बांसवाड़ा में माहीडेम बनने से लगभग 340 गांवों के हजारों आदिवासियों को विस्थापित होकर कुर्बानियां दी उनको आज तक जमीन नसीब नहीं हुई है और आप एक संवैधानिक पद पर होते हुए हमारे आदिवासियों के इतिहास के साथ छेड़छाड़ कर रहे हैं यह कतई बर्दाश्त नही होगा
आप अपने पद व पावर का दुरुपयोग करके हमारी आदिवासी विरासत के साथ छेड़छाड़ करना आपको भविष्य में बहुत महंगा पड़ेगा
जो अधिकारी आरएसएस की दलाली करते हैं उसको आदिवासी एरिया में रहने का कोई हक नहीं है यहां आकर हमारे भील प्रदेश का वातावरण बिगड़ने का काम कर रहे हो
@Nirajkpawanias@RajCMO
आयुक्त साहब आप एक अच्छे IAS अधिकारी हो, यहाँ के युवाओं में आपकी एक अच्छी इमेज है लेकिन आपके इस ट्विट का हम विरोध करते हैं।
जो आज एक सुन्दर बाँसवाड़ा है, उसके निर्माण में हजारों आदिवासियों ने अपनी शहादत दी है। द्वीपों का नामकरण होगा तो इनके नाम से होगा!
@Nirajkpawanias
"सभी गुलामों को मार पड़ेगी तो सभी इकट्ठा होकर लड़ेगे - माननीय @BhimArmyChief एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष ,आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) भाई चन्द्रशेखर आज़ाद जी
मुझे एक मौका दीजिए मैं हर साल देश के युवाओं को 2 करोड़ रोजगार दूंगा। मिला किसी युवा को रोजगार? नहीं। एक बार बेवकूफ बन गए। दो बार वेबकूफ बन गए। ठीक है। लेकिन अगर तीसरी बार वेबकूफ बन गए तो इसका मतलब आप वेबकूफ हो। #मंदिर_नहीं_रोजगार_दो
आज़ाद समाज पार्टी "संपूर्ण सामाजिक न्याय" की मांग करती है-
बिहार में जातिगत जनगणना के आंकड़ों का हम स्वागत करते हैं। यह सामाजिक न्याय की पहली सीढ़ी है। अब पूरे देश में अतिशीघ्र जातिगत जनगणना की मांग करते हैं। इसके बाद संख्या के अनुपात में एससी, एसटी, ओबीसी आरक्षण का प्रतिशत बढ़ाना चाहिए। दूसरे, एससी, एसटी, ओबीसी को सभी अंगों- विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका में, संवैधानिक संस्थाओं और सभी राजकीय पदों पर जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण और "हिस्सेदारी" देने की हम मांग करते हैं। इसके बाद ही बाबा साहेब अंबेडकर का "संपूर्ण सामाजिक न्याय" का सपना पूरा होगा। #CasteCensus #बिहार_सरकार
ब्राह्मण मित्रों से आग्रह है कि दिल पर न ले, लेकिन सच तो सच ही है।
हमें बताया जाता है कि मुगल शासक औरंगज़ेब ने गुरू गोविंद सिंह जी के दोनों बच्चों को दीवार में चुनवा दिया था, पर ये नही बताया जाता कि उन दोनों बच्चों को औरंगजेब के पास "कश्मीरी ब्राह्मण" गंगा दत्त कोल उर्फ गंगू पंडित लेकर गया था।
हमें बताया जाता है कि मुगलों ने गुरू साहब को चमकौर के युद्ध में मारा, पर यह नहीं बताया जाता कि उन्हें मरवाने में गद्दारी "ब्राह्मण सुच्चानदं" ने की थी।
हमें बताया जाता है कि गुरू तेगबहादुर का सिर मुगलो ने काट दिया, पर ये नहीं बताया जाता कि मुखबिरी "ब्राह्मण चैतोदास" ने की थी।
गुरू गोविंद सिंह ने अपने जीवन में चौदह लड़ाईयां लड़ी, जिनमे सिर्फ एक युद्ध मुगलों के विरुद्ध था। इन चौदह युद्ध मे तेरह आक्रमण पहाड़ी "ब्राह्मणों समेत ठाकुर हिंदूओं" ने किये थे।
शिवाजी महाराज पर हमला करने वाला भी गद्दार ब्राह्मण ही था, जो धोखे से शिवाजी महाराज की हत्या करना चाहता था, लेकिन शिवाजी महाराज ने गद्दार ब्राह्मण का सिर धड़ से अलग कर दिया था।
हमें यह तो बताया जाता है कि भारत के इतिहास में औरंगजेब सबसे क्रूर और धार्मिक कटृरता वाला राजा था, मगर यह नहीं बताया जाता है कि पुष्पमित्र शुंग (ब्राह्मण) ने बौद्ध भिक्षु का सिर काटकर लाने वाले को सौ स्वर्ण मुद्राएं ईनाम देने की घोषणा की थी।
भारत का इतिहास ब्राह्मणों की गद्दारी, मुखबिरी, मक्कारी और कुकृत्यों से भरा पड़ा है।
बाकी बाद में......
