Official Account:
Former Central President-Uttarakhand Kranti Dal,
पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष-उत्तराखंड क्रांति दल
@UKD4Uttarakhand
4 times MLA UP/Uttarakhand
माननीय मुख्यमंत्री @pushkardhami जी को सार्वजनिक पत्र लिखकर जॉलीग्रांट एयरपोर्ट का नाम स्व. बिपिन रावत जी के नाम पर रखने अनुरोध किया l उक्रांद ने इस संदर्भ मे मुख्यमंत्री को 1 वर्ष पूर्व पत्र भेजा था l
मुख्यमंत्री उत्तराखंडियों की जनभावना का सम्मान करें l
https://t.co/tod3zkjneI
दिल्ली की भाजपा सरकार अपनी विफलताओं, लापरवाही और भ्रष्ट कार्यशैली पर पर्दा डालने के लिए पहाड़ के एक सीधे-सादे व्यक्ति केशव नेगी को बलि का बकरा बनाकर निशाना बना रही है। अपनी जवाबदेही से भागने वाली दिल्ली भाजपा सरकार अब होटल में कार्यरत एक निर्दोष कर्मचारी पर दोष मढ़कर अपने दामन को बचाने का प्रयास कर रही है।
दिल्ली के मालवीय नगर स्थित एक होटल में पिछले दिनों लगी भीषण आग की घटना में वहां बतौर शेफ कार्यरत उत्तराखंड मूल के केशव नेगी को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। केशव नेगी का कसूर आखिर क्या है? केवल इतना कि जब होटल में भयावह आग लगी तो उन्होंने अपनी जान बचाने के लिए वहां से बाहर निकलने का प्रयास किया और बाहर आ गए । क्या उनसे यह अपेक्षा की जा रही थी कि वे आग में जलकर अपनी जान गंवा देते केवल इसलिए कि वे उस होटल में नौकरी करते थे? किसी कर्मचारी को अपनी जान बचाने के लिए अपराधी ठहराना न केवल अन्यायपूर्ण है बल्कि संवेदनहीनता की पराकाष्ठा भी है।
मालवीय नगर के जिस होटल में यह दुखद हादसा हुआ, उसका लाइसेंस दिल्ली भाजपा की एमसीडी ने जारी किया, फायर सेफ्टी एनओसी दिल्ली सरकार के संबंधित विभागों ने प्रदान की और अन्य सभी आवश्यक अनुमतियां भी दिल्ली सरकार के मंत्रालयों एवं विभागों द्वारा दी गईं। ऐसे में यदि सुरक्षा मानकों में कोई चूक हुई और लोगों की जान गई, तो उसकी नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी सीधे तौर पर दिल्ली भाजपा सरकार पर बनती है। लेकिन अपनी जवाबदेही स्वीकार करने के बजाय दिल्ली भाजपा सरकार एक साधारण पहाड़ी व्यक्ति को फंसाकर अपने अधिकारियों और जिम्मेदार लोगों को बचाने की कोशिश कर रही है।
दिल्ली के होटलों में उत्तराखंड के हजारों लोग शेफ और अन्य व्यवसाय में कार्यरत हैं तथा लाखों उत्तराखंडी दिल्ली में रहकर अपना जीवनयापन कर रहे हैं। हम दिल्ली की भाजपा सरकार को स्पष्ट चेतावनी देते हैं कि अपनी नाकामियों और भ्रष्ट व्यवस्था छुपाने के लिए उत्तराखंड के निर्दोष पहाड़ी व्यक्ति को फँसाने का कार्य ना करे I
हम दिल्ली भाजपा सरकार और वहां की मुख्यमंत्री से निवेदन करते हैं कि केशव नेगी को तुरंत रिहा किया जाए नहीं तो पूरा उत्तराखंड और पहाड़ी समाज दिल्ली भाजपा सरकार के खिलाफ उठ खड़ा होगा ।
हम उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी जी से माँग करते हैं कि अपने समकक्ष दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता जी से बात करें और केशव नेगी को तुरंत रिहा करवाएं I
जय भारत, जय उत्तराखंड
@pushkardhami@gupta_rekha
यदि देश किसी संकट, चुनौती या विपदा का सामना करेगा, तो उत्तराखंड भी उससे अछूता नहीं रह सकता है । राष्ट्रीय स्तर पर होने वाली घटनाओं और नीतियों का प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष प्रभाव हमारे राज्य पर भी पड़ता है । इसलिए यह आवश्यक है कि राज्य के नागरिक केवल स्थानीय मुद्दों तक ही सीमित न रहें, बल्कि देश के ज्वलंत और महत्वपूर्ण विषयों पर भी गंभीरता से चर्चा करें, अपनी राय रखें और लोकतांत्रिक संवाद में सक्रिय भागीदारी निभाएँ।
