आज छात्रों को बहुत बड़ी जीत मिली है।
याद रहे, प्रदर्शन में जिन छात्रों पर घातक हमले हुए - किसी का हाथ टूटा, किसी का पैर, किसी की पसली, पेलेट गन जैसे जानलेवा हथियार क��� इस्तेमाल किया गया, तो कई चोट खा कर critical हो गए - इन सबके सीधे ज़िम्मेदार गृह मंत्री अमित शाह हैं।
मांग साफ है, इस हमले के organisers से लेकर implementors तक, सभी की जवाबदेही तय हो और उनपर ऐसी कार्रवाई हो जो छात्रों को दिखे - तब जा कर होगा इंसाफ़।
अमित शाह जी, आपको ज���ाब तो देना ही पड़ेगा।
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हमारे education system को फिर से संवारने की दिशा में बहुत बड़ा कदम है।
शाबाश देश भर के छात्रों, आप सभी पर गर्व है।
सड़कों पर आ कर लोकतंत्र, संविधान और अपने भविष्य की रक्षा में डट कर खड़े होने वाले हर एक युवा, हर छात्र को बहुत-बहुत बधाई।
2 मांगें अभी भ�� बाकी हैं - प्रधानमंत्री छात्रों और भारत के भविष्य को सम्मान देते हुए माफ़ी मांगें और छात्रों पर हिंसा के दोषियों पर कार्रवाई हो।
ये समाज के दूसरे वर्गों किसानों, मजदूरों, गरीबों, हर वो व्यक्ति जिसे इस सरकार ने दबाया है, कुचला है - अपने सम्मान के लिए संवैधानिक तरीके से डटकर खड़े होने में ही असली साहस है।
इस सरकार को हटाने का वक्त आ गया है।
डरो मत!
CBSE परीक्षा परिणाम में भयंकर हेर-फेर हो गई जिससे देश के लाखों बच्चे और उनके माता-पिता सदमे में हैं।
और मोदी जी? हमेशा की तरह - न जवाब, न ज़िम्मेदारी, न शर्म।
जिस कंपनी COEMPT को यह ज़िम्मेदारी मिली, वह पहले Globarena के नाम से तेलंगाना में 2019 में यही कार���ामे कर चुकी है।
नाम बदला - पर नीयत वही, फितरत वही।
इतिहास सबको पता था, फिर भी ठेका दिया गया। ऐसी कंपनी के हाथ में 18.5 लाख बच्चों का भविष्य सौंप दिया गया और किसी को फ़र्क़ नहीं पड़ा।
यह गलती नहीं - यह सोचा-समझा षड़यंत्र है।
कुछ ज़रूरी सवाल हैं:
- COEMPT को CBSE का ठेका क्यों और किसके कहने पर दिया गया?
- कौन-कौन से नियम और प्रक्रिया दरकिनार करके इस कंपनी को ये ठेका दिया गया?
- COEMPT पहले Globarena के नाम से विवादों म���ं घिर चुकी है, ये CBSE को क्यों नहीं पता चला? Background checks क्यों नहीं किए गए?
- COEMPT प्रबंधन और मोदी सरकार के बीच आखिर क्या संबंध हैं?
हम मांग करते हैं कि इस पूरे घोटाले के असली दोषियों को सामने लाने के लिए स्वतंत्र न्यायिक जांच और SIT का गठन तत्काल किया जाए।
CBSE के Gen Z साथियों - आपकी मेहनत, आपका भविष्य, कोई चुरा नहीं पाएगा। हम इस साजिश की तह तक जाएंगे, और इस भ्रष्टाचार को जड़ से उखाड़ फेंकेंगे।
RSS के लोगों सुन लो...👇
मैं कभी माफी नहीं मांगूगा और फिर कहता हूं: नरेंद्र मोदी-अमित शाह गद्दार हैं, क्योंकि उन्होंने संविधान पर हमला किया है।
सुन लो अच्छी तरह... मैं तुम लोगों से नहीं डरता।
कह दिया था - चुनाव के बाद महंगाई की गर्मी आएगी।
आज कमर्शियल गैस सिलेंडर ₹993 महंगा। एक ही दिन में सबसे बड़ी बढ़ोतरी। यह चुनावी बिल है।
फरवरी से अब तक: ₹1,380 की बढ़ोतरी - सिर्फ़ 3 महीनों में 81% का इज़ाफ़ा।
चायवाला, ढाबा, होटल, ब���करी, हलवाई - हर किसी की रसोई पर बोझ बढ़ा। और इसका असर आपकी थाली पर भी पड़ेगा।
पहला वार गैस पर, अगला वार पेट्रोल-डीज़ल पर।
पहलगाम में पिछले वर्ष हुए कायरतापूर्ण आतंकी हमले में शहीद हुए सभी वीरों को मैं भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।
भारत उनका बल��दान और उनके परिवारों की पीड़ा को न कभी भूलेगा, और �� ही इस कायराना कृत्य के दोषियों को कभी माफ करेगा।
बेरहमी से छीने गए मासूम जिंदगियों की याद आज भी हमारे दिलों को झकझोरती है। शहीदों के परिवारों का दुःख हम सब का दुःख है। देश के उन बेटों की शहादत भारत की आत्मा में सदा अमिट रहेगी।
