देश पर एक system का कब्ज़ा है - परत दर परत।
कौन है ये सिस्टम?
RSS और "हम दो, हमारे दो" की अगुवाई में गिनती के लोगों ने मिल कर भारत की हर संस्था पर अपना नियंत्रण कर लिया है।
सरकार हो, व्यापार हो, शिक्षा हो, स्वास्थ्य हो, खेल हो, मीडिया हो, न्यायपालिका हो, चुनाव आयोग हो या bureaucracy - इस सिस्टम में हुनर नहीं, पैसा और पहुंच मायने रखता है।
इस क़ब्ज़े के खिलाफ, भ्रष्टाचार के खिलाफ, अन्याय के खिलाफ छात्रों की आवाज़ ही सिस्टम के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।
इसीलिए system को students से खतरा है - क्योंकि वो सवाल पूछते हैं, जवाबदेही मांगते हैं।
इसी डर से सिस्टम छात्र नहीं, अंधभक्त चाहता है - छात्रों को प्रताड़ित करता है, अंधभक्त को बढ़ावा देता है, ताकि कोई सवाल न उठे और मनमानी चलती रहे।
#ChhatronKiGoonj
“उस मासूम की क्या गलती थी?”
सत्य निकेतन की त्रासदी में अपने बेटे, अर्पित जाज, को खोने वाला परिवार डबडबाई आंखों से यही सवाल पूछ रहा है।
अगर अच्छे और सुरक्षित हॉस्टल होते, तो उन्हें अपने बच्चे को ऐसी खतरनाक जगह में रखने के लिए मजबूर न होना पड़ता। और अगर सुरक्षा मानकों का सच में पालन होता, तो शायद यह त्रासदी होती ही नहीं - एक ऐसी त्रासदी, जिसकी कल्पना उन बच्चों और उनके माता-पिता ने सपने में भी नहीं की होगी।
सिस्टम की गैर-जिम्मेदारी और भ्रष्टाचार ने सपनों से भरी कई जिंदगियां छीन लीं और उम्मीदों से भरे कई परिवारों को उजाड़ दिया।
अर्पित का परिवार भी पूरे देश की तरह जवाबदेही मांग रहा है। वे चाहते हैं कि छात्रों की जिंदगी की जिम्मेदारी तय हो, ताकि फिर किसी माता-पिता को अपने बच्चे को इस तरह खोने का दर्द न सहना पड़े।
सिस्टम से मेरा सीधा सवाल है: नए और सुरक्षित हॉस्टल क्यों नहीं बनाए जा रहे? छात्रों को असुरक्षित PG में रहने के लिए मजबूर क्यों होना पड़ रहा है? सत्य निकेतन हादसे की जांच कहां तक पहुंची?
"सरकार के पास दिया जलाने के लिए पैसा है - हमारे हॉस्टल के लिए क्यों नहीं?"
यह सवाल कल इंदौर में एक छात्रा ने मुझसे पूछा।
गाँव से पढ़ने शहर आई। हॉस्टल है नहीं, तो PG में रहना पड़ता है। सिर्फ़ सुरक्षित रहने में लाखों ख़र्च हो जाते हैं। हर महीने किराए की चिंता, और बेघर होने का डर - इसी में पढ़ाई करनी पड़ती है।
कई लड़कियाँ इसी वजह से पढ़ाई छोड़ देती हैं। सिर्फ़ इसलिए कि रहने की जगह नहीं है।
और आवास भत्ता? महंगाई के साथ बढ़ता नहीं, ऊपर से भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाता है।
@narendramodi जी - उस बच्ची के सवाल का कोई जवाब है आपके पास?
The video from Jamui, Bihar is deeply disturbing.
Two Class 10 students were stopped on a road. Harassed. Humiliated. Molested. A young girl, hands folded, begged to be let go while goons groped her and dragged her away.
Who gave these men the right to behave like this? This is not "culture." It is patriarchy: the belief that any man can police a girl's body, her movement, her choices.
When control is mistaken for culture, and such attitudes are normalised by Andhbhakts, mobs start believing they are the law.
