपनी के मालिक शाजी निलांबुर ने जंतर-मंतर पर हो रहे छात्रों के विरोध-प्रदर्शन में शामिल होने के लिए भेजा था।
फ़्लाइट टिकट, खाना, रहने की जगह... इन सभी का खर्च 'स्पॉन्सर' ने उठाया। उन्हें तब तक वहां बने रहने को कहा गया जब तक विरोध-प्रदर्शन चलता रहा।
दुबई में काम करने वाले प्रवासी मज़दूरों का भारत में NEET के लिए विरोध कर रहे छात्रों से क्या लेना-देना है?
आखिर यह 'स्पॉन्सर्ड' भागीदारी क्यों?
@NIA_India@PMOIndia@narendramodi@HMOIndia
कृपया अगर सच है तो डण्डा......
काल खण्ड भले बदल जाएँ पर भाई राजनीति कभी न बदली....
आदि काल से अब तक वही है..
धर्म का पक्ष शांति की चाह रखता है, भले वहाँ उपस्थित धृष्टधुम्न और भीम हमेशा चीर डालूंगा फाड़ डालूंगा वाले मूड में रहते हों। दुश्मन की छाती का लहू पीने को आतुर रहते हों।
पर केशव को पता है कब क्या करना है।
तो पुनः प्रस्ताव आगे किया गया है...
पांच गांव... सिर्फ पांच
"देहि मे पञ्च ग्रामान्, अविष्ठलं वृकस्थलम्।
माकन्दीं वारणावतं पञ्चमं च यथासुखम्॥"
अब उत्तर क्या आएगा, ये भी हम सब जानते हैं। केशव भी जानते थे...
मोदी भी जानते हैं। जहाँ शकुनी, दुशासन, दुर्योधन, कर्ण हों उत्तर तो अब भी वही आना है।
"यावद् हि सूच्यग्रेण विध्येदग्रेण माधव।
तावदपि न दास्यामि विना युद्धेन केशव॥"
तो ठीक है भाई... सबको पता है।
पर केशव को तो शांति प्रस्ताव देना ही होगा। काहे कि किसी विनाश का उत्तरदायित्व न केशव को ओढ़ना है। और न युधिष्ठिर के सर डालना है!!
इतिश्री धन्यवाद!
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🚩🫵🙏🏻
*सनातनीं हिंदू कृपया इसे पूरा सुनैं ध्यान से,*
*व्यवहार में लाएं, तथा~*
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*अपने का दायित्व निर्वहन करैं~*
*अपनीं सन्तानों, व उनकी सन्तानों के उज्जवल भविष्य के लिए;*
*(तथा स्वयं को ही अनुगृहीत करैं........)*