वर्तमान समय में देश जिन परिस्थितियों से गुजर रहा है, उनमें उत्तराखंड के युवाओं की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। युवाओं को स्थानीय समस्याओं के साथ-साथ राष्ट्रीय मुद्दों पर भी निर्भीकता से बोलना, लिखना और अपनी आवाज़ बुलंद करनी चाहिए। यह उनकी सामाजिक और लोकतांत्रिक जिम्मेदारी है, क्योंकि वही इस राज्य और देश के वर्तमान के सहभागी तथा भविष्य के निर्माता हैं।
देश की अर्थव्यवस्था से जुड़े गंभीर प्रश्न, लगातार बढ़ती महँगाई, रुपये के मूल्य में गिरावट, पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस के बढ़ते दाम, NEET परीक्षा में पेपर लीक जैसी घटनाएँ, CBSE परीक्षाओं की उत्तरपुस्तिकाओं की जाँच में सामने आ रही अनियमितताएँ, बढ़ती बेरोजगारी, सार्वजनिक उपक्रमों का निजीकरण तथा जल, जंगल और जमीन जैसे प्राकृतिक संसाधनों को बड़े पूंजीपति समूहों के हवाले किए जाने जैसे मुद्दे केवल राष्ट्रीय चिंताएँ नहीं हैं, बल्कि इनका प्रभाव उत्तराखंड सहित देश के प्रत्येक नागरिक पर पड़ता है।
हमें पूर्ण विश्वास है कि उत्तराखंड का युवा वर्ग इन ज्वलंत मुद्दों पर मुखर होकर अपनी बात रखेगा, जनहित के प्रश्नों को मजबूती से उठाएगा और समाज में एक सशक्त, जागरूक तथा जिम्मेदार आवाज़ के रूप में अपनी भूमिका निभाएगा।
जय उत्तराखंड, जय भारत
उत्तराखंड क्रांति दल, काशीपुर के पूर्व जिलाध्यक्ष, संघर्षशील व्यक्तित्व एवं पूर्व सैनिक श्री जगदीश चंद्र बौड़ाई जी के आकस्मिक निधन का अत्यंत दुःखद समाचार प्राप्त हुआ।
श्री बौड़ाई जी उत्तराखंड क्रांति दल के एक कर्मठ, समर्पित एवं निष्ठावान कार्यकर्ता थे। उन्होंने अपने जीवन में सदैव जनहित, सामाजिक सरोकारों एवं क्षेत्रीय मुद्दों के लिए संघर्ष किया। एक पूर्व सैनिक के रूप में उन्होंने राष्ट्रसेवा की, वहीं सामाजिक एवं राजनीतिक जीवन में भी जनता के अधिकारों और उत्तराखंड के हितों के लिए निरंतर सक्रिय भूमिका निभाई।
उनके आकस्मिक निधन से व्यक्तिगत रूप से गहरा आघात पहुँचा है। उनका जाना उत्तराखंड क्रांति दल तथा समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति है। इस दुःखद घड़ी में हम सभी शोक-संतप्त परिवारजनों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएँ व्यक्त करते हैं तथा ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें और परिजनों को इस असहनीय दुःख को सहन करने की शक्ति दें।
मेरी तथा उत्तराखंड क्रांति दल की ओर से आदरणीय श्री जगदीश चंद्र बौड़ाई जी को भावभीनी श्रद्धांजलि।
एक बार फिर उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में परिवहन निगम की जर्जर और खस्ताहाल बसों के कारण एक स्थानीय चालक को अपनी जान गंवानी पड़ी है। चंपावत–पिथौरागढ़ राजमार्ग पर परिवहन निगम की एक बस तकनीकी खराबी के कारण दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस दुर्घटना में बस चालक चंपावत निवासी श्री बेनीराम भट्ट ने सूझ-बूझ का परिचय देते हुए बस में सवार 34 यात्रियों की जान बचा ली । दुर्भाग्यवश, दुर्घटना के दौरान चालक सीट का दरवाजा खुल जाने से वे बस के नीचे आ गए और उनकी मृत्यु हो गई।
श्री बेनीराम भट्ट के निधन पर हमें गहरा दुःख है। इस कठिन समय में हम उनके परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करते हैं। यह केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र की गंभीर लापरवाही का परिणाम है। यदि परिवहन निगम की बसों का समय पर रखरखाव और तकनीकी निरीक्षण किया जाता, तो संभवतः यह दुखद घटना टाली जा सकती थी। इसलिए इस दुर्घटना की नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी सरकार तथा परिवहन विभाग को स्वीकार करनी चाहिए। हम मांग करते हैं कि श्री बेनीराम भट्ट के परिवार को उचित आर्थिक मुआवजा तथा आश्रितों को आवश्यक सहायता प्रदान की जाए।