Every individual in that video must be identified and prosecuted under POCSO, and justice must be swift. And if the incident happened on September 19th, why are the culprits not behind bars yet?
And the Bihar government must answer why a girl is not safe on a public road at 7 pm?
बिहार के जमुई का एक वीडियो बहुत बेचैन करने वाला है।
10वीं क्लास के एक छात्र और छात्रा को रास्ते में जबरदस्ती रोक लिया गया। उन्हें प्रताड़ित किया गया, अपमानित किया गया और छात्रा के साथ उत्पीड़न किया गया। बच्ची हाथ जोड़कर उसे जाने देने की विनती करती रही, मगर गुंडे उसे गलत तरीके से छूते और खींचतान करते रहे।
इन लोगों को ऐसी बदतमीज़ी करने का हक किसने दिया? यह "संस्कृति" नहीं है, यह patriarchy है: ये सोच कि किसी भी पुरुष का किसी लड़की के शरीर, उसके आने-जाने और उसकी पसंद-नापसंद पर नियंत्रण है।
जब नियंत्रण को ही संस्कृति मान कर 'अंधभक्त' ऐसी सोच को सामान्य ठहराते हैं, तो भीड़ को लगने लगता है कि वही कानून है।
उस वीडियो में दिख रहे हर व्यक्ति की पहचान होनी चाहिए और उन अपराधियों पर POCSO के तहत मुकदमा चलाकर उन्हें जल्द से जल्द सजा मिलनी चाहिए। और अगर ये घटना 19 सितंबर की है तो गुनहगार अब तक सलाखों के पीछे क्यों नहीं हैं?
और बिहार सरकार जवाब दे कि शाम 7 बजे कोई लड़की राज्य की सड़कों पर सुरक्षित क्यों नहीं है?
महाराष्ट्र में हजारों छात्र सड़कों पर हैं, शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलनरत हैं - इसकी वजह सिर्फ एक परीक्षा या भर्ती नहीं, पूरे सिस्टम से टूट चुका भरोसा है।
चाहे वो केंद्र की हो या राज्य की, BJP सरकार से हर छात्र त्रस्त है। पेपर लीक, रुकी हुई भर्तियां, शिक्षा की असहनीय लागत, हॉस्टल में अमानवीय हालात, ज़हर जैसा खाना, DBT में धोखाधड़ी...
...और अब MPSC जैसी संवैधानिक संस्था पर कब्ज़ा कर उसकी विश्वसनीयता बर्बाद कर दी है।
अपने सफल भविष्य के लिए छात्रों की हर मांग जायज़ है। सरकार उनकी आवाज़ सुनकर तुरंत कार्रवाई करे - वरना न्याय मिलने तक ये छात्रों की गूंज बढ़ती ही जाएगी।
#ChhatronKiGoonj
दिल्ली NCR महिलाओं के लिए इतना असुरक्षित हो चुका है कि एक नाबालिग बच्ची के साथ एक स्लीपर बस में 47 किलोमीटर तक गैंगरेप हुआ - ग्रेटर नोएडा से दिल्ली तक।
हैरानी की बात है कि पूरी दिल्ली या नोएडा पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी। यह बस नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे, दिल्ली का रिंग रोड, बॉर्डर - सब पार कर गई, बिना एक भी चेकपोस्ट पर रोके गए।
बस की सीटों पर पर्दे लगे थे, ताकि अंदर क्या हो रहा है कोई देख न सके। और अपराधियों में प्रशासन का कोई डर भी नहीं।
निर्भया के बाद इतने सालों में, इतनी घटनाओं के बाद भी ऐसी बसों की जाँच और निगरानी के नियमों का पालन क्यों नहीं हो रहा?
पर्दे सिर्फ़ उस बस में नहीं डाले गए थे - साल दर साल सरकार द्वारा प्रशासन की नाकामियों पर डाले गए पर्दों का नतीजा है कि देश की राजधानी में भी महिलाएं एक सुरक्षित सफर नहीं कर सकतीं।
और कितनी महिलाओं और बच्चियों के साथ ऐसा होना बाक़ी है, तब जाकर केंद्र और राज्य सरकारें इस व्यवस्था को ठीक करेंगी?
