Kastoori (The Musk)” - अत्यंत चिंतनीय चित्रपट.केवळ एक चित्रपट नसून, तो मानवी आत्म्याच्या आवश्यकतेच्या आणि बदलाच्या आवश्यकतेच्या विचाराचा एक शक्तिशाली संदेश. श्री. विनोद कांबळे यांचे काम खूपच अद्वितीय आहे. समाजाच्या कठीण वास्तवाची आपल्याला समजण्यासाठी एक उत्तम चित्रपट!
“In search of fragrance, we get ourselves covered with the stench of guilt”
It is a story of a boy searching for a fragrance to cover the stench on his body caused by the unfairness and unjust cruelty of the world.
To attain that fragrance called @Kastoori_Musk his life gives him various choices for him to make.
Will he bend to the emotion of greed or resist it with his boon of knowledge?
#AaDekheZara with @GirishWankhede to get the detailed review
@anuragkashyap72@Nagrajmanjule
#podcast #eplog #socialimpact
कस्तूरी: बदबूदार समाज में ख़ुशबू की तलाश
फ़िल्म रिव्यू- मिथिलेश प्रियदर्शी
एक लड़का है गोपी, जो पोस्टमार्टम घर में लाशों की चिरफाड़ में अपने पिता की सहायता करता है। शौचालयों की सफाई में मां की मदद करता है। यह सब कर जब वह स्कूल जाता है तो उसे लगता है, बदबू उसके शरीर में बस गई है। स्कूल में बच्चे उससे दूर भागते हैं। उसके डेस्क पर भंगी लिख देते हैं।
लड़का किसी तरह इस बदबू से छुटकारा पाना चाहता है।
एक रोज़ अपनी बूढ़ी दादी से वह कस्तूरी की सुगंध का जिक्र सुनता है।
लड़के को कस्तूरी की गंध में अपनी इस नारकीय बदबू का अंत दिखता है। अब हर हाल में उसे कस्तूरी चाहिए और वह उसकी तलाश में अपने दोस्त के साथ लग जाता है।
यह कहानी है, 8 दिसंबर रिलीज होने वाली मराठी फिल्म कस्तूरी की।
परदे पर खूबसूरती और चमकदमक देखने की आदी हमारी आंखें फिल्म के शुरू में ही जब मक्खियां भिनभिनाते पीले पड़े गंदे शौचालय को देखती हैं तो झाड़ू लेकर खड़े गोपी की तरह एक बार नजरें फेर लेती हैं।
कस्तूरी आपको कई जगहों पर असहज करती है। क्योंकि हम वो हैं जो अपने पीछे कूड़ा पैदा करते हैं और बिना मुड़े आगे बढ़ जाते हैं। यह सोचते हुए कि कोई गोपी आएगा और इसे साफ कर देगा।
लेकिन इस बार गोपी सामने है। हाथ में झाड़ू लिए।
कस्तूरी को बनाया है, Vinod Kamble ने।
कल इसके प्रीमियर में जब विनोद ने इस फिल्म की यात्रा बतानी शुरू की तो रो पड़े।
रो पड़े, क्योंकि वो जिस जातीय, सामाजिक पृष्ठभूमि से आते हैं, यहां तक पहुंचना उनके लिए किसी सपने की तरह है।
उनके पिता सफाई कामगार हैं। बस्ती में पले बढ़े हैं। विनोद ने कहीं से फिल्म की कोई औपचारिक शिक्षा नहीं ली है। बस बस्ती में अपने लोगों को जिन संघर्षों से गुजरते देखा तो लगा उनकी कहानियां कहनी चाहिए। और एक ज़िद के बाद कस्तूरी सामने है।
कस्तूरी फिल्म बस्ती के एक लड़के की सच्ची कहानी पर आधारित है जो पोस्टमार्टम घर में काम करता है।
फिल्म चार साल पहले बनी। 2019 का नेशनल फिल्म फेयर अवार्ड मिला। बावजूद इसने न ओटीटी का मुंह देखा, न थियेटर का। पूरी टीम हताश हो गई। फिर इसे अनुराग कश्यप और नागराज मंजुले का सहारा मिला और अंतत: यह थियेटर में रिलीज हो रही है।
कस्तूरी की सबसे खूबसूरत बात यह है कि इसे छह महिलाओं ने मिलकर प्रोड्यूस किया है जिनका इसके पहले फिल्मी दुनिया से कोई रिश्ता नहीं था।
इन्हें साथ मिला फिल्मों के प्रति जुनूनी और वंचित तबकों के लिए प्रतिबद्ध एक IRS अधिकारी अजय ढोके का, जो वंचित समुदायों के लिए बिना किसी शोर शराबे के लगातार प्रयासरत हैं कि वो फिल्मों में आएं और अपनी कहानियां कहें।
तो कस्तूरी के बनने की कुल जमा कहानी यही है।
कस्तूरी के भीतर की कहानी सुननी हो फिल्म देखने जाइए।
Directed by Vinod Kamble !! Kastoori !! The ‘Musk, A boy tries to change the future written for him. The story was recently awarded the Special Festival Mention Award by the Tamil Nadu Film Festival.
The film, based on a true story, was aired on https://t.co/qXs4mHN1yr
His Hindi film Kastoori disrupts the idea of a message movie. Find out more about why we picked #VinodKamble and others as #FCDisruptors2020 (Oct 2019 - Sept 2020):
https://t.co/hh81yaagvp
His Hindi film Kastoori disrupts the idea of a message movie. Find out more about why we picked #VinodKamble and others as #FCDisruptors2020 (Oct 2019 - Sept 2020):
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@SrBachchan Hi @SrBachchan sir @Kastoori_Musk film is based on manual scavenging and inspired from true event. please watch it and give your feedback. Link is below
https://t.co/Jai4dD97If