हम लंबे समय से पर्वतीय क्षेत्रों में परिवहन निगम की जर्जर बसों के संचालन का विरोध करते रहे हैं तथा सरकार से नई और सुरक्षित बसें खरीदकर उन्हें पर्वतीय मार्गों पर संचालित करने की मांग करते रहे हैं। सरकार को न केवल नई बसों की व्यवस्था करनी चाहिए, बल्कि उनके नियमित रखरखाव और तकनीकी निरीक्षण की भी प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए। इसके लिए प्रत्येक पर्वतीय जिले में बस डिपो को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया जाए तथा बसों की मरम्मत और देखभाल के लिए प्रशिक्षित तकनीकी टीमों की नियुक्ति की जाए।
उत्तराखंड की भाजपा सरकार जिस प्रकार विज्ञापनों पर हजारों करोड़ रुपये खर्च कर रही है, उसी धन का एक हिस्सा सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने में लगाया जा सकता था। नई और सुरक्षित बसों की उपलब्धता से पर्वतीय क्षेत्रों के लोगों को बेहतर आवागमन सुविधा मिलती और ऐसी दुखद घटनाओं को रोका जा सकता था।
हम सरकार से मांग करते हैं कि वह पर्वतीय क्षेत्रों में खस्ताहाल बसों का संचालन तत्काल बंद करे, परिवहन व्यवस्था को सुरक्षित और आधुनिक बनाए तथा आम जनता के जीवन को जोखिम में डालने वाली लापरवाहियों पर प्रभावी कार्रवाई करे।
@UKD4Uttarakhand@UKDPithoragarh@UKDChampawat
मेरे जन्मदिवस के अवसर पर आप सभी द्वारा दिए गए स्नेह, शुभकामनाओं और आशीर्वाद के लिए मैं हृदय की गहराइयों से आपका आभार व्यक्त करता हूँ।
आज मुझे आप सभी के हजारों संदेश प्राप्त हुए । आपका प्रेम, विश्वास और अपनापन देखकर मैं भावुक और अभिभूत हूँ। आप सभी का यह स्नेह मेरे लिए अमूल्य है तथा मुझे जनसेवा के पथ पर और अधिक समर्पण एवं ऊर्जा के साथ कार्य करने की प्रेरणा देता है।
मैं आप सभी से क्षमा भी प्रार्थना करता हूँ कि संदेशों की अत्यधिक संख्या के कारण प्रत्येक व्यक्ति को व्यक्तिगत रूप से धन्यवाद प्रेषित कर पाना संभव नहीं है । मैं आप सभी का दिल से आभार प्रकट करता हूँ I
आप सभी का स्नेह, सहयोग और आशीर्वाद सदैव इसी प्रकार बना रहे । मैं हमेशा आपसे जुड़ा रहूँगा और आपके विश्वास पर खरा उतरने का हर संभव प्रयास करता रहूँगा ।
एक बार पुनः आप सभी का हृदय से धन्यवाद।
सादर।
काशी सिंह ऐरी
हमारे देश के लाखों बच्चों ने NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं और CBSE बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी के लिए पूरे वर्ष दिन-रात कड़ी मेहनत की, अपने सपनों को साकार करने के लिए अथक परिश्रम किया। लेकिन NEET परीक्षा में पेपर लीक और CBSE की उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन व्यवस्था में सामने आई गंभीर गड़बड़ियों ने उनकी मेहनत और उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
आज हमारे देश के बच्चों और युवाओं के भविष्य के साथ खुला खिलवाड़ हो रहा है, लेकिन इसकी जिम्मेदारी लेने को कोई तैयार नहीं है। यह स्थिति अत्यंत चिंताजनक और दुर्भाग्यपूर्ण है। जब परीक्षाओं की निष्पक्षता पर ही सवाल खड़े होने लगें, तब विद्यार्थियों का विश्वास व्यवस्था से उठना स्वाभाविक है।