मैं तो कब साल से ईवीएम हटाने की माँग कर रहा हूँ। लेकिन हम लोग ठहरे बेचारे साधारण नागरिक। न नरसिम्हा राव और मनमोहन सिंह ने हमारी सुनी, न नरेंद्र मोदी ने।
राजीव गांधी ने ईवीएम का क़ानून बनाकर इस देश को ऐसा बवासीर दे दिया है कि बस क्या ही तो बोलें।
बिना सोचे समझे पक्का क़ानून 61(A) बना दिया राहुल बाबू ने और नरसिंह राव की सरकार ने लागू भी कर दिया धड़धड़ाते हुए।
कांग्रेस और बीजेपी सहमत हैं कि सरकार में रहते हुए वे ईवीएम नहीं हटाएँगे तो कितना भी कर लीजिए। नहीं हटेगा।
लेकिन चीज़ ग़लत है।
ईवीएम को कांग्रेस की सरकार ने संसद में क़ानून बनाकर 1989 में लागू किया। ये अब संसद के क़ानून से ही जाएगा।
ये किसी भी सरकार से ऊपर, संसद का मैटर है। राजीव गांधी सरकार ने व्यवस्था ही उतनी टाइट बना दी। सारी दुनिया काग़ज़ पर वोट डालकर चुनाव करती है। जाने उस समय की सरकार को क्या खुजली मची थी।
आडवाणी 2009 चुनाव के बाद आँखों में आँसू भरकर रोते रहे कि ईवीएम बंद करो। काग़ज़ से मतदान कराओ। तब मनमोहन सरकार अपने नशे में थी। बहनजी ने भी माँग की ईवीएम हटाने की। पर मनमोहन सरकार ने उनकी भी अनदेखी की।
सरकार में आने के बाद कोई किसी की नहीं सुनता है जी।
ईवीएम का जिन्न बोतल से बाहर आ गया है। जिस कांग्रेस ने इसे बोतल से निकाला, वही छटपटा रही है। पर जिन्न है। इतनी आसानी से नहीं जाएगा। निकालने से पहले सोचना था न।
राहुल गांधी जी जिस परिस्थिति में कांग्रेस का नेतृत्व कर रहे है जिगर चाहि फौलाद का,
पूरी मीडिया, एक पीएम, 200 केंद्रीय और राज्यों के मंत्री, 18 मुख्यमंत्री और आरएसएस सब पीछे पड़े है फिर भी राहुल डटे है..!!
जब देश का हर तीसरा युवा बेरोज़गारी का शिकार है, तब प्रधानमंत्री ने एक बार फिर उनके साथ बड़ा धोखा किया है।
इस बार धोखा आम परिवार से आने वाले, 18-18 घंटे मेहनत करने वाले उन छात्रों के साथ है जो छोटे छोटे किराए के कमरों में रह कर बड़े सपने देखते हैं।
जहां रेलवे में लाखों पद खाली हैं, वहां 5 वर्षों के इंतजार के बाद मात्र 5696 पदों की भर्ती, प्रतियोगी छात्रों के साथ अन्याय है।
रेलवे में भर्तियों को कम करने की नीति आखिर किसके फायदे के लिए बनाई जा रही है?
कहां गया हर साल 2 करोड़ नौकरियों का वादा? कहां गया रेलवे का निजीकरण न करने का भरोसा?
एक बात बिल्कुल साफ है - मोदी की गारंटी, युवाओं के लिए खतरे की घंटी है।
हमें उनके हक़, उनके साथ न्याय के लिए आवाज़ उठानी ही होगी।
#NyayForYuva
ये राम रहीम का क़ाफ़िला, कई बार सोचता हूँ इस आदमी के ख़िलाफ़ गवाही देने वाले गवाहों को किस प्रेशर में जीना पड़ा होगा। उन साध्वियों की भी हिम्मत है जिन्होंने इतने ताकतवर आदमी के ख़िलाफ़ लड़ाई लड़ी। पत्रकार रामचन्द्र छत्रपति के साहस सा उदाहरण नहीं जिन्होंने अपने अख़बार में सच छापा