आतंकवाद और हिंसा के खिलाफ पूरा देश एकजुट था, है और हमेशा रहेगा।
नफरत और डर फैलाने वाली ताकतों के सामने भारत कभी नहीं झुकेगा - हम और अधिक मजबूती, एकता और संकल्प के साथ इसके विरुद्ध खड़े रहेंगे।
जय हिंद।
राजस्थान देश में सबसे ज्यादा टोल टैक्स दे रहा है। पिछले 5 साल में करीब 29,700 करोड़ का टोल टैक्स इकट्ठा हुआ है लेकिन टोल सड़कों की हालत खस्ता और दयनीय है।
अनुमान है कि जयपुर-दिल्ली और अजमेर तक के NH-48 से सबसे ज्यादा टोल मिला है। खुद नितिन गडकरी जी ने 8 साल पहले इस हाइवे का निरीक्षण किया था।
मंत्री जी ने वादा किया था क��� सालभर में ये हाइवे पूरी तरह से तैयार हो जाएगा लेकिन उसका काम अबतक पूरा नहीं हुआ। सड़कों के कई हिस्से टूटे हुए हैं, साइड लेन अधूरी हैं।
सवाल है:
• राजस्थान में कितने टोल प्लाजा ऐसे हैं, जिनपर अवधि पूरी होने के बाद/कन्सेशन के साथ टोल वसूला जा रहा है?
• कितने टोल प्लाजा ऐसे हैं, जिनपर बुनियादी सुविधाएं और एंबुलेंस की व्यवस्था है?
• जिन टोल प्लाजा की अवधि समाप्त हो गई है, उन्हें कब तक बंद कर जनता को राहत दी जाएगी?
: लोकसभा में @Brijendra_ola जी
भारत के लिए निडर होकर फैसले लेने और हर परिस्थिति में देशहित को प्रथम रखने की प्रेरणा मुझे दादी से ही मिली है।
उनका साहस, देशभक्ति और नैतिकता आज भी मुझे अन्याय के ख़िलाफ़ मज़बूती से खड़े होने का हौसला देती हैं।
यह अब पूरी तरह स्पष्ट हो चुका है कि भाजपा सरकार राजस्थान में पंचायती राज और शहरी निकाय चुनाव से बचना चाहती है, इन चुनावों को अनुचित कारणों से स्थगित किया गया था, और अब SIR की प्रक्रिया के बहाने फिर से चुनावों को टालने की कवायद शुरू हो चुकी है।
कांग्रेस पार्टी ने पहले ही बिहार में SIR की प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं के नाम सूची से हटा��� जाने पर गंभीर सवाल उठाए थे। अब यही प्रक्रिया अन्य राज्यों में लागू करने की तैयारी सरकार ने कर ली है।
राजस्थान में पंचायतों और नगर निकायों की अवधि समाप्त होने के बावजूद ��ुनाव न कराना संविधान की भावना के विपरीत है।
चुनाव आयोग का नया कारनामा देखिए-
नए वोटर बनने का आवेदन किया - 16 लाख 93 हज़ार लोगों ने
नए वोटर बनाए गए - 21 लाख 53 हज़ार लोग
ये भ्रष्टाचार नहीं देश के लोकतंत्र पर हमला है.
गोदी मीडिया कुछ नहीं बोलेगा…आपको बोलना होगा.
बोलिए…आवाज़ उठाइए…देश का लोकतंत्र बचाइए.
#votechoriexposed #BiharElections2025
#VoteChorGaddiChhod
हरियाणा के IPS अधिकारी वाई पूरन कुमार जी की आत्महत्या उस गहराते सामाजिक ज़हर का प्रतीक है, जो जाति के नाम पर इंसानियत को कुचल रहा है।
जब एक IPS अधिकारी को उसकी जाति के कारण अपमान और अत्याचार सहने पड़ें - तो सोचिए, आम दलित नागरिक किन हालात में जी रहा होगा।
रायबरेली में हरिओम वाल्मीकि की हत्या, सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश का अपमान और अब पूरन जी की मृत्यु - ये घटनाएँ बताती हैं कि वंचित वर्ग के ख़िलाफ़ अन्याय अपनी चरम सीमा पर है।
BJP-RSS की नफ़रत और मनुवादी सोच ने समाज को विष से भर दिया है।
दलित, आदिवासी, पिछड़े और मुस्लिम आज न्याय की उम्मीद खोते जा रहे हैं।
ये संघर्ष केवल पूरन जी का नहीं - हर उस भारतीय का है जो संविधान, समानता और न्याय में विश्वास रखता है।
Deeply saddened by the tragic incident at a political rally in Karur, Tamil Nadu, that has taken so many precious lives. My heart goes out to their loved ones, and I wish a swift recovery to all those injured.
I urge Congress workers and leaders to extend every possible support to the victims and their families, and to work closely with the authorities in relief and rescue efforts.