केंद्र सरकार द्वारा संचालित विभिन्न परीक्षाओं में लगातार अनियमितताओं और गड़बड़ियों की खबरें सामने आ रही हैं, लेकिन जिम्मेदार मंत्रालयों और विभागों के मंत्रियों और अधिकारियों और के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है। इसके विपरीत, दबाव और मानसिक तनाव का बोझ बच्चों और उनके परिवारों पर डाला जा रहा है।
यदि सत्ता में बैठे लोग ही देश के बच्चों और युवाओं के भविष्य को सुरक्षित रखने में विफल रहेंगे, तो भारत एक मजबूत, विकसित और समृद्ध राष्ट्र कैसे बनेगा? यह केवल विद्यार्थियों का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का प्रश्न है। ऐसी लापरवाही और गैर-जिम्मेदाराना रवैया किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।
प्रधानमंत्री को तत्काल हस्तक्षेप करते हुए शिक्षा मंत्री तथा इस पूरे मामले के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए उनको पद से हटा देना चाहिए । साथ ही परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार कर ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी और पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए।
देश के बच्चों और युवाओं की मेहनत, सपनों और भविष्य की रक्षा करना सरकार की सर्वोच्च जिम्मेदारी है।
बच्चों, हम आपके साथ हैं।
@UKD4Uttarakhand
उत्तराखंड के कई क्षेत्र आज भी भीषण पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। पानी जैसी मूलभूत आवश्यकता की पूर्ति के लिए लोगों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। गाँवों तक स्वच्छ पेयजल पहुँचाने के उद्देश्य से शुरू किया गया प्रधानमंत्री जल जीवन मिशन उत्तराखंड में अनेक स्थानों पर भ्रष्टाचार और बदइंतजामी की भेंट चढ़ता दिखाई दे रहा है। कहीं पानी की टंकियाँ टूट रही हैं, कहीं पाइपलाइनें फट रही हैं, तो कहीं निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। परिणामस्वरूप करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद अनेक गाँव आज भी प्यासे हैं।
स्थिति यह है कि लोगों की समस्याएँ सुनने वाला न कोई जिम्मेदार अधिकारी दिखाई देता है, न प्रशासन और न ही सरकार। चुने हुए जनप्रतिनिधि भी जनता की बुनियादी समस्याओं के समाधान में असफल साबित हो रहे हैं। ऐसे में आम नागरिक अपनी आवाज़ उठाने के लिए सड़कों पर उतरने को विवश हैं।
देवप्रयाग क्षेत्र के कई गाँव लंबे समय से गंभीर जल संकट का सामना कर रहे हैं। हाल ही में क्षेत्र की महिलाओं ने एक कार्यक्रम के दौरान स्थानीय विधायक के सामने पानी की समस्या उठाई और समाधान की मांग की। लेकिन उनकी पीड़ा सुनने और समस्या का समाधान खोजने के बजाय उनसे "भारत माता की जय" के नारे लगाने को कहा गया। यह घटना दर्शाती है कि जनता की वास्तविक समस्याओं को किस तरह नजरअंदाज किया जा रहा है। आज देवप्रयाग क्षेत्र के लोग पानी की मांग को लेकर मशाल यात्राएँ निकालने पर मजबूर हैं। यदि समय रहते उनकी बात सुनी जाती और प्रभावी कदम उठाए जाते, तो शायद ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती।
वर्तमान में भीषण गर्मी पड़ रही है और पहाड़ के अनेक गाँव पानी की कमी से त्रस्त हैं। इस संकट का सबसे अधिक बोझ महिलाओं पर पड़ता है, जिन्हें कई किलोमीटर दूर जाकर पानी ढोना पड़ता है। उत्तराखंड के अनेक गाँव पीने के पानी जैसी बुनियादी सुविधा के लिए तरस रहे हैं। करोड़ों रुपये की जल परियोजनाएँ भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ चुकी हैं, जबकि दूसरी ओर सरकार करोड़ों रुपये विज्ञापनों पर खर्च कर विकास के दावे कर रही है। सवाल यह है कि यदि विकास वास्तव में हुआ है, तो फिर उत्तराखंड के गाँव आज भी पानी के लिए संघर्ष क्यों कर रहे हैं ?