क्या अमित शाह के अधीन दिल्ली पुलिस और आदित्यनाथ के अधीन UP पुलिस की जवाबदेही तय की जाएगी? कोई गुंजाइश ही नहीं - इस अपराध पर भी एक पर्दा डाल दिया जाएगा।
Apparently, 2 in 1 didn’t like my Chakravyuh speech. ED ‘insiders’ tell me a raid is being planned.
Waiting with open arms @dir_ed…..Chai and biscuits on me.
निशु, घबराने की ज़रूरत नहीं है। मैं तुम्हारे साथ हूँ।
साफ है कि तुम्हें इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि तुम अपने समुदाय और छात्रों के हक़ की आवाज़ उठाती हो।
अमित शाह की दिल्ली पुलिस एक तरफ़ छात्रों के साथ अमानवीय बर्बरता करती है। दूसरी तरफ़ एक दलित लड़की के पिता का सिर फोड़ने वाला अपराधी खुलेआम घूम रहा है।
@narendramodi जी, @AmitShah जी - ऐसे अपराधी को आपका और आपकी पार्टी के लोगों का संरक्षण क्यों है? अब भी कार्रवाई होगी या किसी को बचाते रहेंगे?
निशु, तुम्हारी लड़ाई अकेली नहीं है। हम तब तक नहीं रुकेंगे जब तक न्याय नहीं मिल जाता।
जय भीम। जय संविधान।
Without comment:
India ranks 106th among 179 countries on the Electoral Democracy Index
V-Dem's democracy index score for India is at its lowest since 1975
NCLT - “नेता-कंपनी लूट ट्रिब्यूनल”
किसान 50 हज़ार न चुकाए तो ज़मीन नीलाम हो जाती है। Salaried एक EMI न भर पाएं तो घर पर बैंक के गुंडे पहुंच जाते हैं। गरीब छात्रों को तो शिक्षा तक के लिए लोन नहीं मिलता।
मगर, चुनिंदा "मित्रों" के लिए बैंक का पैसा निजी संपत्ति है - कितना भी निकालो, जो मर्ज़ी चुकाओ।
मोदी सरकार ने देश में दो व्यवस्थाएं बना रखी हैं - एक चंद अरबपतियों के लिए, दूसरी बाक़ी सबके लिए।
कांग्रेस अध्यक्ष श्री मल्लिकार्जुन खरगे जी ने हल्द्वानी में रैली को संबोधित किया, उसके बाद BJP-RSS के लोगों ने उनके मंच का “शुद्धिकरण” किया। “शुद्धिकरण” न सिर्फ़ एक बेहद निंदनीय और शर्मनाक सोच का प्रतीक है बल्कि हमारे संविधान व SC/ST Act का घोर उल्लंघन और कानूनी अपराध है। 20 दिन हो गए हैं, मगर आदरणीय प्रधानमंत्री जी और उनकी सरकार द्वारा कोई कार्रवाई नहीं हुई - इसकी वजह???
अगर आदरणीय प्रधानमंत्री मोदी जी सचमुच हमारे देश के संविधान का आदर करते हैं तो जिन लोगों ने उत्तराखंड में यह अपराध किया है, उनके खिलाफ FIR दर्ज करवायें और SC/ST Act के तहत कार्यवाही सुनिश्चित करें।
On my father’s birthday today, I think he would have been especially proud of my mother for having written her story with so much heart and honesty.
For me, it’s one of the greatest love stories of our time. I feel privileged to have witnessed it and I am happy that through her book, everyone will get to know my mother for what she truly is - a brave, loyal, compassionate woman, who is also tough as nails and great fun when she wants to be.
A woman whose life has been a testament to her love for her husband and her country.
Love you, ma and so, so proud of you.
https://t.co/SQWtXhXrS9
PM does not CARE: Public Authority Without Public Accountability?
PM CARES fund ended 2024–25 with ₹8,452 crore, yet spent just ₹87.85 lakh during the year, barely 0.01% of its closing balance.
