मेहनत हार गई और किस्मत जीत गयी 😭
डिलीट हुए 11 प्रश्नों में से 8 क्वेश्चन सही थे लेकिन आलोक राज जी की घटिया एक्सपर्ट टीम और घटिया सिस्टम की वजह से आज मेरे जैसे हजारों युवाओं के सपनों का मर्डर हुआ है।
@alokrajRSSB जी आपके इस घटिया सिस्टम की वजह से मैं आज से ही आगे की तैयारी को यहीं विराम देता हूं।
सरकारी नौकरी को लेकर बहुत सपने देखें थे लेकिन अब सबकुछ बर्बाद हो गया है 🥹
अंततः मैं हार गया हूं 😭
धीरे-धीरे सब जागरूक हो रहे हैं अपने-अपने क्षेत्र में कार्य करते हुए जनता के मुद्दे इनडायरेक्ट उठा ही रहे हैं,,, भ्रष्टाचार को उजागर करता एक AC लगाने वाला लड़का, अधिकतर सरकारी भवनों की यही कहानी है 🙏
NEET परीक्षा का पेपर परीक्षा से क ई सप्ताह पहले लीक हो चुका था इस बात का अंदाजा भी लग चुका था, उसके बाद भी परीक्षा का आयोजन किया गया।
सुनिए अलख पांडे और अभिनव पांडे की रिपोर्ट-
यह वीडियो राजस्थान के बूंदी जिले के लुहारपुरा गांव का बताया जा रहा है।
गेहूं की तैयार हुई फ़सल में अचानक आग लगने से सैकड़ों बीघा गेहूं के खेतों में आग लगी।
जब किसान बच्चों की तरह फसल को पालकर बड़ा करता है और यह हालात बन जाते हैं तब किसान टूट जाता है।
हजारों क्विंटल गेहूं तबाह हो गया, सरकार इसकी जांच करके उचित मुआवजा दें।
50000 Retweet करके सरकार तक मांग को पहुंचाने की जिम्मेदारी हमारी आपकी है।
OMR घोटाले में ‘ऊंट के मुंह में जीरा’ जैसी कार्रवाई…सरकार ने वाहवाही लूटी, विपक्ष ने की CBI जांच की मांग...अब 3 महीने से चौतरफा शांति क्यों?
पूर्व अध्यक्ष सहित पुलिस जवान से क्या हुई कोई पूछताछ या FIR में दर्ज तथ्य झूठे!
तथ्य सही थे तभी हुई 5 लोगों की गिरफ्तार, आगे कब बढ़ेगा OMR घोटाले में गड़बड़ करने वालों की तरफ कार्रवाई का रथ?
क्या @BhajanlalBjp सरकार पूरे मामले में कार्रवाई का फॉलोअप लेने में नाकाम?
जनवरी 2026 में OMR घोटाले को लेकर SOG द्वारा गिरफ्तारी की गई थी। 5 लोगों की गिरफ्तारी के बाद भी इस पूरे मामले में तीन महीने बाद तक कोई नई गिरफ्तारी नहीं हुई है। इस पूरे मामले में सरकार द्वारा वाहवाही लूटने और श्रेय लेने की होड़ तो मची, लेकिन सरकार के लोग OMR सहित अन्य मामलों में अप-टू-डेट नहीं रह पा रहे हैं। इस पूरे मामले को लेकर जनवरी में विपक्ष काफी हावी रहा था। यहां तक कि पहली बार आक्रमण विपक्ष ने इस पूरे मामले की CBI जांच करवाने की मांग ने भी तेजी पकड़ी थी।
FIR के एक साल बाद हुई गिरफ्तारी
इस पूरे मामले में 2025 जनवरी में FIR हुई। उससे पहले जनवरी 2019 में लखनऊ के गोमती नगर थाने में दर्ज FIR में पांच लोगों को मौके पर ही पैसों के साथ पकड़ा गया था, जिनके पास से लगभग 62 लाख 50 हजार रुपये की राशि जब्त की गई थी। 2019 की FIR दर्ज होने के बाद भी राजस्थान की जांच एजेंसी को इस मामले में एक साल बाद केवल 5 लोगों को गिरफ्तार कर इसे बड़ी उपलब्धि की तरह प्रस्तुत किया गया। जबकि इनमें से 2 लोग शादान खान और विनोद कुमार गौड़ को तो पहले ही इस मामले में लखनऊ में गिरफ्तार किया जा चुका था। दो कर्मचारी और एक महिला अभ्यर्थी की गिरफ्तारी को ही आंशिक उपलब्धि के रूप में देखा जा सकता है।