@UKD4Uttarakhand@UKDTehri
आज 30 मई का दिन तिलाड़ी कांड के अमर शहीदों को श्रद्धापूर्वक नमन करने का दिन है। यह दिन उत्तराखण्ड के जनसंघर्षों, बलिदानों और अधिकारों की लड़ाई की गौरवशाली विरासत का प्रतीक है।
जब तत्कालीन टिहरी रियासत ने जनता के पारंपरिक वनाधिकारों को छीन लिया और जंगलों पर कठोर प्रतिबंध लगा दिए, तब जौनपुर और रवांई क्षेत्र की साहसी जनता ने अन्याय के विरुद्ध आवाज़ बुलंद की। अपने हक-हकूक की रक्षा के लिए लोगों ने संगठित होकर सभा की और राजशाही के दमनकारी निर्णयों का विरोध किया। जनता के इस लोकतांत्रिक प्रतिरोध से भयभीत टिहरी राज्य के कारिंदों ने निहत्थी भीड़ पर गोलियां चला दीं। इस निर्मम गोलीकांड में सौ से अधिक लोगों ने अपने प्राणों की आहुति दी और तिलाड़ी की धरती शहीदों के रक्त से लाल हो गई।
तिलाड़ी कांड केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि अन्याय के विरुद्ध संघर्ष, साहस और जनएकता का अमर प्रतीक है। यह दिन हमें अपने पूर्वजों के बलिदान की याद दिलाता है और प्रेरित करता है कि हम अपने अधिकारों, जल-जंगल-जमीन और जनहित के मुद्दों के प्रति सजग रहें। विडंबना यह है कि जंगलों से जुड़े अनेक कानून और व्यवस्थाएं आज भी उसी मानसिकता की झलक देती हैं, जिनके खिलाफ हमारे पूर्वजों ने संघर्ष किया था।
आइए, तिलाड़ी के शहीदों के बलिदान से शक्ति और प्रेरणा ग्रहण करें, अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनें और न्यायपूर्ण, समृद्ध तथा जनआकांक्षाओं के अनुरूप उत्तराखण्ड के निर्माण के लिए निरंतर प्रयासरत रहें।
तिलाड़ी के अमर शहीदों को शत-शत नमन।
जय भारत! जय उत्तराखण्ड!
भाजपा सरकार फायदे में चल रही सरकारी कंपनियों को भी निजी हाथों में सौंप रही है । उत्तराखंड के अल्मोड़ा स्थित आयुर्वेदिक दवाइयाँ बनाने वाली सरकारी कंपनी IMPCL (इंडियन मेडिसिन फार्मास्युटिकल कॉर्पोरेशन लिमिटेड) को भी निजी कंपनी को बेच दिया गया है, जिससे वहाँ कार्यरत स्थानीय कर्मचारियों की नौकरियों पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
केंद्र सरकार ने 26 मई 2026 को अल्मोड़ा स्थित IMPCL को मात्र 121 करोड़ रुपये में Ms स्काईमैप फार्मास्युटिकल्स प्राइवेट लिमिटेड को बेच दिया। हैरानी की बात यह है कि जिस सरकारी कंपनी की नेटवर्थ लगभग 145 करोड़ रुपये बताई जा रही है, उसे उससे भी कम कीमत पर निजी हाथों में सौंप दिया गया।
IMPCL की स्थापना 12 जुलाई 1978 को वन विभाग की लगभग 40 एकड़ भूमि पर की गई थी। इस कंपनी के पास करीब 1200 प्रकार की औषधियाँ बनाने का लाइसेंस था और यह 575 प्रकार की आयुर्वेदिक एवं यूनानी दवाइयों का निर्माण कर देशभर के केंद्रीय अस्पतालों, रिसर्च संस्थानों और राज्य सरकारों के अस्पतालों को आपूर्ति कर रही थी।
यह केवल एक कंपनी की बिक्री का मामला नहीं है, बल्कि उत्तराखंड के रोजगार, आयुर्वेदिक विरासत और सरकारी संपत्तियों के भविष्य से जुड़ा गंभीर प्रश्न है।
भाजपा सरकार जनता को जवाब दे कि आखिर एक लाभ में चल रही सरकारी कंपनी को निजी कंपनी के हाथों क्यों बेचा गया? क्या सरकार का उद्देश्य सरकारी संस्थानों को मजबूत करना है या उन्हें धीरे-धीरे निजी कंपनियों के हवाले करना?
बच्चे और युवा किसी भी देश का भविष्य होते हैं। वे कड़ी मेहनत, लगन और शिक्षा के माध्यम से देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने का सपना देखते हैं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में लगातार सामने आ रहे पेपरलीक के मामलों ने लाखों छात्रों और उनके परिवारों के मन में गहरी निराशा और असुरक्षा पैदा कर दी है। मेहनत करने वाले विद्यार्थियों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या उनकी वर्षों की मेहनत और संघर्ष का कोई मूल्य रह गया है?
