सामान्य वर्ग को पता होना चाहिए कि जिस भाजपा ने हर जगह आरक्षण 50% से अधिक किया, वहाँ आरक्षितों की फ़ीस माफ़ है और वह फ़ीस आप ही भर रहे हो।
यदि एक 100 विद्यार्थियों की IIT को चलाने के लिए ₹100 रुपये चाहिए, और आरक्षित का योगदान शून्य हो, फिर भी वह IIT चल रही है, तो आपकी फीस, जो ₹1/विद्यार्थी होनी थी, वह ₹2/विद्यार्थी है।
यानी, आपके पिता केवल आपकी शिक्षा का ही नहीं बल्कि उस आरक्षित की भी शिक्षा का भार उठा रहे हैं जो ना केवल कम नंबर लाता है, बल्कि हर तरह के अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करता है।
मध्य प्रदेश में OBC में 40% जातियाँ मुस्लिम हैं। आप उनकी भी फ़ीस का इंतज़ाम करते हैं। और यही @BJP4India आपको यह भी बताती है कि उन्होंने फलाने राज्य में मुस्लिम आरक्षण रुकवा दिया।
सत्य यह है कि यह #AntiGCBJP बस आपसे दलितों-मुस्लिमों के लिए रक्तदान और अंगदान नहीं करवा रही है, बाक़ी आपके रक्त-स्वेद की कमाई पर आधा अधिकार जिनको देना था, मोदी ने वह दे दिया है।
बिहार में द्वितीय श्रेणी से भी पास होने के पर सरकार ₹8,000 देगी। क्योंकि यह पैसा सम्राट चौधरी और मोदी जी के पारिवारिक ट्रस्ट से रिलीज किया जाता है। टैक्सदाता इसमें क्यों बिलबिला रहा है!
मध्यप्रदेश सरकार का 73% आरक्षण वाला केस आज निरस्त हो गया। यह भाजपा सरकार द्वारा अपील किया गया था। पहले ही हायकोर्ट निरस्त कर चुकी थी। पर ओबीसी प्रेम में अंधी भाजपा भगवान राम को जातिवादी हत्यारा बताने के एफिडेविट को आधार बना कर ओबीसी को ऐतिहासिक प्रताड़ना का शिकार बता रही थी।
बहुत बढ़िया कार्य YFE द्वारा! देते रहो गाली! लोग समाज के लिए लड़ते रहेंगे।
फूलपुर प्रयागराज से यह रिपोर्ट है। कोई कन्फर्म करेगा कि यह घटना किस तारीख की है? ब्राह्मण परिवार की स्थिति देखिए, उनके महल देखिए जो पीछे हैं।
न तो इन्हें PM आवास योजना मिली, न @myogiadityanath की मुख्यमंत्री आवास योजना। हाँ, मोदी एक्ट अवश्य मिल गया है।
मेरी माँ की 2 महीने पहले मौत हो गई, मैं उन्हें नागपुर में हॉस्पिटल में लेकर था, यहाँ मेरे प्लॉट पर जाने के लिए दी गई सड़क को ही भू माफिया बेच दे रहे हैं…….और फफक-फफक कर रो पड़ा ये फौजी।
प्रीतम द्विवेदी सेना में हैं। लोन लेकर प्लॉट लिया। प्लॉट के लिए जो सड़क दी गई थी भू माफिया अब उसी की प्लॉटिंग कर रहे हैं।
भारत माँ का ये सेवक अपनी माँ की दवा करवा रहे थे, तब ये पाप किया गया। मामला MP के रीवा का। इन्हें न्याय कौन दिलवाएगा?
हाल ही में एक लड़ाई हमने जीती है। यदि आप लोगों ने नहीं देखा कि यूपी गवर्नमेंट ने 91% रिजर्वेशन, इलाहाबाद हाईकोर्ट के अगेंस्ट जाकर किया था। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दो बारी ऑर्डर दिया था। चार मेडिकल कॉलेज में 91% रिजर्वेशन था।
फिर YFE के काउंसलर्स और जो वकील थे, यूथ फॉर इक्वालिटी और RHA, जो इसको खोज करके निकाला था, उनके कारण ये कोर्ट तक जा पाया। कोर्ट की अवमानना का भी मामला चला।
इलाहाबाद हाईकोर्ट में सीधा बोला गया कि हमने जब पहले बोल दिया था कि स्टे लगेगा और 50% ब्रीच नहीं हो सकता है, तो यूपी गवर्नमेंट ऐसा क्यों कर रही है। उनसे जवाब माँगा गया और फिर उन्होंने इसे रिजेक्ट कर दिया था।
काउंसलिंग आरंभ होने वाली थी, फिर गवर्नमेंट ने इस पर स्टे करवाकर सुप्रीम कोर्ट में मूव किया। सुप्रीम कोर्ट ने फिर कहा कि नहीं, इसे रिजेक्ट करते हैं और सरकार को डाँट भी लगी।
तो देखिए, ये छोटी-छोटी जीत हैं, जो हम समाज के लिए लड़ रहे हैं और लड़ते रहेंगे।
क्योंकि पहली बार भारत के इतिहास में ये हो रहा है कि सवर्ण यूनाइटेड हो गया है और बोलने लगा है। बोलते हम पहले भी थे, लेकिन किसी दूसरे के लिए बोलते थे। हम दूसरों की राजनीति के लिए बोलते थे और लोड बहुत अधिक लेते थे कि नहीं-नहीं यार, मोदी जी नहीं तो कौन। अब सवर्ण समाज ने वो लोड लेना छोड़ दिया है।
चेक रियल्टी - शिवम त्रिपाठी LU से BA.LLB कर रहे हैं। हमारे छोटे भाई हैं। ये उनके स्क्लोरशिप का स्टेटस है। सबकुछ वेरिफाइड होने के बावज़ूद छात्रवृत्ति क्यों नहीं मिली? क्योंकि वो जनरल से आते हैं?