इस पूरे मामले में दो FIR (लखनऊ 2019 / जयपुर SOG 2025) में संजय माथुर और एक कर्मचारी गंगवाल का कहीं भी नाम नहीं था, फिर भी इस पूरे मामले में जांच पड़ताल कर SOG ने कार्यकुशलता का परिचय देते हुए लिंक जोड़कर इनकी गिरफ्तारी की। जो कि फर्जीवाड़े करने वालों को सलाखों के पीछे पहुंचाने की SOG की मंशा को दिखाता है। लेकिन, आश्चर्य की बात यह है कि राजस्थान SOG के साथ गोमती नगर थाने में दर्ज FIR में एक नाम जिन लोगों के नाम है। उनका कुछ अतापता ही नहीं है। इस लिस्ट में पुलिस के पूर्व जवान से लेकर पूर्व बोर्ड अध्यक्ष का नाम तक शामिल है।
अनिल पुलिस विभाग का ही पूर्व जवान है। राजस्थान SOG में दर्ज FIR में दर्ज FIR में यह व्यक्ति मुख्य सूत्रधार है। आज तारीख तक भी SOG इस व्यक्ति तक नहीं पहुंच पाई है। आपको यह जानकर भी काफी आश्चर्य होगा कि 2025 की FIR के अनुसार, इस अनिल ने अपनी पत्नी, साली, दोस्त की पत्नी सहित कई रिश्तेदारों को नौकरी में लगवाया है। अब राजस्थान SOG बताए कि आखिर जिन लोगों के नाम FIR में है। उनके खिलाफ क्या एक्शन लिया जा रहा है।
डिबार होने के बाद भी नौकरी कर रहे हैं OMR घोटाले से जुड़े अभ्यर्थी — सूत्र
जानकार सूत्र बताते हैं कि अनिल के रिश्तेदार, जिनकी OMR शीट बदली गई थी, उन्हें बोर्ड द्वारा नौकरी से हटाने का दावा किया गया था। लेकिन सूत्रों के अनुसार, वे आज भी उसी नौकरी में सरकारी सेवा में बने हुए हैं। अगर यह दावा सही साबित होता है, तो इस पूरे मामले में बोर्ड के पूर्व से लेकर वर्तमान तक के लोगों की भूमिका संदेह के घेरे में होगी। साथ ही, इस दिशा में SOG द्वारा गंभीर जांच करने की आवश्यकता है। क्योंकि आने वाले दिनों में अगर यह बात सही साबित होती है तो पूर्व सरकार से ज्यादा वर्तमान सरकार कटघरे में खड़ी हो सकती है।
बाकी, शक के आधार पर कार्रवाई करने वाली SOG ने बड़े मगरमच्छों, जिनका नाम FIR में है, उनसे इस मामले में अब तक किसी भी तरह की पूछताछ की है क्या? अगर पूछताछ हुई तो क्या निकल कर आया या अभी तक पूछताछ ही नहीं की, तो तीन महीने बाद भी पूछताछ नहीं करने का क्या कारण है? SOG में स्टाफ की कमी की बात जरूर जांच करने में देरी का एक तर्क हो सकती है। लेकिन, ज्यादा देरी SOG सहित सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़ा करेगी।
@BhajanlalBjp@RajCMO@alokrajRSSB@Kunal_Alwar
आपको OMR में नंबर बढ़ाकर चयन लेने वाला घोटाला याद है? सबसे बड़ा सवाल इस मुद्दे पर विपक्ष मौन क्यों है?
इन 38 लोगों की सूची जारी हुए अब लगभग तीन महीने से ज्यादा समय हो गया है। OMR घोटाले में शामिल 38 लोगों के खिलाफ अब तक क्या कोई कार्रवाई हुई है? इसको लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऐसे में कुछ अहम सवाल खड़े होते हैं–
1.ये 38 लोग इस समय कहाँ हैं?
2.क्या ये अभी भी सरकारी सेवाएँ प्रदान कर रहे हैं?
3.अवैध तरीके से नौकरी हासिल करने के बाद इन्हें जो वेतन मिला, क्या उसकी वसूली की गई है?
4.क्या इनमें से किसी की गिरफ्तारी हुई है?
क्या इन्होंने पूछताछ के दौरान किसी और का नाम उजागर किया है?
5.इस पूरे मामले पर सरकार अपना पक्ष रखेगी या विपक्ष इस पर सवाल उठाएगा?
यह मामला केवल प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं के भविष्य से सीधे जुड़ा हुआ है। ऐसे गंभीर विषय पर कोई भी पक्ष युवाओं के साथ मजबूती से खड़ा होता दिखाई क्यों नहीं देता?