नव सुमन से सुगन्धित रहो तुम,
मुस्कुराती सदा ही रहो तुम,
जैसे तारे गगन में खिले हैं।
दीप जीवन के जगमग जले हैं।
कनुप्रिये ! #जन्मदिनं शुभं भवतु। 🎂
#Happy_Birthday❤
Have a wonderful, happy, healthy birthday now and forever.
सब नर करहिं परस्पर प्रीती।
चलहिं स्वधर्म निरत श्रुतिनीती।।
बाबा विश्वनाथ, कुलदेवता, इष्टदेवता एवं भगवती श्रीत्रिपुरसुन्दरी का आशीर्वाद बना रहे।
सभी को सादर प्रणाम 🙏
#Marriage_Anniversary ❤️
मम व्रते ते हृदयं दधामि मम चित्तमनुचित्तं तेऽस्तु। मम वाचमेकमना जुषस्व प्रजापतिष्ट्वा नियुनक्तु मह्यम्।।
यह प्रेम, विश्वास, सुख और समृद्धि का बंधन है। इस प्रकार सुखद 11 वर्ष व्यतीत हुए।
#Anniversary_Special ❤️
शुभस्य शीघ्रम्, अशुभस्य कालहरणम् ||
शुभ व पवित्र कार्यों में कभी विलम्ब न करें । जीवन की महान उपलब्धियों अर्थात् उत्कर्ष उन्नयन में सही समय पर उत्साह और सत्यनिष्ठा के साथ किये गये शुभ कर्म ही मूलआधार हैं ।
Never delay in doing auspicious and holy work. Auspicious deeds done with enthusiasm and honesty at the right time are the basis for great achievements in life i.e. progress and advancement.
#AvdheshanandG_Quotes
#thoughtoftheday
अजरामरवत् प्राज्ञः विद्यामर्थं च साधयेत्।
गृहीत ईव केशेषु मृत्युना धर्ममाचरेत्॥
सद्ग्रंथों के अध्ययन को जीवनचर्या का आवश्यक अंग बनाएँ।जीवन की बड़ी दुविधाएँ और असाध्य से प्रतीत होने वाली
अनेक चुनौतिओं को ग्रंथ आसान कर देते हैं। सद्ग्रंथों के अवलंबन से हमारी विचार शक्ति एवं आत्म ऊर्जा संयोजित होती है।अतः ग्रन्थों के आश्रित रहें।सद्ग्रंथ हमारी अज्ञान ग्रन्थियों का भेदन कर हमें शाश्वत आह्लाद का अधिकारी बनाते हैं।
Make the study of good scriptures an essential part of your lifestyle. Life's biggest dilemmas and the seemingly insurmountable ones
Books make many challenges easier. By relying on the good scriptures, our thinking power and soul energy get combined. Therefore, remain dependent on the scriptures. The good scriptures pierce our barriers of ignorance and make us entitled to eternal bliss.
#AvdheshanandG_Quotes #thoughtoftheday
#स्वाध्याय
अज्ञान दोष नहीं है और भ्रम होना भी स्वाभाविक है।
#आयुष्मान् भव: नहीं आयुष्मान् भव
भव के साथ विसर्गों को चिपकाने से उपनिषदों वचनों को भी बुरे दिन देखने पड़ते हैं।
मातृदेवो भवः पितृदेवो भव: इत्यादि।
शिवः शक्त्या युक्तो यदि भवति शक्तः प्रभवितुं
न चेदेवं देवो न खलु कुशलः स्पन्दितुमपि।
अतस्त्वामाराध्यां हरिहरविरिञ्चादिभिरपि
प्रणन्तुं स्तोतुं वा कथमकृतपुण्यः प्रभवति ।।
नवरात्र के विशेष कालखंड में देवी भगवती की उपासना के माध्यम से आहार विहार का नियमन, संयमन और आत्म-अनुशासन से रोग प्रतिरोधक क्षमता और आत्म शक्ति का जागरण होता है। अतः वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक दोनों दृष्टि से यह कालखंड अत्यन्त उपयोगी है।
इच्छा, ज्ञान और क्रिया शक्ति के रूप में सचराचर जगत् में व्याप्त कीट से ब्रह्म तक को उदर में धारण करने वाली सम्पूर्ण ब्रह्मांड की क्रियात्मक व आधारभूत शक्ति पराम्बा माँ ललिता राजराजेश्वरि त्रिपुरसुन्दरी दुर्गा के आराधन की शुभ्र बेला शारदीय नवरात्र सर्वथा शुभ एवम् कल्याणकारी सिद्ध हो ।
During the special period of Navratri, regulation of diet, restraint and self-discipline through worship of Goddess Bhagwati leads to awakening of immunity and self-power. Therefore, this period is very useful from both scientific and spiritual point of view.
May Sharadiya Navratri, the auspicious time of worship of Goddess Paramba Maa Lalita Rajarajeshwari Tripurasundari Durga, the active and basic power of the entire universe, which holds everything from insects to Brahma in its stomach in the form of desire, knowledge and action power, be extremely auspicious and beneficial.
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#शारदीय_नवरात्र