लगातार हो रहे पेपरलीक केवल परीक्षा प्रणाली की विफलता नहीं हैं, बल्कि यह देश के युवाओं और बच्चों के भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ है। इससे ईमानदारी से पढ़ाई करने वाले छात्रों का मनोबल टूटता है और शिक्षा व्यवस्था पर लोगों का विश्वास कमजोर होता है। पहले NEET जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाओं में पेपरलीक और गड़बड़ियों के आरोप सामने आए, और अब CBSE परीक्षा में भी अनियमितताओं की खबरें सामने आ रही हैं। यह बेहद चिंताजनक स्थिति है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि हमारे देश के शिक्षा मंत्री आखिर क्या कर रहे हैं? वर्षों से NEET परीक्षा में गड़बड़ियों और पेपरलीक की घटनाएं सामने आती रही हैं, फिर भी उन एजेंसियों और कंपनियों को परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी क्यों दी जाती रही जिन पर पहले से सवाल उठते रहे हैं? CBSE परीक्षा का ठेका भी ऐसी कंपनी को दिया गया जिसके ऊपर पहले से अनियमितताओं के आरोप थे। क्या शिक्षा मंत्रालय को इसकी जानकारी नहीं थी? यदि जानकारी थी, तो ऐसी कंपनियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
देश के करोड़ों छात्रों के भविष्य से जुड़े इस गंभीर मुद्दे की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। NEET पेपरलीक और CBSE परीक्षा में हुई गड़बड़ियों की नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की है। उन्हें इसकी जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए तुरंत इस्तीफा देना चाहिए।
साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को भी इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाना चाहिए, ताकि देश के युवाओं को यह संदेश जाए कि उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
@UKD4Uttarakhand
मैंने अपने जीवन में धैर्य, संयम, समर्पण और अनुशासन को ही सफलता का मूल मंत्र माना है। मेरा दृढ़ विश्वास है कि जीवन में सफलता पाने के लिए किसी भी प्रकार के शॉर्टकट का सहारा नहीं लेना चाहिए, बल्कि निरंतर संघर्ष, दृढ़ संकल्प और ईमानदार प्रयासों के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
अपने राजनीतिक जीवन में भी मैंने कभी उन्माद और तात्कालिक लाभ वाली राजनीति का रास्ता नहीं चुना। शॉर्टकट की राजनीति भले ही कुछ समय के लिए लाभ पहुँचा दे, लेकिन वह लंबे समय तक टिकाऊ नहीं होती। स्थायी सफलता केवल धैर्य, विचारशीलता और जनसेवा के प्रति समर्पण से ही प्राप्त होती है।
मेरी राजनीतिक यात्रा संघर्षों से भरी रही है। इस यात्रा में जीत भी मिली और हार का सामना भी करना पड़ा, लेकिन मैंने कभी अपने संकल्प और निरंतरता को कमजोर नहीं होने दिया। संगठन में रहते हुए मैंने हमेशा धैर्य, संयम, समर्पण और अनुशासन के साथ कार्य किया है और आज भी पूरी निष्ठा और प्रतिबद्धता के साथ समाज एवं संगठन की सेवा में लगा हुआ हूँ।
मैं राजनीति में आने वाले युवाओं से भी यही कहना चाहता हूँ कि वे उन्माद और शॉर्टकट की राजनीति से दूर रहें। उन्हें चाहिए कि वे धैर्य और निरंतरता के साथ संघर्ष करें तथा अनुशासन, समर्पण और सकारात्मक सोच के माध्यम से संगठन को मजबूत बनाने का कार्य करें। मुझे विश्वास है कि ऐसा करने पर सफलता निश्चित रूप से उनके कदम चूमेगी।
उत्तराखंड को समृद्ध, सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए युवाओं को निष्ठा और समर्पण के साथ उत्तराखंड क्रांति दल के विचारों से जुड़ना चाहिए तथा राज्य के विकास में अपनी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
जय उत्तराखंड!
जय भारत!