छात्रवृत्ति क्लेम 46815 है। ये पैसे हमारे लिए मायने रखते हैं। बताओ क्या करूं?
आज एक समाचार देखा कि इंडिगो के पायलट पर ट्रेनी पायलट ने 'मोदी एक्ट' लगवा दिया क्योंकि उसे 'नॉट फिट टू फ्लाई' कहा गया था। ये तो चलिए बाहर आ रहा है हर दिन, पर एक ज्वालामुखी जो मोदी और भाजपा ने सरकारी कार्यालयों में बो रखा है, उसकी स्थिति और विकट है।
मोदी जी के प्रियजन ना काम करते हैं, हल्ला खूब मचाते हैं, समय से आने-जाने पर भी बहुत अधिक रोक आदि नहीं है, प्रमोशन भी समय से पहले इनका ही हों है, तो उनको बस एक काम ही बचता है: मोदी एक्ट लगा कर अपने विरोधियों (जिसे वो ऐसा मानते हैं) को नौकरी से निकलवाना या सस्पेंड करवा कर प्रताड़ित करना।
जब इंडिगो जैसी घटनाएँ होती हैं, तो स्पष्ट संदेश यह जाता है कि मोदी एक्ट लाभार्थियों को नौकरी पर रखने से पहले १० बार सोचो कि कार्यालय में ये क्या-क्या करेंगे। पौने तीन लाख केस पेंडिंग हैं इस एक्ट में। हज़ारों करोड़ कंपनसेशन दिया जा चुका है।
मोदी अपनी बंसी बजा रहा है:
मोदीया की बंशी पुकारे दलित नाम,
पीड़ित का भी काम करूँ, शोषित का भी काम!
मोदीया की बंशी को बजने से काम
वंचित का भी नाम मैं लूँ, दलित का भी नाम!
आदरणीय @myogiadityanath जी, क्या सामान्य वर्ग में निर्धन परिवार नहीं हैं? उनके लिए कोई कोचिंग, हॉस्टल, स्कॉलरशिप आदि क्यों नहीं है? मुसलमान तक के लिए आपका कोष खुला हुआ है, ब्राह्मणों के लिए नहीं?
ब्राह्मण-ठाकुरों के घर मिट्टी के हैं, सर पर छत नहीं, भिक्षा माँग कर खाने को विवश हैं, हर दिन ऐसे रिपोर्ट दिखता सुनता हूँ। आपको वो बच्चे नहीं दिखते?
प्रयागराज में 10 एडवोकेट्स पर ही SC ST एक्ट का मुकदमा दर्ज कर दिया गया है जिसमे आजीवन कारावास की सजा है
सभी 10 के 10 अधिवक्ता ब्राह्मण हैं। जिन्हें आरोपी बनाया गया है उनके अनुसार प्रयागराज में दलित वकील ने आपसी राजनीति और कम मामले मिलने का गुस्सा SC ST Act लगाकर निकाला है।
प्रशासन स्वयं ही रैंडम बातों पर ‘ले चलो इसको SC वाला लगाओ’ कह कर कार्य करे तो समझ जाइए कि न्याय कितना हो रहा है। मोदी एक्ट पुलिस, प्रशासन और दलित के लिए धनोपार्जन का माध्यम बन गया है।
सोचिए, मात्र 22 साल का लड़का था देवा द्विवेदी। 22 साल क्या age होती है? कॉलेज का लड़का, पढ़ने-लिखने वाला और ब्राह्मण था और मोदी एक्ट, जिसे SC-ST Act भी कहा जाता है कुछ लोगों के द्वारा, उसमें उसे फँसाया गया और अंत में उसने आत्महत्या कर ली।
अब एक और नाम याद आता है, विष्णु तिवारी का। विष्णु तिवारी वो भी 22 ही वर्ष के थे। जब वो आगरा सेंट्रल जेल से बाहर निकले तो 45 के हो चुके थे।
माता-पिता, दो भाई की मृत्यु हो चुकी थी, परिवार की ज़मीन बिक गई और रिहाई के बाद उनके सामने फिर से जीवन आरंभ करने का प्रश्न खड़ा हो गया।
सरकार को समझना चाहिए कि सबके सहने की एक सीमा होती है, और उसके बाद आम नागरिक क़ानून अपने हाथ में लेने लगता है।
आज गालियाँ दे रहे हो- कल जेल में बैठकर पछताओगे कि
जब SC/ST एक्ट के दुरुपयोग के खिलाफ आवाज़ उठी, तब प्रीत सिरोही के साथ क्यों नहीं खड़े हुए।
Stand against SC/ST Act misuse. RETWEET.
यदि आप हमारे 'आरक्षण सुधार आंदोलन' @RHAreforms से जुड़ना चाहते हैं तो ये रहा गूगल फॉर्म। आपके डेटा को हम कहीं शेयर नहीं करेंगे। यह एक स्वैच्छिक कार्य है।
https://t.co/VftxHc5Ejc
IIT Bombay suicide case is extremely unfortunate.
But if the professor is booked under SC/ST Act, then-
we are setting a very dangerous precedent in our schools and colleges.