The Prime Minister is its Chairman. The Defence, Home and Finance Ministers are its Trustees. It accepts CSR contributions and tax deductible donations.
Yet, no RTI scrutiny. No CAG audit. No Parliamentary accountability.
@narendramodi ji must answer -
1. Why does a Fund bearing the Prime Minister’s name remain beyond the ordinary mechanisms of public scrutiny?
2. What is the rationale of an emergency fund accumulating thousands of crores when barely 0.01% of its closing balance was spent in 2024–25?
As if one Shree Ram Mandir Trust was not enough for Chanda Chori... !
Remember, you, Modi ji announced both PMCARES fund and Ram Mandir Trust and both get donations under your oversight !
अंकिता भंडारी के परिवार से 2 दिन पहले मिला। चार साल बीत चुके हैं, लेकिन आज भी वो न्याय का इंतज़ार कर रहे हैं - अपनी बच्ची के ख़िलाफ़ एक ऐसे अपराध के लिए जिसकी कोई माफी नहीं।
सिर्फ 19 साल की अंकिता वनंतरा रिज़ॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट थीं जहां एक "VIP" मेहमान की शर्मनाक मांग का विरोध करने पर चीला नहर में डुबो कर उनकी हत्या कर दी गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने हिंसा और डुबोने के सबूतों की पुष्टि भी की।
मगर, रिज़ॉर्ट में अंकिता के रूम को किसी भी तरह की जांच होने से पहले ध्वस्त कर दिया गया जो खुद में संदेहपूर्ण है।
इस दुखद मामले में सबसे शर्मनाक बात है कि राज्य सरकार खुद आज तक उस "VIP" को संरक्षण दे रही है। क्यों? क्योंकि वह BJP-RSS का बड़ा नेता है।
यही BJP की विकृत मानसिकता है बलात्कारियों और अपराधियों को बचाना, उनका राजनीतिक संरक्षण करना, यहां तक कि बलात्कार के दोषियों का फूल-मालाओं से स्वागत करना। दुनिया में सबसे घिनौने इंसान वो होते हैं जो बलात्कारियों की रक्षा करते हैं और BJP में ऐसे लोगों की भरमार है।
भारत तब तक आगे नहीं बढ़ सकता, जब तक महिलाओं को पुरुषों के इस्तेमाल की वस्तु समझने वाली यह अमानवीय मानसिकता खत्म नहीं होती। भारत तभी आगे बढ़ेगा, जब भारत की महिलाएं आगे बढ़ेंगी - सम्मान, सुरक्षा, समानता और न्याय के साथ।
UP has around 7.5 crore women aged 18+.
So, 7.8 crore women × ₹50,000 = ₹3,90,000 crore.
As per UP Budget, around ₹18,620 crore has been allocated to women and child development scheme. That is just 4.77% of the amount.
Where exactly does Ajay Bisht plan to get remaining 95.23% from?
You are the one who has harmed the future of our youth the most.
You allowed and encouraged the total capture and destruction of our education system - and protected every person responsible for it.
The students’ demands are clear:
1. Sack Dharmendra Pradhan.
2. Apologise to the students.
3. Take action against those who assaulted them.
आपने ही हमारे युवाओं के भविष्य को सबसे ज़्यादा नुकसान पहुंचाया है।
आपने न सिर्फ हमारी education system पर पूरा कब्ज़ा होने और उसे बर्बाद होने दिया, उसे बढ़ावा भी दिया - और इसके ज़िम्मेदार हर व्यक्ति को संरक्षण दिया।
छात्रों की मांगें साफ़ हैं:
1. धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाएं।
2. छात्रों से माफ़ी मांगे।
3. छात्रों के साथ हिंसा करने वालों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करें।
Students are on ground zero, because Modi Govt is now using these much-respected universities as propaganda outlets to bully them.
Instead of making Dharmendra Pradhan resign and then start a meaningful discussion on the Education System, Modi-Shah have resorted to denigerating our centre's of learning.
Now you know why our youth are on the streets.
Now you know how BJP damaged the Education system in the past 12 years!