मेरे और उत्तराखंड क्रांति दल की तरफ से हमारे सभी मुस्लिम साथियों को ईद-अल-अज़हा की मुबारकबाद I
प्रदेश में सौहार्द और सामाजिक प्रेम का वातावरण बना रहे I
जय उत्तराखंड, जय भारत
@UKD4Uttarakhand
पिछले दिनों संगठनात्मक कार्यों के सिलसिले में देहरादून प्रवास के दौरान अनेक युवाओं से मुलाकात हुई । इन युवाओं में उत्तराखंड क्रांति दल से जुड़े कार्यकर्ताओं के साथ-साथ विभिन्न सामाजिक क्षेत्रों में सक्रिय युवा भी शामिल थे । मैंने सभी युवाओं से आह्वान किया कि वे उत्तराखंड क्रांति दल से जुड़कर क्षेत्रीय राजनीति को मजबूत बनाएं तथा उत्तराखंड के स्थानीय और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को मजबूती के साथ उठाएं।
मैंने युवाओं से स्पष्ट कहा कि यह केवल एक-दो चुनावों की लड़ाई नहीं है, बल्कि उत्तराखंड के अस्तित्व, अस्मिता और भविष्य को बचाने का एक लंबा वैचारिक एवं जनसंघर्ष है। इसके लिए युवाओं को दृढ़ संकल्प के साथ दीर्घकालिक संघर्ष हेतु तैयार रहना होगा। साथ ही उन्हें संयम, धैर्य और संगठनात्मक अनुशासन का परिचय भी देना होगा।
युवाओं को उत्तराखंड क्रांति दल को केवल राजनीति का मंच नहीं, बल्कि एक मजबूत क्षेत्रीय वैचारिक संगठन के रूप में स्वीकार करना होगा। स्वर्गीय डी. डी. पंत जी, इंद्रमणि बडोनी जी, बिपिन त्रिपाठी जी, जसवंत सिंह बिष्ट जी एवं अनेक बुद्धिजीवियों ने इस दल को एक सशक्त वैचारिक आधार प्रदान किया है। यह वैचारिकता प्रत्येक कार्यकर्ता के भीतर गहराई से समाहित होनी चाहिए।
यदि हम अपने संस्थापकों के विचारों, सिद्धांतों और आदर्शों से स्वयं को मजबूत नहीं करेंगे, तो हम भी अन्य राजनीतिक दलों की तरह केवल सत्ता की राजनीति तक सीमित होकर रह जाएंगे। हमारा उद्देश्य उत्तराखंड क्रांति दल को आदर्शवादी विचारों वाला, जनसंघर्ष आधारित और उत्तराखंड की मूल भावना का प्रतिनिधित्व करने वाला एक मजबूत क्षेत्रीय राजनीतिक दल बनाना होना चाहिए।
युवाओं को उत्तराखंड क्रांति दल की विचारधारा से जुड़कर उसकी नीतियों को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य करना होगा, ताकि उत्तराखंड को एक समृद्ध, आत्मनिर्भर और सशक्त राज्य बनाया जा सके। युवा इस राज्य का भविष्य हैं और आने वाला समय उन्हीं का है, लेकिन उन्हें धैर्य, अनुशासन और निरंतर संघर्ष के साथ आगे बढ़ना होगा।
हमने पूर्व में भी देखा है कि चुनावों से पहले कई लोग पार्टी से जुड़ते हैं और बाद में केवल अपने स्वार्थ की पूर्ति हेतु दल का उपयोग कर अलग हो जाते हैं, जिससे संगठन को नुकसान पहुंचता है। इसलिए आवश्यकता ऐसे समर्पित युवाओं की है, जो उत्तराखंड क्रांति दल से केवल राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि एक क्षेत्रीय वैचारिक आंदोलन के रूप में जुड़ें और संगठन को मजबूत बनाएं।
मुझे पूर्ण विश्वास है कि उत्तराखंड का युवा उत्तराखंड क्रांति दल की विचारधारा को आगे बढ़ाते हुए राज्य, समाज और भविष्य की दिशा तय करेगा। युवा देश, राज्य और समाज की सबसे बड़ी शक्ति हैं, और उत्तराखंड क्रांति दल युवाओं के साथ मिलकर एक समृद्ध एवं सशक्त उत्तराखंड के निर्माण के लिए निरंतर कार्य करता रहेगा।
जय भारत, जय उत्तराखंड।
@UKD4Uttarakhand
आज अमर बलिदानी श्रीदेव सुमन जी की जन्मजयंती है, स्वाधीनता के लिये अपने प्राणों का उत्सर्ग तक करने वाले प्रखर पुरुष श्रीदेव सुमन जी को मैं अपनी और अपने दल की ओर से नमन करता हूं ।
