जैसा कि मैंने कहा है, हर आंदोलन के लिए जंतर मंतर नहीं चाहिए। वो भी जा कर हमने दिखा दिया, पर कई आंदोलन घर बैठे, केवल सूचित करने से भी होते हैं। आंदोलनों में गर्मी केवल जलती बस की आग से नहीं आती, गर्मी हम दूसरे तरह से भी उत्पन्न कर सकते हैं।
यह आंदोलन हमारा है ही नहीं, या आंदोलन हर उस प्रताड़ित व्यक्ति का है जो कभी SC/ST एक्ट, तो कभी UGC तो कभी आरक्षण के कारण घुटता रहता है। कानपुर, आगरा, प्रयागराज, नागपुर, दिल्ली आदि में जो भी सड़क पर हैं, मेरा पूर्ण समर्थन है आपको। जब तक जागरूकता नहीं आएगी, सरकार आपका चूतिया बनाती रहेगी।
BJP कितनी चालबाज़ पार्टी है।
टीवी पर खबर चला दिया की बीजेपी के कुछ सांसद सवर्ण आयोग का समर्थन कर रहे है।
जबकि एक भी सांसद का नाम और उसका फोटो या वीडियो सामने नहीं आया।
ये सब ड्रामेबाज़ी करने से सामान्य वर्ग बेवक़ूफ़ नहीं बन जायेगा।
भाजपा अगले कुछ दिनों में सवर्ण आयोग बनाये, और SC/ST एक्ट को ठीक करे।
अगर ये सब करने में बीजेपी फेल होती है, तो अब किसी भी चुनाव में सामान्य वर्ग से वोट की उम्मीद में ना रहे।
अपने बहुजन वोटर से खूब वोट लो, और सरकार बनाते रहो। ✅
Islam didn't come to America on the Mayflower.
Islam is here because of we brought it here.
Importing people whose values are incompatible with our way of life and governing system fundamentally makes our nation weaker.
सरकार की प्राथमिकता देश के विकास और सुरक्षा पर कम, वोट बैंक पर ज्यादा है।
ये बजट के आंकड़े हैं देखिए कैसे 2014-15 में SC/ST बजट करीब 50-68 हजार करोड़ था...अब यह कई गुना बढ़कर 1.3 लाख करोड़ के आसपास पहुंच गया है. (लगभग 5-7 गुना वृद्धि)।
इसके मुकाबले: ISRO का बजट सिर्फ दोगुना हुआ (6 हजार से 13 हजार करोड़)। Defence बजट सिर्फ करीब 2.5 गुना बढ़ा।
@talk2anuradha के मुताबिक टैक्सपेयर्स का पैसा रणनीतिक क्षेत्रों (स्पेस, डिफेंस) की तुलना में जाति-आधारित कल्याण योजनाओं में बहुत तेजी से बढ़ाया जा रहा है।
पूरे देश में आरक्षण सुधार आंदोलन के स्वरूप को देख कर मन प्रसन्न है अब लग रहा है की अगला आंदोलन जंतर मंतर वाला निर्णायक होगा , न्यायालय की अनुमति के बाद ।
ההסכם הביטחוני שנחתם היום עם יוון, מהגדולים בתולדות המדינה, הוא המשך ישיר לברית מזרח הים-תיכונית שעשינו לפני עשור עם יוון וקפריסין.
הוא מהווה הוכחה נוספת ליכולות האדירות של התעשיות הביטחוניות והטכנולוגיות של ישראל.
מהלך זה מבטא את עוצמתה של ישראל, את האמון בייצוא הביטחוני שלנו ואת חיזוק הבריתות האזוריות.
"The United States is, as we speak, striking Iranian Targets near the Strait of Hormuz. The strikes are large and powerful, and in retaliation for the Iranians’ failed attempt at adding sea mines to the Strait, which currently has no mines (They have been completely removed or detonated!)" - President Donald J. Trump 🇺🇸
गाजियाबाद में सवर्णों का धरना
पुलिस की सख्ती के बाबजूद भी नहीं हटे प्रदर्शनकारी, सवर्ण नेताओं ने कहा जबतक UGC रेगुलेशन, SCST एक्ट और जातिगत आरक्षण समाप्त नहीं होता हम आंदोलन करते रहेंगे।
"जाति खत्म करनी है, तो पहले तहसील से जाति प्रमाण पत्र बनाना बंद करो!" — ओम प्रकाश राजभर 🔥
UP विधानसभा में ओम प्रकाश राजभर ने कहा —सरकारी तंत्र ही कागजों पर ठप्पा मारकर जाति तय करता है।
जब तक तहसीलों से जाति प्रमाण पत्र जारी होते रहेंगे, तब तक समाज से जाति प्रथा खत्म नहीं हो सकती!
बता दें कि EWS आरक्षण कोई Reform नहीं है!
तीन तरह के आरक्षण में चौथा आरक्षण ऐड कर देना reform नहीं, आरक्षण की राजनीति बढ़ाना ही है!
EWS सीट 50% ओपन सीटों से निकाल कर दी गईं हैं, ना कि जाति आधारित आरक्षण को कम कर के!
अगर जाति आधारित आरक्षित कम करके EWS देते या सिर्फ EWS देकर सारा जातिवादी आरक्षण हटा देते और हर जाति के लिए EWS खोल देते, तो वो होता Reform.
आरक्षण बढ़ाते चले जाना, ओपन सीट कम करते चले जाना - ये कोई Reform नहीं, वोट बैंक की राजनीति है!
UGC रोलबैक को लेकर केंद्र सरकार को 48 घंटे का अल्टीमेटम
साथियों,
आज करहेड़ा ग़ाज़ियाबाद एनसीआर की पावन धरा से मैं UGC रोलबैक की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरना एवं आमरण अनशन पर बैठा था, वहीं सरकार के प्रतिनिधिमंडल ने आकर हमसे मुलाकात की और 48 घंटे का समय मांगा।
हमने सरकार को यह समय दे दिया है।
अब गेंद पूरी तरह केंद्र सरकार के पाले में है।
48 घंटे के भीतर केंद्र सरकार UGC Regulations-2026 को लेकर अपना स्पष्ट और अंतिम निर्णय दे।
हमने बहुत इंतजार किया है। अब इस अन्याय को और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
यदि 48 घंटे में सरकार ने अपना रुख स्पष्ट नहीं किया, तो आंदोलन का अगला चरण दिल्ली और केंद्र सरकार के स्तर पर होगा।
अब हम दिल्ली पहुँचेंगे।
अब शिक्षा मंत्री से मुलाकात करके रहेंगे।
अब समय मांगा नहीं जाएगा—समय की मांग का जवाब आंदोलन की ताकत से दिया जाएगा।
हमारी मांग स्पष्ट है:
UGC रोलबैक करो।
समान अवसर और न्यायपूर्ण व्यवस्था सुनिश्चित करो।
सरकार के पास 48 घंटे हैं।
निर्णय लीजिए और अपना स्टैंड स्पष्ट कीजिए।
हम पीछे हटने वाले नहीं हैं।
संघर्ष जारी रहेगा।
UGC रोलबैक होगा—अवश्य होगा।
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