मेरे लंबे राजनीतिक जीवन में मेरे कई राजनीतिक प्रतिद्वंदी रहे हैं, उनमे से एक हरीश रावत जी भी रहे हैं, हमने एक दूसरे के खिलाफ चुनाव भी लड़ा है I राजनीतिक प्रतिद्वंदिता होने के बावजूद भी मैंने कभी किसी के खिलाफ व्यक्तिगत विद्वेष नहीं रखा है और सभी को सम्मान दिया है I
कल देहरादून में देश के पूर्व केंद्रीय मंत्री और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री श्री हरीश रावत जी के जीवन पर एक वृत्तचित्र का विमोचनं था जिसमे उत्त्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी जी, उत्तराखंड के पूर्व मंत्री गणेश गोदियाल जी, पूर्व सांसद प्रदीप टम्टा जी एवं राज्य के अन्य वरिष्ठ राजनीतिज्ञों के साथ मै भी आमंत्रित था I
इस अवसर पर हरीश रावत जी के बारे में मैंने भी अपने विचार रखे और हमारे संबंधों के बारे में भी बताया, राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता होने के बाद भी हम अपने राजनीतिक प्रतिद्वंदियों का सम्मान करते हैं l
आजकल के राजनीतिक वातावरण में आप ये कल्पना भी नहीं कर सकते हैं कि राजनीतिक प्रतिद्वंदी एक दूसरे प्रति सम्मान रखें और प्रतिद्वंदी से भी अच्छे संबंध रहे I पिछले कुछ समय से जिस तरह से राजनीतिक वातावरण दूषित हुआ है उसने राजनीतिक मर्यादा को तार-तार कर दिया है और ये किसी समाज और देश के लिए अच्छा नहीं है I
हम सबको मिलकर उत्तराखंड के लिए काम करना है और ये ध्यान रखना है कि हमारे विचारों और कार्यों से उत्तराखंड को क्षति ना पहुंचे, हम सभी का मकसद उत्तराखंड की खुशहाली, समृद्धता और विकास होना चाहिए l
देश, राज्य और समाज में भाईचारा और सौहार्द बना रहना चाहिए और सभी को देश, राज्य और समाज के लिए मिलकर काम करना चाहिए I
जय उत्तराखंड, जय भारत
@UKD4Uttarakhand@harishrawatcmuk@BSKoshyari@UKGaneshGodiyal@PradeepTamtaINC@garimadasauni
एक बार फिर से पेट्रोल/तेल की दामों में बढ़ोत्तरी करी गई ।
10 दिन पहले पेट्रोल/तेल के दाम 3 रुपए बढ़ाए गए, 4 दिन पहले तेल के दाम 85 पैसे बढ़ाए गए, कल 90 पैसे बढ़ाए है, इस तरह से करीब 5 रुपए पेट्रोल तेल का दाम बढ़ा है । भाजपा सरकार पेट्रोल/तेल की कीमत धीरे-धीरे करते हुए ऐसे ही दाम बढ़ा रही है I
पेट्रोल/तेल के दाम बढ़ रहे हैं, पेट्रोल पंपों पर लाईन लगी हुई मिलती है, रसोई गैस के दाम बढ़ाये गए हैं और गैस के लिए गैस एजेंसियों में लाईन लगी हुई मिलती है I
रुपया लगातार कमजोर हो रहा है, आज रुपया 97 रूपए प्रति डॉलर हो गया है I सोना-चाँदी के दामों ने आसमान छू लिया है, सोना-चाँदी खरीदना आम आदमी के बस की बात नहीं रह गया है I दूध के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, खाने के तेल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, खाने-पीने के सामानों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, महँगाई लगातार बढ़ रही है I
गैस, खाने के तेल, दूध, खाने-पीने की वस्तुओं के दामों में बढोत्तरी और मँहगाई का असर रसोई में दिख रहा है, इससे सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं को हो रही जो घर को देखती हैं और उनका बजट बिगड़ रहा है I बढ़ती महँगाई से आम आदमी का जीना मुश्किल हो गया है और वो परेशान है I
भाजपा सरकार की कमजोर नीतियों ने देश को आर्थिक संकट की ओर धकेल दिया है जिसके परिणाम धीरे-धीरे दिख रहे हैं, बेरोजगारी बढ़ी है, औद्योगिक उत्पादन घटा है, निर्यात घटा है, नौकरियाँ कम हो गई हैं, व्यापार घटा है, बाज़ार में मंदी छाई हुई है, रुपया लगातार कमजोर हो रहा है, सामानों की कीमते बढ़ रही है और महँगाई चरम पर है I
लोग तब कहने लगे हैं कि अबकी बार महँगाई की सरकार !